अंतरिक्ष (SPACE)

                   

 बाह्य अन्तरिक्ष सन्धि-

कृत्रिम उपग्रहों को कुछ निश्चित कक्षाओं में स्थापित किया जाता है। पृथ्वी से दूरी, उपग्रह द्वारा पृथ्वी का चक्कर लगाने में लिया गया समय तथा उपग्रह की कक्षा में झुकाव के आधार पर इन कक्षाओं का वर्गीकरण किया गया है।

प्रमुख उपग्रह कक्षाएँ इस प्रकार हैं (Orbits of Satellites) :–

1. निम्न भू कक्षा- (Law Earth orbit : LEO)-

2. मध्य भू-कक्षा (Middle Earth Orbit : MEO) –

3. भू-स्थैतिक कक्षा (Geo-Stationary Orbit : GSO)  –

 

4. सूर्य तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा (Sun-Synchronous Polar Orbit : SSPO)  –

5. भू-स्थैतिक/भू-तुल्यकानिक स्थानान्तरण कक्षा (Geosynchronous Transfer Orbit : GTO) –

 

 उपग्रह की संरचना/घटक

- इस अवयव के साथ टेलीमेट्री सिस्टम भी जुड़ा रहता है। इसी की सहायता से  संचार पेलोड पृथ्वी के उपग्रह प्रसारण स्टेशनों (एंटीना) से अपलिंक संकेत प्राप्त करता है तथा इन संकेतों को आवर्धित कर पृथ्वी की ओर प्रसारित करता है। इन डाउनलिंक संकेतों को पृथ्वी पर स्थित डाउनलिंक एंटीना ग्रहण कर लेते हैं।

-संचार पेलोड का प्रयोग उच्च आवृत्ति के संकेतों (Signlas) के लिए किया जाता है। निम्न आवृत्ति के संकेत आयनमण्डल द्वारा परावर्तित हो जाते है।

संपादित कार्य के आधार पर उपग्रहों को मुख्य रूप से सुदूर-संवेदी उपग्रह, नौवहन उपग्रह तथा संचार उपग्रह में बाँटा जाता है।

   भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम (Indian Space Research Programme)

 

अंतरिक्ष आयोग के कार्यकारी अंग (Executive Bodies of Space Commission)

अंतरिक्ष आयोग अपने कार्यकारी अंगो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एवं भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पी.आर.एल) अहमदाबाद के अलावा चार अन्य स्वायत्त निकायों के माध्यम से अपने कार्यों का संपादन करता है। अंतरिक्ष आयोग के ये चार स्वायत्त निकाय निम्नलिखित हैं-

 

एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ACL)- इसरो द्वारा विकसित प्रोद्योगिकियों के वाणिज्यिक दोहन और प्रचार-प्रसार के लिए इसे सरकार के स्वामित्व वाली प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी के रूप में स्थापित किया गया। इसका प्रशासनिक नियंत्रण अंतरिक्ष विभाग के पास है।

 

इसरो उसकी विभिन्न इकाइयाँ (ISRO and it's associated Unites)

1969 में स्थापित एवं 1975 से पूर्ण रूप से एक सरकारी संस्था के रूप में कार्य कर रहा 'इसरो' (ISRO - Indian Space Research Organisation) अपनी विभिन्न इकाइयों के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा उनके व्यावहारिक अनुप्रयोग के सभी क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं तथा कार्यक्रमों को संचालित करता है।

 

इससे संबंधित प्रमुख अंतरिक्ष केन्द्र तथा इकाइयाँ निम्नलिखित हैं –

 

विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र (VSSC-Vikram Sarabhai Space Centre) तिरुअनंतपुरम :

थुम्बा में अवस्थित यह इसरो का सबसे बड़ा केन्द्र है, जो प्रक्षेपण यान का विकास करता है। अब तक भारत द्वारा प्रक्षेपित सभी प्रक्षेपण यानों को इसी केन्द्र में विकसित किया गया है। यह केन्द्र प्रक्षेपास्त्र अनुसंधान तथा प्रक्षेपण यान विकास में अग्रणी भूमिका का निर्वहन करता है।

 

इसरो उपग्रह केन्द्र (ISAC - ISRO Satellite Centre), बंगलुरु :

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के विभिन्न प्रौद्योगिकीय व व्यावहारिक उपयोग से संबंधित मिशनों के लिए स्वदेशी उपग्रहों के निर्माण, परीक्षण व प्रबंधन के साथ-साथ परियोजनाओं को लागू करने का उत्तरदायित्व इसी संस्थान पर है।

 

अंतरिक्ष प्रयोग केन्द्र (SAC - Space Application Centre), अहमदाबाद :

उपग्रहों की पेलोड प्रणाली की कल्पना तथा विकास एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोग को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से इस केन्द्र की स्थापना की गई है। दूरसंचार व टेलीविजन में उपग्रहों का प्रयोग, प्राकृतिक संसाधनों के सर्वेक्षण और प्रबंधन के लिए दूरसंवेदन, मौसम विज्ञान व पर्यावरण संरक्षण से संबंधित कार्य इस केन्द्र के द्वारा किये जाते हैं।

सतीश धवन स्पेस सेन्टर (SDSC) शार (SHAR- Sri Harikota HighAltitude Range), श्रीहरिकोटाः आन्ध्रप्रदेश के पूर्वी तट पर अवस्थित इसरो का यह प्रमुख प्रक्षेपण केन्द्र है। यहाँ  प्रक्षेपण यान के ठोस ईंधन रॉकेट के विभिन्न चरणों का सतह पर परीक्षण तथा प्रणोदकों (Propellants) का प्रसंस्करण किया जाता है।

 

द्रव प्रणोदन प्रणाली केन्द्र (LPSC-Liquid Propulsion System Centre) :

इसरो के उपग्रह प्रक्षेपण यानों और उपग्रहों के लिए द्रव ईंधन से चलने वाली चालक नियंत्रण प्रणालियों, क्रायोजनिक संचालन प्रणाली, ऑक्जिलरी नोदन प्रणाली और इंजनों के डिजाइन, विकास व आपूर्ति हेतु यह संस्था कार्य करती है।

 

मुख्य नियंत्रण सुविधा केन्द्र (MCF - Master Control Facility), हासन :

कर्नाटक के हासन में स्थित इस केन्द्र से इनसेट अंतरिक्ष यानों का प्रक्षेपण कक्षा में स्थापित करने तथा कक्षा में स्थापित होने के बाद इनके संचालन संबंधी कार्य किये जाते हैं। इसरो का दूसरा 'मुख्य नियंत्रण सुविधा केन्द्र' भोपाल में स्थापित किया गया है।

 

इसरो जड़त्व प्रणाली इकाई (ISRO Inertial System Unit), तिरुअनंतपुरम :

इसका प्रमुख कार्य प्रक्षेपण यानों और उपग्रहों के लिए जड़त्व प्रणाली का विकास करना है।

 

भौतिक शोध प्रयोगशाला (Physical Research laboratory), अहमदाबाद :

 यह संस्थान अंतरिक्ष और संबद्ध विज्ञान में अनुसंधान एवं विकास कार्य करने वाला प्रमुख राष्ट्रीय केन्द्र है, जो अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत कार्यरत है।

 

राष्ट्रीय दूर-संवेदी एजेंसी (NRSA - National Remote Sensing Agency), हैदराबाद :

 उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग करके पृथ्वी के संसाधनों की पहचान, वर्गीकरण व निगरानी करने की जिम्मेदारी इस एजेंसी की है। राष्ट्रीय दूर-संवेदी एजेंसी का ही एक अंग भारतीय दूर-संवेदी संस्थान है, जो देहरादून में स्थित है। यह दूर-संवेदी तकनीकों और हवाई चित्र व्याख्या तकनीकों के लिए मुख्य प्रशिक्षण केन्द्र है।

 

न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड यह इसरों की वाणिज्यिक इकाई व एक केन्द्रिय सार्वजनिक क्षेत्र की ईकाई (CPSU) है। इसका मुख्यालय बैंगलुरू में है। इसकी स्थापना मार्च 2019 में की गई। यह अन्तरिक्ष विभाग के अधीन है, यह निजी कम्पनियों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी संबंधी लाइसेंस प्रदान करेगी।

 

     अंतरिक्ष कार्यक्रम के उद्देश्य (Objectives of Space programme)

 

भारतीय राष्ट्रीय उपग्रह प्रणाली (INSAT - Indian National Satallite System)

 

उपरोक्त संचार उपग्रहों के उपयोग को दो क्षेत्रों में वर्गीकृत करके देखा जा सकता है
(a)
संचार क्षेत्र में उपयोग

(b) गैर-संचार उपयोग

संचार के क्षेत्र में उपयोग (Uses in Communication)

 

गैर-संचार क्षेत्र में उपयोग (Uses in Non-Communication)

 

 

List of Communication Setellites= ISRO द्वारा प्रेषित संचार उपग्रह

 


Satellite

Launch Date

Launch Mass

Launch Vehicle

Application

GSAT-30

Jan 17, 2020

3357 kg

Ariane-5 VA-251

Communication

 

GSAT-31

Feb 06, 2019

2536 kg

Ariane-5 VA-247

Communication

 

GSAT-7A

Dec 19, 2018

 

GSLV-F11 / GSAT-7A Mission

Communication

 

GSAT-11 Mission

Dec 05, 2018

5854 kg

Ariane-5 VA-246

Communication

 

GSAT-29

Nov 14, 2018

3423 kg

GSLV Mk III-D2 / GSAT-29 Mission

Communication

 

GSAT-6A

Mar 29, 2018

 

GSLV-F08/GSAT-6A Mission

Communication

 

GSAT-17

Jun 29, 2017

3477 kg

Ariane-5 VA-238

Communication

 

GSAT-19

Jun 05, 2017

3136 Kg

GSLV Mk III-D1/GSAT-19 Mission

Communication

 

GSAT-9

May 05, 2017

2230 kg

GSLV-F09 / GSAT-9

Communication

 

GSAT-18

Oct 06, 2016

3404 kg

Ariane-5 VA-231

Communication

 

GSAT-15

Nov 11, 2015

3164 kg

Ariane-5 VA-227

Communication, Navigation

 

GSAT-6

Aug 27, 2015

2117 kg

GSLV-D6

Communication

 

GSAT-16

Dec 07, 2014

3181.6 kg

Ariane-5 VA-221

Communication

 

GSAT-14

Jan 05, 2014

1982 kg

GSLV-D5/GSAT-14

Communication

 

GSAT-7

Aug 30, 2013

2650 kg

Ariane-5 VA-215

Communication

 

GSAT-10

Sep 29, 2012

3400 kg

Ariane-5 VA-209

Communication, Navigation

 

GSAT-12

Jul 15, 2011

1410 kg

PSLV-C17/GSAT-12

Communication

 

GSAT-8

May 21, 2011

3093 kg

Ariane-5 VA-202

Communication, Navigation

 

GSAT-5P

Dec 25, 2010

2310 kg

GSLV-F06 / GSAT-5P

Communication

 

GSAT-4

Apr 15, 2010

2220 Kg

GSLV-D3 / GSAT-4

Communication

 

INSAT-4CR

Sep 02, 2007

2,130 kg

GSLV-F04 / INSAT-4CR

Communication

 

INSAT-4B

Mar 12, 2007

3025 Kg

Ariane5

Communication

 

INSAT-4C

Jul 10, 2006

 

GSLV-F02 / INSAT-4C

Communication

 

INSAT-4A

Dec 22, 2005

3081 Kg

Ariane5-V169

Communication

 

HAMSAT

May 05, 2005

 

PSLV-C6/CARTOSAT-1/HAMSAT

Communication

 

EDUSAT

Sep 20, 2004

1950.5 kg

GSLV-F01 / EDUSAT(GSAT-3)

Communication

 

INSAT-3E

Sep 28, 2003

2,775 Kg

Ariane5-V162

Communication

 

GSAT-2

May 08, 2003

1800 Kg

GSLV-D2 / GSAT-2

Communication

 

INSAT-3A

Apr 10, 2003

2,950 Kg

Ariane5-V160

Climate & Environment, Communication

 

KALPANA-1

Sep 12, 2002

1060 Kg

PSLV-C4 /KALPANA-1

Climate & Environment, Communication

 

INSAT-3C

Jan 24, 2002

2,650 Kg

Ariane5-V147

Climate & Environment, Communication

 

GSAT-1

Apr 18, 2001

1530 Kg

GSLV-D1 / GSAT-1

Communication

 

INSAT-3B

Mar 22, 2000

2,070 Kg

Ariane-5G

Communication

 

INSAT-2E

Apr 03, 1999

2,550 Kg

Ariane-42P H10-3

Communication

 

INSAT-2D

Jun 04, 1997

2079 Kg

Ariane-44L H10-3

Communication

 

INSAT-2C

Dec 07, 1995

2106 Kg

Ariane-44L H10-3

Communication

 

INSAT-2B

Jul 23, 1993

1906 kg

Ariane-44L H10+

Communication

 

INSAT-2A

Jul 10, 1992

1906 kg

Ariane-44L H10

Communication

 

INSAT-1D

Jun 12, 1990

 

Delta 4925

Communication

 

INSAT-1C

Jul 22, 1988

 

Ariane-3

Communication

 

INSAT-1B

Aug 30, 1983

 

Shuttle [PAM-D]

Communication

 

INSAT-1A

Apr 10, 1982

 

Delta

Communication

 

 

 

भारतीय दूर-संवेदी उपग्रह प्रणाली (Indian Remote Sensing Satellite System)

 

भारतीय सुदूर संवेदन प्रणाली के उपयोग (Use of IRSS)

 

रिमोट सेंसिग सेटेलाइट्स 2 प्रकार के हैसक्रिय और निष्क्रिय रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट

सक्रिय रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट ये उपग्रह स्वयं की विकिरणों को पृथ्वी की ओर भेजते हैं और यहाँ से परावर्तित विकिरणों का अध्ययन करके रिमोट सेंसिंग करते हैं। उदाहरण RISAT श्रेणी के उपग्रह, HYSISD उपग्रह आदि।

निष्क्रिय रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट- ये उपग्रह पृथ्वी से उत्सर्जित और परावर्तित सौर विकिरणों का अध्ययन करके रिमोट सेंसिंग डेटा तैयार करते हैं। उदाहरण- कार्टोसेट, रिर्सोसेसेट, ओशनसेट आदि।

 

विविधीकृत क्षेत्रों में सुदूर संवेदन प्रणाली के उपयोग

(1) कृषि एवं मृदा

• फसल उत्पादन का पूर्वानुमान

• क्षारीय या लवणीय मृदा का पता लगाना

• बागवानी विकास

• कृषि मौसम सेवाएं एवं आपदा निगरानी (कीट, बाढ़, सूखा)

(2) जैव संसाधन पर्यावरण

• वनाच्छादित क्षेत्र एवं वन के प्रकारों का पता लगाना।

• आर्द्र भूमि सूची एवं संरक्षण योजना बनाना।

• जैव विविधिता की विशेषताएँ ज्ञात करना।

• मरुस्थलीकरण के स्तर का पता लगाना।

• तटीय मैंग्रोव व प्रवालों से संबंधित जानकारी प्राप्त करना

• हिमपात एवं हिमानियों का अध्ययन करना

(3) मानचित्र में

• बड़े पैमाने पर मानचित्रण।

• उपग्रह आधारित स्थलाकृति नक्शा।

डिजिटल एलीवेशन मॉडल।

(4) भूगर्भशास्त्र एवं खनिज संसाधन

• भू-स्खलन के खतरे वाले क्षेत्रों का निर्धारण।

• खनन क्षेत्र, खनिज/तेल अन्वेषण में।

• भूकंपीय व विवर्तनिकी अध्ययन।

• इंजीनियरिंग व भू-पर्यावरण का अध्ययन।

 

(5) महासागर और मौसम विज्ञान

• समुद्री प्राथमिक उत्पादकता के आँकड़ों के संबंध में समुद्री स्तर का पूर्वानुमान, तूफान की सूचना।

• क्षेत्रीय मौसम की भविष्यवाणी, उष्णकटिबंधीय चक्रवात का वृहद् अध्ययन।

• विस्तारित रूप से मानसून की भविष्यवाणी।

 

(6) ग्रामीण विकास

• बंजर भूमि का मानचित्रण/अद्यतन करना।

• वाटर शेड विकास और निगरानी।

• भू-अभिलेख आधुनिकीकरण योजना।

(7) नगरीय विकास

• प्रमुख शहरों के फैलाव का मानचित्रण, मास्टर प्लान तैयार करना,चयनित शहरों व कस्बों की व्यापक योजना, शहरों के निर्माण के लिए आधारभूत नक्शा बनाने में।

• राष्ट्रीय शहरी सूचना प्रणाली के विकास में।

(8) जल संसाधन प्रबन्धन-

• सिंचाई की आधारभूत संरचना के मूल्यांकन में।

• जल संसाधन सूचना प्रणाली।

• जलाशय क्षमता का मूल्यांकन।

• जलविद्युत के लिए स्थान का चयन।

(9) प्राकृतिक संसाधनों की गणना

• भूमि का उपयोग, भूमि आकृति विज्ञान, भूमि क्षरण, भू उपयोग में परिवर्तन की जानकारी।

• प्राकृतिक संसाधनों के भंडारों का समय-समय पर अनुमान।

(10) आपदा प्रबंधन सहायता

• विभिन्न प्राकृतिक आपदाएँ जैसे बाढ़, चक्रवात, सूखा, भू-स्खलन, वनाग्नि से निबटने में प्रक्रियात्मक भूमिका।

• पूर्व चेतावनी प्रणाली तथा डिसीजन सपोर्ट टेल पर अनुसंधान व विकास।

(11) जलवायु परिवर्तन अध्ययन

• मीथेन उत्सर्जन का अध्ययन।

• जलवायु के चरों की विशेषताओं का अध्ययन।

 

अतः भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह प्रणाली क्षेत्रीय स्तर पर स्थित विभिन्न संस्थानों के साथ मिलकर पृथ्वी के अवलोकन में प्रमुख भूमिका निभा रही है। यह मानव जीवन को सुविधा सम्पन्न बनाने तथा समाज को सुदृढ़ करने के साथ देश में संसाधनों के विकास के साथ अन्य क्षेत्रों में इस प्रणाली की अग्रणी भूमिका है।

 

महत्वपूर्ण दूर-संवेदी उपग्रह (Important Remote Sensing Satellites)

 

IRS-P4 (ओशनसैट 1)

PSLV-C2 द्वारा प्रक्षेपित यह विश्व का पहला उपग्रह है, जिसे केवल समुद्र के चित्रण एवं सर्वेक्षण के लिए विकसित किया गया। इसी कारण इसका नाम ओशनसैट 1 रखा गया। ओशनसैट 1 उपग्रह का मुख्य उद्देश्य सागरों की सतह का तापमान, सागरों के ऊपर वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा, सागरों की गहराई, सागरों में तैरते फाइटोप्लैंकटन की मात्रा आदि का पूरा-पूरा वास्तविक आकलन करना है। ओशनसैट 1 पर एक 'मल्टी फ्रिक्वेंसी स्कैनिंग माइक्रोवेव रेडियोमीटर' और 'ओशन कलर मॉनिटर' लगाया गया है। इस रेडियोमीटर से छोड़ी गई माइक्रोवेव किरणें बादलों को भेदने तथा सभी मौसम में कार्य करने में सक्षम हैं। यह रेडियोमीटर समुद्र की गहराई की भी पड़ताल करने में समर्थ है।

PSLV-C2 प्रक्षेपण यान द्वारा ओशनसेट 4 के साथ ही कोरिया के 'किटसैट 3' एवं जर्मनी के 'डी.एल.आर. ट्यूबसेट' को भी पृथ्वी की ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया गया। इस क्रम में भारतीय प्रक्षेपण यान द्वारा देश से किसी विदेशी उपग्रह को पहली बार प्रक्षेपित किया गया।

IRS-P6 ( कार्टोर्ससेट1)

17 अक्टूबर, 2005 को मानचित्र संबंधी उद्देश्यों के लिए निर्मित और अत्याधुनिक सुविधाओं एवं उपकरणों से युक्त विश्वस्तरीय भारतीय दूर-संवेदी उपग्रह IRS-P5 (कार्टोसेट 1) को PSLV-C6 द्वारा श्रीहरिकोटा (आन्ध्र प्रदेश) में नवनिर्मित दूसरे लॉन्चिंग पैड से ध्रुवीय कक्षा में प्रक्षेपित किया गया। इसके साथ संचार उपग्रह 'हैमसेट' को भी छोड़ा गया। यह पहला अवसर था, जब इसरो ने एक अभियान के तहत दो स्वदेशी उपग्रहों को एक साथ अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया। कार्टोसेट 1 भारतीय दूर-संवेदी उपग्रह श्रृंखला का ग्यारहवाँ तथा मानचित्र संबंधी कार्यों के लिए निर्मित स्वदेशी उपग्रहों की श्रृंखला का पहला उपग्रह था।

ओशनसैट 2

23 दिसम्बर, 2003 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से PSLV-C14 द्वारा ओशनसैट 2 को प्रक्षेपित किया गया। यह देश का सोलहवाँ दूर-संवेदी उपग्रह है, जो समुद्र की स्थिति की भविष्यवाणी करने और तटीय क्षेत्रों के अध्ययन में सहायक है। यह उपग्रह ज्वार-भाटे की भविष्यवाणी व जलवायु अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसका कार्यकाल 5 वर्ष का था।

कार्टोसैट 2B

कार्टोसैट 2 के पूरक रूप में इस उपग्रह को 12 जुलाई, 2010 को PSLV-C15 द्वारा सफलतापूर्वक पृथ्वी की ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया गया। इस उपग्रह में ऑनबोर्ड एवं पैनक्रोमेटिक कैमरा लगा हुआ है, जो 0.8 मीटर रिजोल्यूशन वाले चित्र देने में सक्षम है, इनका प्रयोग मानचित्रण व नागरिक उपयोगों के लिए किया जायेगा।

मेघा-ट्रॉपिक्स

12 अक्टूबर, 2011 को PSLV-C18 द्वारा इसे कक्षा में स्थापित किया गया। यह भारत एवं फ्रांस का संयुक्त उपग्रह है जिसका निर्माण जलवायुवीय घटनाओं को समझने के लिए किया गया है। इसकी विस्तृत चर्चा आगे की गयी है।

रीसैट 1

सभी मौसमों में उपयोगी भारत के प्रथम स्वदेशी रडार इमेजिंग उपग्रह रीसैट 1 का 26 अप्रैल, 2012 को PSLV-C19 के जरिये सफल प्रक्षेपण किया गया। इस उपग्रह का उपयोग कृषि और प्राकृतिक आपदा प्रबंधन में किया जायेगा।

सरल (Satellite with ARGOS & ALTIKA) यह भारत-फ्रांस का संयुक्त उपग्रह मिशन है।

सरल (SARAL) शोध कार्य एवं व्यावहारिक अनुप्रयोगों के लिए लक्षित एक विशिष्ट उपग्रह है। 25 फरवरी, 2013 को PSLV-C20 द्वारा इस उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया गया था। यह उपग्रह सामुद्रिक अध्ययनों में मदद करेगा। इसके जरिए समुद्री जलधाराओं और समुद्री सतह की ऊँचाइयों का अध्ययन किया जा सकेगा। एक ओर जहाँ आर्गोस  से आँकड़े एकत्र किये जाएंगे, वहीं अल्टीकामीटर से समुद्री सतह की ऊँचाई मापी जा सकेगी। आर्गोस के जरिए वैज्ञानिकों को पर्यावरण के प्रति करने में सहजता होगी तथा पर्यावरणीय सुरक्षा विनियमों से संबद्ध संगठनों को भी मदद मिलेगी। सरल के द्वारा जलवायु के विकास का अध्ययन किया जाएगा। महाद्वीपीय हिम अध्ययनों, तटीय अपरदन, जैव-विविधिता की सुरक्षा, समुद्री जीवों के अध्ययन एवं अन्य व्यावहारिक अनुप्रयोगों में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि सरल का जीवन काल 5 वर्षों का होगा।

हाल ही में लॉच किये गये दूर संवेदी उपग्रह – वर्ष 2019 में इसरो ने RISAT-2B, Cartosat-3 & RISAT-2BR1 लाँच किये। वर्ष 2018 में इसरों ने कार्टोसेट शृंखला के उपग्रह और HYSIS उपग्रह लाँच किये। ये सभी PSLV से लॉन्च किये गये थे।

RISAT-2BR1-

यह रडार इमेजिंग अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट है।

इसे 11 दिसम्बर 2019 को श्री हरिकोटा स्थित सतीश धवन अन्तरिक्ष केन्द्र से लाँच किया गया।

इसे निम्न-भू-कक्षा(LEO)में स्थापित किया गया है। इसमें x-बैंड रडार लगा है।

यह उपग्रह कृषि, वानिकी और आपदा प्रबन्धन में सहायता करेगा।

कार्टोसेट-3

• यह तीसरी पीढ़ी का आधुनिकतम ‘हाई रिजोल्यूशन इमेजिंग क्षमता’ वाला उपग्रह है।

• इसे 27 नवम्बर, 2019 को श्रीहरिकोटा से लाँच किया गया।

• इसे ‘सूर्य तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा’(SSPO) में लाँच किया गया है।

• यह उपग्रह वृहद् स्तरीय नगरीय नियोजन, ग्रामीण संसाधन और अवसंरचना विकास, तटीय भूमि प्रयोग आदि में सहायता करेगा।

RISAT-2B

• इसे 22 मई 2019 को, श्रीहरिकोटा से लाँच किया गया था।

• यह ISRO द्वारा विकसित रडार इमेजिंग अर्थ- आब्जरवेशन सैटेलाइट है।

• इसे निम्न-भू-कक्षा (LEO) में स्थापित किया गया है।

• इसका उपयोग पृथ्वी का सर्वेक्षण और आपदा प्रबन्धन आदि में किया जायेगा।

HYSIS-(Hyperspectral Imaging Satellite)

• इसे 29 नवम्बर, 2018 को PSLV-(43 रॉकेट द्वारा श्रीहरिकोटा से लाँच किया गया था)।

• इसका प्रमुख उद्देश्य विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम की विभिन्न तरंगों जैसे- दृश्य प्रकाश, अवरक्त (near infrared) तरंगों और शॉर्टवेव अवरक्त तरंगों के द्वारा पृथ्वी की सतह का अध्ययन करना है।

• इसे ‘सूर्य तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा (SSPO)’ में स्थापति किया गया है।

• इसका उपयोग कृषि, वानिकी, तटीय क्षेत्रों के भूगोल और अन्तर्देशीय जलमार्गों के अध्ययन हेतु किया जायेगा।

कार्टोसेट-2 श्रृंखला उपग्रह –

• इस उपग्रह को 12 जनवरी, 2018 को श्रीहरिकोटा से PSLV-C40 रॉकेट द्वारा श्रीहरिकोटा से लाँच किया गया था।

• इस उपग्रह द्वारा प्रेषित आँकड़ो का प्रयोग कार्टोग्राफिक अनुप्रयोग, ग्रामीण और शहरी अनुप्रयोग, तटीय भूमि प्रयोग और नियमन, सड़क नेटवर्क की निगरानी, जल वितरण, भूमि अनुप्रयोग के नक्शों का निर्माण, लैण्ड इन्फोर्मेशन सिस्टम (LIS) और ज्योग्राफिकल इन्फोर्मेशन सिस्टम (GIS) आदि हेतु किया जायेगा।

• इस उपग्रह का निर्माण ISRO ने किया है और इसे ‘सूर्य तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा (SSPO)’ में स्थापित किया गया है।

 

ISRO द्वारा लॉन्च किये गए अर्थ ऑब्जरवेशन या रिमोर्ट सेंसिंग उपग्रह


Satellite

Launch Date

Launch Mass

Launch Vehicle

Orbit Type

Application

RISAT-2BR1

Dec 11, 2019

628 Kg

PSLV-C48/RISAT-2BR1

LEO

Disaster Management System, Earth Observation

 

Cartosat-3

Nov 27, 2019

 

PSLV-C47 / Cartosat-3 Mission

SSPO

Earth Observation

 

RISAT-2B

May 22, 2019

615 Kg

PSLV-C46 Mission

LEO

Disaster Management System, Earth Observation

 

HysIS

Nov 29, 2018

 

PSLV-C43 / HysIS Mission

SSPO

Earth Observation

 

Cartosat-2 Series Satellite

Jan 12, 2018

710 Kg

PSLV-C40/Cartosat-2 Series Satellite Mission

SSPO

Earth Observation

 

Cartosat-2 Series Satellite

Jun 23, 2017

712 kg

PSLV-C38 / Cartosat-2 Series Satellite

SSPO

Earth Observation

 

Cartosat -2 Series Satellite

Feb 15, 2017

714 kg

PSLV-C37 / Cartosat -2 Series Satellite

SSPO

Earth Observation

 

RESOURCESAT-2A

Dec 07, 2016

1235 kg

PSLV-C36 / RESOURCESAT-2A

SSPO

Earth Observation

 

SCATSAT-1

Sep 26, 2016

371 kg

PSLV-C35 / SCATSAT-1

SSPO

Climate & Environment

 

INSAT-3DR

Sep 08, 2016

2211 kg

GSLV-F05 / INSAT-3DR

GSO

Climate & Environment, Disaster Management System

 

CARTOSAT-2 Series Satellite

Jun 22, 2016

737.5 kg

PSLV-C34 / CARTOSAT-2 Series Satellite

SSPO

Earth Observation

 

INSAT-3D

Jul 26, 2013

2060 Kg

Ariane-5 VA-214

GSO

Climate & Environment, Disaster Management System

 

SARAL

Feb 25, 2013

407 kg

PSLV-C20/SARAL

SSPO

Climate & Environment, Earth Observation

 

RISAT-1

Apr 26, 2012

1858 kg

PSLV-C19/RISAT-1

SSPO

Earth Observation

 

Megha-Tropiques

Oct 12, 2011

1000 kg

PSLV-C18/Megha-Tropiques

SSPO

Climate & Environment, Earth Observation

 

RESOURCESAT-2

Apr 20, 2011

1206 kg

PSLV-C16/RESOURCESAT-2

SSPO

Earth Observation

 

CARTOSAT-2B

Jul 12, 2010

694 kg

PSLV-C15/CARTOSAT-2B

SSPO

Earth Observation

 

Oceansat-2

Sep 23, 2009

960 kg

PSLV-C14 / OCEANSAT-2

SSPO

Climate & Environment, Earth Observation

 

RISAT-2

Apr 20, 2009

300 kg

PSLV-C12 / RISAT-2

SSPO

Earth Observation

 

IMS-1

Apr 28, 2008

83 kg

PSLV-C9 / CARTOSAT – 2A

SSPO

Earth Observation

 

CARTOSAT – 2A

Apr 28, 2008

690 Kg

PSLV-C9 / CARTOSAT – 2A

SSPO

Earth Observation

 

CARTOSAT-2

Jan 10, 2007

650 kg

PSLV-C7 / CARTOSAT-2 / SRE-1

SSPO

Earth Observation

 

CARTOSAT-1

May 05, 2005

1560 kg

PSLV-C6/CARTOSAT-1/HAMSAT

SSPO

Earth Observation

 

IRS-P6 / RESOURCESAT-1

Oct 17, 2003

1360 kg

PSLV-C5 /RESOURCESAT-1

SSPO

Earth Observation

 

The Technology Experiment Satellite (TES)

Oct 22, 2001

 

PSLV-C3 / TES

SSPO

Earth Observation

 

Oceansat(IRS-P4)

May 26, 1999

1050 kg

PSLV-C2/IRS-P4

SSPO

Earth Observation

 

IRS-1D

Sep 29, 1997

1250kg

PSLV-C1 / IRS-1D

SSPO

Earth Observation

 

IRS-P3

Mar 21, 1996

920 kg

PSLV-D3 / IRS-P3

SSPO

Earth Observation

 

IRS-1C

Dec 28, 1995

1250 kg

Molniya

SSPO

Earth Observation

 

IRS-P2

Oct 15, 1994

804 kg

PSLV-D2

SSPO

Earth Observation

 

IRS-1E

Sep 20, 1993

846 kg

PSLV-D1

LEO

Earth Observation

 

IRS-1B

Aug 29, 1991

975 kg

Vostok

SSPO

Earth Observation

 

SROSS-2

Jul 13, 1988

150 kg

ASLV-D2

 

Earth Observation, Experimental

 

IRS-1A

Mar 17, 1988

975 kg

Vostok

SSPO

Earth Observation

 

Rohini Satellite RS-D2

Apr 17, 1983

41.5 kg

SLV-3

LEO

Earth Observation

 

Bhaskara-II

Nov 20, 1981

444 kg

C-1 Intercosmos

LEO

Earth Observation, Experimental

 

Rohini Satellite RS-D1

May 31, 1981

38 kg

SLV-3D1

LEO

Earth Observation

 

Bhaskara-I

Jun 07, 1979

442 kg

C-1Intercosmos

LEO

Earth Observation, Experimental

 

 

 प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी (launch Vehicle Technology)

 

 

 

 

 

 भारत के उपग्रह प्रक्षेपण यान विकास कार्यक्रम को चार चरणों में बाँटा जा सकता है

 

1.  SLV

2. ASLV

3. PSLV

4. GSLV

 

SLV विकास कार्यक्रम

 

PSLV विकास कार्यक्रम

 

 

PSLV प्रक्षेपण यान की विशेषताएँ -

ऊँचाई 44 मीटर

व्यास 2.8 मीटर

चरणों की संख्या 4

लिफ्ट ऑफ मास 320 टन (XL)

प्रथम उड़ान 20 सितम्बर, 1993

 

List of PSLV Launches

 

SN

Title

Launch Date

Launcher Type

Orbit

Payload(satellite)

 

50

PSLV-C48/RISAT-2BR1

Dec 11, 2019

PSLV-QL

 

RISAT-2BR1

 

49

PSLV-C47 / Cartosat-3 Mission

Nov 27, 2019

PSLV-XL

SSPO

Cartosat-3

 

48

PSLV-C46 Mission

May 22, 2019

PSLV-CA

 

RISAT-2B

 

47

PSLV-C45/EMISAT MISSION

Apr 01, 2019

PSLV-QL

 

EMISAT

 

46

PSLV-C44

Jan 24, 2019

PSLV-DL

SSPO

Microsat-R

 

45

PSLV-C43 / HysIS Mission

Nov 29, 2018

PSLV

SSPO

HysIS

 

44

PSLV-C42 Mission

Sep 16, 2018

PSLV

SSPO

   

43

PSLV-C41/IRNSS-1I

Apr 12, 2018

PSLV-XL

GSO

IRNSS-1I

 

42

PSLV-C40/Cartosat-2 Series Satellite Mission

Jan 12, 2018

PSLV-XL

SSPO

Cartosat-2 Series Satellite

 

41

PSLV-C39/IRNSS-1H Mission

Aug 31, 2017

PSLV-XL

 

IRNSS-1H

 

40

PSLV-C38 / Cartosat-2 Series Satellite

Jun 23, 2017

PSLV-XL

SSPO

Cartosat-2 Series Satellite

 

39

PSLV-C37 / Cartosat -2 Series Satellite

Feb 15, 2017

PSLV-XL

SSPO

Cartosat -2 Series Satellite

 

38

PSLV-C36 / RESOURCESAT-2A

Dec 07, 2016

PSLV-XL

SSPO

RESOURCESAT-2A

 

37

PSLV-C35 / SCATSAT-1

Sep 26, 2016

PSLV

SSPO

SCATSAT-1

 

36

PSLV-C34 / CARTOSAT-2 Series Satellite

Jun 22, 2016

PSLV-XL

SSPO

CARTOSAT-2 Series Satellite

 

35

PSLV-C33/IRNSS-1G

Apr 28, 2016

PSLV-XL

GTO

IRNSS-1G

 

34

PSLV-C32/IRNSS-1F

Mar 10, 2016

PSLV-XL

GTO

IRNSS-1F

 

33

PSLV-C31/IRNSS-1E

Jan 20, 2016

PSLV-XL

GTO

IRNSS-1E

 

32

PSLV-C29 / TeLEOS-1 Mission

Dec 16, 2015

PSLV-CA

LEO

   

31

PSLV-C30/AstroSat MISSION

Sep 28, 2015

PSLV-XL

LEO

Astrosat

 

30

PSLV-C28 / DMC3 Mission

Jul 10, 2015

PSLV-XL

LEO

   

29

PSLV-C27/IRNSS-1D

Mar 28, 2015

PSLV-XL

GTO

IRNSS-1D

 

28

PSLV-C26/IRNSS-1C

Oct 16, 2014

PSLV-XL

GTO

IRNSS-1C

 

27

PSLV-C23

Jun 30, 2014

PSLV-CA

SSPO

   

26

PSLV-C24/IRNSS-1B

Apr 04, 2014

PSLV-XL

GTO

IRNSS-1B

 

25

PSLV-C25

Nov 05, 2013

PSLV-XL

HEO

Mars Orbiter Mission Spacecraft

 

24

PSLV-C22/IRNSS-1A

Jul 01, 2013

PSLV-XL

GTO

IRNSS-1A

 

23

PSLV-C20/SARAL

Feb 25, 2013

PSLV-CA

SSPO

SARAL

 

22

PSLV-C21

Sep 09, 2012

PSLV-CA

SSPO

   

21

PSLV-C19/RISAT-1

Apr 26, 2012

PSLV-XL

SSPO

RISAT-1

 

20

PSLV-C18/Megha-Tropiques

Oct 12, 2011

PSLV-CA

SSPO

Megha-Tropiques

 

19

PSLV-C17/GSAT-12

Jul 15, 2011

PSLV-XL

GTO

GSAT-12

 

18

PSLV-C16/RESOURCESAT-2

Apr 20, 2011

PSLV-G

SSPO

RESOURCESAT-2
YOUTHSAT

 

17

PSLV-C15/CARTOSAT-2B

Jul 12, 2010

PSLV-CA

SSPO

CARTOSAT-2B

 

16

PSLV-C14 / OCEANSAT-2

Sep 23, 2009

PSLV-CA

SSPO

Oceansat-2

 

15

PSLV-C12 / RISAT-2

Apr 20, 2009

PSLV-CA

SSPO

RISAT-2

 

14

PSLV-C11

Oct 22, 2008

PSLV-XL

Lunar

Chandrayaan-1

 

13

PSLV-C9 / CARTOSAT – 2A

Apr 28, 2008

PSLV-CA

SSPO

CARTOSAT – 2A
IMS-1

 

12

PSLV-C10

Jan 21, 2008

PSLV-CA

HEO

   

11

PSLV-C8

Apr 23, 2007

PSLV-CA

LEO

   

10

PSLV-C7 / CARTOSAT-2 / SRE-1

Jan 10, 2007

PSLV-G

SSPO

CARTOSAT-2
SRE-1

 

9

PSLV-C6/CARTOSAT-1/HAMSAT

May 05, 2005

PSLV-G

SSPO

CARTOSAT-1
HAMSAT

 

8

PSLV-C5 /RESOURCESAT-1

Oct 17, 2003

PSLV-G

SSPO

IRS-P6 / RESOURCESAT-1

 

7

PSLV-C4 /KALPANA-1

Sep 12, 2002

PSLV-G

GTO

KALPANA-1

 

6

PSLV-C3 / TES

Oct 22, 2001

PSLV-G

SSPO

The Technology Experiment Satellite (TES)

 

5

PSLV-C2/IRS-P4

May 26, 1999

PSLV-G

SSPO

Oceansat(IRS-P4)

 

4

PSLV-C1 / IRS-1D

Sep 29, 1997

PSLV-G

SSPO

IRS-1D

 

3

PSLV-D3 / IRS-P3

Mar 21, 1996

PSLV-G

SSPO

IRS-P3

 

2

PSLV-D2

Oct 15, 1994

PSLV-G

SSPO

IRS-P2

 

1

PSLV-D1

Sep 20, 1993

PSLV-G

SSPO

   

 

PSLV के विभिन्न संस्करण-

1. PSLV-G (जेनेरिक)- यह 1550 किलो के पेलोड को 600 किलो मीटर की ऊँचाई तक निम्न भू-कक्षा (LEO) में स्थापित कर सकता है। इसमें स्ट्रेप ऑन मॉटर्स लगी रहती है।

2. PSLV-CA(Core Alone)-  इसमें स्ट्रेप ऑन मॉटर्स का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसकी क्षमता कम होती है।

3. PSLV-XL (Extra Large)- इसमें स्ट्रेप-ऑन मोटर्स का प्रयोग होता है।

 

यह 1750 किलो वजनी उपग्रह को LEO में तथा हल्के उपग्रहों के GTO में प्रक्षेपित कर सकता है। इसी से चन्द्रयान-1 और मंगलयान मिशन भेजे गये थे।

 

 

GSLV विकास कार्यक्रम

वाहन की विशेषताएं

ऊंचाई

: 49.13 मी

चरणों की संख्या

: 3

उत्थापन द्रव्यमान

: 414.75 टन

पहली उड़ान

: अप्रैल 18, 2001

 

· भारत के प्रक्षेपण यान कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण चरण GSLV (Geosynchronouns satellite launch vehicle) कहलाता है।

· वर्तमान में GSLV श्रृंखला का GSLV-MK II प्रयोग में लिया जा सकता है।

· यह चौथी पीढ़ी का लाँच व्हीकल है, जिसमें तीन चरण है।

· इसमें स्वदेश निर्मित क्रायोजेनिक ईंजन का प्रयोग किया गया है।

· यह एक ऐसा रॉकेट है, जो 2500 किग्रा वजन वाले उपग्रह को भू-स्थैतिक कक्षा में स्थापित करता है। यह कक्षा पृथ्वी से 36,000 किमी की ऊँचाई पर अवस्थित है। इसके अलावा GSLV 5 टन वजन वाले उपग्रह या विभिन्न उपग्रहों को निम्न भू-कक्षा में स्थापित कर सकता है।

· यह रॉकेट तीन चरणों का होता है, जो इस प्रकार हैं:

(क) पहले चरण में ठोस प्रणोदक का प्रयोग किया जाता है। यह चरण PSLV के प्रथम चरण के समान है। इसमें प्रयुक्त होने वाला ईंधन HTBP है।

(ख) इसका दूसरा चरण PSLV के दूसरे चरण पर आधारित है। जिसमें UDMH तथा N204 जैसे तरल प्रणोदक का प्रयोग किया जाता है। इस चरण में विकास ईंजन का रहा है।

(ग) इसका तीसरा चरण सबसे महत्वपूर्ण और जटिल है। इसमें प्रयुक्त होने वाली तकनीक को क्रायोजेनिक तकनीक कहते हैं। क्रायोजेनिक इंजन का अर्थ है अति निम्न ताप पर काम करने वाला इंजन।

 

क्रायोजेनिक इंजन का विकास

 

 

GSLV के विभिन्न संस्करण-

 

GSLV-MK-II

· GSLV के इस संस्करण में, प्रथम स्वदेशी क्रायोजेनिक ईंधन CE-7.5 का उपयोग किया गया है।

यह रॉकेट वर्तमान में ऑपरेशनल है।

· यह रॉकेट 2500 किलो वजनी उपग्रह को GTO कक्षामें तथा 5000 किलो वजनी उपग्रहों को LEO (निम्न भू-कक्षा) में स्थापित करने में सक्षम है।

· इस रॉकेट की द्वितीय अवस्था में विकास ईंजन का प्रयोग किया गया है।

 

                                                    List of GSLV Launches

 

SN

Title

Launch Date

Launcher Type

Orbit

Payload(Satellite)

 

13

GSLV-F11 / GSAT-7A Mission

Dec 19, 2018

GSLV

 

GSAT-7A

 

12

GSLV-F08/GSAT-6A Mission

Mar 29, 2018

GSLV

GSO

GSAT-6A

 

11

GSLV-F09 / GSAT-9

May 05, 2017

GSLV

GSO

GSAT-9

 

10

GSLV-F05 / INSAT-3DR

Sep 08, 2016

GSLV-MK-II

GTO

INSAT-3DR

 

9

GSLV-D6

Aug 27, 2015

GSLV-MK-II

GTO

GSAT-6

 

8

GSLV-D5/GSAT-14

Jan 05, 2014

GSLV-MK-II

GTO

GSAT-14

 

7

GSLV-F06 / GSAT-5P

Dec 25, 2010

GSLV-MK-II

GTO

GSAT-5P

 

6

GSLV-D3 / GSAT-4

Apr 15, 2010

GSLV-MK-II

 

GSAT-4

 

5

GSLV-F04 / INSAT-4CR

Sep 02, 2007

GSLV-MK-II

GTO

INSAT-4CR

 

4

GSLV-F02 / INSAT-4C

Jul 10, 2006

GSLV-MK-II

GTO

INSAT-4C

 

3

GSLV-F01 / EDUSAT(GSAT-3)

Sep 20, 2004

GSLV-MK-II

GTO

EDUSAT

 

2

GSLV-D2 / GSAT-2

May 08, 2003

GSLV-MK-II

GTO

GSAT-2

 

1

GSLV-D1 / GSAT-1

Apr 18, 2001

GSLV-MK-II

GTO

GSAT-1
 

 

 

 

GSLV-MK III-

 

                                GSLV Mk III Launches Till Date - By ISRO

 

SN

Title

Launch Date

Launcher Type

Payload

 

4

GSLV-Mk III - M1 / Chandrayaan-2 Mission

Jul 22, 2019

GSLV-MK-III

Chandrayaan2

 

3

GSLV Mk III-D2 / GSAT-29 Mission

Nov 14, 2018

GSLV-MK-III

GSAT-29

 

2

GSLV Mk III-D1/GSAT-19 Mission

Jun 05, 2017

GSLV-MK-III

GSAT-19

 

1

LVM-3/CARE Mission

Dec 18, 2014

GSLV-MK-III

Crew module Atmospheric Re-entry Experiment (CARE)

 

 

 

 

स्क्रेम जेट ईँजन

 

पुनरुपयोगी प्रक्षेपण यान (Reusable Launch Vehicle)

 

 

स्पेस कैप्सूल रिकवरी एक्सपेरिमेंट [(Space Capsule Recovery Experiment (SRE-1)]

 

ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS - Global Positioning System)

 

 

 

 

भारतीय क्षेत्रीय नौसंचालन उपग्रह प्रणाली (IRNSS)

अमरीकी जीपीएस प्रणाली पर निर्भरता कम करने के लिए इसरो द्वारा एक क्षेत्रीय नेवीगेशन उपग्रह प्रणाली तंत्र है। यह प्रणाली दक्षिण एशिया पर लक्षित होगी और इसे इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह देश के भीतर और इसकी सीमा से 1500 किमी तक की दूरी के क्षेत्र में प्रयोगकर्ताओं को सटीक जानकारी उपलब्ध करा सके। यह प्रणाली सभी मौसमों में सटीकता के साथ उत्तम स्थिति प्रदान करेगा।

इस प्रकार के कुछ प्रमुख उपयोग हैं-

स्थलीय, हवाई और समुद्री नेवीगेशन, आपदा प्रबंधन, वाहन ट्रैकिंग, मानचित्रण, पर्वतारोहियों और यात्रियों के लिए दिशा सूचनाएँ, चालकों के लिए ध्वनि एवं दृश्य संबंधी सूचनाएँ

• मोबाइल फोन के साथ एकीकरण

• सटीक समय (Precise Timing), सटीक लोकेशन की जानकारी आदि।

 

IRNSS/NavIC (Navigatino with Indian Constellation) –

 

QZSS-Quasi Zenith Satellite System-

 

गगन(GAGAN-GPS Aided GEO Augmented Navigation)

 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के प्रमुख पड़ाव

(Major Stages of Indian Space Research

चन्द्रयान-1 परियोजना (Chandrayan-1Project)

 

मेघा-ट्रॉपिक परियोजना (Megha-Tropiques Projects)

 

जुगनू (Jugnu)

 

आदित्य L-1-

 

इसरो का मंगल अभियान (ISRO'S Mars Mission)

भुवन (Bhuvan)-

चन्द्रयान-2

गगनयान –

PSLV C-37-

 

वर्ष 2020 में निम्न 3 मिशन मंगल ग्रह के लिए लाँच किये गये हैं-

1. UAE का हॉप आर्बिटर मिशन।

2. चीन का तियानवेन-1- आर्बिटर, लैंडर और रॉवर मिशन।

3. USA का परसीवरेंस मिशन-ऑर्बिटर, लैंडर और रॉवर युक्त।

 

अवतार (Aerobic Vehicle for Advanced Trans-Atmospheric Hypersonic Aerospace Trans Partation-AVATAR)

 

स्पेस विजन इंडिया 2025 इसके निम्नलिखित उद्देश्य हैं-

 

 

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन(International Space Station-ISS)

 

एण्ट्रिक्स (Antrix)

 

अंतरिक्ष पर्यटन (Space Tourism)

 

अंतरिक्ष प्रदूषण (Space Pollution)

      अंतरिक्ष प्रदूषण का अर्थ है मानवीय गतिविधियों द्वारा अंतरिक्ष में कचरे, छोटे-छोटे कणों तथा प्रदूषक पदार्थो का फैलना। पिछले 60 वर्षों में मानव ने अंतरिक्ष विज्ञान में कई उपलब्धियाँ तो हासिल की हैं किन्तु उन्हीं के साथ प्रदूषण जैसी कुछ समस्याएं भी पैदा हो गयी हैं।

इस प्रदूषण के निम्नलिखित कारण हैं :

 

केसलर सिन्ड्रोम –

समाधान