हॉर्मोन्स रासायनिक संदेशवाहक होते है, रासायनिक संघटन के आधार पर 3 प्रकार के होते हैं।
- अमीनो अम्ल व्युत्पन्न
- पेप्टाइड हॉर्मोन्स
- स्टेरायड हॉर्मोन्स
- एमीन हॉर्मोन्स है।
- ये अमीनो अम्ल से बने होते है। जैसे - एपिनेफ्रीन, नॉर एपिनेफ्रीन, थायरॉक्सिन, मिलेटोनिन, सिरेटोनिन आदि।
- 3-200 AA मिलकर पेप्टाइड हॉर्मोन्स का निर्माण करते है। जैसे - ऑक्सीटोसिन, ADH, TSH, STH, FSH, LH आदि।
- ये स्टीरॉयड्स (व्युप्पन्न वसा) से निर्मित। जैसे - टेस्टीस्टीरोन, कार्टिसोल, प्रोजेस्टेरॉन, एस्ट्रोजन, कार्टिकोस्टीरोन।
पीयूष ग्रंथि
- मानव शरीर की सबसे छोटी ग्रंथि पीयूष ग्रंथि मटर के दाने के आकार के समान होती है।
- पीयूष ग्रंथि मस्तिष्क के अग्र भाग में स्फेनाइड हड्डी के सेलाटर्सिका नामक गुहा में पायी जाती है।
- पीयूष ग्रंथि हाइपोथैलेमस से इन्फंडीबुलम द्वारा जुड़ी रहती है।
- पीयूष ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि भी कहते है क्योंकि यह अन्य सभी अन्त:स्त्रावी ग्रंथियों का नियंत्रण करती है।
(1) अग्रपालि से स्त्रावित हॉर्मोन्स -
(i) STH
(ii) TSH
(iii) ACTH
(iv) गोनेडोट्रॉपिक - LH & FSH
(v) मेटाबोलिक
(vi) प्रौलैक्टिन
(vii) MSH (केवल मनुष्य में यह अग्रपालि से स्त्रावित होता है अन्यथा मध्यपालि से स्त्रावित होता है।)
STH (सोमेटोट्रॉपिक हॉर्मोन्स) - इसे वृद्धि हॉर्मोन्स / GH हॉर्मोन्स भी कहते है क्योंकि यह हमारी कोशिका में प्रोटीन संश्लेषण की क्रिया को बढ़ाकर अस्थियों में वृद्धि को प्रेरित कर हमारे शरीर की वृद्धि तथा विकास को प्रेरित करता है।
- STH हॉर्मोन्स की कमी से व्यक्ति बौना रह जाता है, जिसे इटिलियोसिस / नैनिज्म / बौनापन / Dwartism कहते है।
- STH हॉर्मोन्स की अधिकता से व्यक्ति की शारीरिक लम्बाई एवं वृद्धि अधिक हो जाती है इसे भीमकायता (जाइगेटिज्म) कहते हैं।
- वृद्धि अवस्था पूरी हो जाने के बाद इस हॉर्मोन्स के अतिस्त्रवण से शारीरिक वृद्धि तो होती है लेकिन आनुपातिक रूप से न होने से शरीर के कुछ ही भागों जैसे चेहरे की अस्थियों में वृद्धि, हाथों की लम्बाई, सीने की अस्थियों की मोटाई बढ़ना। ऐसे में शरीर का रूप दिखता है, इसे 'एक्रोमिगेली' कहते है।
- कई बार वृद्धि हॉर्मोन्स के अतिस्त्रवण से रीढ़ की हड्डी की लम्बाई में अधिक वृद्धि होकर यह मुड़ने लगती है, जिससे कूबड़ का विकास हो जाता है, इसे काईफोसिस कहते है।