उत्सर्जन तंत्र (Excretory System)

(i)  अमोनोटेलिक

(ii)  यूरियोटेलिक

(iii) यूरिकोटेलिक

  1. अमोनोटेलिक

उदाहरण- अमीबा, पैरामिशियम, स्पंज, निडेरियन्स, अस्थिल मछलियाँ (Bony fishes), मेढ़क का टेडपोल लार्वा तथा पूंछ वाले उभयचर जैसे सेलामेण्डर, एस्केरिस, केंचुआ व मगरमच्छ

ii 
यूरियोटेलिक:-

उदाहरण- स्तनधारी (मनुष्य), उभयचर (मेढ़क), जलीय सरीसृप जैसे कछुआ, घड़ियाल, उपास्थिल मछलियाँ, शार्क, एस्केरिस व केंचुआ।

iii 
यूरिकोटेलिक:-

उदाहरण- पक्षी वर्ग के जन्तु, कीट (Insects), सरीसृप तथा स्थलीय घोंघा

उत्सर्जन से संबंधित महत्त्वपूर्ण तथ्य-

  1. वृक्क (Kidney)

  2. मूत्राशय (Urinary Bladder)

  3. मूत्र वाहिनियाँ (Ureters)

  4. मूत्रमार्ग (Vrethra)

    i वृक्क (Kidney)

150-180 gm (नर)

135-150 gm (मादा)

  1. प्रोस्टेट/यूरिथ्रल भाग

  2. झिल्लीनुमा

  3. शिश्नी भाग
    • 
    मानव में वृक्क मुख्य उत्सर्जन का कार्य करते हैं परन्तु कुछ अन्य अंग भी उत्सर्जन का कार्य करते हैं, जो निम्न है-

  1. त्वचा (skin) – यूरिया, लवण, पसीना

  2. फेफड़े (Lungs) – CO2

  3. यकृत (Liver) – पित्त रस तथा कोलेस्ट्रॉल

वृक्क के कार्य (Functions of Kidney)

  1. जल तथा लवण का संतुलन बनाना।

  2. परासरणीय क्रियाओं का नियमन

  3. यह इरिथ्रोपोएटीन का स्त्रावण करती है, जो अस्थिमज्जा में RBC के निर्माण को प्रेरित करती है।

  4. यह रेनिन का स्त्रावण करती है, जो एन्जियोटेन्सीन-2 को एन्जियोटेन्सिन-1 में परिवर्तित करती है, जिससे रुधिर का दाब बढ़ जाता है।

  5. रुधिर PH का नियमन।

वृक्क की संरचना (Structure of Kidney)

 

  1. वल्कुट (cortex)

  2. मध्यांश (medula)

  1. वल्कुट (cortex)

वृक्काणु (Nephrons):-

  1. मैलपीघीकाय

  2. हेलने का लूप

  3. दूरस्थ कुंडलित नलिका

  4. संग्रह नलिकाएँ

मैलपीघी काय (Malpiguian Body)

बोमन सम्पुट

केशिका गुच्छ (Glomerulus)

ग्रीवा

समीपस्थ कुंडलित नलिका (PCT)

हेनले का लूप (Henle’s Loop)

 

दूरस्थ कुण्डलित नलिका (DCT)

संग्रह नलिका (collecting tubules)

मूत्र निर्माण की प्रक्रिया (Formation of Urine)

  1. परानिस्यंदन (Ultrafileration)

  2. वरणात्मक पुनरावशोषण (Selective reabsorption)

  3. स्त्रावण (Secretion)

    परानिस्यंदन (Ultrafileration)

  1. अवरोही भुजा में- अवरोही भुजा जल के लिए पारगम्य होती है तथा विद्युत अपघट्य के लिए अपारगम्य होती है।

  1. आरोही भुजा में- इसकी भुजा Na+ तथा Cl- आयनों के लिए पारगम्य तथा जल के लिए अपारगम्य होती है। यहाँ निस्यंद समपरासरणी (Isotonic) हो जाता है।

  2. DCT में पुनरावशोषण-

  1. संग्रह नलिका में पुनरावशोषण

  1. स्त्रावण

उत्सर्जन संबंधी रोग (Disorder Related to exceretion)

  1. पाइयूरिया (Pyurea)- मूत्र में मवाद कोशिकाओं का पाया जाना।

  2. हीमेटोयूरिया (Haematourea)- मूत्र के साथ RBC का निष्कासित होना।

  3. प्रोटीन्यूरिया- मूत्र में प्रोटीन की मात्रा सामान्य से अधिक होना।

  4. यूरेमिया (Uremia)- जब रक्त में यूरिया की मात्रा 10-30mg/100ml से अधिक जाती है।

  5. गॉउट (Gout)

  1. ग्लाइकोसूरिया (Glycosuria)

  1. डिसयूरिया (Disurea)

मूत्र त्याग के समय दर्द की अवस्था।

  1. पॉलीयूरिया (Polyurea)

यह नेफ्रॉन के द्वारा जल का पुन: अवशोषण न हो पाने से मूत्र का आयतन बढ़ जाता है, जिसे बहुमूत्रता (polyurea) कहते हैं।

  1. सिस्टिटिस (Cystitis)

इसमें जीवाणु के संक्रमण के, या रासायनिक क्षति के कारण मूत्राशय में सूजन (प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ जाने में भी)

 

  1. पीलिया (Jaundice)

  1. हीमोग्लोबिन यूरिया (Haemoglobinurea)

मूत्र में Hb की उपस्थिति

  1. एल्केप्टोन्यूरिया (Alcaptonurea)

  1. कीटोन्यूरिया (Ketonuria)

मूत्र में कीटोन काय जैसे ऐसीटो एसीटिक अम्ल आदि की मात्रा बढ़ जाना।

  1. ओलीगोयूरिया (Oligourea)

मूत्र की मात्रा सामान्य से कम

  1. डाइबिटीज इन्सीपिड्स (Diabetes Insipidus)

  1. एल्ब्यूमिन यूरिया (Albuminurea)

मूत्र में एल्ब्यूमिन प्रोटीन की मात्रा बढ़ना।

  1. ब्राइट रोग/नेफ्रिटिस (Brigut’s Disease)

Note-

नेफ्रिटिस का इलाज नहीं होने पर ऊतकों में तरल जमा होने पर टांगे फूल जाती है, इसे एडीमा या ड्रोप्सी कहते हैं।

  1. जलीय शोथ (Oedema)

ऊतकों में अत्यधिक मात्रा में तरल एकत्र होने पर।

  1.  असंयम (Incontinence)

मूत्र त्याग का नियंत्रण न करने की अवस्था।

कारण- बाह्य अवरोधिनी के तंत्रिका मार्ग का पूरी तरह से निर्माण न हो पाना।

• रुधिर अपोहन (Haemodialysis)

वृक्क प्रत्यारोपण

जब रोगी मनुष्य में वृक्क पूरी तरह कार्य करना बंद कर देते है, तो उन्हें भी उपचारित नहीं किया जा सकता है और इनके स्थान पर दूसरे स्वस्थ व्यक्ति के वृक्क लगाये जाते हैं, वृक्क प्रत्योरोपण कहलाता है।

मानव मूत्र

मादा 500ml

  1. H2O

  2. यूरिया

  3. यूरिक अम्ल

  4. क्रिएटिनिन

  5. हिप्यूरिक अम्ल

  6. Nacl

  7. NH3

Important Fact in Daily Science

GHP – (BCOP + CHP)

Filtration Fraction = GFR
                                         RPF

GFR – Glomerular Filtration Rate

RPF – Renal Plasma Flow

जीव व उसके उत्सर्जी अंग

जीव

उत्सर्जी अंग

सीलेन्ट्रेटा 

शरीर की सतह एवं मुख

प्रोटोजोआ

प्लाज्मा मेम्ब्रेन

एस्केहेल्मिन्थीज

रेनेट कोशिका

एनेलिडा

नेफ्रीडिया

ऑथ्रोपोडा (कीट)

मैलपीघी नलिकाएँ

केंचुआ

उत्सर्जिकाएँ/क्लोरोगोगेन कोशिकाएँ

फीताकृमि

फ्लेम कोशिकाएँ

अमीबा

शरीर की सतह एवं मुख

झींगा मछली

हरी ग्रंथियाँ

सिफेलोकॉर्डेटा

प्रोटोनेफ्रिडिया

यूरोकॉर्डेटा

Neurl Gland

प्लेटीहेल्मिन्थीज

ज्वाला कोशिकाएँ

मोलस्का

Organ of Bojanus and Keber’s Organ

 

उत्सर्जन की कार्यिकी

  1. विअमोनीकरण (Deamination)

अतिरिक्त अमीनोअम्ल का विअमोनीकरण यकृत कोशिकाओं में पाया जाता है।

यह दो प्रकार का होता है-

  1. Oxidative

 

  1. Hydrolytic – 1 oxidative deamination

  1. ऑर्निथीन चक्र

इसे हेन्स क्रेब तथा Kurt Henseleit ने वर्ष 1932 में खोजा था, इसे kreb Henseleit Cycle कहते है।