धार्मिक सुधार आन्दोलन

धर्म सुधार आन्दोलन क्यों -

1. वैदिक कर्मकाण्डी व्यवस्था को समाप्त कर समाज के नैतिक उत्थान हेतु

2. वर्ण व्यवस्था में सुधार लाने हेतु

3.  छूआछूत व अंधविश्वास, कर्मकाण्ड को समाप्त करने के लिए

Note : मुण्डकोपनिषद् में ‘यज्ञ को टूटी हुई नौका’ कहा गया है।

देश : धर्म सुधारक

चीन : कन्फ्यूसियस एवं लॉअत्से

ईरान : जरथुस्त्र

यूनान : प्लेटो, सुकरात, अरस्तु, परमानट्स जैसे दार्शनिक

भारत - महावीर व गौतम बुद्ध

बौद्ध धर्म

बौद्ध धर्म के सिद्धान्त :

(i) दु:ख

(ii) दु:ख समुदाय

(iii) दु:ख निरोध

(iv) दु:ख निरोध गामिनी प्रतिपदा।

प्रतीत्य समुत्पाद (द्वादश निदान कारणवाद) बुद्ध के उपदेशों का सार है जिसका अर्थ है कि सभी वस्तुएँ कार्य और कारण पर निर्भर करती है।

बौद्ध धर्म के सम्प्रदाय :

बौद्ध संगीति
प्रथम बौद्ध संगीति

समय

483 ई.पू.

स्थान

सप्तपर्णि गुफा (राजगृह)

शासनकाल

अजातशत्रु

अध्यक्ष

महाकस्सप

कार्य

बुद्ध के उपदेशों को सुत्तपिटक तथा विनयपिटक में अलग - अलग संकलन किया गया।

द्वितीय बौद्ध संगीति

समय

383 ई.पू.

स्थान

वैशाली

शासनकाल

कालाशोक

अध्यक्ष

सब्बाकामी (साबकमीर)

कार्य

भिक्षुओं में मतभेद के कारण स्थविर एवं महासंघिक में विभाजन

तृतीय बौद्ध संगीति

समय

251 ई.पू.

स्थान

पाटलिपुत्र

शासनकाल

अशोक

अध्यक्ष

मोग्गलिपुत तिस्स

कार्य

अभिधम्मपिटक का संकलन

चतुर्थ बौद्ध संगीति

समय

प्रथम शताब्दी ई.

स्थान

कुंडलवन (कश्मीर)

शासनकाल

कनिष्क

अध्यक्ष

वसुमित्र (अश्वघोष उपाध्यक्ष)

कार्य

'विभाषाशात्र' टीका का संस्कृत में संकलन।

बौद्ध संघ का हीनयान एवं महायान सम्प्रदायों में विभाजन

बौद्ध धर्म के पतन के कारण :

जैन धर्म:-

Note : ऋग्वेद में दो जैन तीर्थकरों ऋषभदेव (आदिनाथ) व अरष्टिनेमी का उल्लेख।

Note : ऋग्वेद व यजुर्वेद दोनों में केवल ऋषभदेव का उल्लेख है।

वर्द्धमान महावीर :

जैन धर्म के सिद्धान्त :

अन्य धार्मिक सम्प्रदाय

सम्प्रदाय

संस्थापक

आजीवक

मक्खलिपुत्र गोशाल

अक्रियवादी

पूरणकस्सप

उच्छेदवादी

अजित केसकंबलिन

नित्यवादी

पकुधा कच्चायन

संदेहवादी

संजय वेलट्ठलिपुत्त

त्रिरत्न :

    1.  सम्यक् दर्शन - सत में विश्वास।

    2.  सम्यक् ज्ञान - वास्तविक ज्ञान।

    3.  सम्यक् आचरण - सांसारिक विषयों में उत्पन्न सुख - दु:ख के प्रति समभाव।

सम्मेलन :
प्रथम जैन सम्मेलन

स्थान

पाटलिपुत्र

समय

300 ई.पू.

अध्यक्ष

स्थूलभद्र (शासक चन्द्रगुप्त मौर्य)

कार्य

जैन धर्म के 12 अंगों का संपादन, जैन धर्म का

श्वेतांबर एवं दिगम्बर में विभाजन

द्वितीय जैन सम्मेलन

स्थान

वल्लभी (गुजरात)

समय

512 ई.

अध्यक्ष

देवर्धा श्रमाश्रवण

कार्य

धर्म ग्रंथों का अंतिम संकलन

कर लिपिबद्ध किया गया ।

जैन सम्प्रदाय :

भागवत धर्म

वैष्णव धर्म :

विष्णु के दस अवतार :

1. मत्स्य, 2. कूर्म, 3. वराह, 4. नृसिंह, 5. वामन, 6. परशुराम, 7. रामावतार, 8. कृष्णावतार, 9. बुद्ध, 10. कल्कि।

षडदर्शन :

दर्शन

प्रवर्तक

सांख्य

कपिल

भौतिकवादी

चार्वाक

योग

पतंजलि

न्याय

गौतम

पूर्व मीमांसा

जैमिनी

उत्तर मीमांसा

बादरायण

वैशेषिक

कणाद

प्रमुख मत एवं आचार्य

मत

आचार्य

विशिष्टाद्वैत

रामानुज

द्वैताद्वैत

निम्बार्क

शुद्धाद्वैत

वल्लभाचार्य

अद्वैतवाद

शंकराचार्य

रामानुज ने ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखा जिसे “श्रीभाष्य” कहा जाता है।

शैव धर्म

नयनार :

पाशुपत सम्प्रदाय :

कालामुख सम्प्रदाय :

कापालिक एवं लिंगायत सम्प्रदाय :