मेरुरज्जु
- मस्तिष्क पुच्छ करोटि के महारन्द्ध पर मेरुरज्जु बन जाती है, जो कशेरूक दण्ड में केवल प्रथम कटि (First lumbar) कशेरूका तक फैली रहती है।
- खोपड़ी के आधार पर एक बड़े आकार का छिद्र पाया जाता है, जिसे फोरामैन मैग्नम (महारन्ध्र) कहते है।
- मेरुरज्जु के चारों ओर कशेरूक दण्ड उपस्थित होती है जो मस्तिष्क के समान तीन झिल्लियों के आवरण से घिरी हुई होती है।
- मेरुरज्जु के चारों ओर भी CSI लगातार परिसंचरण करते हुए पोषण उपलब्ध कराने के साथ उत्सर्जी पदार्थों को हटाने का कार्य करता है।
- यह पीड़ा, ताप, स्पर्श, दबाव, स्पन्दन आदि की सूचनाओं को मस्तिष्क में पहुँचाने तथा मस्तिष्क से इन भागों की पेशियों एव ग्रंथियों में चालक प्रेरणाओं को पहुँचाने का कार्य करते हैं।
- प्रतिवर्ती क्रियाएँ (Reflex Actions)
- मार्शल हॉल ने इनके बारे में सर्वप्रथम बताया।
- ये मस्तिष्क तथा मेरुरज्जु दोनों से नियंत्रित होती है।
- ये दैनिक जीवन में होने वाली क्रियाऐं होती है, जिन्हें हम बिना सोचे समझे तुरन्त सम्पादित कर देते हैं।
- ये दो प्रकार की होती है -
(1) सरल प्रतिवर्ती क्रियाऐं - जन्म से ही पायी जाने वाली
(2) प्रानुकूली प्रतिवर्ती क्रियाऐं - जन्म के बाद सीख कर विकसित।
उदाहरण -
(i) गर्म या नुकीली वस्तु से छू जाने पर हाथ को तुरंत पीछे हटाना।
(ii) भोजन को देखकर मुँह में लार आना।
(iii) तेज प्रकाश की उपस्थिति में आँखों का बंद होना।
- प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arch)
- प्रतिवर्ती प्रक्रिया में संवेदांग से उत्तक तक एक चाँदनुमा तन्त्रिकीय प्रेरणा परिपथ स्थापित होता है, जिसे प्रतिवर्ती चाप कहते है।

- परिधीय तंत्रिका तंत्र - इसमें तंत्रिकायें सम्मिलित की जाती है जो इस प्रकार हैं -
(1) कार्य के आधार पर तंत्रिकाऐं -
- अभिवाही (संवेदी) तंत्रिका - यह वातावरण से प्राप्त संवेदनाओं को CNS तक पहुँचाती है।
- अपवाही (चालक प्रेरक) - CNS के संदेशों को प्रभावित अंग तक पहुँचाती है।
- मिश्रित - यह संवेदी एवं चालक / प्रेरक दोनों तंत्रिकाओं के कार्य करती हैं।
(2) उत्पत्ति के आधार पर तंत्रिकाऐं -
- कपाल तंत्रिकाऐं - 12 जोड़ी
- मेरु तंत्रिकाऐं - 31 जोड़ी
- चालक / अपवाही तंत्रिकाऐं 2 प्रकार के तंत्रों का निर्माण करती हैं-
(1) कायिक तंत्रिका तंत्र (SNS)
(2) स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (ANS)
- कायिक तंत्र की तंत्रिकायें ऐच्छिक पेशियों से जुड़ती है तथा हमारी ऐच्छिक क्रियाओं का नियत्रंण करती हैं।
- स्वायत तंत्र की तंत्रिकाऐं हमारे आंतरिक अंगों एवं अनैच्छिक पेशियों से जुड़ती है तथा अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण करती हैं।