संवातन:- गैसों को शरीर के अंदर लेना तथा शरीर से बाहर छोड़ना संवातन कहलाता है।
संवातन एक भौतिक प्रक्रम है, कि रासायनिक प्रक्रम है।

  1. बाह्य श्वसन
  2. परिवहन
  3. आन्तरिक श्वसन
  4. कोशिकीय श्वसन

बाह्य श्वसन:- वातावरण तथा फुफ्फुस अर्थात् फेंफड़ो के मध्य गैसों का आदान-प्रदान बाह्य श्वसन कहलाता है।
परिवहन:- शरीर की 97% ऑक्सीजन का परिवहन हीमोग्लोबिन के रूप में होता है तथा केवल 3% ऑक्सीजन का परिवहन प्लाज्मा के रूप में होता है।

 

मानव श्वसन तंत्र के निम्न भाग होते है।
नासा
ग्रसनी
श्वासनली
फेंफडे
डायफ्राम
वायु कूपिका
नासा (NOSE) - श्वसन की प्रक्रिया नासा से प्रारंभ होती है।

  1. नेजल
  2. मेक्सिला
  3. एथेमॉइड
    ग्रसनी (Pharynx):– ग्रसनी भोजन तथा वायु का उभयनिष्ठ मार्ग है।
    ग्रसनी पर एपिग्लोटिस नामक ढक्कन रूपी संरचना पाई जाती है जो कि भोजन को श्वासनली में जाने से रोकता है।
  1. 1 जोड़ी सत्य वाक् तन्तु
  2. 1 जोड़ी मिथ्या वाक् तन्तु

अन्त:श्वसन

बहिश्वसन

अन्त:श्वसन में अन्तरापर्शुक पेशियाँ एवं डायफ्राम में संकुचन होता है।

बहिश्वसन में अन्तरापर्शुक पेशियाँ एवं डायफ्राम में शिथिलन होता है

वक्ष गुहा बाहर की तरफ गति करती है।

वक्ष गुहा अंदर की तरफ गति करती है।

वक्ष गुहा का आयतन बढ़ता है।

वक्ष गुहा का आयतन घटता है।

वक्ष गुहा का दाब घटता है।

वक्ष गुहा का दाब बढ़ता है।

 सांद्रता घटती है।

सांद्रता बढ़ती है।

विसरण के कारण गैसे बाहर से शरीर के अंदर प्रवेश करती है।

विसरण के कारण गैसे अंदर से शरीर के बाहर उत्सर्जित होती है।

इस प्रक्रिया में डायफ्राम चपटा हो जाता है।

इस प्रक्रिया में डायफ्राम सीधी हो जाता है।

अन्त:श्वसन में 2 सैकण्ड का समय लगता है।

बहिश्वसन में 3 सैकण्ड का समय लगता

श्वसन दो प्रकार का होता है।

वायवीय श्वसन/ऑक्सीश्वसन

अवायवीय श्वसन/अनॉक्सीश्वसन/किण्वन

यह ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है।

यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है।

यह माइटोकॉन्ड्रिया के मेट्रीक्स भाग में होती है।

अवायवीय श्वसन कोशिका द्रव्य में होता है।

 

वायवीय श्वसन के दौरान ग्लूकोज से CO2, H2O तथा ATP का निर्माण होता है।

अवायवीय श्वसन में ग्लूकोज के टूटने पर एथेनॉल, लैक्टिक एसिड, जल, CO2 तथा ATP का निर्माण होता है।

वायवीय श्वसन के दौरान 36 या 38 ATP का निर्माण होता है।

अवायवीय श्वसन के दौरान 2 ATP के अणुओं का निर्माण होता है।

अवायवीय श्वसन के उदाहरण:-

  1. जब व्यक्ति अधिक मात्रा में शारीरिक कार्य करता है। तब उसकी पेशी कोशिका में अवायवीय श्वसन होता है। जिससे फलस्वरूप कोशिका में लेक्टिक अम्ल का निर्माण हो जाता है। लेक्टिक अम्ल के कारण ही शरीर में थकान उत्पन्न होती है।
  2. एथेनॉल का निर्माण, बीयर का निर्माण
    एथेनॉल के निर्माण में जाइमेज एंजाइम का उपयोग किया जाता है।
  3.  गोबर गैस का निर्माण
  4. ब्रेड का निर्माण ब्रेड के निर्माण में सेकेरोमाइसीज सेरेवेसी का उपयोग किया जाता है।
  5. कुछ जीवाणुओं में अवायवीय श्वसन होता है।
    जैसे विनाइट्रीकरण करने वाले जीवाणु अवायवीय श्वसन करते हैं।
     श्वसन पथ:-
  1. ग्लाइकोलाइसिस
  2. क्रेब्स चक्र
  3. लिंक रिएक्शन
  4. इलेक्टॉन परिवहन तंत्र
  1.  ग्लाइकोलाइसिस- ग्लाइकोलाइसिस को EMP पाथ कहा जाता है।
  1. क्रेब्स चक्र:-
  1. ETS (इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र)

RQ- (श्वसन गुणांक)- मुक्त CO2 का आयतन तथा प्रयुक्त O2 के आयतन का अनुपात कहलाता है।

                         

श्वसन से संबंधित विकार-
अस्थमा- यह एक एलर्जी रोग है।

मेट हीमोग्लोबिन- जब हीमोग्लोबिन में उपस्थित आयरन (fe+2)की ऑक्सीजन अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता तो शरीर में O2 का परिवहन अच्छा होता है।
जब शरीर में नाइट्रेट कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा अधिक हो जाती है तब हीमोग्लोबिन में उपस्थित आयरन की ऑक्सीकरण अवस्था में परिवर्तन हो जाता है जिस कारण शरीर में O2 का परिवहन धीमा हो जाता है।