राजपूतों की उत्पत्ति से संबंधित विभिन्न सिद्धान्त

अग्निकुल सिद्धान्त

विदेशी सिद्धान्त

ब्राह्मण सिद्धान्त

सूर्यवंशी/चंद्रवंशी सिद्धान्त

(पृथ्वीराज रासो)

सर्वप्रथम चंदबरदाई

कर्नल जेम्स टॉड – शक व सीथियन

डॉ.भंडारकर – विदेशी ब्राह्मण

श्री जगदीश गहलोत

(राजपूताने का इतिहास)

(मारवाड़ रा परगना री विगत) मुहणौत नैणसी

वी.ए.स्मिथ – हूण

1. मण्डोर, जोधपुर अभिलेख के आधार पर

 

(वंश भास्कर) सूर्यमल्ल मिश्रण

कनिंघम – यू-ची कुषाण

2. बिजौलिया अभिलेख में वत्सगौत्रीय ब्राह्मण

 

हम्मीर रासो - जोधराज

कैनेडी – ईरानी

डॉ. गोपीनाथ शर्मा

 

(नवसहंसाक चरित)

पद्मनाभ

 

विलियम क्रुक टॉड की पुस्तक के सम्पादक – शक, हूण (स्मिथ) कुषाण (कनिंघम)

(नागर जाति के ब्राह्मण) भंडारकर ने

अग्नि पुराण के अनुसार

 

डॉ. ईश्वरी प्रसाद – विदेशी

 

हर्षनाथ अभिलेख –सीकर

 

डी.आर. भंडारकर – विदेशी ब्राह्मण

(कुंभा – रसिक प्रिया)

हम्मीर महाकाव्य

 

स्मिथ – प्राचीन आदिम जातियों (गौड़,खखार, भर के वंशज)

पिंगल पुत्र वृत्ति

G.M. शर्मा, J.N आसोपा

विभिन्न वंशावलियों में

वैदिक आर्यों/क्षत्रियों का सिद्धान्त – डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा (सर्वमान्य मत), सी.वी.वैद्य

मिश्रित जातियों का मिश्रण सिद्धान्त – विशुद्धनंद पाठक, डी.पी. चट्‌टोपाध्याय (देवी प्रसाद)

गुर्जरवंशीय मत – भण्डारकर, ईश्वरी प्रसार (ये गुर्जरों को श्वेत हूण (विदेशी) मानते थे।

ब्रोच गुर्जर ताम्र पत्र के आधार पर कनिंघम ने कुषाणों की सन्तान बताया

सामाजिक – आर्थिक प्रक्रिया की उपज – ब्रजदूलाल चट्‌टोपाध्याय