इतिहास

भाग - 03

- 1842 - कर्नाटक - रायचुर - लिंगसुगर नामक गाँव से कुछ पाषाणकालीन औजार जैसे - पत्थर के तीर फलक छुरे, वैदरणी, गण्डासा इत्यादि प्राप्त किये गए।

- इसी आधार पर इस सम्पूर्ण काल को पाषाणकाल कहा गया। पाषाणकाल - 'पत्थरों का युग'

- औजारो की बनावट के आधार पर सम्पूर्ण पाषाणकाल को 3 भागों में विभाजित किया गया है -

 

पुरा पाषाण काल

मध्य पाषाणकाल

नवपाषण काल

  • आदिमानव की उत्पत्ति
  • मानव की स्थिति दयनीय व यायावर
  • केवल शिकार पर निर्भर तथा शिकार हेतु पत्थरों के औजार बनाए, जिनका आकार बहुत बड़ा था।
  • आदिमानव द्वारा सर्वप्रथम हस्तकुठार (Hand Axe) औजार  का निर्माण किया गया।
  • 1863 - मद्रास - पल्लवम् से Hand Axe के साक्ष्य
  • समुह में निवास नहीं करता था
  • केवल उपभोक्ता का जीवन यापन करता था।
  • इस काल के दौरान आदिमानव ने समुह में रहना प्रारम्भ किया।
  • सर्वप्रथम पालतु पशु श्वान (कुत्ता) को बनाया
  • औजारों का आकार छोटा था। इन औजारो को सुक्ष्म पाषाण (1-4 इंच) (marcro liths) कहा गया।

Notes -  मध्यपाषाण काल को भारतीय इतिहास का संक्रमणकालीन चरण कहा जाता है।

  • मानव ने आग का आविष्कार किया (आग का प्रयोग अपने सामान्य जीवन में जैसे - भोजन पकाने, जंगल साफ करने इत्यादि में)।
  • स्थाई बसावट के साक्ष्य - मेहरानगढ़ (पाक) से मिलते है। यही से खेती बाड़ी या कृषि के साक्ष्य प्राप्त
  • पहिये का आविष्कार -  (इस काल का सबसे क्रांतिकारी आविष्कार)
  • आदिमानव ने सर्वप्रथम धातु के रूप में ताँबे का अविष्कार किया।
  • अनाज के भण्डारण हेतु उसने मृदभाण्ड बनाए।
  • इस काल में आदिमानव उत्पादक व उपभोक्ता था
  • इस प्रकार वह खाद्य सग्रांहक बना।













प्राचीनतम           -     कोल्डीहवा (उत्तरप्रदेश) सर्दी में ठंडी हवा

प्रथम                  -    लोथल (गुजरात) सबसे पहले चावल थल पर 

जले                    -     कालीबंगा (राजस्थान) से जला हुए चावल काला - कालीबंगा

  1. प्राचीनतम - बुर्जहोम (जम्मू & कश्मीर)

  2. प्रथम - रोपड़ (पंजाब)

Q.  भारत में नवपाषाणकाल का स्थल जहाँ हडि्डयों के साक्ष्य मिले?

Ans.  'चिरान्द' नामक स्थल से हडि्डयो से बने औजार / आभूषण (बिहार) मिले हैं।

         भारत में आदिमानव के साक्ष्य - शिवालिक की पहाड़ियों से मिले है, जिन्हें रामपिथिकस कहा गया।