बजट

बजट

 

सरकारी बजट :-

व्यापारिक बजट :-

वित्त मंत्री होते हुए भी बजट प्रस्तुत नहीं किया-

प्रधानमंत्री के साथ-साथ वित्त मंत्री के रूप में बजट पेश किया
पंडित जवाहरलाल नेहरू (1958-59 का बजट
श्रीमती इंदिरा गाँधी (1970-71 का बजट
राजीव गाँधी (1987-88 का बजट)

 

वार्षिक वित्तीय विवरण :-

  1. संचित निधि :-
  1. आकस्मिकता निधि :-
  1. लोक लेखा निधि :-

बजट संबंधी खाते

1. राजस्व खाता :- राजस्व खाते में सरकार की राजस्व  प्राप्तियाँ और इस राजस्व से किए जाने वाले व्यय सम्मिलित होते हैं।

2. पूँजीगत खाता :- पूँजीगत खाता, केंद्र सरकार की परिसंपत्तियों तथा देयताओं का खाता है। इसमें पूँजीगत परिवर्तनों को भी ध्यान में रखा जाता है। इसमें सरकार की पूँजीगत प्राप्तियाँ एवं पूँजीगत व्यय सम्मिलित होते हैं।

3. सार्वजनिक ऋण खाता :- इसमें सरकार द्वारा ली गई ऋण की राशि को शामिल किया जाता है।

 

बजट प्रक्रिया के विभिन्न चरण :-

    

  1. बजट का प्रस्तुतिकरण :- बजट को ‘बजट भाषण’ के साथ प्रस्तुत किया जाता है। बजट भाषण दो भागों में होता है- भाग A में ‘देश का सामान्य आर्थिक सर्वेक्षण’ एवं भाग B में आगामी वित्तीय वर्ष हेतु ‘कराधान प्रस्ताव’ होते हैं। सदन में बजट के प्रस्तुतीकरण के दिन इस पर कोई चर्चा नहीं होती है।
  1. आम चर्चा / बहस :- साधारण बजट को प्रस्तुत करने की तिथि के कुछ दिन बाद तक बजट पर आम बहस चलती रहती है। दोनों सदन इस पर तीन से चार दिन बहस करते हैं।
  2. विभागीय समितियों द्वारा जाँच :- बजट पर आम बहस पूरी होने के बाद सदन तीन या चार हफ्तों के लिए स्थगित हो जाता है। इस अंतराल के दौरान संसद की स्थायी समितियाँ अनुदान की माँग आदि की विस्तार से पड़ताल करती हैं और एक रिपोर्ट तैयार करती हैं। इन रिर्पोटों को दोनों सदनों में विचारार्थ रखा जाता है।
  3. अनुदान की माँगों पर मतदान :- विभागीय स्थायी समितियों के आलोक में लोकसभा में अनुदान की माँगों के लिए मतदान होता है। मांगें मंत्रालयवार प्रस्तुत की जाती हैं। पूर्ण मतदान के उपरांत एक माँग, अनुदान बन जाती हैं।
  4. विनियोग विधेयक का पारित होना :- संविधान में व्यवस्था की गई है कि भारत की संचित निधि से विधि सम्मत विनियोग के सिवाय धन की निकासी नहीं होगी, तदानुसार भारत की निधि से विनियोग के लिए एक विनियोग विधेयक पुन: स्थापित किया जाता है ताकि धन को निम्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।
  5. वित्त विधेयक का पारित होना :- वित्त विधेयक भारत सरकार के उस वर्ष के लिए वित्तीय प्रस्तावों को प्रभावी करने के लिए पुन:स्थापित किया जाता है। इस पर धन विधेयक की सभी शर्तें लागू होती हैं। वित्त विधेयक में विनियोग विधेयक के विपरीत संशोधन (कर को बढ़ाने या घटाने के लिए) प्रस्तावित किए जा सकते हैं।

बजट के प्रकार

समयावधि के आधार पर बजट के प्रकार

  1. वार्षिक बजट :– प्रत्येक सरकार अपने संभावित आय-व्यय की संवैधानिक पूर्ति हेतु सामान्यतः आगामी वित्त वर्ष के लिए चालू वर्ष फरवरी में बजट प्रस्तुत करती है।
  2. पूरक बजट :– किसी वित्त वर्ष की समाप्ति पूर्व ही सरकार को किसी विशेष मद के व्यय हेतु और अधिक धन की आवश्यकता महसूस होती है तो सरकार संसद में अनुपूरक माँगों के लिए जो बजट पेश करती है उसे पूरक बजट की संज्ञा दी जाती है। इसे पास करने की प्रक्रिया भी सामान्य बजट जैसी ही है।
  3. अंतरिम बजट :- अंतरिम बजट को “वोट ऑन अकाउंट” कहा जाता है। कुछ लोग इसे लेखानुदान माँग और मिनी बजट भी कहते हैं। वोट ऑन अकाउंट के जरिए सीमित अवधि के लिए सरकार के जरूरी खर्च को मंजूरी मिलती है। जिस साल लोकसभा चुनाव होता है, उस साल सरकार अंतरिम बजट पेश करती है। चुनाव के बाद बनने वाली सरकार पूर्ण बजट पेश करती है।

सावर्जनिक संस्था के आधार पर बजट के प्रकार

  1. केन्द्र सरकार का बजट :- भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट
  2. राज्य सरकारों के बजट:- इसमें सभी राज्यों के अलग-अलग बजट आते हैं।
  3. पंचायती राज एवं स्थानीय निकायों के बजट :- इसके तहत प्रत्येक राज्य में जिलेवार पंचायत राज संस्थाओं एवं नगर निगमों तथा नगरपालिका का समावेश होता है।

आम बजट :-

बजटिंग का विकास :-

1. लाइन आइटम बजट :-

2. आउटकम बजट :-

 

3. निष्पादन बजट :-

4. शून्य आधारित बजट / जीरोबेस बजट :-

5. लैंगिक बजट/जेंडर बजट :-

6. ई-बजटिंग :-

 

बजट पर नियंत्रण (Budgetary Control)

1. आकलन समिति :–

आकलन समिति के कार्य:-

2. विभागीय स्टैंडिंग समिति :–

विभागीय स्टैंडिंग समिति के कार्य:-

3. लोक लेखा समिति:-

लोक लेखा समिति के कार्य:-

4. सार्वजनिक उद्यम समिति :–

सार्वजनिक उद्यम समिति के कार्य

5. रेलवे कन्वेशन कमेटी :-

लेखा-अंकेक्षण (Auditing of Account)

नियंत्रक व महालेखा परीक्षक(Controller and Auditor-General)

बजटीय घाटे के प्रमुख प्रकार

  1. बजटीय घाटा :- सरकार की कुल सार्वजनिक व्यय एवं कुल सार्वजनिक प्राप्तियों का अंतर बजट घाटा कहलाता है।
  2. बजट घाटा = कुल सार्वजनिक व्यय -  कुल सार्वजनिक प्राप्तियाँ
  3. राजकोषीय घाटा :- सार्वजनिक व्यय का वह भाग जो राजस्व प्राप्तियों तथा गैर ऋण पूँजी प्राप्तियों से पूरा न होने पर सार्वजनिक उधार देयता से पूरा किया जाए तो इसे राजकोषीय घाटा कहते हैं।
  4. राजस्व घाटा :- राजस्व प्राप्ति पर राजस्व व्यय का आधिक्य को राजस्व घाटा कहा जाता है।
  5. प्राथमिक घाटा :- चालू वर्ष के बजट व्यवहार के कारण होने वाले घाटे को प्राथमिक घाटा कहते हैं। इसे राजकोषीय घाटे में से ब्याज अदायगिया निकालकर ज्ञात किया जा सकता है।
  6. प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा – ब्याज अदायगिया

बजट शब्दावली

संघीय बजट 2020-21 की प्रमुख विशेषताएँ

नोट:- वित्तीय वर्ष 2017-18 से बजट प्रस्तुत करने की तिथि में बदलाव करके 1 फरवरी कर दिया गया, इससे पूर्व 28 फरवरी या 29 फरवरी को बजट प्रस्तुत किया जाता था।