अजयराज चौहान – (1113-33 ई.) इसका काल “चौहानो के साम्राज्य का निर्माण काल” माना जाता है। चक्रवर्ती शासक होन के कारण इसे “अजयचक्री” कहा गया। अजमेर नगर (1113 ई.) बसाया व इसे राजधानी बनाया। बीठली पहाड़ी पर गढ़बीठली/तारागढ़/अजयमेरू दुर्ग बनवाया। मेवाड़ के कुँवर पृथ्वीराज ने अपनी पत्नि तारा के नाम पर इसका नाम तारागढ़ रखा था। सर्वाधिक आन्तरिक आक्रमण इसी दुर्ग पर हुए। अजयराज ने अजसप्रीय/द्रुम्स नामक सिक्के चलाए इन सिक्कों पर अपनी रानी सोमल्लदेवी/सोमलेखा का नाम उत्कीर्ण करवाया। अजयराज ने मालवा के शासक नरवरर्मन (परमार वंश) को तथा अन्हिल वाड़ा (गुजरात) के चालुक्य शासक मूलराज II को पराजित किया व इसके सेनापति सुल्हण को बन्दी बनाया व (घोडे़ पर बाँधकर) अजमेर लेकर आया। इसने चौहान राज्य का विस्तार भटिण्डा और दिल्ली तक किया। मथुरा से इसकी रजत मुद्राएँ मिली है जो मथुरा पर इसके अधिकार को पुष्ट करती हैं। इसने पुत्र अर्णोराज को सिंहासन सौंपकर पुष्कर में अपना अन्तिम समय व्यतीत किया।
अर्णोराज (1133-50 ई.) दरबारी विद्वान –
(i) धर्मघोष सूरी (ii) देवबोध सूरी
अन्य नाम – आनाजी, गजनी (अफगानिस्तान) के खुशरव मलिक को हराकर “गर्जनों मातँग” की उपाधि धारण की। चन्द्रानदी को रोककर नागपहाड़ व तारागढ़ के मध्य “आनासागर झील”का निर्माण करवाया। बिजोलिया शिलालेख में अनुसार निर्माण का उद्देश्य “तुर्कों के खून से सनी धरती को धोना” बताया गया है। अनासागार झील के निर्माण सम्बन्धी तिथियाँ
(i) बिजोलिया शिलालेख (1133-37ई. के मध्य)
(ii) पृथ्वीराज रासो (1135-37 ई. के मध्य)
अर्णोराज के युद्ध/विजेय –
(i) मालव नरेश नरवर्मा को पराजित किया।
(ii) गुजरात के चालुक्य शासक जयसिंह सिद्धराज को 1134 ई. में पराजित किया व उसकी पुत्री कांचन देवी से विवाह किया।
(iii) गुजरात के चालुक्य शासक कुमारपाल से 1145 ई. में पराजित हुआ व अपनी पुत्री जल्हण का विवाह कुमारपाल से किया। पाली, जालौर, नाडोल चालुक्यों को दिए।
अर्णोराज की हत्या इसी के पुत्र जग्गदेव ने की व 1150-52 तक शासन किया। जग्गदेव को चौहानों में पितृहन्ता शासक माना जाता है।