धार्मिक जीवन : -
- ऋग्वेदिक आर्य एकेश्वरवादी थे, प्रकृति की पूजा करते थे सर्वप्रथम पृथ्वी व धौंस (आकाशिय देवता) की पूजा प्रारंभ की तीसरे पूजक (देवता) के रूप में वरूण की पूजा की जाने लगी।
- आर्योँ के अनुसार धौंस व पृथ्वी के मिलन से इस सृष्टि का निर्माण हुआ है। इन दोनों के जो कुछ भी है उसमें वरूण का निवास माना गया है।
वरूण :-
- वरूण हेतु ऋग्वेद में कुल 30 सुक्त मिलते है।
- इसे सम्पूर्ण जलनिधि का स्वामी व असुर देवता बताया गया है।
इन्द्र :-
- ऋग्वेदिक काल के सबसे लोकप्रिय देवता माने गए है।
- ऋग्वेद में 250 सुक्त इन्द्र को समर्पित है।
- इन्हें तुफान व वर्षा का देवता माना जाता था।
- इन्द्र को पुरन्दर (किलों को तोड़ने वाला) कहा जाता था।
अग्नि :-
- इन्द्र के बाद दूसरे सबसे महत्त्वपूर्ण देवता थे।
- ऋग्वेद में अग्नि हेतु 220 सुक्त मिलते हैं।
- इन्हें धौंसपुत्र व आहुतियों का देवता माना गया है।
अन्य तथ्य :-
- संरक्षक देवता के रूप में – विष्णु की पूजा की जाती थी।
- प्रार्थनाओं का पितामह – बृहस्पति को कहा गया है।
- 4th प्रमुख देवता के रूप में सूर्य की पूजा की जाती है।
आर्थिक जीवन :-
- ऋग्वेदिक आर्यों का मुख्य व्यवसाय कृषि व पशुपालन था।
- ऋग्वेद में कृषि शब्द का उल्लेख – 33 बार हुआ है।
कृषि हेतु "चर्षिणी" शब्द का उल्लेख मिलता है।
भूमि :-
- कृषि योग्य भूमि को-क्षेत्र/उर्वरा कहा जाता था।
- पड़ती (बंजर भूमि) को → खिल्य कहा जाता था।
- हल को → लांगल कहा जाता था।
- हल चलाने वाले व्यक्ति को → कीवाश कहा जाता था।
- हल से बनी नालियों (रेखाएँ) को – सीता कहा जाता था।
- ऋग्वेद में केवल यव (जौ) का ही उल्लेख मिलता है।
- अनाज मापने के पात्र को "उर्दरा" कहा जाता था।

- ऋग्वेद में केवल यव (जौ) का ही उल्लेख मिलता है।
- अनाज मापने के पात्र को "उर्दरा" कहा जाता था।
- राजा को कुल उपज का 1/6 भाग कर के रूप में दिया जाता था।