पीयूष ग्रंथि
पश्च पालि से स्त्रावित हॉर्मोन्स:- पश्च पालि से किसी हॉर्मोन्स का निर्माण/संश्लेषण नहीं होता है लेकिन यहाँ से हाइपोथैलेमस में निर्मित 2 हॉर्मोन्स का स्त्रवण होता है, जो कि इस प्रकार है-
(1) ऑक्सीटोसिन
(2) वेसोप्रेसिन/ADH
ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन्स:-
ये हॉर्मोन्स गर्भविधि पूर्ण हो जाने पर गर्भाशय में तीव्र संकुचन प्रेरित करता है, जिससे बच्चों को जन्म लेने में आसानी होती है।
ये हॉर्मोन्स शिशु जन्म के बाद माता के शरीर में स्तन ग्रंथियों में संकुचन प्रेरित होकर दुग्ध स्त्रवण को प्रेरित करता है।
इसे लव हॉर्मोन्स भी कहते हैं।
वेसोप्रेसिन/ADH/एंटीडाईयूरेटिक हॉर्मोन्स:-
यह मूत्र रोधी हॉर्मोन्स है क्योंकि ये हॉर्मोन्स वृक्क पर कार्य करता है तथा जल के पुन: अवशोषण को बढ़ाकर मूत्र के आयतन में कमी लाता है। इसकी कमी से मूत्र का आयतन बढ़ जाता हैं, जिससे रोगी को बार-बार मूत्र की शिकायत रहती है, इसे मूत्रमेह/ डायबिटीज इन्सीपिड्स कहते हैं।
ये हॉर्मोन्स रक्त नलिकाओं में संकुचन प्रेरित कर रक्त-दाब को नियमित करता है।
नोट –
यदि शिशु के विकास के दौरान पीयूष ग्रंथि की अग्र पालि नष्ठ हो जाए तो बच्चे का विकास प्रभावित सीने की अस्थियाँ मोटी होने से कूबड़ का विकास, त्वचा पर झुर्रियाँ एवं शिशु अपनी उम्र से ज्यादा बढ़ा दिखाई देता है, इसे सायमंड रोग कहते है।
थायरॉइड ग्रंथि :-
मानव शरीर की सबसे बड़ी अन्त:स्त्रावी ग्रंथि, जो कि गले में स्वरयंत्र (Larynx) के पास स्थित होती है।
यह ‘H’ आकार की होती है।
थायरॉइड ग्रंथि के दो भाग होते हैं-
थायरॉइड पुटिकाऐं
C- कोशिकाऐं
थायरॉइड पुटिकाओं द्वारा दो हॉर्मोन्स स्त्रावित होते हैं-
T3 हॉर्मोन्स (ट्राई आयोडोथायरोनिन)- इसकी मात्रा 20% होती हैं।
T4 हॉर्मोन्स (टेट्रा आयोडोथायरोनिन)- इसकी मात्रा 80% होती हैं।
T4 हॉर्मोन्स को ही थायरॉक्सिन हॉर्मोन्स भी कहते हैं।
नोट –
T3 व T4 हॉर्मोन्स को संयुक्त रूप से थायरॉइड हॉर्मोन्स कहते हैं।
C- कोशिकाओं द्वारा थायरो कैल्शिटोनिन (कैल्शिटोनिन) हॉर्मोन्स का स्त्राव होता है, जो शरीर में Ca की मात्रा का नियमन करता है।
यह हॉर्मोन्स अस्थियों को मजबूत बनाता हैं।