भक्ति आंदोलन

 

  1. भक्तिमार्ग की सरलता :- प्राचीन हिन्दू धर्म में कर्मकाण्ड बढ़ा। साधारण लोगों के लिए आसान नहीं था, इसलिए उन्होने भक्ति मार्ग को चुना।

  2. मुस्लिम आक्रमण :- मध्यकालीन भारत में मुस्लिम आक्रांताओं ने हिन्दू मंदिरो को तोड़ा व लूटा।

  3. जटिल वर्ण व्यवस्था :- समाज के सभी वर्णो में समानता नहीं थी, इसी कारण अस्पृश्यता थी।

  4. समन्वय की भावना जागृत हुई :- हिन्दु + मुस्लिम आपसी समन्वय स्थापित करना चाहते थे।

 

(1) निर्गुण स्वरूप (निराकार) सबसे लोकप्रिय संत कबीर, नानकदेव थे 

           (2) सगुण (साकार) लोकप्रिय संत तुलसीदास, सूरदास वल्लभाचार्य, मीरा, चैतन्य थे।

           

              मोक्ष प्राप्ति के लिए 3 मार्ग बताए गए है-

           (1) ज्ञान- उपनिषद् वेद

           (2) कर्म- कर्मकाण्ड

           (3) भक्ति- (i) निर्गुण   (ii) सगुण

मोक्ष का साधन बताया गया है।

 

 

 

(1) 804 ई. में शृंगेरी पीठ की स्थापना मैसूर (कर्नाटक) में की गई थी। यह पीठ शिवजी को समर्पित है। इसके आचार्य मण्डल मिश्र थे।

(2) 808 ई. में गोवर्धन पीठ की स्थापना जगन्नाथ पुरी (ओडिशा) में की गई थी। यह पीठ विष्णु, भैरवी, सुभद्रा, बलराम को समर्पित है।

(3) 910 ई. में ज्योतिपीठ की स्थापना ब्रदीनाथ (उत्तराखण्ड) में की गई थी। यह पीठ विष्णु को समर्पित है। इसके आचार्य त्रोटकाचार्य थे।

(4) शारदा पीठ की स्थापना द्वारिका गुजरात में की गई थी। यह पीठ भगवान कृष्ण को समर्पित है।

             “भामती

Note :-

शंकराचार्य रामानुज माध्वाचार्य प्रसिद्ध नहीं हो पाए क्योंकि वे संस्कृत बोलते थे जो जनसामान्य की भाषा

नहीं थी।

रामानंद – प्रसिद्ध हुए तथा हिन्दी को आधार बनाया।

1.भक्ति आन्दोलन का सेतु

2. द्रविड़ उपजी लाए रामानंद

3. भक्ति को दक्षिण से उत्तर भारत में लाए।

 

 

  1. वेदान्तसंग्रहम्

  2. श्रीभाष्यम्

  3. गीताभाष्यम्

  4. वेन्दान्त दीपम्

  5. वेदान्तसारम्

  6. शरणगतिगद्यम्

 

 

प्रथम - 1199-1276 ई.

दुसरा - 1238-1317 ई.

 

  1. अणुभाष्यम्

  2. न्यायविवरणम्

  3. गीताभाष्यम्

  4. ऋग्भाष्यम् (ज्ञान ऋग्वैद के प्रथम 30 सुक्त पर भाष्य)

 

(1) नित्य संसारी- जो सांसारिक चक्र में बंधे हुए है।

(2) तमोयोग्य- जिन्हे नरक जाना है।

  1. वैष्णवमताब्ज भास्कर

  2. रामरक्षास्रोत्रतम् टीका

 

  1. सिद्धान्तपटल

  2. ज्ञानलीला

  3. योग चिंतामणि

  4. सतनामपंथी

 

  1. नरसी जी रो मायरो

  2. गीत गोविन्द का टीका

  3. राग गोविन्द

  4. मीरा बाई का मल्हार

  5. राग सोरठा

  6. सत्यभामा रो रूसणो

  7. रूक्मणी मंगल

 

 

 

  1. विनयपत्रिका (तुलसी का अंतिम ग्रंथ)

  2. वैरागय संदीपनी

  3. दोहावली

  4. कवितावली & कृष्ण गीतावली

  5. गीतावली

  6. पार्वती मंगल

  7. जानकी मंगल

  8. रामलला नहछू

  9. बरवै रामायण

  10. हनुमान बाहुक

  11. रामाज्ञा प्रश्न

 

  1. सूरसागर – सबसे प्रसिद्ध रचना/अकबर के समय में रची गई थी।

  2. सूरसारावली – अनुक्रमणिका

  3. साहित्य लहरी

 

  1. सुबोधिनी 2. सिद्धान्त रहस्य

वल्लभाचार्य के शिष्य     विट्‌ठलनाथ के शिष्य

  1. कुंमनदास    1. गोविन्दस्वामी

  2. सूरदास        2. छीतस्वामी

  3. परमानंद दास           3. चतुर्भुज दास

  4. कृष्णदास     4. नंददास

 

  1. सुन्दरदास

  2. गरीबदास

  3. रज्जब जी

  4. मस्किनदास

  5. बालिन्द

  6. बखना

 

  1. गुरुनानक

  2. गुरुअंगद

  3. गुरु अमरदास

  4. गुरु रामदास

  5. गुरु अर्जुनदेव (आदिग्रंथ का संकलन कर्ता)

  6. गुरु हरगोविन्द

  7. गुरु हरराय

  8. गुरु हरकिशन

  9. गुरु तेगबहादुर

  10. गुरु गोविन्दसिंह (खालसा पंथ की स्थापना)

 

 

 

 

  1. श्यामलदास नो विवाह

  2. शृगारमाला

  3. हारमाला

  4. सूरतसंग्राम

  5. गोविन्दगमन

 

            महाराष्ट्र धर्म 2 भागों में विभाजित था।

1. बारकरी/वरकरी

    वार + करी

   परिक्रमा करने वाले लोग सौम्य स्वभाव के लोग, भावुक लोगो का धर्म, ये कृष्ण की पूजा करते थे।

   संस्थापक – संत तुकराम

2. धरकरी/ धरना

एक जगह ही रहने वाले रामदास पंथ के थे, राम की पूजा करते है, ये सैद्धान्तिक लोग थे।

धरकरी सम्प्रदाय के संस्थापक - रामदास

 

 

 

  1. मराठी भाषा में – श्रीमद्भगवतगीता का टीका इसे “ज्ञानेश्वरी” और  “भावार्थ दीपिका” कहा जाता। 

  2. अमृतानुभव

  3. चंगदेवप्रशस्ति

 

 

 

                   (ii) चतुश्लोकी भागवत       

                   (iii) भावार्थ रामायण

                   (iv) रूक्मणी स्वयंवर