जल विलेय विटामिन

 

विटामिन-B1

(ii) तंत्रिका तंत्र की क्रियाशीलता में सहायक।

(iii) ट्रिप्टोफैन अमीनो अम्ल को नियासिन में परिवर्तित करने में सहायक।

(iv) यह क्रेब चक्र (TCA) में थाइमीन पाइरोफॉस्फेट की तरह व्यवहार करता है।

कमी से होने वाले रोग –

1.   बेरी-बेरी (भूख कम लगना, वजन कम)

2.   न्यूराइटिस (तंत्रिकाओं का विकास बाधित होना)

3.   वरनिक्स व कोरसाकॉफ सिन्ड्रोम – शराबखोरों में ज्यादा एल्कोहॉल के सेवन से विटामिन B1 की कमी से यह सिन्ड्रोम उत्पन्न होता है।

नोट - एल्कोहॉल यकृत में विटामिन-B1 के उपापचय में बाधा पहुँचाता है, जिसकी खोज आइजकमेन ने वर्ष 1897 में की थी।

 

विटामिन-B2

(ii) श्वसन के दौरान FMN तथा FAD के निर्माण में सहायक

(iii) कोशिकीय वृद्धि एवं विकास में सहायक

कमी से होने वाले रोग –

1.   ओष्टविदरक (कीलोसिस) – होठों के किनारों का फटना

2.   ग्लासाईटिस – जीभ पर छाले होना

3.   किरेटाइसिस – गालों की त्वचा का फटना

नोट -

1.   FMN (फ्लेविन मोनो न्यूक्लियोटाइड) ETC में कार्य करते हैं।

2.   FAD (फ्लेविन एडेनिन डाई न्यूक्लियोटाइड), TCA तथा ETC दोनों में कार्य करता है।

 

विटामिन-B3

(ii) ये विभिन्न प्रोटीन के अवशोषण में तथा ट्रिप्टोफैन अमीनो अम्ल के उपापचय में सहायक है, जिससे कोशिकीय वृद्धि तथा विकास प्रेरित होती है।

कमी से होने वाले रोग –

1.   श्वसन क्रिया प्रभावित

2.   पेलाग्रा व हार्टनप रोग (4D सिन्ड्रोम) ® डर्मेटाइटिस, डायरिया, डिमेंशिया, डेथ

नोट -

1.   वर्ष 1937 में एल्वीजेम ने निकोटिनिक अम्ल की खोज की थी।