1. धात्विक खनिज – ऐसे खनिज जिनसे धातुएँ प्राप्त होती है धात्विक खनिज कहलाते हैं।

धात्विक खनिज लौह और अलौह दोनों प्रकार के होते हैं जैसे- लौहा, मैंगनीज, सीसा-जस्ता, चाँदी, ताँबा, सोना, बॉक्साइट आदि

  1. अधात्विक खनिज – ऐसे खनिज जिनमें धातुएँ नहीं पाई जाती है जैसे- अभ्रक, पोटाश, नमक, बेन्टोनाइट, वोलेस्टोनाइट आदि।

  2. आणविक खनिज – ऐसे खनिज जिनके प्रयोग द्वारा ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। जैसे- यूरेनियम, थोरियम, लिथियम, बेरिलियम।

  3. ईंधन खनिज – इस श्रेणी में कोयला, लिग्नाइट, प्राकृतिक गैस तथा पेट्रोलियम पदार्थों को सम्मिलित किया जाता है।

  1. लौह धात्विक खनिज

  1. लौह अयस्क – ऐसे अयस्क जिनमें लौह ऑक्साइड की मात्रा अधिक होती है। पृथ्वी के भूगर्भ में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला धात्विक अयस्क लौह अयस्क है। भारत में लौह अयस्क कुडप्पा तथा धारवाड़ क्रम की चट्‌टानों में पाया जाता है। राजस्थान में धारवाड़ क्रम की चट्‌टानों में अरावली पर्वतीय प्रदेश में लौह अयस्क पाया जाता है।

मुख्यत: लौह अयस्क चार प्रकार का होता है-

  1. मेग्नेटाइट - भारत में मेग्नेटाइट के सर्वाधिक भण्डार कर्नाटक में (72%) तथा राजस्थान में (6%) पाए जाते है। मेग्नेटाइट सर्वश्रेष्ठ किस्म का लौह अयस्क होता है किन्तु भारत में कम पाया जाता है। इसे काला लोहा भी कहते है इसमें लौह अयस्क की मात्रा 72% तक होती है। राजस्थान में मेग्नेटाइट किस्म भीलवाड़ा व सीकर जिले में पाई जाती हैं।

  2. हेमेटाइट – इसमें 60-70% तक लौह अयस्क पाया जाता है। भारत में हेमेटाइट के सर्वाधिक भण्डार राजस्थान में पाए जाते हैं। राजस्थान में हेमेटाइट प्रकार का लोहा-जयपुर, दौसा, अलवर आदि में पाया जाता है। यह लाल/गेरुआ रंग का लौह अयस्क है। राजस्थान तथा भारत में सर्वाधिक हेमेटाइट प्रकार का लौह अयस्क पाया जाता है।

  3. लिमोनाइट -  इसे जलयोजित लोहा भी कहते हैं। इसमें  45 - 50% तक लौह अयस्क पाया जाता है। यह निम्न कोटि का लौह अयस्क होता है। लिमोनाइट व सिडेराइट का कोई आर्थिक महत्व नहीं होता है।

  4. सिडेराइट – यह अत्यन्त ही निम्न कोटि का लौह अयस्क होता है। इसमें  45 % से भी कम लौह अयस्क पाया जाता है। यह भूरा लोहा होता है।

राजस्थान में लौह अयस्क उत्पादक क्षेत्र

मेग्नेटाइट प्रकार का लौह अयस्क

Note – लौह अयस्क के उत्पादन में भारत में राजस्थान का सातवाँ स्थान है।

  1. मैंगनीज

राजस्थान में मैंगनीज प्राप्ति के प्रमुख स्थान – बाँसवाड़ा- लीलवाना, तलवाड़ा नरड़िया

राजसमन्द – नगेड़िया

उदयपुर - छोटीसार, बड़ी सार

  1. अलौह धात्विक खनिज

  1. ताँबा (ताम्र धातु)

  1. खेतड़ी – झुंझुनूँ,

  2. सिंघाना – झंझुनूँ (मदान कुदान क्षेत्र में सर्वाधिक भण्डार मिले।)

  3. खो दरीबा – अलवर

  4. बीदासर – चुरू

  5. पुर बनेड़ा – भीलवाड़ा

  6. मीरा का नांगल क्षेत्र – सीकर

  7. बन्ने वालों की ढाणी – सीकर

  1. सीसा-जस्ता

राजस्थान में सीसा – जस्ता की निम्न खानें या प्राप्ति स्थल है-

  1. रामपुरा – आगुचा – भीलवाड़ा (गुलाबपुरा)

  2. राजपुरा – दरीबा – राजसमंद

  3. देबारी – उदयपुर

  4. जावर खान - उदयपुर (सीसा – जस्ता के साथ चाँदी भी)

  5. चौथ का बरवाड़ा – सवाई माधौपुर

  6. गुढ़ा किशोरीदास क्षेत्र – अलवर

  7. सिंदेसर खुर्दखान – रेलमगरा (राजसमंद)

♦ हिंदुस्तान जिंक लि. द्वारा राजस्थान में निम्न जिंक स्मेलटर प्लान्ट स्थापित किए गए-

  1. चंदेरिया सीसा - जस्ता स्मेलटर, चित्तौड़गढ (ब्रिटेन के सहयोग से)

  2. दरीबा स्मेलटर - राजसमंद

  3. देबारी जिंक स्मेलटर – उदयपुर

  1. चाँदी

  1. सोना (स्वर्ण भण्डार)

स्वर्ण भण्डार प्राप्ति स्थल – 

आनंदपुर भूकिया – बाँसवाड़ा

जगतपुरा भूकिया - बाँसवाड़ा             

तिमरान माता - बाँसवाड़ा

खेड़ा – राजपुरा - उदयपुर

  1. टंगस्टन

 

डेगाना – नागौर (राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन तथा देश की सबसे बड़ी टंगस्टन की खान है)

नानाकराब – पाली

वाल्दा क्षेत्र – सिरोही

आबू, रेवदर – सिरोही

Note – टंगस्टन की डेगाना खान को हिंदुस्तान जिंक लि. को दिया गया था लेकिन अभी वर्तमान में उत्पादन बंद है।

डेगाना स्थित खानदेश एकमात्र खान है जहाँ अभी टंगस्टन का उत्पादन हो रहा है।

  1. बॉक्साइट

बॉक्साइट एल्युमिनियम का एक अयस्क है। एल्युमिनियम उद्योग में प्रमुख स्त्रोत बॉक्साइट है।

राजस्थान में इसके कुछ भण्डार बाराँ के माजोला, सहरोल, व शाहबाद तहसील में पाए गए हैं।

अधात्विक खनिज

राजस्थान अधात्विक खनिजों की दृष्टि से समृद्ध है। यहाँ अनेक प्रकार के अधात्विक खनिज पाए जाते हैं जिन्हे हम विभिन्न श्रेणियों में निम्नांकित रूप से विभक्त कर सकते हैं-

राजस्थान के प्रमुख अधात्विक खनिज –

(1)   जिप्सम :- जिप्सम को सेलखडी, हरसौंठ व खड़िया मिट्टी भी कहते हैं।

(2) रॉक फास्फेट :

  1. उदयपुर- झामरकोटड़ा, माटोन, सीसारमा, भींडर

  2. जैसलमेर- बिरमानिया व लाठी क्षेत्र

  3. जयपुर- अचरोल

  4. बाँसवाडा- सलोपत

  5. सीकर-कानपुरा

(3) ऐस्बेस्टस :

  1. उदयपुर-ऋषभदेव (अच्छी किस्म क्राइसोटाइल पाई जाती )

  2. उदयपुर झाडोल (एन्थोफिलाइट ट्रेमोलाइट)

  3. राजसमंद- देवगढ, आमेट, कुंभलगढ तहसील

  4. अजमेर-कंवलाई, अर्जुनपुरा, कोटडा

  5. भीलवाडा-आसीन्द

  6. डूँगरपुर- जाडोल, देवल

(4)  फेल्स पार :

         देश में फेल्सपार में सर्वाधिक भंडार राजस्थान (90%) में है और राजस्थान में अजमेर जिले से (95%) फेल्सपार प्राप्त होता है। फेल्सपार खनिज की उत्पत्ति अभ्रक की खानों से सह उत्पाद के रूप में होती है।

         फेल्सपार सोडियम, पोटाश व कैल्शियम का सिलिकेट है। राज्य में यह खनिज अरावली पहाडियों की पेग्मेटाइट में पाया जाता है।

         फेल्सपार का उपयोग सिरेमिक उद्योग, चीनी के बर्तन, टाइल्स बनाने, सफेद सीमेंट तथा काँच उद्योग में किया जाता है।

 

राजस्थान में फेल्सपार के प्राप्ति स्थल :-

  1. अजमेर- मकरेडा, बांदरसिंदरी , ब्यावर, जवाजा, मसूदा, पीसांगन, लोहागल

  2. भीलवाड़ा- जहाजपुर

  3. पाली- चानोदिया

(5)  अभ्रक :

  1. भीलवाडा- दांता, मांडल, टूंका, बनेड़ा, फूलिया, शाहपुरा

  2. अजमेर-अराई, बाघसूरी, रामसर, पारा, केसरपुरा

  3. राजसमंद व टोंक

(6) फ्लोर्सपार/फ्लोराइट :

(7) डोलोमाइट :

  1. बाँसवाडा-विट्ठलदेव, त्रिपुरा सुन्दरी

  2. उदयपुर- धारियावाद, ईसवाल

  3. राजसमंद- नाथद्वारा, हल्दीघाटी , तलाई

  4. अलवर, सीकर, झुंझुनूँ, भीलवाडा नागौर जिलों में भी डोलोमाइट के निक्षेप है।

(8) बेन्टोनाइट :

(9) पाइराइट्स :

(10) केल्साइट:

(11) वर्मीक्यूलाइट:

(12) मैग्नेसाइट:

(13) बेराइट्स:

(14) क्वार्ट्ज:

(15) सिलिका सैंड/काँच बालुका:

  1. जयपुर

  2. बाराँ-अटरू व छबड़ा

  3. बाडमेर-शिव तहसील

  4. बूँदी-बारोदिया

(16) गार्नेट/तामड़ा:

(17) पन्ना (एमरल्ड):

  1. राजसमंद- कालागुमान,  देवगढ़, कुंभलगढ़, नाथद्वारा, आमेट

  2. अजमेर-बूबानी गाँव, राजगढ़

पन्ना का उपयोग – आभूषण आदि में किया जाता है।

   Note : हाल ही में ब्रिटेन की माइनस मैनेजमैंट कम्पनी ने (बूबानी) अजमेर से देवगढ (राजसमंद) तक पन्ने की विशाल पट्टी का पता लगाया।

(18) सैण्ड स्टोन :

        

राजस्थान में sand stone (बलुआ पत्थर) प्राप्ति स्थल

(19) घीया पत्थर/soap stone :

(20) मुल्तानी मिट्‌टी/Bleaching clay :

(21) ग्रेनाइट:

         सर्वाधिक ग्रेनाइट राजस्थान में जालोर में मिलता है इस कारण जालौर को ग्रेनाइट सिटी भी कहते है।

(22) पोटाश:

(23) लैटराइट:

(24) चूना पत्थर-लाइम स्टोन: