विग्रजहराज IV (1152-63) बीसलदेव

दरबारी साहित्यकार-

(i) नरपति नाल्ह “बीसलदेव रासो” इस ग्रन्थ में विग्रहराज IV व परमार राजा भोज की पुत्री राजमति के बीच प्रेम प्रसंग का उल्लेख किया गया है।

(ii) सोमदेव“ललित विग्रह राज” इस ग्रन्थ में इन्द्रपुरी की राजकुमारी देसल देवीविग्रहराज IV के बीच प्रेम प्रंसग का उल्लेख मिलता है।

विग्रहराज ने बीसलदेव के नाम से “हरिकेलि” नामक संस्कृत नाटक लिखा जिसमें भगवान शिव व अर्जुन के बीच धनुर्युद्ध का उल्लेख है। इसी रचना के आधार पर कीलहॉर्न ने विग्रहराज की तुलना कालीदास भवभूति से की है। यह कल्पना पर आधारित ग्रन्थ है।

दरबारी विद्वान धर्मद्योष सूरी के आग्रह पर “पशुवध पर प्रतिबन्ध” लगाया। (एकादशी के दिन)।

विग्रहराज के प्रमुख निर्माण कार्य-

(i) बीसलपुर कस्बा (टोंक) बसाया।

(ii) बीसलपुर बाँध (बीसलसागर तालाब) का निर्माण करवाया।

(iii) अजमेर में सरस्वती कण्ठाभरण संस्कृत विद्यालय का निर्माण करवाया तथा इसकी दिवारों पर हरिकेलि नाटक उत्कीर्ण करवाया।

1. जालौर  = जाबालिपुर

2. नाडोल  = नड्डुल

3. दिल्ली = ढ़िल्लिका

4. भीनमाल = श्रीमाल

5. माँडलगढ़ = मण्डलकर

6. बिजोलिया = विन्ध्यवल्ली

7. नागदा  = नागह्द आदि।