गुर्जर - प्रतिहार वंश
भीनमाल शाखा

1. नागभट्ट-I (730-60 ई.) –

2. कक्कुकयह नागभटट-I का भतीजा था, जिसका अन्य नाम ककुस्थ भी मिलता है। इसने मण्डोर में "विष्णुस्तंभ' का निर्माण करवाया, जो राजस्थान का  दूसरा सबस प्राचीन विष्णुस्तंभ माना जाता है।

3. देवराज कक्कुक का भाई था। इसने उज्जैन को अपना केन्द्र बनाया। यह वैष्णव धर्मावलम्बी था। वराह अभिलेख में इसे देशभक्त कहा गया है।

4. वत्सराज (783-795 ई.) –

5. नागभटट-II (795-833 ई.) –

  1. "प्रबंध कोष” के अनुसार इसके सामन्त व चाहमान राजा गूवक-I(गोविन्दराज) ने सुल्तान बेग को हराया।
  2. "खुम्माण रासो” के अनुसार इसके सामन्त व गुहिल शासक खुम्माण ने मुसलमानों को पराजित किया।

6. रामभद्र (833-36) –

7. महिरभोज (836-85) –

  1. ग्वालियर अभिलेख - आदिवराह
  2. दौलतपुर - प्रभास पाटन
  3. बग्रमा - संपुर्ण पृथ्वी को जीतने वाला
  4. ताम्र सिक्कों पर - मदादिवराह

8. महेंद्रपाल-I (885-910 ई.) –

9. भोज-II (910-13) – महेंन्द्रपाल का पुत्र , माता - देहनागा देवी

10. महिपाल-I (914-43) –

11. महेन्द्रपाल-II (945-48) –

राज्यपाल (990-1019 ई.) – इसके समय दिस. 1018 में महमूद गजनवी ने कन्नौज पर आक्रमण किया व कन्नौज को लूटा, कत्लेआम व नष्ट किया। इस समय राज्यपाल बिना युद्ध किए ही भाग गया था। अत: चंदेल शासक विद्याधर ने राजाओं का संघ बनाकर राज्यपाल को मृत्यु दण्ड दिया था।

त्रिलोचनपाल (1019-1027) – अलबरूनी के अनुसार इसके समय कन्नौज राजधानी नहीं थी। बल्कि "बारी' को राजधानी बनाया था, जो रामगंगा व सरयू के संगम पर थी।
इसके समय भी महमद गजनवी ने पुन: आक्रमण किया व लूटा।

यशपाल (1036-1093 ई.) अंतिम शासक। चन्द्रदेव गहड़वाल ने इस पर आक्रमण कर कन्नौज पर अधिकार किया व कन्नौज के गहड़वाल राज्य की स्थापना की।

 चौहानों को सूर्यवंशी बताने वाले स्त्रोत

बिजोलिया शिलालेख व जान कवि – “कायम खाँ रासो” में चौहानो को ब्राह्मण कहा गया। बिजोलिया शिलालेख  में चौहानों को ”वत्स गौत्रीय ब्राह्मणों की सन्तान” कहा गया।

वासुदेव चौहान (551ई.)