छोटी आँत में पाचन :-
- अग्नाशयी रस –

आंत्रीय रस (Succus Entenicus)-
- ये आँत की दीवारों में उपस्थित ब्रूनर्स ग्रंथियों, लिबरकुहन की दरारों एवं म्यूकस ग्रंथियों के स्त्रवण से निर्मित क्षारीय प्रकृति का पाचक रस है, जिसका PH=8.4 होता है।

बड़ी आँत में पाचन क्रिया :-
• मनुष्य में बड़ी आँत में पाचन क्रिया नहीं होती है, लेकिन यहाँ कुछ बैक्टीरिया जैसे - E.Coli विटामिन संश्लेषण
(B-12, Vit-K)
• चारा चरने वाले जंतु (Ruminents) जैसे- गाय, बकरी, भेड़, भैंस, आदि बड़ी आँत की लंबाई अधिक होती है। अत: सेल्युलोज के पाचन की क्षमता पाई जाती है।
• मनुष्य के पूर्वजों में (कपि वर्ग के जंतु) बड़ी आँत से जुड़ी अपेन्डिक्स की सहायता से सेल्युलोज़ का पाचन किया जाता था। लेकिन वर्तमान में ये संरचना अवशेषी अंग (Vestigeal Organ) के रुप में पाई जाती है।
बड़ी आँत में अवशोषण :-
• यहाँ पर जल एवं खनिज लवणों तथा कुछ दवाओं का अवशोषण।
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सर्वाधिक अवशोषण
पचित भोजन का स्वांगीकरण (Assimilation):-
• कोशिकाओं द्वारा सरल पोषक पदार्थों का उपयोग कर लेने के बाद भी शेष बचे सरल पोषक पदार्थों को पुन: जटिल भोज्य पदार्थों में परिवर्तित कर शरीर में ग्लायकोजन के रुप में संग्रहित किया जाता है। इसे ही स्वांगीकरण (Assimilation) कहते हैं।
भोजन का अवशोषण (Absorption of digested food):-
• पचित (Digested) या सरल भोज्य पदार्थों का आहारनाल के अलग-अलग भागों में अवशोषण होता है तथा ये पोषक पदार्थ रक्त में पहुँचते हैं, जहाँ से इन्हें अलग-अलग अंगों, उत्तकों एवं कोशिकाओं (Cells) तक पहुँचाया जाता है।
• मुख गुहा में – यहाँ जल, ग्लूकोज एवं कुछ विशेष दवाओं जैसे- नाइट्रोग्लिसरीन, सॉर्बिमाइड आदि का ही अवशोषण होता है।
• आमाशय (Stomach) – ग्लूकोज, खनिज-लवण एवं एल्कोहॉल का अवशोषण।
छोटी आँत में (Small intestine)-
• अधिक लंबाई + कम व्यास + रसांकुर/Villi आंतरिक पृष्ठीय क्षेत्रफल में वृद्धि।
• ग्लूकोज एवं अमीनो् अम्ल का अवशोषण रंसाकुर (Villi) से।
• वसीय अम्ल + ग्लिसरॉल का अवशोषण लसिका कोशिकाओं द्वारा।
• छोटी आँत में अवशोषण क्रिया सर्वाधिक होती है।

मल-त्याग(Defaecatopn):-
• आहारनाल में अपचित भोजन को मल के रुप में गुदा(Anus) के द्वारा शरीर से बाहर त्याग दिया जाता है।