चौहानों को सूर्यवंशी बताने वाले स्त्रोत

वासुदेव चौहान (551ई.)

अजयराज चौहान – (1113-33 ई.)

अर्णोराज (1133-50 ई.) दरबारी विद्वान –

  1. बिजोलिया शिलालेख (1133-37ई. के मध्य)
  2. पृथ्वीराज रासो (1135-37 ई. के मध्य)

अर्णोराज के युद्ध/विजेय –

  1. मालव नरेश नरवर्मा को पराजित किया।
  2. गुजरात के चालुक्य शासक जयसिंह सिद्धराज को 1134 ई. में पराजित किया व उसकी पुत्री कांचन देवी से विवाह किया।
  3. गुजरात के चालुक्य शासक कुमारपाल से 1145 ई. में पराजित हुआ व अपनी पुत्री जल्हण का विवाह कुमारपाल से किया। पाली, जालौर, नाडोल चालुक्यों को दिए।

देवीसिंह/देवा हाड़ा-

रामसिंह –

पृथ्वीराज चौहान तृतीय – (1177-92)

प्रधानमंत्री – कैमास (कदम्बवास) मूलत: दक्षिणी पूर्वी पंजाब के निवासी व सामन्त थे। ये दहिया राजपूत सरदार थे।

सेनापति – भुवन मल्ल (कर्पूरी देवी के सम्बन्धी चाचा)

पृथ्वीराज चौहान तृतीय की उपाधियाँ-
(i) दल पूँगल (विश्व विजेता)
(ii) रायपिथौरा (युद्ध में पीठ न दिखाने वाला)

महोबा से संघर्ष के प्रमुख कारण-

  1. भण्डाणिको के दमन के बाद लौटते समय घायल चौहान राज्य के सैनिको की हत्या परमर्दीदेव ने करवाई थी।
  2. भण्डाणिको के दमन के बाद महोबा राज्य से चौहान राज्य की सीधी सीमा लगने लगी अत: सीमा विवाद बढ़ा।

अजमेर-कन्नौज संघर्ष के कारण-

(1) पृथ्वीराज के अनुसार –

(2) महोबा राज्य पर चौहानो का अधिकार होने के बाद चौहान व कन्नौज राज्यों की सीमा लगने लगी (हसन निजामी के अनुसार)अत: सीमा विवाद भी कारण बना।

(3) पूर्व में भी विग्रहराज चतुर्थ ने कन्नौज के विजयचन्द्र को पराजित किया था अत: शत्रुता पहले से ही थी।

चौहान-चालुक्य संघर्ष का कारण

  1. पृथ्वीराज रासो के अनुसार आबू के परमार शासक जैतसिंह की पुत्री इच्छिनी देवी से विवाह को लेकर। तथा भीम द्वितीय (चालुक्य) द्वारा पूर्व में सोमेश्वर चौहान की हत्या करना।
  2. पृथ्वीराज तृतीय के चाचा कान्हड़देव ने भीम द्वितीय के चचेरे भाई की हत्या की थी, तो भीम द्वितीय ने सोमेश्वर की हत्या कर दी व नागौर पर अधिकार कर लिया था। अत: बदला लेने हेतु पृथ्वीराज चौहान तृतीय ने भीम द्वितीय से युद्ध कर उसे पराजित किया।
  3. गोपीनाथ शर्मा के अनुसार सीमाएँ लगने के कारण साम्राज्य विस्तार का प्रयास दोनों ओर से था अत: महतवकांक्षाओं का टकराव भी एक कारण बना।
  4. नागौर युद्ध के बाद हुई सन्धि मे नागौर, पाली, जालौर व सिरोही पर पृथ्वीराज तृतीय का अधिकार हो गया था।
  5. दोनो के बीच 1184 में नागौर का युद्ध हुआ इसमें भीम द्वितीय के प्रधानमंत्री जगदेव प्रतिहार ने चालुक्य सेना का नेतृत्व किया।

मो. गौरी-चौहान संघर्ष –

  1. पृथ्वीराज रासो – 21 बार
  2. सुर्जन चरित्र – 21 बार
  3. प्रबन्ध कोष  - 20 बार
  4. प्रबन्ध चिन्तामणी - 23 बार 
  5. हम्मीर महाकाव्य – 7 बार
  6. फारसी तवारीख – 2 बार

मो. गौरी

तराईन का प्रथम युद्ध- (1191)

तराईन का द्वितीय युद्ध (1192)

चौहान की पराजय क्यों हुई-

  1. चन्देल + गहड़वाल गठबन्धन
  2. मुख्य सेना का अनुपस्थित होना, अव्यवस्थित सेना।
  3. तराईन प्रथम युद्ध मे गौरी का पीछा न करना
  4. राजकार्य में ध्यान न देकर विलासिता पूर्वक जीवन जीना।
  5. पड़ौसी राज्यों से मैत्री सम्बन्ध न होने से समय पर सहायता न मिलतना।
  6. अश्वपति, प्रतापसिंह जैसे सामन्तो द्वारा विश्वासघात करना।

तराईन द्वितीय युद्ध के बाद चौहन की मृत्यु से सम्बन्धित मत-

  1. “पृथ्वीराज रासो”- पृथ्वीराज तृतीय को गजनी ले जाया गया वही मृत्यु।
  2. “पृथ्वीराज प्रबन्ध” – चौहान को बन्दी बनाकर अजमेर लाया गया, बाद में उसे खड्डा खोदकर गाड़ दिया गया।
  3. “हम्मीर महाकाव्य”- चौहान को कैद करके बाद में उसकी हत्या की गयी।
  4. “विरूद्ध विधि विध्वंस”- युद्ध में ही वीरगति
  5. हसन निजामी – “ताज उल मआसिर” बन्दी बनाकर अधीनता मनवाकर पुन: अजमेर का शासक बनाया बाद में विद्रोह करने पर मृत्युदण्ड दिया गया।
  6. मिन्हाज सिराज – “तबकाते नासीरी”- तराईन, द्वितीय युद्ध के बाद सिरसा (हरियाणा) स्थान पर उसकी हत्या कर दी गयी।
  7. अबुल फजल – गौरी उसे गजनी ले गया जहाँ उसकी मुत्यु हुई।
  1. चौहान व मोहम्मद साम, का उल्लेख होने को माना जाता है।
  2. कलमा व लक्ष्मी का चित्र
  3. अव्यक्त मेव मोहम्मद अवतार लिखा है।

दरबारी साहित्यकार-

  1. चन्द्रबरदायी (पृथ्वीभट्ट)
  2. जयानक (कश्मीरी लेखक) इसकी रचना में तराईन युद्धों का उल्लेख नही है (पृथ्वी विजय)
  3. वागीश्वर
  4. जनार्दन
  5. विश्वरूप
  6. विद्यापति गौड़

रणथम्भौर के चौहान वंश

प्रमुख शासक

गोविन्द राज/गोविन्द चन्द्र चौहान

वल्लनदेव चौहान

बागभट्ट-

जय सिम्हा/जैत्रसिंह (1250-82) ई.

हम्मीर देव चौहान (1282-1301) ई.

  1. भीमरस का राजा अर्जुन
  2. धार राज्य  (भोज परमार)
  3. आबू, चित्तौड़, वर्धनपुर,पुष्कर,चम्पा

अलाउद्दीन खिलजी के रणथम्भौर अभियान के कारण –

  1. चन्द्रशेखर- “हम्मीर हठ” के अनुसार अलाउद्दीन के भगोड़े सैनिक मोहम्मदशाह व केहब्रु को हम्मीर द्वारा शरण देना युद्ध का कारण बना। मोहम्मदशाह व अलाउद्दीन की मराठा बेगम चिमना बेगम के बीच प्रेम-प्रसंग बताया जाता है। इसे भी एक कारण बताया है।
  2. पद्मनाथ – “कान्हड़देव प्रबन्ध” के अनुसार 1299 ई. में अलाउद्दीन के गुजरात अभियान के समय मोहम्मदशाह व केहब्रु ने शाही सेना में विद्रोह किया व पराजित होकर हम्मीर के पास शरण ली। हम्मीद द्वारा इन्हें नहीं लौटाने पर युद्ध हुआ।
  3. अमीर खुसरो ने राजनीतिक महत्वकांक्षा को युद्ध का प्रमुख कारण माना (सर्वमान्य कारण)
  1. बरनी = 10 जुलाई,1301ई.
  2. इलियट = 11 जुलाई ,1301ई. (सर्वमान्य)
  3. हम्मीर महाकाव्य = 12 जुलाई,1301ई.
  1.  मोहम्मद शाह
  2. केहब्रु
  3. रतिपाल
  4. रणमल

जालौर का चौहान वंश

प्रमुख शासक  

कीर्तिपाल चौहान – 1181 ई. में परमारों को पराजित कर जालौर पर अधिकार किया व जालौर की चौहान शाखा की स्थापना की।

समर सिंह (1182-1205) ई.

उदयसिंह (1205-57)

चाचिगदेव (1257-82 ई.)

सामन्त सिंह – (1282-1296ई.)

कान्हड़देव चौहान (1296-1311)

  1. समकालीन राजनीतिक स्थिति
  2. दिल्ली = अलाउद्दीन खिलजी
  3. मेवाड़ (चित्तौड़) को प्रशासक = खिज्र खाँ   (अलाउद्दीन खिलजी का पुत्र)
  4. सिवाणा – शीतलदेव चौहान
  5. मण्डोर – प्रतिहार
  6. आमेर – कच्छवाहा वंश
  7. मुख्य रानी = देसल देवी
  8. पुत्र = वीरम देवी

जानकारी के स्त्रोत

  1. पद्मनाभ – “कान्हड़देव”
    “वीरम देव सोनगरा री बात”
  2. जालौर प्रशस्ती
  3. मकराना शिलालेख
  4. मुहणोत नैणसी – “नैणसी री ख्यात”
  5. फरिश्ता – “तारीखे फरिश्ता”
  6. अमीर खुसरो – “खजाईन-उल-फुतुह”
  1. कान्हड़देव प्रबन्ध – गुजरात अभियान के समय शाही सेना को मार्ग नही देना तथा लौटती शाही सेना पर कान्हड़देव द्वारा आक्रमण
  2. तारीखे फरिश्ता – “अलाउद्दीन द्वारा कान्हड़देव को दिल्ली बुलाकर अपमानित करना।”
  3. नैणसी री ख्यात -  “वीरम देव तथा फिरोजा (अलाउद्दीन की बेटी)” के बीच प्रेम प्रसंग, वीरम देव द्वारा विवाह प्रस्ताव को ठुकरा देना।
  4. अमीर खुसरो – “राजनीतिक महत्वकांक्षा”(सर्वमान्य मत)

सिवाणा विजय

जालौर विजय

सिरोही के चौहान

लुम्बा

शिवभान/शिभान s/o रायमल –

 सहसमल – शिवमान का पुत्र था।

लाखा – 1451 में सिरोही का शासक बना।

जगमाल – लाखा का पुत्र

सुरताण देवड़ा –

 बेरीसाल –

शिवसिंह –

जालौर का चौहान वंश

प्रमुख शासक

कीर्तिपाल चौहान-  

समर सिंह (1182-1205)

उदयसिंह (1205-57)

चाचिगदेव (1257-82 ई.)

सामन्त सिंह (1282-1296ई.)

कान्हड़देव चौहान (1296-1311)

जानकारी के स्त्रोत-

जालौर पर अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के कारणो पर विभिन्न मत -

  1. कान्हड़देव प्रबन्ध- गुजरात अभियान के समय शाही सेना को मार्ग नहीं देना तथा लौटती शाही सेना पर कान्हड़देव द्वारा आक्रमण।
  2. तारीखे फरिश्ता- अलाउद्दीन द्वारा कान्हड़देव को दिल्ली बुलाकर अपमानित करना।
  3. नैणसी री ख्यात- वीरम देव तथा फिरोजा (अलाउद्दीन की बेटी) के बीच प्रेम प्रसंग, वीरमदेव द्वारा विवाह प्रस्ताव को ठुकरा देना।
  4. अमीर खुसरो-राजनीतिक महत्वकांक्षा - (सर्वमान्य मत)

जालौर विजय-