व्युत्पन्न वसायें:-
- सरल एवं संयुग्मित वसाओं के अपघटन से प्राप्त वसाऐं व्युत्पन्न वसाऐं कहलाती है।
स्टीरॉयडस-
- रासायनिक रूप से चक्रीय कार्बनिक यौगिक साइक्लोपेन्टेनो पर हाइड्रो-फीनेन्थ्रीन की संरचना दर्शाते हैं।
- ये वसीय अम्ल की अनुपस्थिति के कारण साबुनीकरण की क्रिया नहीं दर्शाते हैं।
- लैंगिक हॉर्मोन्स, इर्गोस्टीरॉल, कॉप्रोस्टीराल, लेनास्टीराल आदि स्टीरॉयडस के प्रकार है-
- लैंगिक हॉर्मोन्स (sexual Harmones):- टेस्टोस्टीरान, एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रेरान आदि स्टीरॉयडस है।
- इर्गोस्टीराल:- कवकों में पाये जाने वाले स्टीरॉयडस को इर्गोस्टीराल कहते हैं।
- कॉप्रोस्टीरॉल:- मल में पाया जाने वाला स्टीरॉयडस कॉप्रोस्टीरॉल कहलाता है।
- लेनोस्टीरॉल:- ऊन देने वाले जन्तुओं में उपस्थित स्टीरॉयडस लेनोस्टीरॉल कहलाता है।
- टर्पीन्स:- ये वसायें पौधों में पत्तियों, फूलों एवं फलों में विशेष गंध उत्पन्न करते हैं।
- प्रौस्टाग्लैण्डिन्स:- ये स्थानीय हॉर्मोन्स के रूप में मानवों के वीर्य में, चोट ग्रस्त स्थानों पर प्रदाह में सहायक हैं।
- प्रदाह (Inflammation) के लक्षण-
- त्वचा का लाल होना
- सूजन, दर्द एवं तापमान में वृद्धि
वसा के कार्य-
- ये ऊर्जा के संचित स्त्रोत की तरह कार्य करते हैं।
- ये त्वचा के नीचे जमा होकर शरीर को प्रतिरोधक परत उपलब्ध कराते हैं।
- ये आघात प्रतिरोधक परत के रूप में जमा होकर जीवों के विभिन्न अंगों का बचाव करते हैं।
प्रोटीन (Protein)-
- प्रोटीन शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द प्रोटियोज से हुई है, जिसका अर्थ प्राथमिक अथवा अधिक महत्त्वपूर्ण होता है।
- प्रोटीन शब्द की खोज मूलर (1838) ने की थी तथा बर्जीलियस द्वारा नाम दिया गया।
- ये C, H व O के अलावा N, P, S युक्त होते हैं।
- प्रोटीन से 4 किलो कैलोरी प्रति ग्राम ऊर्जा प्राप्त होती है।
- दालों, सोयाबीन, अण्डे, मछली आदि में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
- प्रोटीन की सर्वाधिक मात्रा सोयाबीन में पायी जाती है।
- प्रोटीन का मुख्य कार्य हमारे शरीर में वृद्धि एवं विकास करना है तथा चोट ग्रस्त अंगों की मरम्मत इन्हीं से होती है।
- प्रोटीन की संरचनात्मक इकाई अमीनो अम्ल है।
- ये अमीनो अम्ल आपस में पेप्टाइड बंध से जुड़कर पेप्टाइडस का निर्माण करते हैं। इन पेप्टाइड के आपस में जुड़ने से पॉलीपेप्टाइडस या प्रोटीन का निर्माण होता है।
- प्रोटीन निर्माण से संबंधित कुल 20 अमीनो अम्ल मानव शरीर में पाये जाते हैं।
- इन अमीनो अम्लों के अलावा भी मानव शरीर में अन्य अमीनो अम्ल भी पाए जाते हैं जैसे-
- ऑनिर्थीन
- सिटुलीन
- GABA
- यूरिया चक्र में ऑनिर्थीन एवं सिटुलीन अमीनो अम्ल उपयोगी है।
- GABA (गामा अमीनो ब्यूटाइरिक अम्ल) न्यूरोट्रांसमीटर के रूप में कार्य करता है।
- यकृत ऑनिर्थीन द्वारा ही अमोनिया को यूरिया में बदलता है।
- अमीनो अम्ल में ऐमीनो तथा कार्बोक्सिलिक दोनों समूह होते हैं।
- ऐमीनो क्षारीय समूह है तथा कार्बोक्सिलिक अम्लीय प्रवृत्ति के होते हैं। अत: ये दोनों समूह परस्पर क्रिया करके आन्तरिक लवण बनाते हैं जिसकी द्विधुवीय संरचना होती है इसलिए अमीनो अम्ल को द्विध्रुवक आयन, ज्विटर आयन या ऐम्फोलाइट आयन भी कहते हैं।



अमीनो अम्ल रंगहीन तथा क्रिस्टलीय ठोस होते हैं।
- अमीनो अम्ल जल, अम्ल तथा क्षार में विलेयशील होते हैं।
- रासायनिक रूप से अमीनो अम्ल, प्राथमिक ऐमीन तथा कार्बोक्सिलिक अम्ल दोनों के महत्वपूर्ण लक्षण दर्शाते हैं।
- अमीनो अम्ल समविभव बिन्दु वाले होते हैं।
Note:-
- विलयन का वह PH जिस पर विद्युत विभव लगाने पर अमीनो अम्ल किसी भी इलेक्ट्रोड की ओर गमन नहीं करता हैं, समविभव बिन्दु (Iso Electric Point) कहलाता है।
- समविभव बिन्दु पर विलेयता, चालकता, श्यानता तथा परासरण दाब न्यूनतम होता है।