राजस्थान में औद्योगिक क्षेत्र
राजस्थान में औद्योगिक क्षेत्र-
- स्वतंत्रता प्राप्ति के समय राजस्थान में मात्र 11 वृहद उद्योग- 7 सूती वस्त्र, 2 सीमेंट व चीनी उद्योग तथा 207 पंजीकृत फैक्ट्रियाँ थी। वर्ष 1978 में केन्द्र प्रवर्तित योजना के तहत जिला स्तर पर जिला उद्योग केन्द्रों की स्थापना कि गई। अगस्त, 2016 में सुजानगढ़ (चुरू) एक नया उप जिला उद्योग खोला गया है। अत: वर्तमान में राज्य में 36 जिला उद्योग केन्द्र व 8 उपकेन्द्र(सुजानगढ़, ब्यावर, फालना, आबुरोड़, बालोतरा, किशनगढ़, मकराना व नीमराना) कार्यरत है। राज्य का प्रमुख ध्येय राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उधमों की स्थापना को बढ़ावा देना और उन्हें प्रोत्साहित करना है, तथा उनके द्वारा प्रतिस्पर्द्धी क्षमता स्तर प्राप्त करने के लिए एक सक्षम अनुकूल वातावरण का निर्माण करना है।
औद्योगिक आधारभूत संरचना विकास हेतु राजकीय सहायता-
राजस्थान की औद्योगिक नीतियाँ-
- राजस्थान सरकार ने वर्ष 2003 से पहले 4 औद्योगिक नीतियाँ घोषित की थी जो इस प्रकार है-
प्रथम औद्योगिक नीति-
- प्रथम औद्योगिक नीति 24 जून, 1978 को घोषित की गयी।
- इस नीति के अर्न्तगत रोजगारोन्मुख उद्योग यथा-खादी, ग्रामोद्योग, हथकरघा व हस्तशिल्प के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई व असंतुलनों को दूर करने के प्रयास किए गए।
द्वितीय औद्योगिक नीति-
- द्वितीय औद्योगिक नीति दिसम्बर,1990 को घोषित व अप्रेल, 1991 से लागू की गयी।
- इस नीति के अर्न्तगत द्वितीय नीति में खनन, कृषिगत व अन्य साधनों के अधिकतम उपयोग, रोजगार संवर्द्धन तथा औद्योगिकीकरण के माध्यम से राज्य के वित्तीय साधन बढ़ाने पर जोर दिया गया।
तृतीय औद्योगिक नीति-
- तृतीय औद्योगिक नीति 15 जून,1994 को घोषित की गयी।
- इस नीति के अर्न्तगत राज्य का तीव्र गति से औद्योगीकरण का लक्ष्य रखा गया जिसमें मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए निजी क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना को प्रोत्साहन दिया गया।
चतुर्थ औद्योगिक नीति-
- चर्तुथ औद्योगिक नीति 4 जून,1998 को घोषित की गयी।
- इस नीति का उद्देश्य राज्य को कुछ चुने हुए क्षेत्रों में विनियोग की दृष्टि से सर्वोच्च प्राथमिकता वाला राज्य बनाना था। इस हेतु समूहों के विकास की रणनीति अपनाई गई।
- राज्य सरकार ने प्रदेश के लिए ‘नई औद्योगिक नीति’ तैयार करने के लिए डा. के.के पाठक की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समीति बनाने की घोषणा 17 जनवरी, 2019 में की गई।
राजस्थान मे निवेश प्रोत्साहन योजनाएं-
राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना, 2003-
- राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना-2003, 28 जुलाई, 2003 को प्रभावी हुई तथा इस योजना का मुख्य उद्देश्य निवेश में वृद्धि एवं रोजगार सृजन करना। यह नीति 31 मार्च, 2008 तक लागू रही।
राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना, 2010-
- राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना-2010, अगस्त, 2010 को प्रभावी हुई तथा इस योजना का मुख्य उद्देश्य निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया।
राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना, 2014-
- राजस्थान में नये निवेश को प्रोत्साहन एवं अतिरिक्त रोजगार सृजन हेतु राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना-2014 को राज्य मंत्रीमण्डल में अनुमोदन किया।
- राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना-2014, 8 अक्टूबर, 2014 से 31 मार्च, 2021 तक प्रभावी रहेगी।
- इस योजना के माध्यम से नए उपक्रम, स्थापित उपक्रम जो विस्तार करना चाहें, रूग्ण इकाइयों के पुनर्जीवन एंव चयनित सेवाओं में किए गये निवेश पर लागु होगी।
- राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना-2014 के अंतर्गत निम्न अनुसार छूट/लाभ के प्रावधान किये गए हैं-
- मुद्रांक शुल्क एवं भू-रूपांतरण शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट।
- विद्युत कर, मण्डी शुल्क एवं भूमि कर में 50 प्रतिशत की छूट। (7 वर्षों के लिए)
- 30 प्रतिशत निवेश अनुदान व 20 प्रतिशत रोजगार सृजन अनुदान। (7 वर्षों के लिए)
- टेक्सटाईल क्षेत्र के लिए 5 से 7 प्रतिशत ब्याज अनुदान 5 वर्ष तक।
- टेक्सटाईल, एग्रो प्रोसेसिंग, फूड प्रोसेसिंग एवं बायोटेक्नोलॉजी इकाइयों को ईटीपी स्थापना पर 20 प्रतिशित पूँजी अनुदान।
राजस्थान विजन 2020
- राज्य सरकार के दस्तावेज ’राजस्थान विजन 2020’ के अनुसार सकल राज्य घरेलू उत्पाद की वार्षिक वद्धि दर को बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने और इसे बनाए रखने के लिए सार्वजनिक- निजी पूँजी निवेश में वृद्धि आवश्यक है। इस लक्षित विकास दर को अर्जित करने के लिए वही कहीं भी सभंव होगा।
राजस्थान विशेष निवेश क्षेत्र अधिनियम, 2016-
- राज्य भर में एवं डी.एम.आई.सी. क्षेत्र में “राजस्थान विशेष निवेश क्षेत्र अधिनियम, 2016” के नाम से एक विशेष कानून 26 अप्रैल, 2016 केा अधिसूचित किया गया और इस अधिनियम के अन्तर्गत बनाये गये नियमों को भी अधिसूचित किया गया है।
- राजस्थान विशेष निवेश क्षेत्र के विकास हेतु प्रवर्तन एवं निगरानी बाबत एक राज्य स्तरीय “राजस्थान विशेष निवेश क्षेत्र बोर्ड” का गठन किया गया है।
एकल खिड़की स्वीकृति/अनुमति प्रणाली (सिंगल विण्डो क्लियरेन्स सिस्टम)
- इस खिड़की का प्रमुख उद्देश्य उद्यमियों को भूमि, पानी, बिजली, रजिस्ट्री, सलाह, वित्तीय सहायता व ऋण जैसी सुविधाएँ एक ही जगह सुलभ करवाई जाएंगी।
- एकल खिड़की स्वीकृति/अनुमति प्रणाली (सिंगल विण्डो क्लियरेन्स सिस्टम) में प्रारंभिक तौर पर 11 विभागों की 56 ऐसी सेवाएँ सम्मिलित थीं, जो व्यापार/उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक थीं।
पंचवर्षीय योजनाओं के अंतर्गत औद्योगिक विकास
- राजस्थान के निर्माण के प्रारंभिक वर्ष में प्रशासनिक व वित्तीय समस्याओं के कारण वित्तीय संसाधन सीमित थे और उनका भी उपयोग औद्योगिक विकास के लिए न्यायोचित रूप से नहीं किया जा सका। फिर भी राज्य में विभिन्न आकारों की लगभग 95 औद्योगिक इकाईयाँ कार्यरत थीं, जिन्हें राज्य के आकार तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से पर्याप्त नहीं कहा जा सकता है। परंतु धीरे-धीरे इस स्थिति में परिवर्तन आने लगा है। सरकार ने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत राज्य के औद्योगिक विकास के लिए पर्यत्न किए हैं, जिनका संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है-
प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-1956) –
- प्रथम पंचवर्षीय योजना में औद्योगिक कार्यक्रमों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-1961) –
- औद्योगिक सर्वेक्षण का कार्य करवाया गया, भरतपुर में वैगन फैक्ट्री, सवाई माधोपुर में सीमेंट फैक्ट्री अस्तित्व में आई।
- गंगानगर शुगर मिल सरकारी प्रभुत्व में आई।
- इसके अतिरिक्त जयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, कोटा, जोधपुर, भरतपुर, श्रीगंगानगर, उदयपुर में औद्योगिक बस्तियों का निर्माण किया गया।
तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961-1966) –
- सूती कपड़ा मिलें – किशनगढ़, भीलवाड़ा। वूलटोप्स फैक्ट्री – कोटा। वूलन स्पिनिंग मिल – जोधपुर। सोडियम सल्फेट संयंत्र – डीडवाना में स्थापित किए गए।
सातवीं पंचवर्षीय योजना –
- इस योजना में मैसर्स अरावली फर्टिलाइजर्स लिमिटेड को गैस पर आधारित खाद संयंत्र की स्थापना गडेपान (कोटा) हेतु स्वीकृति।
- जयपुर में जैम स्टोन इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना की गई। जयपुर में एक कंटेनर फ्रेट स्टेशन की स्थापना की गई।
- नए उद्योगों के लिए राज्य पूंजी विनियोजन अनुदान योजना 1990 प्रारंभ की गई।
आठवीं पंचवर्षीय योजना –
- कोटा, जयपुर, फालना, चित्तोड़गढ़, उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर आदि राजस्थान में प्रमुख आद्योगिक केंद्र बने। जहाँ वर्ष 1951 में पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या 240 थी वह अब बढ़कर 10,509 हो गई।
- इस योजना में छोटे पैमाने के उद्योगों में निजी क्षेत्र का कुल विनियोग ₹1032.16 करोड़ था।
नौवीं पंचवर्षीय योजना –
- इस योजना में राज्य के बड़े व मध्यम उद्योगों में ₹27 हजार करोड़ निजी क्षेत्रों द्वारा नियोजित किए गए।
- इस योजना के अंतर्गत जो अन्य प्रयास किए गए, वे निम्न हैं –
- राज्य के शुद्ध घरेलू उत्पाद का 16% भाग निर्माण क्षेत्र से प्राप्त करना।
- राज्य के साधनों का अनुकूलतम प्रयोग करना।
- रोजगार के अतिरिक्त पर्याप्त अवसर प्रदान करना।
- राज्य के उद्योगों की तकनीकी क्षमता में वृद्धि करना।
- मानवीय संसाधनों के विकास पर ध्यान देना।
दसवीं पंचवर्षीय योजना –
- इस योजना में उद्योग तथा खनिज विकास के लिए ₹1113.56 करोड़ का प्रावधान किया गया।
ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना –
- इस योजना में खनिज एवं उद्योगों के विकास हेतु कुल राशि का 1.03% खर्च करने का प्रावधान किया गया था।
बारहवीं पंचवर्षीय योजना –
- इस योजना में खनिज व उद्योग के लिए कुल राशि का 0.50% खर्च करने का प्रावधान किया गया।
राज्य स्तरीय औद्योगिक संस्थाएँ-
निवेश संवर्द्धन ब्यूरो (BIP) –
- निवेश संवर्द्धन ब्यूरो राजस्थान की निवेश संवर्द्धन एजेंसी है, जो राज्य में निवेश प्रस्तावों की स्थापना हेतु सुविधा प्रदान करती है।
- बी.आई.पी. सक्रिय रूप से विभिन्न वर्गों में उपलब्ध निवेश अवसरों की ओर घरेलू एवं विदेशी कंपनियों के संभावित निवेशकों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करता है और राज्य में निवेश को प्रोत्साहित करता है।
- बी.आई.पी. द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 (दिसंबर, 2019 तक) के दौरान राज्य में निवेश के अवसरों का प्रदर्शन करने के लिए निम्नलिखित कार्यक्रमों में भाग लिया –
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कार्यक्रम का नाम
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आयोजित तिथि
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आयोजित स्थल
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इनवेस्ट नॉर्थ – 2019
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29-30 अगस्त, 2019
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बेंगलुरू
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टेकोटैक्स – 2019
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29-31 अगस्त, 2019
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मुम्बई
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मेक इन इंडिया वर्कशॉप – 2019
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30 अक्टूबर, 2019
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नई दिल्ली
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आई.आई.टी.एफ. – 2019
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14-27 नवंबर, 2019
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नई दिल्ली
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एम.एस.एम.ई. कॉनक्लेव – 2019
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19 दिसंबर, 2019
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जयपुर
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- इसके अलावा एकल खिड़की एवं एम.एस.एम.ई. अधिनियम के प्रचार तथा शिकायतों के निवारण हेतु संभागीय मुख्यालयों पर उद्योग विभाग के समन्वय से दिसंबर, 2019 तक सेमिनार आयोजित किए गए।
राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम लिमिटेड (रीको) –
- राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम लिमिटेड (रीको), राज्य के औद्योगिक विकास को गति देने वाली शीर्ष संस्था है।
- यह राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए औद्योगिक आधारभूत सुविधाओं को विकसित करने एवं वित्तीय सहायता प्रदान करने में भी मदद करता है।
रीको द्वारा विकसित विशेष पार्क्स-
- एग्रो फूड पार्क्स- रीको द्वारा ₹49.65 करोड़ की लागत से चार एग्रो फूड पार्क्स क्रमश: बोरानाडा (जोधपुर),
कोटा, अलवर एवं श्रीगंगानगर में विकसित किए गए हैं, रीको द्वारा औद्योगिक क्षेत्र तिंवरी (जोधपुर) में लगभग 33 हेक्टेयर भूमि पर “कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र” बनाया जाएगा।
- जापानी क्षेत्र या जोन- रीको द्वारा नीमराना औद्योगिक क्षेत्र, जिला अलवर, राजस्थान में जापानी क्षेत्र स्थापित किया गया है। वर्तमान में इस पार्क में 45 इकाइयां कार्यरत है और 7 इकाइयां निर्माणाधीन हैं। एक अन्य जापानी क्षेत्र अलवर जिले के घिलोठ औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 534 एकड़ भूमि पर स्थापित किया गया है।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज)- रीको द्वारा दो विशेष आर्थिक क्षेत्र जेम्स एण्ड ज्वैलरी प्रथम एवं द्वितीय, सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र जयपुर में स्थापित किए गए हैं। महिन्द्रा ग्रुप ने रीको के साथ मिलकर महिन्द्रा वर्ल्ड सिटी (जयपुर) में ₹ 4,461 करोड़ निवेश के साथ बहुउत्पादन विशेष आर्थिक क्षेत्र की स्थापना की है।
निगम द्वारा प्रारम्भ की गई महत्वपूर्ण गतिविधियां-
इण्डिया स्टोनमार्ट-2019-
- इण्डिया स्टोनमार्ट-2019 के 10वें संस्करण का आयोजन 31 जनवरी से 3 फरवरी 2019 के मध्य जयपुर में किया गया, जिसमें 484 राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शकों (एक्जिबिटर्स) द्वारा अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया गया तथा बड़ी संख्या में विदेशी क्रेता/आपूर्तिकर्ताओं ने भाग लिया।
ग्लोबल स्टोन टेक्नोलॉजी फोरम-2019-
- सेन्टर ऑफ डवलपमेंट ऑफ स्टोन्स (सी.डी.ओ.एस.) ने ग्लोबल स्टोन टेक्नॉलोजी फोरम (जी.एस.टी.एफ) के सहयोग से एक अन्तर्राष्ट्रीय पत्थर प्रौद्योगिकी सम्मेलन (8वां संस्करण) का आयोजन 19 से 20 दिसम्बर, 2019 को उदयपुर, राजस्थान में किया गया।
- यह फोरम आयामी पत्थर क्षेत्र में नवीनतम और अभिनव तकनीकी प्रवृत्तियों पर ध्यान केन्द्रित करता है।
- ग्लोबल स्टोन टेक्नॉलोजी फोरम (जी.एस.टी.एफ.) आयामी पत्थर के उपयोगकर्ताओं एवं उत्पादकों के अलावा अन्य हितधारों जैसे- प्रौद्योगिकी एंव मशीनरी आपूर्तिकर्ताओं, आर्किटेक्क्ट्स, इंजीनियर्स और बिल्डर्स आदि ,द्वारा सभी प्रतिभागियों के लाभ हेतु परस्पर संवाद करने एवं अपने अनुभव को साझा करने के लिए एक आदर्श मंच है।
राजस्थान लघु उद्योग निगम लिमिटेड (राजसीको)-
- राजस्थान लघु उद्योग निगम लिमिटेड की स्थापना लद्यु उद्योगों एवं कारीगरों को सहायता तथा उनके द्वारा उत्पादित वस्तुओं के समुचित विपणन की सुविधा प्रदान करने के लिए जून, 1961 में की गई।
- निगम राज्य के समृद्ध हस्तशिल्प को उत्थान और बढ़ावा देने के उद्देश्य से कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से कारीगरों को प्रत्यक्ष लाभ प्रदान करता है।
राजस्थान वित्त निगम (आर. एफ. सी.)-
- राजस्थान वित्त निगम की स्थापना राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 के अन्तर्गत वर्ष 1955 में की गई।
- वित्त निगम की स्थापना का मुख्य उद्देश्य राज्य में नवीन उद्योगों की स्थापना, विद्यमान उद्योगों के विस्तारीकरण एवं नवीनीकरण हेतु ₹20 करोड़ तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
- निगम द्वारा उद्यमियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए निम्नांकित ऋण योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं-
- सामान्य परियोजना ऋण योजना
- सेवा क्षेत्र हेतु योजना
- विशेष सेवा क्षेत्र योजना
- एकल खिड़की योजना (₹200 लाख तक परियोजना लागत की लघु एवं एसएसआई इकाईयों के लिए)
- अर्हता प्राप्त पेशेवरों हेतु योजना
- स्विच ओवर ऋण योजना
- प्राकृतिक आपदाओं हेतु योजना
- सौर ऊर्जा परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए योजना
दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर-
- दादरी (उत्तर प्रदेश) और जवाहर लाल नेहरू पोर्ट, मुम्बई के बीच एक वैस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा हैं, जिसकी कुल लम्बाई लगभग 1,483 कि. मी. है। जिसका लगभग 39 प्रतिशत भाग राजस्थान से होकर गुजरता है।
- दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना भारत की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य नए औद्योगिक शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करना एवं आधारभूत ढांचे को अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी के रूप में परिवर्तित करना है।
- फ्रेट कॉरिडोर के दोनों तरफ लगभग 150 किमी. के प्रभाव क्षेत्र को दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में विकसित किये जाने हेतु चयन किया गया है।
- प्रथम चरण में खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र (के.बी.एन.आई.आर.) एवं जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र (जे.पी.एम.आई.ए.) को विकसित किया जा रहा है।
खादी एवं ग्रामोद्योग-
- खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की स्थापना असंगठित क्षेत्र के कारीगरों को रोजगार प्रदान करने, उच्च गुणवत्तायुक्त उत्पादों के उत्पादन में सहायता प्रदान करने, दस्तकारों को प्रशिक्षण प्रदान करने और आत्मनिर्भरता की भावना जागृत करने के लिए की गई।
राजस्थान में खनिज क्षेत्र-
राजस्थान में खनिज संसाधन-
- राजस्थान भू-सम्पदा के दृष्टकोण से भी विशिष्ट है। देश में खनिजों की उपलब्धता और विविधता के मामले में राजस्थान सर्वाधिक समृद्ध राज्यों में से एक है। यहां 81 विभिन्न प्रकार के खनिजों के भण्डार हैं। इनमें से वर्तमान में 57 खनिजों का खनन किया जा रहा है।
- राजस्थान सीसा एवं जस्ता अयस्क, सेलेनाईट और वॉलेस्टोनाइट का एकमात्र उत्पादक राज्य है।
- देश में चाँदी, केल्साइट और जिप्सम का लगभग पूरा उत्पादन राजस्थान में होता है।
- राजस्थान देश में बॉल क्ले, फॉस्फोराइट, ओकर, स्टिएटाइट, फेल्सफार एवं फायर क्ले का भी प्रमुख उत्पादक है।
राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड (आर.एस.एम.एम.एल )-
- राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड की स्थापना कम्पनी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के तहत 30 अक्टूबर, 1974 को की गई।
- आर.एस.एम.एम.एल का प्रमुख उद्देश्य लागत प्रभावी तकनीक का प्रयोग करते हुए खनित सम्पदा का आधुनिक तकनीकों से दोहन करना है।
तेल एवं प्राकृतिक गैस-
- संयुक्त राज्य अमेरिका एवं चीन के बाद भारत विश्व में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभेक्ता है। देश में विश्व का लगभग 5 प्रतिशत कच्चा तेल खपत होता है।
- राजस्थान भारत में कच्चे तेल का महत्वपूर्ण उत्पादक है। भारत में कच्चे तेल के कुल उत्पादन (34 एम.एम.टी.पी.ए.) में राज्य का योगदान लगभग 22-23 प्रतिशत (7.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष) है और यह बॉम्बे हाई, जो कि लगभग 40 प्रतिशत का योगदान देता है, के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
- राज्य में पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र निम्नलिखित 4 पेट्रोलीफेरस बेसिन के अन्तर्गत लगभग 1,50,000 वर्ग किमी. (14 जिलों ) क्षेत्र में विस्तृत है-
- बाड़मेर- सांचोर बेसिन- (बाड़मेर एवं जालौर जिले)
- जैसलमेर बेसिन- (जैसलमेर जिला)
- बीकानेर- नागौर बेसिन- (बीकानेर, नागौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ एवं चूरू जिले)
- विंध्ययन बेसिन – (कोटा, बारां, बून्दी, झालावाड़ जिले तथा भीलवाड़ा एवं चित्तौड़गढ़ जिलों का कुछ हिस्सा ) राज्य में।
- बाड़मेर से प्राकृतिक गैस का उत्पादन वर्ष 2012 से प्रारम्भ हुआ।
- जैसलमेर से प्राकृतिक गैस का उत्पादन वर्ष 1994 से प्रारम्भ हुआ।
- जैसलमेर जिले के बाघेवाला क्षेत्र से लगभग 30,981 बैरल भारी तेल का दोहन किया गया है। वर्तमान में, 130 से 140 बैरल प्रतिदिन भारी तेल का उत्पादन किया जा रहा है।
- मैसर्स फोकस एनर्जी द्वारा 8 जुलाई, 2010 से प्राकृतिक गैस का उत्पादन आरम्भ किया और वर्तमान में रामगढ़ विद्युत संयंत्र (110 मेगावाट एवं 160 मेगावाट) को आपूर्ति करने के लिए 2-3 लाख घनमीटर प्रतिदिन उत्पादन किया जा रहा है।
मंगला तेल क्षेत्र बाड़मेर
- मंगला तेल क्षेत्र से खनिज तेल का व्यावसायिक उत्पादन 29 अगस्त, 2009 से प्रारम्भ हुआ और वर्तमान में 12 क्षेत्रों यथा- मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या, सरस्वती, रागेश्वरी, कामेश्वरी एवं अन्य सेटेलाइट क्षेत्र से लगभग 1,40,000 बैरल्स खनिज तेल का प्रतिदिन उत्पादन किया जा रहा है।
राजस्थान रिफाईनरी परियोजना-
- 9 मिलियन टन वार्षिक क्षमता की राजस्थान रिफाईनरी सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्पलेक्स परियोजना के कार्य का शुभारम्भ 16 जनवरी, 2018 को पचपदरा, जिला बाड़मेर में किया गया।
- इस परियोजना में हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एच.पी.सी.एल.) एवं राजस्थान सरकार का संयुक्त उद्यम परियोजना में क्रमश: 74 प्रतिशत और 26 प्रतिशत की इक्विटी भागीदारी है।
- देश की प्रथम ऐसी परियोजना है, जिसमें रिफाईनरी पेट्रोकेमिकल कॉम्पलेक्स का सम्मिश्रण है।
- परियोजना में लागत- ₹43,129 करोड़ है।
- रिफाईनरी से निकलने वाले उत्पाद- बी.एस.-VI