भरतपुर का जाट वंश
- स्वतंत्रता के समय राजस्थान में दो जाट रियासतें भरतपुर तथा धौलपुर थी।
- लोक मान्यता के अनुसार, भरतपुर का नाम मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीरामचंद्र जी के छोटे भाई भरत के नाम पर रखा गया।
- लक्ष्मण, जाट वंश के कुल देवता है तथा इस वंश के राज चिह्न में लक्ष्मण का नाम अंकित किया जाता है।
- इस क्षेत्र में जाट शक्ति का उदय औरंगजेब के समय में हुआ। औरंगजेब ने जब हिंदू मंदिरों को तुड़वाया तथा जजिया कर लगाकर प्रताड़ित किया, तब इस क्षेत्र के जाट किसानों ने आंदोलन कर दिया।
गोकुला
- गोकुला तिलपट्ट गाँव, मथुरा का जमींदार था।
- जाटों ने इसके नेतृत्व में संगठित होकर औरंगजेब के विरूद्ध विद्रोह कर दिया। औरंगजेब ने हसन अली खाँ के नेतृत्व में सेना भेजकर इस विद्रोह को दबाया तथा गोकुला को बंदी बना दिया।
- गोकुला को बंदी बनाकर आगरा ले जाकर उस पर इस्लाम स्वीकार करने का दबाव बनाया गया, लेकिन मना करने पर आगरा की कोतवाली के सामने उसका एक-एक अंग काटकर फेंक दिया गया।
- इस दमन के पश्चात् एक बार के लिए जाट शांत हो गए।
राजाराम
- राजाराम, भज्जा के सात पुत्रों में सबसे बड़ा पुत्र था।
- उसने लूट-मार कर मुगलों को परेशान करना शुरू किया तथा छापामार पद्धति से युद्ध कर अपने क्षेत्रों पर वापस अधिकार कर लिया।
- राजाराम ने मार्च , 1688 ई. में आगरा में स्थित अकबर की कब्र को खोदकर हड्डियों को जला दिया एवं वहाँ रखा सारा सामान लूट लिया।
- 1688 ई. में आमेर के कच्छावा शासक बिसन सिंह व औरंगजेब के पौत्र बीदरबक्श के नेतृत्व में मुगल सेना ने राजाराम को उसके क्षेत्र में मार गिराया तथा इसका कटा सिर औरंगजेब के पास ले जाया गया , जहाँ पर औरंगजेब ने इसके कटे सिर के साथ बड़ा उत्सव मनाया।
चूड़ामन जाट
- चूड़ामन को जाट साम्राज्य का संस्थापक माना जाता है।
- चूड़ामन ने थून के किले का निर्माण करवाया व थून को अपनी राजधानी बनाया।
- फर्रुखशियर ने चूड़ामन को राव बहादुर की उपाधि दी।
बदनसिंह
- सवाई जयसिंह ने बदनसिंह को डीग की जागीर देकर ‘ब्रजराज’ की उपाधि दी एवं एक राजा की तरह उसका राजतिलक किया।
- इसने अपना राज्य भरतपुर से लेकर आगरा तक विस्तृत कर दिया। कुम्हेर, डीग एवं वैर में नए किलों का निर्माण करवाया।
- बदनसिंह ने ही सर्वप्रथम भरतपुर नामक रियासत का गठन किया, अत: बदनसिंह को ‘जाट राजवंश का वास्तविक का संस्थापक’ माना जाता है।
महाराजा सूरजमल (1756 – 64 ई.)
- सूरजमल को उसके पिता बदनसिंह ने अपनी जीते जी 1756 ई. में शासन सौंप दिया।
- सूरजमल को ‘जाट जाति का प्लेटो’ अथवा 'जाटों का अफलातून' कहा जाता है।
- सूरजमल के समय जाटों की शक्ति अपने चरमोत्कर्ष पर थी। इसने जयपुर के ईश्वरी सिंह को सिंहासन पर बिठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 1754 ई. में भरतपुर पर हुए मराठा सरदार मल्हारराव होल्कर के आक्रमण को विफल किया।
- 1761 ई. अहमद शाह अब्दाली के विरूद्ध मराठों का साथ दिया।
- 1764 ई. में पठानों के आक्रमण से सूरजमल का देहांत हो गया।
जवाहर सिंह (1764-68 ई.)
- जवाहर सिंह के समय जाट शक्ति का पतन शुरू हो गया।
- इसने पेशेवर सेना का निर्माण करवाया। इसे मराठा, रूहेलों एवं राजपूतों से लगातार संघर्ष करना पड़ा।
- जवाहर सिंह की हत्या इसी के एक सैनिक ने कर दी।
रणजीत सिंह (1777-1805 ई.)
- इसने 29 सितंबर, 1803 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ संधि कर ली।
- दिसंबर, 1804 ई. में मराठा सेना नायक होल्कर को लेकर हुए विवाद के कारण अंग्रेज सेनापति लॉर्ड लेक ने भरतपुर पर आक्रमण कर दिया। पाँच माह तक लगातार जबरदस्त आक्रमणों के बावजूद अंग्रेज दुर्ग को नहीं जीत पाए। अंग्रेजों की इस हार के कारण भरतपुर का देशभर में नाम हुआ।