- कुम्भाकालीन रणकपुर लेख में बूंदी का नाम वृन्दावती मिलता है।
- बूंदा मीणा के नाम पर बूंदी का नामकरण हुआ।
देवीसिंह/देवा हाड़ा-
- बम्बावड़े के सामंत चौहान वंशीय देवा हाड़ा ने मीणाओं का परास्त कर 1241 ई.में बूंदी राज्य की स्थापन की
- देवी सिंह ने अमरनाथ में गंगेश्वरी माता का मंदिर बनवाया तथा अमर धूण नामक स्थान पर बावड़ी बनवायी।
- 1243 ई. में इसने अपने पुत्र समरसिंह को हाड़ौती का शासक बना दिया।
- समर सिंह- समरसिंह ने कोटिया भील को हराकर कोटा पर अधिकार कर लिया।
- सुर्जन हाड़ा – इसने मेवाड़ से संबंध विच्छेद कर अपनी स्वतंत्र सत्ता की स्थापना की एवं रणथम्भौर दुर्ग पर अधिकार किया।
- अकबर द्वारा रणथम्भौर आक्रमण करने पर सुर्जन हाड़ा ने मुगल अधीनता स्वीकार कर ली।
- अकबर ने इसे ‘रावराजा’की उपाधि एवं पाँच हजार का मनसब दिया।
- इसने द्वारिका में रणछोड़ जी मंदिर का निर्माण करवाया।
- राव रतन सिंह- जहांगीर ने इसे पाँच हजार का मनसब दिया। जहांगीर ने इसे न्यायप्रियता के लिए ‘रामराज’ एवं चित्रकला प्रेमी होने के कारण ‘सरबुलन्द राय’ की उपाधि दी।
- राव शत्रुशाल- मुगल शासक शाहजहां ने इसे ‘राव’ की उपाधि, तीन हजार जात व दो हजार सवार का मनसब दिया।
- मुगल उत्तराधिकार युद्ध में दाराशिकोह की ओर से युद्ध करते ‘सामुगढ़ का युद्ध’(1658 ई.) में वीर गति को प्राप्त हुआ।
- राव अनिरुद्ध – शत्रुशाल की स्मृति में 1683 ई. में बूंदी में ’84 खम्भो की छतरी’ का निर्माण करवाया।
- अनिरुद्ध की पत्नी रानी नाथावती ने ‘रानी जी की बावड़ी’ का निर्माण करवाया।
- राव जोधसिंह- राव जोधसिंह 1706 ई. में बूंदी के जैतसागर तालाब में गणगौर की प्रतिमा एवं अपनी रानी के साथ नाव की सवारी करते समय डूब गया।
- तभी से यह ‘हाड़ों ले डूब्यो गणगौर’ विख्यात हो गया।
- राव राजा बुद्ध सिंह- औरगंजेब की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी युद्ध में इसने बहादुरशाह का साथ दिया।
- बहादुरशाह ने इसे ‘महाराव राणा’ की उपाधि दी।
- बुद्धसिंह के शासनकाल में मुगल बादशाह फर्रुखसियर ने बून्दी का नाम बदलकर ‘फर्रुखाबाद’ कर दिया था।
- इसके समय सर्वप्रथम राजस्थान में मराठों का प्रवेश हुआ।
- जयपुर नरेश सवाई जयसिंह से झगड़ा होने पर जयसिंह ने बुद्धसिंह को हटाकर दलेलसिंह को बूंदी की गद्दी पर बैठा दिया।
- यह 1734 ई. में मराठों के राजस्थान प्रवेश का कारण बना।
- बुद्ध सिंह कि पत्नी ने होल्कर को राखी भेजकर बून्दी आमंत्रित किया।
- उम्मेद सिंह- यह मल्हारराव होल्कर की सहायता से शासक बना था।
- यह ‘श्रीजी’ के नाम से जाना जाता था।
- उम्मेदसिंह ने बूंदी के तारागढ़ किले में चित्रशाला का निर्माण करवाया।
- इसने अपने जीवनकाल में स्वयं की सोने की मूर्ति बनाकर उसका अंतिम संस्कार करवाया।
- बूंदी के शासक विष्णुसिंह हाड़ा ने 10 फरवरी 1818 को अंग्रेजो से संधि कर अधीनता स्वीकार की।
रामसिंह –
- 1857 की क्रांति के समय बूंदी का शासक
- 1857 की क्रांति में इसने अंग्रेजो का साथ नही दिया।
- इसने कन्या वध व डाकन प्रथा पर प्रतिबंध लगाया।
- सुर्यमल्ल मिश्रण इनके ही दरबार में था जिसने ‘वंश भास्कर’ की रचना की।
- बूंदी का अंतिम शासक बहादुर सिंह हाड़ा था।