विटामिन-B5

(ii) TCA चक्र में को-एन्जाइम्स A के रूप में कार्य करता है।

(iii) यह ऑस्टियो आर्थराइट्स, पर्किसन बीमारी तथा प्रीमेन्सटअल सिन्ड्रोम में मुख द्वारा दिया जाता है।

कमी से होने वाले रोग –

1.   डर्मेटाइटिस

2.   शारीरिक वृद्धि कम होना

3.   बालों का गिरना

4.   बालों का सफेद होना

नोट - पेन्टाथीनिक अम्ल को विलियमस और सहयोगियों ने सन् 1933 में ज्ञात किया था।

 

 विटामिन-B7

कमी से होने वाले रोग –

1.   शारीरिक विकास में कमी

2.   बालों का झड़ना

3.   डर्मेटाइटिस

नोट -

1.   कोगल और टोनिस में सन् 1936 में बायोटीन की खोज की।

2.   कच्चा अण्डा खाना नहीं चाहिए क्योंकि अण्डे के सफेद भाग में एविडीन प्रोटीन होता है, जो बायोटिन (Vit-B7) के अवशोषण को रोक देता है।

 

 विटामिन-B6

(ii) टीबी की वृद्धि को रोकता है।

(iii) तंत्रिका तंत्र की क्रियाशीलता हेतु आवश्यक

कमी से होने वाले रोग –

1.   डर्मेटाइटिस

2.   शारीरिक वृद्धि कम होना

3.   उल्टी दस्त एवं शारीरिक कमजोरी अनुभव करना।

4.   तंत्रिका तंत्र का विकास न होना।

 

 

 

विटामिन-B9

कमी से होने वाले रोग –

1.   RBC का परिपक्व न हो पाने से रक्त में बड़े आकार की अपरिपक्व RBC ज्यादा दिखाई देती है, जिसे मेगालोब्लास्टिक रक्ताल्पता रोग कहते हैं।

नोट -

1.   फॉलिक अम्ल की खोज सन् 1934 में लूसी विल्स ने की थी।

 

विटामिन-B12

(ii) तंत्रिका तंत्र की वृद्धि

(iii) DNA संश्लेषण में सहायक

कमी से होने वाले रोग –

1.   इसकी कमी से पर्नीशियस/प्रणाशी/घातक एनीमिया रोग होता है।

नोट- इसमें कोबाल्ट (Co) तत्त्व पाया जाता है।

 

विटामिन-B17

 

विटामिन-C

(ii) RBC एवं एंटीबॉडी निर्माण/रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के लिए सहायक

(iii) एंटीऑक्सीडेन्ट विटामिन

कमी से होने वाले रोग –

      स्कर्वी रोग(मसूड़ों में सूजन एवं बार-बार रक्त आना)

 

विटामिन-P

कमी से होने वाले रोग –

      आंतरिक रक्त स्त्रवण

खनिज लवण –

(1) लघु/सूक्ष्म पोषक तत्त्व

(2) दीर्घ/गुरू पोषक तत्त्व

1.   लघु पोषक तत्व

-     आयरन       आयोडीन

-     कॉपर          कोबाल्ट

-     मैंग्नीज        क्रोमियम

-     जिंक           मॉलीब्डेनम

-     सेलेनियम    फ्लोरीन

2.   दीर्घ पोषक तत्व-

-     फॉस्फोरस   मैग्नीशियम

-     सल्फर        सोडियम

-     पोटेशियम   क्लोरीन

-     कैल्शियम