वैदिक सभ्यता
भाग-3
2. यजुर्वेद –
- यजुष - कर्मकाण्ड यज्ञ/हवन
- इससे आर्यों की धार्मिक व सामाजिक जीवन की जानकारी मिलती है।
- यह वेद पद्य व गद्य दोनों में है। अत: इसे चम्पुकाव्य भी कहा जाता है।
- यजुर्वेद की 2 शाखाएँ हैं -
(i) कृष्ण यजुर्वेद – पद्य और गद्य दोनों में है। यह दक्षिण भारत में सर्वाधिक मान्य है।
(ii) शुक्ल यजुर्वेद – केवल मंत्र (पद्य)। उत्तर भारत में प्रचलित। सबसे प्रामाणिक शाखा। इसे वाजसनेय शाखा भी कहा जाता है।
- पुरोहित - अध्वर्यु
- श्लोक - 1875
- शून्य का प्रथम उल्लेख
3. सामवेद -
- साम् - गायन
- संगीतवेद, मंत्रों का वेद, यति, रति, अलंकार
- भारतीय संगीत का जनक
- पुरोहित - उद्गाता
- सबसे कम ऐतिहासिक महत्व वाला देह - सामवेद
- केवल 75 मौलिक मंत्र (बाकी मंत्र ऋग्वेद से लिए गए हैं।)
- सूर्य की स्तुति इसी वेद में है।
4. अथर्ववेद -
- जादू/टोना/टोटका, औषधि का उल्लेख
- काण्ड - 20, मंत्र - 5849
- इसे लोकप्रिय धर्म प्रतिनिधित्व धारण करने वाला वेद
- सबसे नवीनतम वेद माना जाता है।
- इसे ब्रह्मवेद/क्षत्रवेद भी कहा जाता है।
- पुरोहित - ब्रह्मा
- अन्यनाम - भृगवँगिरोहवेद, महीवेद, भैषज्य वेद, अंगीरस वेद, अथर्वाअंगिरस वेद, महीवेद
- अथर्ववेद के भूमि सूक्त में - माता भूमि पुत्रोहं पृथिव्या
- इस वेद का कोई भी आरण्यक नहीं है।
- वेदत्रय - ऋग्वेद + यजुर्वेद + सामवेद (प्रथम 3)
- वेदांग - वेदों को पूर्ण रूप से समझने हेतु वेदांगों की रचना हुई। कुल 6 वेदांग माने गए हैं।
(i) निरुक्त (कान) (ii) कल्प (हाथ)
(iii) ज्योतिष (आँख) (iv) शिक्षा (घ्राण/नाक)
(v) व्याकरण (मुख) (vi) छन्द(पैर)
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वेद
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पुरोहित
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1. ऋग्वेद
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होता/होतृ
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2. यजुर्वेद
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अध्वर्यु
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3. सामवेद
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उद्गाता
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4. अथर्ववेद
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ब्रह्मा/ब्राह्मण
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