तंत्रिकीय संचरण -
इनके दो मुख्य भाग हैं -
(A) एक ही तंत्रिका कोशिका में संचरण आयनों की गति (Na+, k+ एवं CI- आयन) के द्वारा संभव होता है।
(B) एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन में सूचना संचरण / सिनेप्स से ही होता है -
(i) रासायनिक सिनेप्स
(ii) विद्युत सिनेप्स
(i) रासायनिक सिनेप्स -
(ii) विद्युत सिनेप्स -
Note :-
(i) तंत्रिका सूचनाओं प्रवाह की गति 130-200 मीटर / सैकण्ड होती है।
(ii) तंत्रिकीय संचरण के दौरान तंत्रिका झिल्ली पर 12-20 मिली वोल्ट विभव उत्पन्न होता है।
(iii) हमारे मस्तिष्क का बाहरी भाग ग्रे मैटर /धूसर द्रव्य से बना तथा आन्तरिक भाग श्वेत द्रव्य से बना होता है।
(iv) मेरुरज्जु में बाहरी भाग श्वेत द्रव्य का एवं आंतरिक भाग धूसर द्रव्य का बना होता है।
(v) तंत्रिका तंत्र में सबसे कम पुनरूद्भवन क्षमता पाई जाती है।
(1) अल्जाइमर - तंत्रिका कोशिकाओं के नष्ठ होने से याद्दाश्त खोने लगती है, ये आनुवांशिक कारण भी होता है।
(2) पार्किन्सोनिज्म (पार्किसन) - ऐच्छिक पेशियों पर भी नियंत्रण नहीं रह पाता, हाथ - पैर में अनैच्छिक कंपन तथा चेहरा / भावशून्य।