इतिहास
भाग - 03
- 1842 - कर्नाटक - रायचुर - लिंगसुगर नामक गाँव से कुछ पाषाणकालीन औजार जैसे - पत्थर के तीर फलक छुरे, वैदरणी, गण्डासा इत्यादि प्राप्त किये गए।
- इसी आधार पर इस सम्पूर्ण काल को पाषाणकाल कहा गया। पाषाणकाल - 'पत्थरों का युग'
- औजारो की बनावट के आधार पर सम्पूर्ण पाषाणकाल को 3 भागों में विभाजित किया गया है -
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पुरा पाषाण काल |
मध्य पाषाणकाल |
नवपाषण काल |
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Notes - मध्यपाषाण काल को भारतीय इतिहास का संक्रमणकालीन चरण कहा जाता है। |
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चावल (धान) के साक्ष्य -
प्राचीनतम - कोल्डीहवा (उत्तरप्रदेश) सर्दी में ठंडी हवा
प्रथम - लोथल (गुजरात) सबसे पहले चावल थल पर
जले - कालीबंगा (राजस्थान) से जला हुए चावल काला - कालीबंगा
श्वान (कुत्ते) के साक्ष्य -
प्राचीनतम - बुर्जहोम (जम्मू & कश्मीर)
प्रथम - रोपड़ (पंजाब)
भारतीय चित्रकला के प्राचीनतम साक्ष्य - भीमबेटका (मध्यप्रदेश)
प्राचीनतम कृषक बस्ती - मेहरगढ़ (पाक)
बकरे के साक्ष्य - हडप्पा
Q. भारत में नवपाषाणकाल का स्थल जहाँ हडि्डयों के साक्ष्य मिले?
Ans. 'चिरान्द' नामक स्थल से हडि्डयो से बने औजार / आभूषण (बिहार) मिले हैं।
आदिमानव की उत्पत्ति सम्पूर्ण संसार में अफ्रीका महाद्वीप में मानी जाती है, जिन्हें ऑस्ट्रेलोपिथिकस कहा गया।
भारत में आदिमानव के साक्ष्य - शिवालिक की पहाड़ियों से मिले है, जिन्हें रामपिथिकस कहा गया।