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क्रं.सं. |
वेद |
ब्राह्मण |
आरण्यक |
उपनिषद् |
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1 |
ऋग्वेद |
ऐतरेय, कौषितकी |
ऐतरेय, कौषितकी |
ऐतरेय, कौषितकी |
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2 |
यजुर्वेद |
शुक्ल |
शतपथ |
वृहदारण्यक |
वृहदा,ईश |
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कृष्ण |
तैतिरीय |
तैतिरीय |
कपिष्ठल कठोपनिषद् तैतिरीय मैत्रायणी |
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3 |
सामवेद |
पंचविष षडविष जैमिनी |
छान्दोग्य जैमिनीय |
छान्दोग्य जैमिनीय केन |
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4 |
अथर्ववेद |
गोपथ |
कोई नहीं |
मुण्डक माण्डुक्य प्रश्न |
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नोट:- शतपथ ब्राह्मण में जल प्लवन की घटना का उल्लेख मिलता है।
- शतपथ ब्राह्मण में नारी को अंद्धागिनी कहा गया है।
नोट :- (1) '' सत्यमेव जयते '' मुण्डकोपनिषद् से लिया गया है।
(2) लोकपालबिल का ध्येय वाक्य '' मा गृध कस्यस विधानम् '' अर्थात किसी के धन की लालसा ना करें - ईशोनिपषद् से लिया गया है।
आर्य + वृत = आर्यावृत
सिन्धु + स्थान = हिन्दुस्थान
• वेदों में कुल - 31 नदियों का उल्लेख मिलता है (ऋग्वेद के नदी सुक्त में नदियों का वर्णन है।)
केवल ऋगवेद - 25 नदियों का उल्लेख मिलता है।
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क्रं.सं. |
नदियों के प्राचीन नाम |
आधुनिक नाम |
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1 |
पुरुष्णी |
रावी |
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2 |
वितस्ता |
झेलम |
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3 |
कुम्भा |
काबुल |
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4 |
शुतद्री |
सतलज |
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5 |
विपाशा |
व्यास |
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6 |
सिन्धु |
सिंध |
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7 |
सरस्वती |
घग्घर |
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8 |
गोमती |
गोमल |
• आर्य सिन्धु और उसके आसपास के क्षेत्रों में आकर बसे जिसे सप्तसैंधव-प्रदेश कहा गया।
• प्रदेश - शब्द का प्रयोग 'देश' के रूप में किया गया।
• सिन्धु व उसके आस - पास के क्षेत्र को कालांतर में युनानियों द्वारा 'हिन्दुस्थान' के नाम से पुकारा गया।
• आर्यों का निवास स्थान होने के कारण इसे परवर्ती ग्रंथों में 'आर्यावृत' कहकर पुकार गया।
• आर्यों का सबसे महत्वपूर्ण जनजाति भरत थी, इसी कारण कालान्तर में हमारे देश का नाम 'भारत' पड़ा।