पैराथायरॉइड ग्रंथि :-
ये ग्रंथियाँ संख्या में 4-6 होती हैं।
मक्के के दाने के आकार की यह ग्रंथि थायरॉइड ग्रंथि की सतह पर पाई जाती हैं।
इस ग्रंथि से स्त्रावित हॉर्मोन्स को पैराथार्मोन हॉर्मोन्स (PTH)/ कोलिप हार्मोन्स कहते हैं।
यह हॉर्मोन्स अस्थियों में उपस्थित अतिरिक्त कैल्शियम को रक्त में स्थानान्तरित करता है।
PTH हॉर्मोन्स की अधिकता से अस्थियों में कैल्शियम की कमी होने लगती है जबकि रक्त में कैल्शियम की कमी होने लगती है, जबकि रक्त में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती हैं। अस्थियों में Ca की कमी से इनमें छेद बनने लगते हैं, जिसे अस्थि-सुषिरता (ऑस्टियोपौरोसिस) कहते हैं।
PTH हॉर्मोन्स की कमी से रक्त में Ca की मात्रा कम होने लगती है, जिससे रक्त में थक्का बनने की क्रिया प्रभावित होती हैं, Ca न मिल पाने से इनका संकुचन एवं गति शीलता प्रभावित होती है, इसे टिटेनी रोग कहते हैं।
पिनियल काय –
यह ग्रंथि मस्तिष्क के एपिथैलेमस भाग से जुड़ी रहती हैं।
इस ग्रंथि से मिलेटोनिन तथा सिरेटोनिन हॉर्मोन्स का स्त्रवण होता हैं।
इस ग्रंथि को Biological Clock तीसरी आँख तथा मस्तिष्क की रैती भी कहा जाता हैं।
मिलेटोनिन एक प्रकाश संवेदी हॉर्मोन्स है, जो कि निद्रा हॉर्मोन्स कहलाता है।
मिलेटोनिन हॉर्मोन्स जैविक घड़ी का निर्माण कर दैनिक क्रियाओं को नियमन करता हैं तथा लैंगिक लक्षणों के विकास को बाधित (Delayed) करता है।
सिरेटोनिन हॉर्मोन्स मस्तिष्क के अन्य भागों से स्त्रावित होता है ,यह न्यूरोट्रांसमीटर /तंत्रि हॉर्मोन्स के रूप में कार्य करता हैं।
थाइमस ग्रंथि –
इसे बाल्यावस्था ग्रंथि भी कहते हैं क्योंकि ये ग्रंथि 12-14 वर्ष की उम्र तक ही सक्रिय रहकर हॉर्मोन्स का स्त्रवण करती हैं।
इस ग्रंथि से थाइमोसिन हॉर्मोन्स का स्त्रवण होता हैं।
थाइमोसिन हॉर्मोन्स WBC निर्माण, WBC के कार्यों में विभेदन तथा एंटीबॉडीज़ निर्माण का कार्य करता है।
यह ग्रंथि हमारे प्रतिरक्षा तंत्र के विकास में सहायक है।
इस ग्रंथि के निष्क्रिय हो जाने के बाद भी इसमें हैसल्स कणिकाऐं पायी जाती हैं।
हैसल्स कणिकाऐं मेक्रोफेज के समान एंटीजन का भक्षण करती हैं।
नोट –
थाइमस ग्रंथि को T- लिम्फोसाइट्स का प्रशिक्षण केन्द्र कहा जाता हैं।