1. गुरूपोषक तत्त्व-
(a) फॉस्फोरस (P)
- कोशिका झिल्ली के निर्माण में सहायक।
- दाँतो एवं अस्थियों के निर्माण के लिए सहायक।
- ATP,DNA,RNA आदि का घटक
(b) सल्फर (S)-
- सिस्टीन तथा मैथिऑनीन अमीनो अम्ल का घटक
- प्रोटीन निर्माण (कैरोटीन के संश्लेषण) में सहायक।
(c) पोटेशियम (K)
- अम्ल क्षार संतुलन
- तंत्रिकाओं में सूचनाओं की गति हेतु Na+-K+ पम्प का निर्माण
(d) कैल्शियम (Ca):-
- दाँतों एवं अस्थियों के निर्माण में सहायक
- रक्त का थक्का जमाने में सहायक माँसपेशियों की गति में सहायक
(e) मैंग्नीशियम (Mg)-
- माँसपेशियों की गति में सहायक
(f) सोडियम (Na)-
- रक्त दाब का नियमन
- Na+-K+ पोषक तत्त्व की कमी से निम्न रक्तचाप तथा पेशियों में ऐंठन आती है।
(g) क्लोरीन (Cl)-
- परासरण नियमन में सहायक
लघुपोषक तत्त्व
(1) आयरन (Fe)-
- हीमोग्लोबिन तथा मायोग्लोबिन के निर्माण में सहायक।
(2) कॉपर (Cu)-
- रक्त में आयरन के अवशोषण को बढ़ाकर इसे हीमोग्लोबिन निर्माण के लिए उपलब्ध कराता है।
- साइटोक्रोम ऑक्सीडेज एन्जाइम्स का सहघटक, लौह उपापचय, संयोजी ऊत्तकों और रूधिर वाहिनियों का विकास तथा त्वचा में मेलानिन पिगमेंट का निर्माण
(3) मैंग्नीज (Mn)-
- ये जननाँगों तथा स्तन ग्रंथियों के विकास के लिए आवश्यक।
- यूरिया-संश्लेषण तथा फॉस्फेट समूहों के स्थानान्तरण तथा फॉस्फेट समूहों के स्थानान्तरण से संबंधित अभिक्रियाओं के कुछ एन्जाइम्सों के सहघटक।
(4) जिंक (Zn)-
- कई एन्जाइम्सों के Co-Factor में सहायक।
- हृदय की क्रियाशीलता तथा इन्सुलिन की सक्रियता के लिए आवश्यक
(5) सेलेनियम (Se)-
- विटामिन E के निर्माण में तथा एंटी ऑक्सीडेन्ट के रूप में उपयोगी।
- संयोजी ऊत्तकों के लोच के लिए आवश्यक
- थायरॉइड ग्रंथि के सुचारु रूप से कार्य करने हेतु जरूरी।
(6) आयोडीन (I)-
- ये थायरॉइड हॉर्मोन्स के निर्माण में सहायक।
- थायरॉइड की क्रियाशीलता को बनाए रखने में सहायक।
(7) कोबाल्ट (Co)-
- Vit-B12 के निर्माण में आवश्यक।
- RBC के निर्माण में सहायक।
(8) क्रोमियम (Cr)-
- ग्लूकोज तथा अपचयी उपापचय में महत्वपूर्ण।
- हृदय की क्रियाशीलता तथा इन्सुलिन की सक्रियता में आवश्यक।
(9) फ्लोरीन (F)-
- दाँतों को सड़ने से बचाता है।
नोट- दाँतों की दूर्बलता तथा फ्लोरीन की अधिकता से फ्लोरासिस नामक रोग होता है।
(10) मॉलीब्डेनम (Mo)-
- एन्जाइम्सों के सहायक के रूप में।
- आयरन के अवशोषण को बढ़ाकर हीमोग्लोबिन निर्माण में सहायक।
नोट- मॉलीब्डेनम तत्त्व की कमी से नाइट्रोजनीय अपजात पदार्थों के उत्सर्जन में अनियमितता आती है।
रेशे/Fibers
- ये सामान्यत: पॉलिसैकेराइड्स के बने होते हैं तथा ये अत्यधिक जलावशोषण (Water ebsorption) की क्षमता रखते हैं।
- ये आहारनाल में भोजन की गति को बनाये रखते हैं तथा पाचन क्रिया को नियमित बनाये रखते हैं।
उदाहरण- सेल्युलोज, हेमी सेल्युलोज, म्यूकोपॉलीसैकेराइड
- ‘डायटरी फायबर्स’ अपाच्य कार्बोहाइड्रेट्स जैसे- सेल्यूलोज आदि के बने होते हैं, इनसे आँत की सफाई का कार्य भी होता है।
संतुलित भोजन
- ऐसा भोजन, जिसमें प्रत्येक पोषक पदार्थ उचित मात्रा एवं अनुपात में मनुष्य की आवश्यकता के अनुसार प्रत्येक पोषक पोषक तत्व से युक्त हो, संतुलित भोजन कहलाता है।
- एक वयस्क मनुष्य हेतु प्रतिदिन के भोजन में लगभग- 500 ग्राम प्रोटीन, खनिज-लवण, विटामिन्स व रेशेदार पोषक पदार्थ पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए।