¨ सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology):-
- किसी भी सूचना प्रसारण माध्यम/चैनल के चार प्रमुख घटक होते हैं-
1. सूचना(Information)
2. प्रेषक(Transmitter)
3. संचार माध्यम(Communication Medium)
4. ग्राही(Receiver)
¨ सूचना प्रेषक :-
ट्रांसड्यूसर
माड्यूलेटर
एम्प्लीफायर
एण्टीना
¨ संचार माध्यम :-
संचार लाइन
ऑप्टिकल फाइबर्स
Space waves
¨ ग्राही :-
एण्टीना
डिमॉड्यूलेटर
एम्प्लीफायर
ट्रांसड्यूसर
1. सूचना :-
- वह विचार या संदेश जिसे एक से दूसरे स्थान तक भेजा जाना है, सूचना/Information कहलाती है।
- सूचना के प्रकार –
1. ऑडियो/वाक् संदेश
2. ऑडियो + वीडियो/चलचित्र संदेश
3. प्रतिलिपि संदेश/Letter
¨ सूचना तंत्र :-
सूचना(Information)
प्रेषक(Transmitter)
संचार माध्यम(Channel)
प्राप्तकर्त्ता(Receiver)
2. प्रेषक/Transmitter :-
- सूचना(Information) को किसी स्थान पर भेजने वाला प्रेषक कहलाता है।
- प्रेषक के पास चार घटक(Components) पाए जाते हैं।
3. संचार माध्यम(Communication Channel) :-
- वह माध्यम जिससे होकर कोई सूचना प्रेषक(Transmitter) से ग्राही(Receiver) तक पहुँचती है।
- ये संचार माध्यम ‘मुक्त आकाश (रेडियो तरंगों के लिए), ’संचरण लाइन (टेलीफोन का तार)’, ’ऑप्टिकल फाईबर (प्रकाशीय संचरण)’ के रूप में पाए जाते हैं।
4. ग्राही(Receiver) :-
- सूचना तंत्र का वह भाग जो किसी सूचना को प्राप्त करता है।
- सूचना को डिजिटल या एनालॉग रूप में भेज सकते हैं।
- संचार माध्यम के आधार पर सूचना तंत्र निम्नलिखित प्रकार के होते हैं।
1. संचरण लाइन द्वारा संचार :-
2. आकाशीय संचार :-
- विभिन्न रेडियो तंरगों के द्वारा किसी सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजना।
A. भू-तरंग संचार (Ground Waves Communication) :- 500KHz से 1500KHz आवृत्ति वाली रेडियो तरंग।
- इनका प्रयोग कम दूरी के संचार में किया जाता है।
- पृथ्वी की सतह के लगभग समांतर गति करती है।
B. व्योम/आकाशीय तरंग संचार (Sky Waves Communication) :-
- 2MHz से 30MHz आवृत्ति की रेडियो तरंगें।
- ये वायुमंडल की परत आयन मंडल से परावर्तित हो कर ग्राही तक पहुँचती है।
C. अंतरिक्ष तरंग संचार (Space Waves Communication) :-
- 30MHz से 300MHz तथा इससे भी अधिक आवृत्ति की तरंगे उपग्रह संचार में प्रयुक्त होती है।
- FM एवं DTH प्रसारण।
¨ सूचना प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग :-
- सूचना प्रौद्योगिकी में विद्युत चुंबकीय तरंगों का प्रयोग करते हैं। ये विद्युत चुंबकीय तरंगें कई प्रकार की हो सकती है। जैसे-
अनआयननकारी विकिरणें :-
रेडियो तरंगे(Radio Waves)
सूक्ष्म तरंगे(Micro Waves)
अवरक्त तरंगे(Infrared Waves)
दृश्य प्रकाश(Visible Light)
आयननकारी विकिरणें (संचार में प्रयोग नहीं) :-
पराबैंगनी विकिरणें(Ultra Violet Rays)
X-विकिरणें(X-Rays)
गामा विकिरणें(g-Rays)
¨ ब्लू-टूथ :-
- ये लगभग 10-15 मीटर के क्षेत्र में, वायरलैस संचार का माध्यम है, जो कि पर्सनल स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क (PLAN) का निर्माण कर कम्प्यूटर, मोबाईल, लैपटॉप, स्पीकर, प्रिंटर, कैमरे आदि आपस में जोड़ता तथा इनके बीच सूचनाओं/डेटा का स्थानांतरण होता है।
- ये 2.4 गीगा हर्टज (GHz) की आवृत्ति पर कार्य करता है।
- ब्लू-टूथ SIG(स्पेशल इंट्रेस्ट ग्रुप) के द्वारा ब्लू-टूथ के नए संस्करण/Version का विकास किया जाता है।
- ब्लू-टूथ 5.0 को जून, 2016 में लॉन्च किया गय।
- ब्लू-टूध 5.1 को जनवरी, 2019 में लॉन्च किया गया।
¨ WiFi/वायरलैस फाईडेबिलिटी(Wireless Fidebility) :-
- ये भी LAN(लोकल एरिया नेटवर्क) के रूप में कार्य करता है तथा 100-150 मीटर के दायरे में डेटा ट्रांसफर, वायरलैस इंटरनेट तथा सूचना स्थानांतरण के लिए उपयोगी है।
- ये भी ब्लू-टूथ की आवृत्ति 2.4 GHz पर कार्य करता है, इसके अलावा ये 5GHz की आवृत्ति पर भी कार्य करता है तथा ब्लू-टूथ की तुलना में तेजी से डेटा ट्रांसफर करता है।
- WiFi डायरेक्ट एवं WiFi कॉलिंग इसके अनुप्रयोग(Application) है।
¨ Li-Fi/Light Fidebility(लाइट फाईडेबिलिटी) :-
- इसमें दृश्य प्रकाश(Visible light) की सहायता से इंटरनेट सुविधा प्राप्त की जाती है।
- ये अत्यधिक तीव्र गति का इंटरनेट कनेक्शन है, जिसमें LED बल्ब से उत्पन्न प्रकाश के माध्यम से डेटा स्थानांतरण किया जाता है।
- गति तो Wi-Fi की तुलना में बहुत अधिक लेकिन Range(परास) बहुत कम तथा सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत विश्वसनीय।
- हैरॉल्ड हैस ने इसके बारे में बताया।
¨ इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) :-
- 4th औद्योगिक क्रांति/Industrial Revolution
- इसमें इंटरनेट तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता/Artificial Intelligence की सहायता से भौतिक वस्तुओं का स्वचालीकरण (Automation) करते हुए अब ह्यूमनोइड रोबोट्स की सहायता से तीव्र गति से सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही है।
- अब मशीनों में (रोबोट में) भी कुछ हद तक सोचने की क्षमता का विकास किया गया है।
- IOT के द्वारा अब मानवीय प्रयासों को अन्य रचनात्मक कार्यों में लगाकर उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है।
¨ IOT के उदाहरण :-
- स्मार्ट होम, ऑटोमेटिक सेंसर्स, ह्यूमनोइड रोबोट, वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेन्टेड रियलिटी, NFC (नियर फील्ड कम्यूनिकेशन)
1. स्मार्ट होम :-
- उदाहरण – गूगल डॉट, एलेक्सा
- ये डिवाइसेज घरेलू उपकरणों को इंटरनेट के द्वारा आपस में जोड़कर वॉइस कमाण्ड के द्वारा नियंत्रित की जा सकती है।
2. ऑटोमेटिक सेंसर्स :-
- हमारी शारीरिक गतिविधियों को पहचान कर उनके अनुसार ये सेंसर्स स्वयं वैसी ही गतिविधि दोहराते हैं, हमारी पहचान करते हैं या टी.वी. स्क्रीन वीडियो का नियंत्रण करते हैं। (X-Box कनेक्ट)
3. ह्यूमनोइड रोबोट :-
- इनका शारीरिक निर्माण सामान्य मनुष्य जैसा ही होता है।
- ये मनुष्य के चेहरे पर भाव भी उत्पन्न कर सकते हैं।
- जैसे –
- सोफिया रोबोट – वर्ष 2016 में हांगकांग में निर्मित, प्रथम ह्यूमनोइड रोबोट जिसे UAE की नागरिकता भी प्राप्त है।
- Sona 2.5 – Covid-19 के मरीजों को दवा देने वाला रोबोट, जिसका जयपुर (राजस्थान) के SMS हॉस्पिटल में प्रयोग किया गया। ‘भुवनेश मिश्रा’ ने इसका निर्माण ‘Club-First’ नामक कंपनी के अधीन ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत् किया है।
¨ ऑगमेण्टेड रियलिटी (AR) (संवर्धित वास्तविकता) :-
- वास्तविक वस्तुएँ + आभासी वस्तुएँ
- इसमें इंटरनेट, मोबाईल के द्वारा वास्तविक जीवन की घटनाओं/व्यक्तियों को अन्य रूप में GPS एवं एप(App) के द्वारा देखा जा सकता है।
- उदाहरण – पोकेमोन गो (वीडियो गेम), उबर, ओला, मौमेटो से संबंधित व्यक्ति या वाहन को एप में देखना।
¨ वर्चुअल रियलिटी (V.R.) आभासी वास्तविकता :-
- आभासी संसार
- वास्तविकता से दूर ऐसे स्थान, किरदार बनाए जाते हैं जो हमें वास्तविक प्रतीत होते हैं।
- उदाहरण :- PUBG, VR-Box, X-Box कनेक्ट।
- हाल ही में चर्चा में रहे PUBG Game वर्चुअल रियलिटी का महत्त्वपूर्ण उदाहरण है।
¨ NFC(नियर फील्ड कम्युनिकेशन) :-
- इसमें 4-5 की रेंज में उपस्थित NFC युक्त डिवाइसेज में डेटा का आदान-प्रदान संभव है।
- उदाहरण – मेट्रो ट्रेन के कूपन/कार्ड में उपस्थित चिप जब NFC युक्त सेंसर के संपर्क में आती है तो चिप से डेटा स्थानांतरण होता है तथा किराया/रिचार्ज पूरा किया जाता है।
- ये NFC स्मार्टफोन्स तथा DSLR कैमरों में भी पाया जाता है।
¨ National Telecom Policy (राष्ट्रीय दूरसंचार नीति):-
- केन्द्रीय मंत्रिमण्डल ने वर्ष 2018 में राष्ट्रीय दूरसंचार नीति ‘नेशनल डिजिटल कम्यूनिकेशन पॉलिसी (राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति)’ को अनुमोदित किया जिससे अब वर्ष 2012 की दूरसंचार नीति को प्रतिस्थापित किया गया।
- इस पॉलिसी के साथ ही दूरसंचार आयोग को अब ‘डिजिटल संचार आयोग (Digital Communications Commission)’ के नाम से जाना जाएगा।
- इस पॉलिसी के तीन आधार बिंदु –
I. सभी को इंटरनेट।
II. IT सेक्टर में निवेश।
III. डाटा सुरक्षित रखना।
¨ Connect India :-
- नेशनल ब्रॉडबैण्ड मिशन (राष्ट्रीय ब्रॉडबैण्ड अभियान) के तहत वर्ष 2022 तक सभी नागरिकों को 50Mbps की स्पीड वाला ब्रॉडबैण्ड उपलब्ध कराना।
- भारत नेट प्रोजेक्ट के तहत् सभी ग्राम पंचायतों को 1Gbps स्पीड के ब्रॉडबैण्ड से जोड़ना वर्ष 2020 तक।
- ग्रामनेट प्रोजेक्ट के तहत् ‘ग्रामीण विकास संस्थानों’ में 50Mbps की स्पीड वाले इंटरनेट की उपलब्धता।
- नगरनेट प्रोजेक्ट के तहत् शहरी क्षेत्रों में 1 मिलियन वाई-फाई हॉट स्पॉट।
- जन Wi-Fi के तहत् ग्रामीण एंव दूरस्थ क्षेत्रों में 2 मिलियन वाई-फाई हॉटस्पॉट की स्थापना।
- विकास से संबंधित संस्थानों में 100Mbps की स्पीड का ब्रॉडबैण्ड।
- Fibre First Initiative के तहत् ‘नेशनल डिजिटल ग्रिड’ की स्थापना जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैण्ड कनेक्टिविटी पहुँचे।
- सेटेलाइट कम्यूनिकेशन को भी बढ़ावा।
- टेलीकॉम-लोकपाल के माध्यम से शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढृ बनाना।
¨ Propell India :-
- वर्ष 2022 तक IT सेक्टर में 100 बिलियन डॉलर के निवेश के द्वारा IT सेक्टर में आधारभूत संरचना का विकास करते हुए देश की अर्थव्यवस्था को IOT/इंटरनेट ऑफ थिंग्स, औद्योगिक क्रांति 4.0 के अनुकूल बनाना।
- 1 मिलियन (10 लाख) युवाओं को IT क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत् प्रशिक्षण देकर मानव संसाधन तैयार करना।
- बौद्धिक संपदा अधिकार/IPR/Intellectual Property Rights के तहत् नवाचारों/Innovations को सुरक्षा प्रदान करना।
¨ Secure India :-
- इंटरनेट उपलब्धता के साथ-साथ डेटा सुरक्षा, साइबर हमलों से बचना, गोपनीय जानकारियों (Secure Informations) की सुरक्षा तथा नागरिकों से संबंधित डेटा की सुरक्षा हेतु मजबूत साइबर सुरक्षा तंत्र का निर्माण।
- नेट न्यूट्रेलिटी की स्थापना।