उत्तरवैदिक काल:-

स्त्रियों की स्थिति :

 स्त्रियों की स्थिति दयनीय थी, कन्या के जन्म को कण्ठ का सूचक माना जाने लगा था।

 कन्या वध को बढ़ावा मिला।

- विवाह उत्सव दो चरणों में होता था।

 पाणिग्रहण संस्कार :- जब वर-वधू एक-दूसरे के दाहिनें हाथ को थामकर – जीवन भर सहमति व सामंजस्य की शपथ लेते थे।

 सप्तपदी – वर–वधू एक-दूसरे के साथ सात-कदम  चलकर शपथ लेते थे।

- धर्म ग्रन्थों के अनुसार 8 प्रकार के विवाह माने गए हैं।

1. प्रजापत्य = कन्या का पिता वर को अपनी कन्या प्रदान करता था।

वर - वधू धर्म का आचरण करते हुए विवाह करते थे।

2. आर्ष विवाह = वर्तमान दहेज प्रथा इसी विवाह की देन मानी जा सकती है।

वर / वरपक्ष के - कन्या के पिता को एक जोड़ी गाय / बैल उपहार (दहेज) स्वरूप दी जाती थी।

3. देव विवाह = यज्ञ कराने वाले पुरोहित के साथ कन्या का विवाह किया जाता था।

4. ब्रह्म विवाह = सर्वोत्तम व सबसे उच्चश्रेणी का विवाह माना जाता था।

ब्रह्म विवाह वर्तमान में सर्वाधिक प्रचलित है।

कन्या का पिता अपनी पुत्री हेतु 'वेदज्ञ' व शीलवान वर ढूँढ कर अपनी पुत्री के साथ विवाह कर देता था।

Note:- विवाह संख्या - 1 to 4 इन्हें उत्तम विवाह की श्रेणी में रखा गया है।

5. गन्धर्व विवाह = अपनी ही पसंद से वर-वधू एक दूसरे का चयन करते हैं।

आधुनिक प्रेम विवाह माना जाता है।

6. आसुर विवाह = जब पिता अपनी कन्या के बदले, धन लेकर उसका विवाह - किसी के भी साथ कर देता था।

7. राक्षस विवाह = बलपूर्वक कन्या का अपहरण कर उससे विवाह करना।

महाभारत में इसे "क्षात्र धर्म" (क्षत्रिय धर्म) कहा गया है।

इसे क्षात्र विवाह भी कहा जाता है।

8. पैशाच विवाह = कन्या के शरीर पर जबरदस्ती अधिकार कर लेना।

इसे सबसे निकृष्ठ (अधम) विवाह माना गया है।

Note :- विवाह संख्या - 5 to 8 निम्न श्रेणी के विवाह माने गए हैं।

जन्म से मृत्यु पर्यन्त 16 संस्कार बनाए गए हैं जैसे:-

1. गर्भाधान बालक के जन्म से पूर्व होने वाला संस्कार

2. पुंसवन बालक के जन्म से पूर्व होने वाला संस्कार

3. सीमान्तोनयन बालक के जन्म से पूर्व होने वाले संस्कार

4. जातकर्म :- बालक के जन्म के बाद प्रथम संस्कार

किया जाता था।

सोने की श्लाका से बालक को पंचामृत चटाया जाता था।

बालक की जिह्वा पर "ओम" शब्द लिखा जाता था।

5. नामकरण = जन्म के 7वें/11वें दिन बालक का नामकरण होता था।

6. निष्क्रमण = बालक को पहली बार घर से बाहर ले जाया जाता था।

7. अन्नप्राशन

8. चुड़ाकर्म / जडुला / लटूरिया / मुंडन संस्कार = पहली बार बाल काटना

9. कर्णभेदन = कान छेदकर उसमें पहली बार "गायत्री" मंत्र सुनाया जाता था।

10. विद्यारम्भ

11. उपनयन

12. वेदारम्भ = वेदों का अध्ययन प्रारंभ करना

13. केशान्त / गोदान = पहली बार दाढ़ी मूंछ कटाना

14. समावर्तन

15. विवाह

16. दाह संस्कार/अन्त्येष्टि