संविधान की व्याख्या के संबंध में अधीनस्थ न्यायालय से स्थानांतरित मामलों की सुनवाई करता है।
2. रिट क्षेत्राधिकार
- अनुच्छेद-226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को भी निम्न पाँच रिट अधिकारिता जारी करने का अधिकार है-
1. बंदी प्रत्यक्षीकरण
2. परमादेश
3. उत्प्रेषण
4. प्रतिषेध
5. अधिकार उत्प्रेक्षा
3. अपीलीय क्षेत्राधिकार-
- उच्च न्यायालय, मूलतः एक अपीलीय न्यायालय है, इसमें संबंधित राज्य क्षेत्र के अंतर्गत् आने वाले अधीनस्थ न्यायालयों के आदेशों के विरुद्ध सुनवाई की जाती है।
- इसके अंतर्गत् दीवानी/सिविल और आपराधिक दोनों प्रकार के मामलों की सुनवाई की जाती है।
4. पर्यवेक्षीय क्षेत्राधिकार-
- उच्च न्यायालय को यह अधिकार प्राप्त है, कि वह अपने क्षेत्राधिकार के सभी न्यायालयों व सह-न्यायालयों पर नजर रखे, परंतु इसमें सैन्य न्यायालय और अधिकरण नहीं आते हैं।
5. अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण-
- उच्च न्यायालय के पास अधीनस्थ न्यायालयों पर प्रशासनिक नियंत्रण जैसी अन्य शक्तियाँ भी प्राप्त होती हैं।
6. अभिलेख का न्यायालय-
- अभिलेख न्यायालय के रूप में उच्च न्यायालय को दो प्रकार की शक्तियाँ प्राप्त हैं-
(i) उच्च न्यायालय के फैसले, कार्यवाही और कार्य, शाश्वत स्मृति और परिसाक्ष्य के लिए रखे जाते हैं। इन अभिलेखों को साक्ष्य के तौर पर रखा जाता है और अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यवाही के समय इन पर सवाल नहीं उठाए जा सकते तथा इन्हें कानूनी परंपरा और संदर्भो की तरह माना जाता है।
(ii) इन्हें न्यायालय की अवमानना पर साधारण कारावास, आर्थिक दण्ड अथवा दोनों प्रकार के दण्ड देने का अधिकार है।
7. अधीक्षण संबंधी अधिकारिता-
- उच्च न्यायालय के पास न्यायिक तथा प्रशासनिक दोनों प्रकार की अधीक्षण अधिकारिता प्राप्त हैं।
- प्रशासनिक अधीक्षण के तहत उच्च न्यायालय अपने निचले न्यायालयों के कर्मचारियों, वकीलों की कार्यप्रणाली का निर्धारण कर सकता है तथा न्यायिक कार्यवाहियों का नियम बना सकता है साथ ही न्यायिक अधीक्षण के तहत उच्च न्यायालय सभी प्रकार के मुकद्दमों को अपने पास सुनवाई के लिए मँगा सकता है।
8. न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति-
- उच्च न्यायालय की न्यायिक-पुनर्विलोकन की शक्ति राज्य विधान मण्डल व केन्द्र सरकार दोनों के अधिनियमों और कार्यकारी आदेशों की संवैधानिकता के परीक्षण के लिए है।
- यदि राज्य विधान मण्डल व केन्द्र सरकार दोनों के अधिनियमों और कार्यकारी आदेश संविधान का उल्लंघन करते हैं, तो उन्हें असंवैधानिक अथवा सामान्य/शून्य घोषित किया जा सकता है, परिणाम स्वरुप सरकार उन्हें लागू नहीं कर सकती
उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय की तुलना
उच्चतम न्यायालय के पास सलाहकारी शक्ति, विशेष इजाजत से अपील एवं संघीय विवाद के निर्धारण की शक्ति है, जो उच्च न्यायालय के पास नहीं है।
प्रमुख उच्च न्यायालय और उनका न्यायिक क्षेत्र
नाम न्यायिक क्षेत्र
1. इलाहाबाद उत्तर प्रदेश
2. आंध्र प्रदेश आंध्र प्रदेश
3. बंबंई महाराष्ट्र, गोवा, दादरा और नागर हवेली
4. कलकत्ता पश्चिम बंगाल तथा अंडमान एव
निकोबार द्वीप समूह
5. छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़
6. दिल्ली दिल्ली
7. गुवाहाटी असम, नागालैंड, मिजोरम और अरूणाचल
8. गुजरात गुजरात
9. हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश
10. जम्मू एवं कश्मीर जम्मू एवं कश्मीर
11. झारखंड झारखंड
12. कर्नाटक कर्नाटक
13. केरल केरल और लक्षद्वीप
14. मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश
15. मद्रास तमिलनाडु और पुडुचेरी
16. मणिपुर मणिपुर
17. मेघालय मेघालय
18. उड़ीसा ओडिशा
19. पटना बिहार
20. पंजाब और हरियाणा पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़
21. राजस्थान राजस्थान
22. सिक्किम सिक्किम
23. त्रिपुरा त्रिपुरा
24. उत्तराखण्ड उत्तराखण्ड
25. तेलगांना तेलगांना
अनुच्छेद विषय-वस्तु
214 राज्यों के लिए उच्च न्यायालय
215 उच्च न्यायालय अभिलेखों के न्यायालय के रूप में
216 उच्च न्यायालय का गठन
217 उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद के लिए नियुक्ति तथा दशाएँ
218 उच्च् न्यायालय में उच्च्तम न्यायालय से संबंधित कतिपय प्रावधानों का लागू होना
219 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का शपथ ग्रहण
220 स्थायी न्यायाधीश बहाल होने के बाद प्रैक्टिस पर प्रतिबंध
221 न्यायाधीशों का वेतन इत्यादि
222 किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण
223 कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति
224 अतिरिक्त एवं कार्यवाहक न्यायाधीशों की नियुक्ति
224ए उच्च न्यायालयों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति
225 उच्च न्यायालयों का क्षेत्राधिकार
226 कतिपय याचिकाएँ जारी करने की उच्च न्यायालयों की शक्ति
226ए अनुच्छेद 226 के तहत केन्द्रीय अधिनियमों की संवैधानिक वैधता पर विचार नहीं किया जाना (निरस्त)
227 उच्च न्यायालय के सभी न्यायालयों पर अधीक्षण की शक्ति
228 उच्च न्यायालयों में कतिपय मामलों का स्थानांतरण
228ए राज्य अधिनियमों की संवैधानिक वैधता से संबंधित प्रश्नों के विस्तारण के लिए विशेष प्रावधान (निरस्त)
229 पदाधिकारी तथा सेवक एवं उच्च न्यायालयों में व्यय
230 उच्च न्यायालयों में क्षेत्राधिकार संघीय क्षेत्रों तक विस्तार
231 दो या अधिक राज्यों के लिए एक साझे उच्च न्यायालय की स्थापना
232 व्याख्या (निरस्त)