वैदिक सभ्यता
भाग-1
- सिन्धु घाटी सभ्यता के पतन के बाद भारत में एक नई ग्रामीण सभ्यता का जन्म हुआ, जिसका उल्लेख वेदों में मिलने के कारण इसे "वैदिक सभ्यता' कहा गया।
- यह भारत की प्रथम ग्रामीण सभ्यता (लौहयुग) मानी जाती है।
- वेदों में इस सभ्यता के संस्थापकों को ‘आर्य' कहा गया।
- आर्य संस्कृत भाषा के "अरि + य' शब्दों से मिलकर बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ – ‘सुसंस्कृत या उच्चकुल में उत्पन्न व्यक्ति' है।
- आर्य सफेद उपजाति की नोर्डिक शाखा से संबंधित मानव समूह को कहा गया है।
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आर्यों का मूल स्थान
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क्र.
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विद्वान
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मत
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1.
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दयानंद सरस्वती
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तिब्बत
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2.
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बालगंगाधर तिलक
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उत्तरी ध्रुव
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3.
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मेक्समूलर (जर्मन)
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मध्य एशिया
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4.
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गंगानाथ झा
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ब्रह्मऋषि प्रदेश
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5.
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अविनश चन्द्र
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सप्तसैंधव प्रदेश
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6.
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राजबली पाण्डेय
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मध्यप्रदेश
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7.
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गाइल्स
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हंगरी या डेन्यूब नदी घाटी
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8.
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पेंका व हर्ट
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जर्मनी
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- जर्मन विद्वान मेक्समूलर का मत सबसे प्रामाणिक माना जाता है। उन्होंने भाषाओं के तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर व आर्यों के (इरानी) सबसे प्राचीनतम ग्रंथ जेन्दावेस्ता व भारतीय आर्यों के सबसे प्राचीनतम ग्रंथ ऋग्वेद के तुलनात्मक आधार पर भी उन्होंने यह साबित करने का प्रयास किया कि आर्यों का मूल स्थान मध्य एशिया ही था।
- बोगजकोई अभिलेख – यह अभिलेख 1400 ई.पू. के आसपास का माना जाता है, जो कि एशिया माइनर (ईरान) से प्राप्त होता है। यह इण्डोईरानी भाषा में लिखित है, जिससे यह प्रतीत होता है कि बिछुड़ने से पहले ईरानी आर्य व भारतीय आर्य एकसाथ निवास करते थे।
- खोज - 1907 ई. में ह्यूगो द्वारा की गई थी। इसके अनुसार यह अभिलेख 1400 ई.पू. का माना जाता है।
- इसमें 4 ऋग्वेदिक आर्य देवता - 1. इन्द्र, 2. वरुण, 3. मित्र, 4. नासत्य (अश्विनी कुमार) का उल्लेख मिलता है। इस अभिलेख की खोज 1907 में 'ह्युगो' के द्वारा किया।
- पहली बार लोहकालीन सभ्यता के बारे में जानकारी यही अभिलेख देता है।
नोट - यह एक संधि अभिलेख है, जो मितानी शासक 'मात्यूजा' व इरानी (हिताताई) शासक 'शब्लील्यूमा' के मध्य हुई है।