राजस्थान के प्रमुख मन्दिर
- राजस्थान में सर्वाधिक मन्दिर जयपुर में स्थित है।
- मंदिर निर्माण की प्रमुख् तीन शैलियां होती है।
नागर शैली - उत्तर भारत में मन्दिर निर्माण की शैली
द्रविड़ शैली - दक्षिण भारत में मन्दिर निर्माण की शैली। चौपड़ा मंदिर - धौलपुर। जयकुण्ड
बेसर शैली - मध्य भारत में मन्दिर निर्माण की शैली
नागर शैली + द्रविड़ शैली
1. नागर शैली - उत्तर भारत में मंदिर निर्माण की शैली है।
- इस शैली में मूर्तिस्थल के चारों तरफ परिक्रमा स्थल होता है एवं ऊपर गुम्बद बना होता है।
- राजस्थान के अधिकांश मंदिर इसी शैली में निर्मित है। इस शैली की तीन उपशैलियां है।
(i) पंचायतन शैली - चार अन्य मूर्तियां व एक मूर्ति/मंदिर निर्मित शैली।
(ii) एकायतन शैली - एक मंदिर का समूह।
(iii) गुर्जर प्रतिहार भरलीन मूर्तियों का मंदिर है।
महाभारन शैली - 8 से 12वीं सदी तक निर्मित मंदिरों की शैली।
Note : महाभारन शैली की नवीनतम शैली भूमिज शैली है, जिसके अंतर्गत मंदिर का गुंबद अनेक खण्डों में विभक्त होता है।
2. द्रविड़ शैली - इस शैली के मंदिर दक्षिण भारत में बनाये जाते है।
- इस शैली के मंदिर नीचे से वर्गाकार, बीच में से गुम्बदाकार एवं ऊपर से पिरामिड आकृति के होते है।
- इस शैली के मंदिरों का प्रवेश द्वार गोपुरम कहलाता है।
Note: राजस्थान में द्रविड़ शैली का प्रथम मंदिर - चौपड़ा मंदिर धौलपुर है।
3. बेसर शैली - नागर शैली + द्रविड़ शैली का मिश्रण बैसर शैली कहलाता है।
- यह मध्य भारत में मंदिर निर्माण की शैली है।
ब्रह्माजी मंदिर
पुष्कर-अजमेर - इस जगह का उल्लेख पद्म पुराण में मिलता है।
आसोतरा-बाड़मेर -
निर्माण - खेतारामजी महाराज
इस मंदिर में ब्रह्माजी व माता सावित्री की प्रतिमा स्थित है।
छींछ-बांसवाड़ा - इस मंदिर में ब्रह्माजी की आदमकद मूर्ति लगी हुई है।
सावित्री माता मंदिर -
यह मंदिर रत्नागिरी पहाड़ी - पुष्कर (अजमेर) पर स्थित है।
इस मंदिर की पहाड़ी पर राजस्थान का तीसरा रोप-वे स्थापित किया गया है।
काचरिया मंदिर - किशनगढ़ - अजमेर
निम्बार्क सम्प्रदाय का मंदिर
रंगनाथ जी का मंदिर - पुष्कर - अजमेर
राजस्थान में एकमात्र मंदिर
1. इन्दिरा गाँधी मंदिर - अचरोल (जयपुर)
2. रावण मंदिर - मण्डोर (जोधपुर)
3. विभीषण मंदिर - कैथुन (कोटा)
4. लक्षमण मंदिर - भरतपुर
5. रघुनाथ जी चुण्डावत मंदिर - सीकर
6. दाढी मुंछ वाले राम लक्ष्मण मंदिर - झुंझुनूँ
सूर्य मंदिर
ओसियां-जोधपुर
यहां स्थित सूर्य मंदिर का निर्माण वत्सराज प्रतिहार ने करवाया था।
राजस्थान का कोणार्क/भूवनेश्वर मंदिर कहलाता है।
क्लेंक पैंगेडा भी कहा जाता है।
गलता जी - जयपुर
गालण ऋषि की तपोभूमि मंकी वैली
दीगोद-कोटा
बुढातीत-कोटा
सूर्य मंदिर स्थित है।
झालरापाटन झालावाड़
यहां स्थित सूर्य मंदिर को सात सहेलियों का मंदिर भी कहते है।
झालावाड़ का सूर्य मंदिर - झालरापाटन-झालावाड़
यहा स्थित मंदिर सात सहेलियों का मंदिर भी कहा जाता है।
इस मंदिर को पदमनाथ/चारभुजा मंदिर भी कहते है।
यह मंदिर खजुराहो/महामारन शैली में निर्मित है।
इस मंदिर की रधिका में विष्णु जी एवं सूर्य की मूर्ति एक साथ लगी है।
(1) रणकपुर जैन मंदिर - पाली - मथाई नदी के तट पर
- निर्माण - 1439 ई. धारणकशाह
- वास्तुकार - सोमपुर ब्राह्मण दैपाक
- यह मंदिर सेवड़ी पत्थर एवं सोनाणा पत्थरों से निर्मित है।
- कुल - इस मन्दिर में 1144 खम्भे है।
- उपनाम - स्तम्भों का वन, चौमुखा मंदिर, नलिनी विमान मंदिर
- फर्ग्युसन ने कहा - मैंने जीवन में ऐसा सुन्दर भवन पहली बार देखा जिसमें स्तम्भों का वर्गीकरण इतना आकर्षक है।
(2) दैलवाड़ा जैन मंदिर - सिरोही
- यहाँ पर पाँच मन्दिरों का समूह है।
(1) विमलबसही आदिनाथ मंदिर
(2) लुणवसहि मन्दिर / नेमीनाथ मन्दिर
(3) भीमाशाह मन्दिर
(4) पार्श्वनाथ मन्दिर
(5) महावीर मन्दिर
- कर्नल जेम्स टॉड का कथन - ताजमहल को छोड़कर देश की सबसे सुन्दर इमारत / देलवाड़ा के जैन मन्दिर हैं।
(1) विमलबसहि मन्दिर - निर्माण - विमलशाह - 1031 ई. में
- विमलशाह गुजरात के चालुक्य शासक भीमदेव सोलंकी का मंत्री था।
- इस मन्दिर की जमीन आबू के शासक घुघरु ने प्रदान की।
- इस मन्दिर का वास्तुकार - कीर्तिधर था।
- इस मन्दिर में सप्त धातुओं से निर्मित आदिनाथ की प्रतिमा स्थित है।
- लूणवसही मंदिर - इसे नेमीनाथ मन्दिर भी कहते है।
- इसका निर्माण - 1280-81 ई. में चालुक्य शासक धवल मंत्री तेजपाल व वास्तुपाल ने करवाया।
- वास्तुकार - शोमन देव
- 1287 ई. में इस मन्दिर की मूर्ति 'विजयसेन सूरी' के हाथों से रखी गई।
- इस मन्दिर में नेमीनाथ की मूर्ति काले संगमरमर से निर्मित है।
- इस मन्दिर को देवरानी - जेठानी मन्दिर भी कहा जाता है।
(3) भीमाशाह मन्दिर - 15 वीं सदी में भीमाशाह द्वारा निर्मित।
- इसे पीतलहर मन्दिर भी कहा जाता है।
- यहाँ ऋषभदेव / आदिनाथ की 108 मन की पीतल की प्रतिमा स्थित है।
(4) पार्श्वनाथ मन्दिर - यह मन्दिर संगमरमर से निर्मित है।
- यहाँ पर पार्श्वनाथ की प्रतिमा स्थित है।
(5) महावीर मन्दिर - जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर महावीर स्वामी की प्रतिमा स्थित है।
(3) भांडाशाह जैन मन्दिर - बीकानेर
- निर्माण - भांडाशाह
- इस मन्दिर की नींव में पानी के स्थान पर घी का प्रयोग हुआ।
(4) 72-जिनालय - भीनमाल (जालोर)
- यह उत्तर भारत का सबसे बड़ा मन्दिर है।
(5) पार्श्वनाथ मन्दिर - नाकोड़ा (बाड़मेर)
- यहाँ पर शांतिनाथ व भैरवनाथ की प्रतिमा स्थित है।
(6) आस पार्श्वनाथ मन्दिर - लौद्रवा (जैसलमेर) मेड़ी
- यह मन्दिर मूमल महल (मूमल मेड़ी) के पास स्थित है।
नोट - पार्श्वनाथ जी जैन धर्म के 23 वें तीर्थकर थे।
नोट - 'मूमल' नामक पुस्तक की रचना 'लक्ष्मीकुमारी चुण्डावत' ने की जबकि 'महेन्द्र व मूमल ' की प्रेमकथा पुस्तक 'मिनाक्षी स्वामी' ने लिखी।
(7) स्वर्ण जैन मन्दिर - फालना (पाली)
- यह जैन धर्म का प्रथम स्वर्ण मन्दिर है।
नोट - फालना को 'गेटवे ऑफ गोडवे मिनी मुंबई' कहा जाता है।
(8) ऋषभदेवजी का मन्दिर - धुलेव गाँव - उदयपुर
- इनको काला बावजी भी कहा जाता है।
- इनको केसरियानाथ जी भी कहा जाता है।
- यहाँ पर चैत्र कृष्ण अष्टमी को मेला लगता है।
- यह जैन मन्दिर है।
महावीर मंदिर- करौली
- चांदन गांव/महावीर जी-करौली
- उपनाम- अहिंसानगरी
- यह मंदिर गंभीरी नदी के तट पर स्थित है।
- महावीर जयंती पर भव्य मेला आयोजित होता है जिसका मुख्य आकर्षण जिनेन्द्र रथ यात्रा होती है।
- यहाँ महावीर जी का मेला चार दिन तक आयोजित होता है जिसमें आने वाला चढ़ावा चमार जाति/चर्मकार जाति में वितरित होता है।
मुंछाला महावीर मंदिर
- घाणेराव/पाली
- भगवान महावीर की मुंछो वाली मूर्ति
- सतबीस देवरी मंदिर-चित्तौड़गढ़
- श्रंगार चंवरी मंदिर- चित्तौड़गढ़
- निर्माण- वेलका
- राणा कुंभा की पुत्री रमाबाई (वागीश्वरी) का विवाह स्थल।
- नारेली तीर्थ-अजमेर
सोनी जी की नसियां
- अजमेर
- निर्माण- मूलचंद सोनी
- मूलचंद के पुत्र टीकमचंद ने इसका निर्माण कार्य पूर्ण करवाया।
- इसके अंदर द्वारिका नगरी का चित्रण है।
- सोनी जी की नसियां को राजस्थान का लाल मंदिर कहते है।
- नीलकण्ड जैन मंदिर-अलवर
- शांतिनाथ जैन मंदिर-झालावाड़
- चमत्कारी जैन मंदिर- सवाई माधोपुर।
किराडू मंदिर
- बाड़मेर
- यह मंदिर नागर शैली में निर्मित है।
- स्थान-हल्देश्वर पहाड़ी के निकट हाथमा गांव-बाड़मेर
- यहां कुल 5 मंदिरो का समूह 1 विष्णु मंदिर व 4 शिव मंदिर है।
- यहां का सबसे प्रमुख मंदिर सोमेश्वर मंदिर है।
एकलिंगनाथ जी मंदिर
- कैलाशपुरी-उदयपुर
- इसका निर्माण-बप्पारावल द्वारा
- 8वीं सदी में करवाया था।
- इस मंदिर का परकोटा राणा मोकल ने बनवाया था।
- यह मेवाड़ राजाओं के कुलदेवता है।
- यह लकुलीश/पाशुपात संप्रदाय की प्रधान पीठ है।
घुश्मेश्वर महादेव
- शिवाड़- सवाई माधोपुर
- इस स्थान पर भगवान शिव का 12 वाँ ज्योर्तिलिंग स्थित है।
- राजस्थान का एकमात्र शिवलिंग जो 12 माह पानी में डुबा रहता है।
- इस स्थान पर कृत्रिम कैलाश पर्वत निर्मित है।
- यह मंदिर बनास नदी के तट पर स्थित है।
- यहां शिवरात्रि (फाल्गुन कृष्ण 13) को मेला आयोजित होता है।
Note:- शिवरात्रि पशु मेला करौली में लगता है।
अचलेश्वर महादेव मंदिर
- माउंट आबु सिरोही
- इस मंदिर में शिवलिंग के स्थान पर एक गहरा गढ्ढा है, जिसे “ब्राह्म खट्टा” कहा जाता है।
- इस मंदिर स्थल को भ्ँवराथल भी कहते हे।
- इसी मंदिर में दुरसा आढा की पीतल की प्रतिमा स्थित है।
सारणेश्वर महादेव
- माउंट आबु सिरोही
बेणेश्वर महादेव मंदिर
- डुँगरपुर
- बेणेश्वरधाम- सोम-माही-जाखम नदी के संगम पर नवटापरा गांव (डूंगरपुर) में स्थित है।
- बेणेश्वर धाम की स्थापना संत मावजी द्वारा की गई थी।
- बागड़ का धणी कहा जाता हे।
- इस स्थान पर माघ पूर्णिमा को मेला आयेाजित होता है जिसे आदिवासियो का कुंभ कहा जाता है।
निर्माण – मलय वर्मा
इसे राजस्थान का छोटा खजुराहो तथा हाड़ौती का खजुराहो कहा जाता है।
Note – मेवाड़ का खजुराहो – जगत अम्बिका माता मन्दिर – उदयपुर राजस्थान का खजुराहो – किराडू मन्दिर – बाड़मेर
निर्माण – संग्रामसिंह
निर्माण – 10 फरवरी 1672 को राजसिंह द्वारा निर्मित।
निर्माण – गंगा प्रसाद बिड़ला
निर्माण – सवाई जयसिंह
निर्माण – अभयसिंह सिसोदिया
मेला – फाल्गुन शुक्ल 11 व 12 को आयोजित।
निर्माण – गुवक I
हर्षनाथ की पूजा भैरव के रूप में की जाती है।
निर्माण – दट्ड चौहान
निर्माण – परशुराम