सभा :-
- सभा को ऋग्वेद में नरिष्ठा कहा गया है।
- ऋग्वेद में सभा का 8 बार उल्लेख मिलता है।
- सभा में महिलाओं को भाग लेने का अधिकार था। इन्हें सभावती कहा जाता था।
- सभा गाँव के वरिष्ठ व महत्वपूर्ण लोगों का समूह था।
- जो गाँव के सामूहिक मसलों को हल करते थे।
- न्याय – कठोर परीक्षाओं के आधार पर जैसे- जल परीक्षा, अग्नि परीक्षा इत्यादि।
समिति :-
- केन्द्रीय राजनैतिक संस्था थी।
- जन के समस्त लोग इसमें शामिल होते थे।
- महिलाओं को भाग लेने का अधिकार नहीं था।
- इसमें मुख्यत: धनाढ्य व युवा वर्ग (ब्राह्मण) के लोग शामिल होते थे।
- सभा व समिति का मुख्य कार्य :- राजा की नियुक्ति व पदमुक्ति से संबंधित थे।
- यह दोनों संस्थाएँ राजा पर नियंत्रण रखने का कार्य करती थी।
- समिति का मुखिया – ईशान कहलाता था।
* अथर्ववेद में सभा व समिति को प्रजापति की दो पुत्रियों के समान बताया गया है।
गण :-
- जनतंत्र के लिए प्रयुक्त एक तकनीकी शब्द था।
- प्रारंभिक समय में एक सैन्य टुकड़ी था।
- मुखिया – गणस्य गोप्ता होता था।
सामाजिक जीवन :-
- ऋग्वेदिक समाज पितृसत्तात्मक था।
- परिवार के मुखिया को – गृहपति कहा जाता था।
- संयुक्त परिवार प्रथा प्रचलित थी।
खान-पान :-
- खान-पान सरल था, अर्थात् दुग्ध से निर्मित वस्तुओं का प्रयोग करते थे।
- मीठे हेतु शहद का प्रयोग करते थे।
- मांस-मछली खाने से घृणा करते थे।
- आर्यों का सबसे प्रिय पेय पदार्थ – सोमरस था।
सोमरस का उल्लेख ऋग्वेद के 9वें मण्डल में मिलता है।
- सोमरस को अमृत के समान माना गया है।
- शतपथ ब्राह्मण में गाय को ‘अघन्या’ अर्थात् ’न मारने योग्य कहा है।’
- ऋग्वेद में ‘गऊ’ शब्द का उल्लेख 176 बार मिलता है।
- गाय को ‘रथि’ अर्थात् संपति माना जाता था। ऋग्वेदिक काल में "गाय" वस्तुविनिमय का साधन थी तथा यह आर्थिक सम्पन्नता का सूचक थी।
- ऋग्वेदिक काल में प्राय: गायों हेतु युद्ध लड़े जाते थे, यहाँ गवेषणा, गव्येषु, गवेष्टि शब्द मिलते हैं।
- पहनावा – आर्य 4 प्रकार के वस्त्र धारण करते थे-
1. नीवी
2. अधिवास
3. वास
4. अंतका