बट्टा
(Discount)
• महत्त्व : लाभ – बट्टा/छूट से संबंधित प्रश्न हानि/लाभ प्रश्नों का एक विशिष्ट प्रकार माने जा सकते हैं। किंतु इससे अधिकतर प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार प्रश्न आते रहे हैं। अत: इसे अलग-अलग अध्याय के रूप में दिया जा रहा है।
• प्रश्नों की व्यापकता – इसमें प्रतिशत बट्टा, क्रमिक बट्टा, समतुल्य बट्टा ज्ञात करना या छूट के बाद क्रय/विक्रय मूल्य ज्ञात करना आदि प्रकार के प्रश्न सामान्यतया पूछे जाते हैं। दो या तीन बट्टों की तुलना, छूट देने एवं न देने की स्थितियों की तुलना से संबंधित विशिष्ट प्रश्न भी परीक्षाओं में पूछे गए हैं।
• हल करने के लिए मूलमंत्र – ध्यान दें कि प्रतिशत बट्टा की गणना सदैव अंकित या सूची मूल्य पर होगी न कि क्रय या विक्रय मूल्य पर। विभिन्न प्रश्नों में सूत्रों की सहायता से अतिशीघ्र हल निकल जाता है। आवश्यक है कि प्रश्न का प्रकार पहचानने में प्रवीणता लाई जाए।
• क्रय मूल्य (क्र.मू.) : वह मूल्य, जिस पर आदमी किसी वस्तु को खरीदता है, उसे उस वस्तु का क्रय मूल्य कहते हैं।
• विक्रय मूल्य (वि.मू.) : वह मूल्य, जिस पर किसी वस्तु को बेचा जाता है, उसे उसका विक्रय मूल्य कहते हैं। जब भी इस तरह का लेन-देन दो दलों या व्यक्तियों के बीच में होता है। जैसे कि क्रेता और विक्रेता, तो वह कीमत जिस पर विक्रेता वस्तु को बेचता है और जिस पर क्रेता खरीदता है, समान होते हैं।
साधारणत: क्रय मूल्य और विक्रय मूल्य प्रश्नों में थोड़े परिवर्तित रूप में उपयोग होते हैं। यह बात नीचे की गयी व्याख्या से स्पष्ट है।
A एक वस्तु को x रुपए में B को बेचता है, B उसे C को y रुपए में बेचता है। यहाँ x रुपए A के लिए विक्रय मूल्य और B के लिए क्रय मूल्य है। लेकिन B के लिए विक्रय मूल्य y रुपए है, जो कि C के लिए क्रय मूल्य भी है।
• लाभ या वृद्धि : जब कभी एक व्यक्ति एक वस्तु को क्रय मूल्य से अधिक कीमत पर बेचता है तो यह कहा जाता है कि उसे लाभ हुआ है।
लाभ या वृद्धि = विक्रय मूल्य – क्रय मूल्य
उपर्युक्त उदाहरण में 'B' का लाभ = y रुपए – x रुपए
• हानि या कमी : जब विक्रय मूल्य क्रय मूल्य से कम होता है, तब हानि होती है।
हानि = क्रय मूल्य – विक्रय मूल्य
उपर्युक्त उदाहरण में 'B' की हानि = x रुपए – y रुपए
• नोट - क्रय मूल्य और विक्रय मूल्य दोनों एक ही वस्तु के लिए और समान मात्रा में होना चाहिए और एक ही व्यक्ति के लिए ही होना चाहिए। तभी हम लाभ या हानि पता कर पाएंगे।
• ऊपरी या अतिरिक्त खर्च (Overheads) : वस्तु को एक जगह से दूसरी जगह ढोकर ले जाने का खर्च, किराया, कर्मचारियों का वेतन, मरम्मत, प्रचार इत्यादि के खर्च ओवरहेड यानि ऊपरी खर्च कहलाते हैं। इन ऊपरी खर्च और लाभ को क्रय मूल्य में जोड़ने पर विक्रय मूल्य प्राप्त होता है। यदि ऊपरी खर्च अलग से नहीं दिया है ता इसका मान शून्य लेते हैं।
• छूट (Discount) : विक्रेता द्वारा क्रेता को वस्तु की कीमत में की गई कमी को छूट कहते हैं। ऐसी बहुत सी परिस्थितियाँ होती हैं, जहाँ पर छूट दी जाती है। जैसे - पुरानी चीजों को बेचने के लिए, कंपनी का बाज़ार में हिस्सा, नगद भुगतान पर इत्यादि।
• इसे मौलिक कीमत में से घटाया जाता है। सामान्यत: इसे लिखे गए कीमत के प्रतिशत के रूप में बताया जाता है।
नियम –
1. अंकित मूल्य = (M.P.)
विक्रय मूल्य = (S.P.) तो
बट्टा = अंकित मूल्य M.P. – विक्रय मूल्य (S.P.)
तथा बट्टा प्रतिशत = ![]()
ध्यान रखें कि बट्टा या छूट की गणना सदैव अंकित मूल्य पर ही की जाती है न कि विक्रय मूल्य पर या लागत मूल्य पर।
2. यदि एक वस्तु D% बट्टा देकर बेचा जाता है, तो
विक्रय मूल्य = अंकित मूल्य \(\left(\frac{100-D}{100}\right)\)
अंकित मूल्य = विक्रय मूल्य × \(\left(\frac{100}{100-D}\right)\)
3. यदि क्रमिक बट्टे/छूट D1, D2, D3,........ इत्यादि बट्टा है तो विक्रय मूल्य
= अंकित मूल्य \(\left(\frac{100-D_{1}}{100}\right)\left(\frac{100-D_{2}}{100}\right)\left(\frac{100-D_{3}}{100}\right)\)
4. यदि D1, D2, D3 तीन लगातार बट्टा/क्रमिक बट्टे हैं, तो समतुल्य बट्टा/कुल बट्टा होगा, समतुल्य बट्टा
\(=100-\left[\left(\frac{100-D_{1}}{100}\right)\left(\frac{100-D_{2}}{100}\right)\left(\frac{100-D_{3}}{100}\right) \times 100\right]\)
5. विशिष्ट स्थिति – यदि लगातार दो बट्टे दिये गए तो (जब बट्टा क्रमश: D1 तथा D2 हो),
6. यदि किसी वस्तु के अंकित मूल्य पर D% बट्टा देने के बाद भी विक्रेता को r% लाभ या हानि होता है, तो ![]()
(धनात्मक चिह्न लाभ तथा ऋणात्मक चिह्न हानि के लिए)
7. यदि x वस्तु को खरीदने पर y वस्तु (संख्या या मात्रा में) मुफ्त में दिया जाता है, तो बट्टा प्रतिशत = \(\frac{y \times 100}{(x+y)}\)
8. यदि एक व्यापारी अपने सामान की कीमत क्रय मूल्य से r% अधिक रखता है तथा वह अपने ग्राहक को अंकित मूल्य पर r1% छूट देता है तो उसका लाभ या हानि प्रतिशत होगा
\(\frac{r \times\left(100-r_{1}\right)}{100}-r_{1}\)
'+' दर्शाता है लाभ तथा '–' हानि को दर्शाता है।
9. यदि किसी वस्तु का मूल्य इस प्रकार रखा जाता है कि r% छूट देने के बाद भी R% लाभ प्राप्त होता है तो उस वस्तु का अंकित मूल्य उसके क्रय मूल्य से \(\left(\frac{r+R}{100-r} \times 100\right)\) अधिक होगा।