अन्त: स्त्रावी तंत्र

(i) अन्त:स्त्रावी

(ii) बहि: स्त्रावी

(iii) मिश्रित

(1) अन्त: स्त्रावी ग्रंथियाँ - ये ग्रंथियों नलिका विहीन ग्रंथियों हैं, जो कि अपने उत्पाद (हॉर्मोन्स) को सीधे रक्त में मिला देती हैं।

प्रमुख अन्त:स्त्रावी ग्रंथियाँ -

(i) पीयूष ग्रंथि

(ii) थायरॉइड ग्रंथि   

(iii) पैराथायरॉइड ग्रंथि

(iv) थाइमस ग्रंथि

(v) एड्रीनल ग्रंथि

(vi) पिनियल काय

(2) बहि: स्त्रावी ग्रंथि - ये ग्रंथियाँ नलिकायुक्त होती है, जो कि अपने स्त्रवण को नलिकाओं के द्वारा लक्षित स्थल तक पहुँचाती है।

(i) लार ग्रंथियाँ

(ii) यकृत

(iii) स्वेद ग्रंथियाँ

(iv) लेक्राइमल ग्रंथियाँ

(v) स्तन ग्रंथियाँ

(3) मिश्रित ग्रंथियाँ - ये ग्रंथियाँ बहि:स्त्रावी तथा अन्त:स्त्रावी दोनों रूप में कार्य करती हैं। जैसे -

(i) वृषण

(ii) अण्डाशय

(iii) वृक्क

(iv) अग्नाशय

 

 

 

(i)  - Cells à ग्लूकेगॉन

(ii)  -Cells à इन्सुलिन

(iii) S-Cells à सोमेटोस्टेटीन

(iv) P.P-Cells àपैक्रियाटिक पॉलि-पेटटाइड

Note :-

(i) हॉर्मोन्स ऊर्जा तो नहीं देते है लेकिन उपापचयी क्रियाओं में ऊर्जा-उत्पादन को प्रभावित कर शारीरिक वृद्धि एवं विकास का नियमन करते हैं।

(ii) हॉर्मोन्स कम मात्रा में स्त्रावित होते है।

(iii) प्रो हॉर्मोन्स निष्क्रिय अवस्था में स्त्रावित हॉर्मोन्स होते है जैसे - प्रो इंसुलिन

(iv) हॉर्मोन्स अपना कार्य करने के बाद यकृत में नष्ट होते जाते हैं।