वसीय अम्ल :-
- संतृप्त वसीय अम्ल -
- इनका सामान्य सूत्र CnH2nO2 है।
- हाइड्रोजन द्वारा संतृप्त रहने के कारण, इन्हें संतृप्त वसा कहा जाता है।
- संतृप्त वसायें हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ाती हैं, जिससे वजन बढ़ने लगता है तथा रक्त नलिकाओं में कोलेस्ट्रॉल का जमाव होने से हृदय-वाहिका रोग की संभावना बढ़ जाती है।
- ये कमरे के तापमान पर ठोस होती है।
- पामिटिक अम्ल व स्टिएरिक अम्ल दोनों संतृप्त वसीय अम्ल है।
- असंतृप्त वसीय अम्ल –
- इनका सामान्य सूत्र CnH2nO2 है।
- असंतृप्त वसीय अम्लों से असंतृप्त वसाओं का निर्माण होता है जैसे – तेल
- असंतृप्त वसीय अम्ल पोषण एवं रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को नियमित बनाए रखते हैं, जो कि हृदय के लिए स्वास्थ्यवर्धक होते हैं।
असंतृप्त वसीय अम्लों के उदाहरण :-
- ओलिक अम्ल
- लिनोलिक अम्ल
- लिनोलिनिक अम्ल
- एरेकेडॉनिक अम्ल
Note –
- ओमेगा-3-वसीय अम्ल स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है तथा यह मेकेरेल एवं अन्य मछलियों के तेल, अलसी के बीजों में भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
- वर्तमान में बाजारों में उपलब्ध खाद्य तेलों में PUFA (बहु असंतृप्त वसीय अम्ल) अधिक मात्रा में होते हैं।
वसाओं के प्रकार :-
- सामान्य वसा
- संयुग्मित वसा
- व्युत्पन्न वसा
- सामान्य वसा :-
- साधारण वसाओं का निर्माण वसीय अम्लों के 3 अणुओं एवं एक अणु ग्लिसरॉल के आपस में क्रिया करने से होता है, इसमें तीन एस्टर बंध का निर्माण होने से इसे ‘ट्राईग्लिसराइडिस’ भी कहते हैं।
- घी, वनस्पति तेल, मक्खन आदि सामान्य वसायें हैं।
- सामान्य वसाओं के अन्य उदाहरण –
- मोम
- क्यूटिन
- सुबेरिन
- मोम :-
- मानव के कर्ण में ‘सिरुमिन’ मोम पाया जाता है।
- पेट्रोलियम पदार्थों में ‘पैराफिन’ मोम पाया जाता है।
- पशु-पक्षियों के फरों में ‘लिनोलिन’ मोम उपस्थित होता है।
- मधुमक्खियों की उदर ग्रंथियों से Bees-Wax प्राप्त होता है।
- Wax-D नामक मोम बैक्टीरिया से प्राप्त होता है।
- क्यूटिन :-
- ये पत्तियों की सतह पर क्यूटिकल का निर्माण करते हैं, जो कि पत्तियों को जलरोधी बनाते हैं।
- सुबेरिन :-
- यह पादप कोशिकाओं की कोशिका भित्ति में पाया जाता है, जो इन्हें जलरोधी बनाता है।

ट्राइहाइड्रिक वसीय अम्ल ट्राइग्लिसराइडस
एल्कोहॉल
(ग्लिसरॉल)
NOTE –
- NaOH या KOH जैसे क्षारों की क्रिया साधारण वसा से की जाती है, तो साबुन का निर्माण होता है, जिसे साबुनीकरण कहते हैं।
- असंतृप्त वसाओं जैसे तेल के हाइड्रोजनीकरण से हमें वनस्पति घी प्राप्त होता है, इस क्रिया में Ni(निकल) उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है।
- संयुग्मित वसा :-
साधारण वसायें और क्रियात्मक समूह या अन्य यौगिक से संयुग्मित वसा का निर्माण होता है।
संयुग्मित वसायें निम्न हैं-
फॉस्फोलिपिड्स-
- वसा और फॉस्फेट से मिलकर फॉस्फोलिपिड्स का निर्माण होता है।
- यह वसा कोशिका झिल्ली के निर्माण में सहायक है।
स्फींगोलिपिड्स –
- स्फिंगोसीन अमीनो अम्ल और वसा से मिलकर स्फींगोलिपिड्स का निर्माण होता है।
- यह वसा तंत्रिका तंत्र के विकास में सहायक है।
लिपोप्रोटीन्स (वसा + प्रोटीन)
ग्लाइकोप्रोटीन्स (कार्बोहाइड्रेट + प्रोटीन)
- व्युत्पन्न वसा :-
- सामान्य एवं संयुग्मित वसाओं के अपघटन से प्राप्त वसा व्युत्पन्न वसा कहलाती है।