यकृत/Liver के कार्य-
• पित्त रस/ Bile Juice का निर्माण यकृत में, यहाँ से स्त्रावित हो कर पित्ताशय/Gall bladder में इसे संग्रहित किया जाता है।
विऐमीनकरण/Deamination- नाइट्रोजन युक्त अमीनो समूह (-NH2) को अमीनो अम्लों से हटाना। ताकि अब इन्हें शरीर में संग्रहित किया जा सके।
• निराविषीकरण/detoxification
• RBC निर्माण
• यकृत में β- कैरोटीन से विटामिन- A का निर्माण।
• यकृत के द्वारा ग्लायकोजेनेसिस, ग्लायकोजेनोलाइसिस एंव लाइपोजेनेसिस (वसा का निर्माण) आदि क्रियाऐं की जाती हैं।
• यकृत से हिपेरिन (प्रतिस्कन्दक/Anticoagulant) का स्त्रवण।
• यकृत में विटामिन-K की सहायता से प्रोथ्रोम्बिन का निर्माण होता है, जो कि चोट लगने पर रक्त के थक्का निर्माण/Clotting में सहायक।
• यकृत में विटामिन्स (A,D,E,K एवं B12), वसा, ग्लाइकोजन का संग्रहण।
• उत्सर्जन में सहायक/(बिलिरुबिन एवं बिलिवर्डीन का निर्माण)
• यकृत/Liver में पाई जाने वाली कुफ्फर कोशिकाओं के द्वारा एंटीजन्स का भक्षण/Phagocytosis किया जाता है।
• यकृत/Liver के नीचे पित्ताशय/Gall bladder स्थित होता हैा
• पित्ताशय में पित्त रस (Bile Juice) संग्रहित रहता है।
• इस पित्ताशय में आहारनाल से स्त्रावित कॉलीसिस्टोकाइनिन नामक हॉर्मोन्स संकुचन/Contractions प्रेरित करता है, जिससे पित्त-रस का स्त्रवण/Secretion बढ़ता हैं।
पाचन की कार्यिकी
मानव में भोजन के पाचन को 5 चरणों में बांट सकते हैं-
- भोजन का अन्तर्ग्रहण (Ingestion)
- भोजन का पाचन(Digestion)
- पचित भोजन का अवशोषण(Absorption )
- स्वांगीकरण(Assimilation)
- अपचित भोजन का मल-त्याग(Defaection)
1. भोजन का अन्तर्ग्रहण-
मुख के द्वारा भोजन को ग्रहित कर आहारनाल के अन्य भागों में ये गति करते हुए पहुँचता है।
2. भोजन का पाचन
भोजन का पाचन 2 प्रकार से होता हैं, जो निम्न है-
यांत्रिक पाचन/Mechanical digestion- इसमें भोज्य पदार्थों को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है, भोजन को चबाना, पिसना इसी में शामिल है। (मुख गुहा एवं आमाशय में)
रासायनिक पाचन/Chemical digestion- इसमें जटिल भोज्य पदार्थों को पाचक रसों एवं एन्जाइम्स की सहायता से सरल भोज्य पदार्थों में परिवर्तित किया जाता है।
मुख गुहा में पाचन/(Digestion in Oral Cavity) -
• मुख गुहा में दाँत/Teeth एवं जिह्वा (Tongue) की सहायता से भोजन का यांत्रिक पाचन होता है,जिसमें दाँत भोजन को चबा कर तथा जिह्वा इसमें लार मिलाकर पाचन में सहायता करती है।
• मुख गुहा में लार की सहायता से रासायनिक पाचन की क्रिया होती है।
• लार का स्त्रवण प्रतिदिन लगभग 2 लीटर तक।
• लार का PH= 6.35-6.85
• लार के संगठन में 99.9 प्रतिशत जल होता है।
• 0.1 प्रतिशत में एन्जाइम्स, लवण, म्यूसिन, बफर पदार्थ होते हैं।
• लार में पाया जाने वाला टायलिन/सलाईवरी एमाइलेज एन्जाइम्स स्टार्च का पाचन इस प्रकार करता है-
बिना पका हुआ स्टार्च – सलाईवरी एमाइलेज /टायलिन – डेक्सिट्रन
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पका हुआ स्टार्च – सलाईवरी एमाइलेज /टायलिन - माल्टोज
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