प्रमुख बोलियाँ

-     21 फरवरी को राजस्थानी भाषा दिवस तथा 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है।

-     राजस्थान के संबंध में एक लोकोक्ति प्रचलित है- ‘पाँच कोस पर पानी बदले सात कोस पर बाणी’

-     राजस्थान की राजभाषा हिंदी तथा मातृभाषा राजस्थानी है।

-     राजस्थानी बोलियों को सर्वप्रथम उल्लेख तथा वैज्ञानिक वर्गीकरण जॉर्ज अब्राह्म ग्रियर्सन ने ‘लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया’ में किया।

कुवलयमाला :–

पिंगल शिरोमणीकवि कुशललाभ (मारवाड़ी भाषा का उल्लेख)

आइने-अकबरीअबुल फज़ल (मारवाड़ी भाषा का उल्लेख)

कर्नल जेम्स टॉडदी एनल्स एण्ड एंटीक्वीटिज ऑफ राजस्थान (1829ईस्वी)

जॉर्ज थॉमसक्षेत्र के लिए सर्वप्रथम (1805ईस्वी) राजपुताना शब्द का प्रयोग

जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सनभाषा के लिए सर्वप्रथम राजस्थान शब्द का प्रयोग (वर्ष 1912)

राजस्थानी भाषा उत्पत्ति :-

राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति शौरसेनी प्राकृत के गुर्जरी अपभ्रंश से हुई।


 

राजस्थानी भाषा की प्रमुख बोलियाँ :-

1. मारवाड़ी बोली:- मेवाड़ी, बागड़ी, शेखावाटी, गोड़वाड़ी, थली, नागौर, देवड़ा वाटी, खैराडी

उत्पत्ति – 8वीं सदी में शौरसेनी प्राकृत के गुर्जरी अपभ्रंश से

प्राचीन नाम मरुभाषा

प्राचीनतम प्रमाण – कुवलयमाला ग्रन्थ

क्षेत्र – जोधुपर के आसपास का क्षेत्र (पाली, जैसलमेर)

अन्य क्षेत्र – नागौर, बाड़मेर, बीकानेर, जालोर, सिरोही

यह राज्य में सर्वाधिक बोली जाने वाली बोली है।

साहित्यिक रूप – डिंगल – प्राचीन जैन साहित्य और मीराबाई के पद इसी भाषा में हैं।

मारवाड़ी बोली मधुर व मीठी बोली हैं (कर्णप्रिय)

2. ढूँढाड़ी बोली:- तोरावाटी, राजावाटी, नागर चोल, काठेड़ी, चौरसी, उदयपुरवाटी, हाड़ौती, अजमेरी, किशनगढ़ी

उपनाम – झाड़शाही बोली/जयपुरी बोली

क्षेत्र – जयपुर, आमेर, दौसा, टोंक, किशनगढ़

इस बोली पर ब्रजभाषा और गुजराती भाषा का प्रभाव हैं।

ढूँढाड़ी बोली का सबसे प्राचीतम प्रमाण 18वीं सदी के ग्रन्थ 'आठ देस गूजरी' नामक ग्रन्थ में मिलता है।

उपबोलियाँ :-

1. तोरावाटी बोली – कांतली नदी का अपवाह क्षेत्र तोरावाटी प्रदेश कहलाता है यह इस प्रदेश में बोली जाने वाली भाषा है।

क्षेत्र – जयपुर व सीकर का सीमार्वती क्षेत्र

2. किशनगढ़ी – किशनगढ़ के आस-पास

3. अजमेरी – अजमेर जिले के गाँवों की बोली

4. राजावाटी – सवाई माधोपुर – जयपुर के सीमावर्ती क्षेत्र में बोली जाने वाली बोली

5. कोठड़ी – जयपुर-दौसा का सीमावर्ती क्षेत्र में

6. चौरसी – बूँदी के क्षेत्र में

7. नागर चोल – टोंक-जयपुर के सीमावर्ती क्षेत्र में

8. उदयपुर वाटी – झुंझुनूँ-जयपुर के सीमावर्ती क्षेत्र में

9. हाड़ौती – ढूँढाड़ी की उपबोली।

10. क्षेत्र – हाड़ौती क्षेत्र – कोटा, बूँदी, बाराँ, झालावाड़।

11. कवि सूर्यमल्ल मिश्रण ने अपने काव्य ग्रन्थों में इसी बोली का प्रयोग किया हैं।

12. एम. केलांग ने 1875 ईस्वी में अपनी पुस्तक ‘हिन्दी ग्रामर’ में हाड़ौती शब्द का भाषा के अर्थ में सर्वप्रथम प्रयोग किया।

  1. मेवाती बोली :-

क्षेत्र – अलवर व भरतपुर (मेवात क्षेत्र)

मेव जाति के मुसलमानों द्वारा बोली जाती है।

उत्पत्ति/उद्गम/विकास की दृष्टि से यह पश्चिमी हिन्दी और राजस्थानी बोली के मध्य सेतु का कार्य करती हैं।

चरणदासी संतों का साहित्य तथा लालदासी संतों का साहित्य इसी भाषा में हैं।

सहज प्रकाश, सोलह तिथि, दयाबोध तथा विनय मल्लिका ग्रन्थ इसी में रचित हैं।

  1. मालवी बोली :- रागडी, निमाड़ी

मधुर व कर्णप्रिय बोली

क्षेत्र – कोटा, भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़), प्रतापगढ़

दक्षिणी पूर्वी क्षेत्र – दक्षिणी पूर्वी राजस्थानी बोली

मालवा के राजपूतों द्वारा बोली जाने वाली भाषा।

उपबोली :-

निमाड़ी बोली – दक्षिणी राजस्थान + उत्तरी मालवा क्षेत्र में

उपनाम – दक्षिणी राजस्थानी बोली – डूँगरपुर + बाँसवाड़ा

रांगड़ी बोली – मालवी + मारवाड़ी का मिश्रण

मालवा के राजपूतों की कर्कश बोली

  1. अहीरवाटी/राठी बोली :-

अलवर मुंडावर व बहरोड़ तहसील का क्षेत्र

राठ क्षेत्र – हीरावाल जाति का निवास क्षेत्र

राठी बोली/हीरावल/अहीरवाटी

जयपुर की कोटपुतली तहसील का क्षेत्र

यह बोली हरियाणा की बांगरू और राजस्थानी की मेवाती बोली के मध्य बोली जाती है।

जोधराज का हम्मीर महाकाव्य तथा अलवर के रसखान अलीबख्श के ख्याल नाट्य इसी भाषा में लिखे हुए हैं।

प्रमुख उपबोलियाँ :-

  1. मेवाड़ी बोली :-

मेवाड़ क्षेत्र में – उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़

राजस्थान की दूसरी सबसे प्राचीन बोली तथा दूसरी महत्वपूर्ण बोली

महाराणा कुम्भा ने विजय स्तम्भ पर इसी भाषा में नाटक लिखे हैं।

  1. थली बोली :- बीकानेर के आस-पास बोली जाती है।

  2. खैराड़ी :- ढूँढाड़ी, मेवाड़ी और हाड़ौती का मिश्रण

केन्द्र – बूँदी

मीणाओं की प्रिय बोली

  1. वागड़ी :- डूँगरपुर तथा बाँसवाड़ा में बाली जाने वाली

प्रभाव – मेवाड़ी तथा गुजराती बोली का

उपबोली – भीली बोली

भीलों की प्रिय बोली

  1. शेखावाटी :- सीकर, चुरु व झुंझुनूँ क्षेत्र में

यह खड़ी व कर्कश बोली है।

  1. गौडवाड़ी :- गौडवाना प्रदेश में (लूणी नदी के खारे पानी का अपवाह क्षेत्र )

जालोर, पाली, सिरोही

प्रमुख केन्द्र – बाली (पाली)

इस बोली में ग्रन्थ – बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह का)

  1. देवड़ावाटी :- सिरोही के देवड़ा शासकों की बोली

क्षेत्र – सिरोही

उपनाम – सिरोही बोली