परिवहन

सड़क परिवहन

      - भारत में प्राचीनकाल से सड़क परिवहन (Road Transport) का अधिक महत्त्व रहा है। भारत की सड़क प्रणाली विश्व की दूसरी सबसे बड़ी प्रणाली है। यहाँ प्रतिवर्ष सड़कों द्वारा 65% प्रतिशत माल ढुलाई और 80% सवारी यात्री तथा 70% भार यातायात का परिवहन किया जाता है। सड़कों का निर्माण एवं रख-रखाव रेल परिवहन की तुलना में सस्ता है और यह छोटी दूरियों की यात्रा के लिए अपेक्षाकृत अधिक अनुकूल होता है।

      - देश के सड़क नेटवर्क को पाँच भागों में बाँटा गया हैं-

      - राष्ट्रीय राजमार्ग/एक्सप्रेस मार्ग

      - राज्यों के राजमार्ग

      - जिला सड़कें

      - ग्रामीण सड़कें

      - सीमावर्ती सड़कें

      राष्ट्रीय राजमार्ग/एक्सप्रेस मार्ग

      - राज्यों की राजधानियों, बड़े-बड़े औद्योगिक नगरों तथा प्रमुख पोताश्रयों को मिलाने वाला यह मार्ग केन्द्र सरकार के नियन्त्रण में होता है, जिसका विकास तथा रख-रखाव का कार्य भारतीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) करता है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का प्रचालन वर्ष 1995 में हुआ था। राष्ट्रीय राजमार्ग़ों की लम्बाई देश की सड़कों की लम्बाई का मात्र 1.7% है, परन्तु देश के कुल यातायात का 40% इन्हीं राष्ट्रीय राजमार्ग़ों के माध्यम से होता है।

      राष्ट्रीय राजमार्गों का वितरण

      - हमारे देश में सड़कों का वितरण समरूप नहीं है। भू-भाग की प्रकृति तथा आर्थिक विकास का स्तर सड़कों के घनत्व के प्रमुख निर्धारक हैं। मैदानी क्षेत्र में सड़कों का निर्माण आसान एवं सस्ता होता है, जबकि पहाड़ी एवं पठारी क्षेत्रों में कठिन एवं महँगा होता है। इसलिए, मैदानी क्षेत्रों की सड़कें न केवल घनत्व, बल्कि सड़कों की गुणवत्ता की दृष्टि से अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों, बरसाती तथा वनीय क्षेत्रों की तुलना में अपेक्षाकृत बढ़िया होती है।

      - राष्ट्रीय राजमार्ग़ों की सर्वाधिक लम्बाई उत्तर प्रदेश (6,774 किमी) में पाई जाती है, इसके बाद राजस्थान (5585 किमी), तमिलनाडु (4832 किमी), मध्यप्रदेश (4670 किमी) और आन्ध्रप्रदेश (4537 किमी) का स्थान है।

      - प्रति 1000 व्यक्तियों पर राष्ट्रीय राजमार्ग़ों की लम्बाई के सन्दर्भ में प्रथम स्थान अरुणाचल प्रदेश का है, जहाँ यह आँकड़ा 1,816 किमी है। दूसरे स्थान पर मिजोरम (1,044 किमी) है।

1. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 1 (NH-1)

यह ऊरी, बारामुला, श्रीनगर, कारगिल और लेह से गुजरता है। (जम्मू - कश्मीर एवं लद्दाख), यह भारत की उत्तरी सीमा के समानांतर है। कुल लम्बाई 535 किमी. है।

2. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 2 (NH-2)

लम्बाई - 1,214 किमी.। यह डिब्रुगढ़ से शुरू होता है और असम, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम राज्यों को शिवसागर, कोहिमा, इम्फाल, और ट्यूपेंग के साथ जोड़ता है। यह उत्तर - पूर्व भारत का दूसरा लम्बा राजमार्ग है। यह भारत म्यांमार सीमा के समानांतर है।

3. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 3 (NH-3)

अटारी, अमृतसर, जालंधर, अवादेवी, मण्डी, कुल्लू मनाली (पंजाब, जम्मू - कश्मीर, हिमाचल प्रदेश) कुल लम्बाई 427 किमी.।

4. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 4 (NH-4)

मयाबंदर से पोर्ट ब्लेयर (अण्डमान निकोबार) लम्बाई 230 किमी.

5. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 5 (NH-5)

सेपड से शिमला (पंजाब, हिमाचल प्रदेश) कुल लम्बाई 182 किमी.

6. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 6 (NH-6)

लम्बाई - 1,945 किमी.। यह मेघालय के जोरबट के पास से शुरू होकर मिजोरम के शिलांग में समाप्त होता है। यह उत्तर - पूर्व भारत का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है। यह मेघालय, असम और मिजोरम राज्यों से होकर गुजरता है। यह पूर्वोत्तर राज्यों में बांग्लादेश सीमा के समानांतर है।

7. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 7 (NH-7)

फजिल्का, भटिण्डा, पटना, शाहीद, देवप्रयाग, रूद्रप्रयाग, प्रणप्रयाग, चमोली, बद्रीनाथ, माना दर्रा (पंजाब, चंडीगढ, हिमालय, उत्तराखण्ड) कुल लम्बाई - 770 किमी.

8. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 9 (NH-9)

सिरशाह, दिल्ली, बिलासपुर, पीसोरगढ़ से गुजरता है। (पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखण्ड) कुल लम्बाई 811 किमी. है।

9. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 10 (NH-10)

सिलीगुड़ी, कलीम्पाग, गंगटोंक (सिक्किम, पश्चिम बंगाल) लम्बाई - 174 किमी.।

10. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 11 (NH-11)

जैसलमेर, पोखरण, बीकानेर, फतेहपुर (सीकर) कुल लम्बाई 495 किमी.।

11. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 12 (NH-12)

यह ढोलका, रानीगंज, मालदा व कोलकाता के मध्य है। (पश्चिम बंगाल) यह भारत बांग्लादेश सीमा के समानांतर स्थित है।

12. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 13 (NH-13)

लम्बाई - 1150 किमी. (पुराना NH-229) यह अरुणाचल प्रदेश के तवांग से शुरू होकर असम के पासीघाट तक जाता है। यह राजमार्ग सेला झील के खूबसूरत कस्बे, दिरांग, बोमडिला, जीरो टाउन, बीरू और असम के पासीघाट से गुजरता है।

13. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 16 (NH-16)

लम्बाई - 1659 किमी. (पुराना NH-5) यह स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना का हिस्सा है जो पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश के पूर्वी तट के साथ - साथ चलता है। यह चेन्नई में समाप्त होता है।

14 राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 19 (NH-19)

लम्बाई - 1435 किमी. (पुराना NH-2) इसे दिल्ली - कोलकाता रोड भी कहते हैं। यह भारत के व्यस्ततम राजमार्गों में से एक है जो दिल्ली, आगरा, वाराणसी, बरही, आसनसोल और कोलकाता के प्रमुख शहरों से गुजरता है। इसे ग्राण्ड ट्रंक रोड भी कहते हैं एवं यह स्वर्णिम चतुर्भुज योजना का एक हिस्सा है।

15. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 27 (NH-17)

(लम्बाई - 3507 किमी.) यह राष्ट्रीय राजमार्ग उत्तर - दक्षिण व पूर्व पश्चिम गलियारे का भाग है। जो पोरबंदर से शुरू होकर सिलचर में समाप्त होता है। यह गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम राज्यों से गुजरता है। झांसी, उत्तर - दक्षिण व पूर्व - पश्चिम गलियारों का जंक्शन है।

16. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 30 (NH-30)

लम्बाई - 2,010 किमी. (पुराना NH-221) यह उत्तराखण्ड के सितारगंज को आंध्रप्रदेश के इब्राहिम पट्‌टनम से जोड़ता है। NH-30 लखनऊ, प्रयागराज, जवलपुर, रायपुर और भद्राचलम शहरों के माध्यम से 2,010 किमी. की दूरी तय करते हुए भारत के 6 प्रमुख राज्यों से होकर गुजरती है।

17. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 31 (NH-31)

यह उत्तरप्रदेश से शुरू होकर, पश्चिम बंगाल में समाप्त हो जाता है।

18. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 34 (NH-34)

यह उत्तराखंड के गंगोत्री धाम से चलता है एवं NH-44 पर लखनादौन, जबलपुर के पास समाप्त होता है। इसके मार्ग में उत्तरकाशी, ऋषिकेश, हरिद्वार, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, दमोह और जबलपुर शामिल हैं।

19. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 44 (NH-44)

लम्बाई - 3,745 किमी. यह भारत का सबसे लम्बा राष्ट्रीय राजमार्ग है। यह श्रीनगर से कन्याकुमारी तक जाता है। यह जम्मू - कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु राज्य से गुजरता है। यह भारत में सर्वाधिक राज्यों से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग है। NH-44 पुराने             को मिलाकर अस्तित्व में लाया गया है। जिसमें NH-1A, NH-1, NH-2, NH-3, NH-75, NH-26 और NH-7 शामिल है। यह स्वर्णिम चतुर्भुज व उत्तर - दक्षिण कॉरिडोर का भाग है।

20. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 47 (NH-47)

लम्बाई - 1080 किमी. यह बामनबोर, गुजरात से शुरू होकर नागपुर महाराष्ट्र तक जाता है। इस राजमार्ग के पथ में बामनबोर, लिम्बड़ी गोधरा, इंदौर, हरदा, बेतुल आते हैं तथा यह नागपुर में NH-44 से जुड़ जाता है।

21. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 48 (NH-48)

लम्बाई - 2,807 किमी. (पुराना NH-8) यह दिल्ली से शुरू होकर चेन्नई तक जाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या - 8 दिल्ली से जयपुर तक किशनगढ़ एक्सप्रेस वे, नेशनल एक्सप्रेस वे 1, उदयपुर से बड़ोदरा और बड़ौदा से बॉम्बे सहित अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों का विलय किया जाता है।

22. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 52 (NH-52)

लम्बाई - 2,317 किमी. यह हिसार, जयपुर, कोटा, इंदौर, धुले, औरंगाबाद, बीजापुर से हुबली तक के प्रमुख शहरों से गुजरता हुआ, उत्तर से दक्षिण भारत को जोड़ता है।

23. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 53 (NH-53)

लम्बाई - 1781 किमी. यह गुजरात में हजीरा को ओडिशा के पराद्वीप बंदरगाह को जोड़ने वाला राजमार्ग है।

यह गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के चार राज्यों से होकर गुजरता है।

24. राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 66 (NH-66)

लम्बाई - 1593 किमी. (पुराना NH-17) NH-17 भारत के पश्चिमी घाट के समानांतर चलता है यह पनवेल से कन्याकुमारी तक जाता है।

      एक्प्रेस राजमार्ग

      - तेज व्यापारिक वाहनों को कम अवधि में गन्तव्य तक पहुँचाने हेतु एक्सप्रेस राजमार्ग बनाया गया है। ये राजमार्ग प्रायः 4 एवं 6 लेन वाले होते हैं। एक्सप्रेस राजमार्ग के कुछ उदाहरण-पुणे-मुम्बई एक्सप्रेस राजमार्ग, दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस राजमार्ग (वाया-जयपुर), यमुना एक्सप्रेस राजमार्ग आदि हैं।

 

 

      स्वर्णिम चतुर्भुज योजना

      - इसके अन्तर्गत देश के चार महानगरों-दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई तथा कोलकाता को उच्च गुणवत्ता युक्त सड़कों से जोड़ा गया है। इसकी कुल लम्बाई 5846 किमी है।

      उत्तर-दक्षिण, पूर्व पश्चिम कॉरिडोर योजना

      - उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर का निर्माण कन्याकुमारी (तमिलनाडु) से श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) तक तथा पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर का निर्माण पोरबन्दर (गुजरात) से सिल्चर (असम) तक किया गया है। यह भी उच्च गुणवत्ता युक्त महामार्ग है, जिसकी कुल लम्बाई 7300 किमी है। पूर्व-पश्चिम तथा उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर एक-दूसरे से झाँसी में मिलते हैं।

      राज्यों के राजमार्ग

      - राज्यों के राजमार्ग़ों के निर्माण तथा रख-रखाव का दायित्व राज्य सरकार पर होता है। ये राज्य के प्रमुख शहरों, जिला मुख्यालयों एवं राष्ट्रीय राजमार्ग़ों को जोड़ता है।

      - प्रान्तीय राजमार्ग़ों की सबसे अधिक लम्बाई महाराष्ट्र में है।

      जिला सड़कें

      - लगभग 4.7 लाख किमी लम्बी जिला सड़कें जिला मुख्यालय से जिले के सभी पुलिस स्टेशन को जोड़ती है। ये सड़के जिला बोर्ड़ों के अधीन होती है।

      ग्रामीण सड़कें

      - ग्राम पंचायत के द्वारा ग्रामीण सड़कें बनाई जाती हैं। वर्तमान समय में भी देश की आधी से अधिक ग्रामीण सड़कें कच्ची हैं, जो वर्षा के मौसम में परिवहन के लिए कठिनाई उत्पन्न करती है।

      प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)

      - 500 व्यक्तियों या इससे अधिक आबादी वाले मैदानी क्षेत्रों तथा 250 व्यक्तियों या इससे अधिक आबादी वाले पहाड़ी, रेगिस्तानी एवं जनजातीय क्षेत्रों में सभी मौसम में सिंगल कनेक्टिविटी देने के लिए दिसम्बर, 2000 में प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना प्रारम्भ की गई थी।

      भारत निर्माण योजना (BNY)

      - 1000 की आबादी वाले मैदानी क्षेत्रों तथा 500 की आबादी वाले पहाड़ी तथा जनजातीय क्षेत्रों में भारत निर्माण योजना सभी मौसमों वाली सड़कों से सम्बद्धता प्रदान करता है।

      - इस सड़कों का सामरिक महत्त्व होता है। इस कारण इन सड़कों के रख-रखाव पर सरकार का विशेष ध्यान है।

      सीमावर्ती सड़कें

      - अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं के सहारे बनाई गई सड़कों को सीमावर्ती सड़कें कहा जाता है। ये सड़कें सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रमुख नगरों से जोड़ने और प्रतिरक्षा प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनका निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) करता है।

      - सीमावर्ती सड़कों का निर्माण सभी देशों में गाँवों एवं सैन्य शिविरों तक वस्तुओं को पहुँचाने के लिए ऐसी सड़कें पाई जाती हैं।

      रेल परिवहन

      - भारत में पहली रेलगाड़ी 16 अप्रैल, 1853 ई. को मुम्बई से थाणे के मध्य लॉर्ड डलहौजी के काल में चलाई गई थी। तदुपरान्त 1854 ई. में कलकत्ता से रानीगंज के मध्य रेल सेवा की शुरुआत हुई।

      - भारतीय रेल नेटवर्क एशिया का सबसे बड़ा नेटवर्क है तथा एकल प्रबन्धनाधीन यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है। यह विश्व का सबसे बड़ा नियोक्ता है, इसके 16 लाख से भी अधिक कर्मचारी हैं। यह भारत में माल और यात्रियों के परिवहन का मुख्य साधन है।

      - रेलवे पटरी की चौड़ाई के आधार पर भारतीय रेल के तीन वर्ग बनाए गए हैं-

      - बड़ी लाइन (Broad gauge) - ब्रॉड गेज में रेल पटरियों के बीच की दूरी 1.616 मी. होती है। ब्रॉड गेज लाइन की कुल लम्बाई वर्ष 2011 में 55188 किमी थी।

      - मीटर लाइन (Meter gauge) - इसमें दो रेल पटरियों के बीच की दूरी एक मीटर होती है। इसकी कुल लम्बाई वर्ष 2011 में 6809 किमी थी।

      - छोटी लाइन (Narrow gauge) - इसमें दो रेल पटरियों के बीच की दूरी 0.762 मीटर या 0.610 मी होती है। इसकी कुल लम्बाई वर्ष 2011 में 2463 किमी थी। यह प्रायः पर्वतीय क्षेत्रों तक सीमित है।

      कोंकण रेलवे -

      - कोंकण रेलवे का प्रारम्भ मार्च, 1990 में गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा केरल के बीच छोटे-से-छोटे रेलवे मार्ग द्वारा एक लिंक प्रदान करने के लिए प्रारम्भ की गई। रोहा से मंगलौर के बीच 760 किमी की दूरी इस परियोजना में सम्मिलित है।

      रेलवे जोन -

      - भारतीय रेल को 17 रेलवे जोनों में बाँटा गया है, ताकि प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से किया जा सके। ये सत्रह रेलवे जोन निम्नलिखित हैं-
                                 रेलवे जोन

      जोन                                                           मुख्यालय

      मध्य रेलवे (CR)                                          मुम्बई वी टी

      पूवी रेलवे (ER)                                           कोलकाता

      उत्तरी रेलवे (NR)                                        नई दिल्ली

      उत्तरी-पूर्वी रेलवे (NER)                               गोरखपुर

      उत्तरी-पूर्वी सीमान्त प्रान्त रेलवे (NEFR)        मालेगाँव गुवाहाटी

      दक्षिणी रेलवे (SR)                                       चेन्नई

      दक्षिणी-मध्य रेलवे (SCR)                             सिकन्दराबाद

      दक्षिण-पूर्वी रेलवे (SER)                               कोलकाता

      पश्चिमी रेलवे (WR)                                     मुम्बई चर्चगेट

      पूर्वी-मध्य रेलवे (ECR)                                 हाजीपुर

      उत्तरी पश्चिमी रेलवे (NWR)                          जयपुर

      पूर्वी तटवर्ती रेलवे (ECR)                              भुवनेश्वर

      उत्तरी-मध्य रेलवे (NCR)                              इलाहाबाद

      दक्षिण-पश्चिम रेलवे (SWR)                          हुगली

      पश्चिमी-मध्य रेलवे (ECR)                             जबलपुर

      दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे (SECR)                      विलासपुर

      कोलकाता मेट्रो (KMR)                                कोलकाता (नवीनतम)

      डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर

      - डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रेलवे की एक महत्त्वाकांक्षी योजना है, जिसके पूरा हो जाने से माल वाहन क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हो जाएगी। इस याजना के अन्तर्गत दो गलियारे बनाए गए हैं- प्रथम दादरी (दिल्ली के निकट) मुम्बई के बीच है जिसे पश्चिमी गलियारा (Western Corridor) कहा जाता है। दूसरा लुधियाना से दानुकुनी (हावड़ा के निकट) के बीच पूर्वी गलियारा (Estern Corridor) है।

      - पश्चिमी गलियारे की कुल लम्बाई 1469 किमी है, जबकि पूर्वी गलियारा 1280 किमी. लम्बा है।

      ट्वाय ट्रेन्स

      - भारतीय रेल द्वारा निम्न ट्वाय ट्रेन्स भी चलाई जाती हैं

      - दार्जिलिंग ट्वाय ट्रेन - इसे वर्ष 1999 से यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत का दर्जा हासिल है।

      - शिमला ट्वाय ट्रेन-कालका से शिमला तक।

      - माथेरान ट्वाय ट्रेन।

      - नीलगिरी माउण्टेन ट्रेन-इसे विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है।

भारत में रेलवे की उत्पादन इकाइयाँ
 

कारखाना

स्थापना वर्ष

स्थान 

राज्य 

विवरण

चितरंजन           
लोकोमोटिव    

1950

चितरंजन 

पश्चिम बंगाल 

रेलवे विद्युत इन्जन बनाने का सबसे  पुराना कारखाना

इण्टीग्रल कोच फैक्ट्री

1950

पेराम्बदूर

तमिलनाडु

सवारी डिब्बे का निर्माण

रेल कोच फैक्ट्री

1985

कपूरथला

पंजाब  

रेल डिब्बे का निर्माण

डीजल लोकोमोटिव वर्क्स

1956

वाराणसी

उत्तरप्रदेश

डीजल इन्जन व विद्युत शटर्स का निर्माण

डीजल इन्जन आधुनिकीकरण कारखाना

1983

पटियाला

पंजाब

डीजल इन्जन के संघटकों का निर्माण

                                               

        

      भारत में मेट्रो रेल

      - भारत में मेट्रो रेल का शुभारम्भ कोलकाता में वर्ष 1972 में तात्कालीन प्रधानमन्त्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी द्वारा किया गया। इस भूमिगत रेलमार्ग की कुल लम्बाई 16.45 किमी है।

      - वर्ष 1996 में दिल्ली मेट्रो रेल की स्वीकृति दी गई तथा 25 सितम्बर, 2002 से इसका व्यावसायिक परिचालन प्रारम्भ हुआ। दिल्ली मेट्रो भारत सरकार तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार का संयुक्त उपक्रम है।

      - देश के पाँच महानगरों में वर्ष 2010 में सरकार ने नई मेट्रो परियोजना को मन्जूरी दी है।

      - ये महानगर - जयपुर, मुम्बई, चेन्नई, पुणे एवं लखनऊ है।

      वायु परिवहन

      - वायु परिवहन का व्यापक महत्त्व होता है। इससे किसी देश के आर्थिक विकास में मदद के अलावा युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं के समय लोगों को शीघ्र सहायता पहुँचाने में सुविधा होती है।

      - एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इण्डिया (AAI) - भारतीय वायुक्षेत्र में सुरक्षित, सक्षम वायु यातायात एवं वैमानिकी संचार सेवाएँ प्रदान करने के लिए उत्तरदायी है।

      - मुक्त आकाश की नीति (Open Sky Policy) को अप्रैल, 1992 में सरकार द्वारा अपनाया गया। भारतीय निर्यात को सहायता देना तथा उसके निर्यात को विश्व बाजार में अधिक प्रतियोगितापूर्ण बनाना इसका मुख्य उद्देश्य था। इस नीति के तहत वायु परिवहन में निजी क्षेत्र को पुनः वर्ष 1992 में अनुमति दी गई।

      ग्रीन फील्ड हवाई अड्डा -

      - जब पुराने हवाई अड्डे में विस्तार द्वारा यातायात को सुगम बनाने की गुंजाइश नहीं रह जाती है, तब उसके निकट बिल्कुल नए और आधुनिक हवाई अड्डे का निर्माण किया जाता है, जिसे ग्रीन फील्ड हवाई अड्डा कहते हैं।

      - निजी क्षेत्र के सहयोग से कोच्चि में एक अन्तर्राष्ट्रीय ग्रीन फील्ड हवाई अड्डा बनाया गा है। शमशाबाद (हैदराबाद) एवं देवनहल्ली (बेंगलुरू) में भी ग्रीन फील्ड हवाई अड्डे का निर्माण किया गया है।

      भारत की प्रमुख परिवहन वायु कम्पनी

      - भारत की प्रमुख वायु परिवहन कम्पनियाँ निम्नलिखित हैं-

      एअर इण्डिया और इण्डियन एअर लाइन्स

      - वर्ष 1953 में सभी विमान कम्पनियों का राष्ट्रीयकरण (Nationalisation) कर दिया गया तथा ‘एयर इण्डिया’ और ‘इण्डियन एयरलाइन्स’ अस्तित्व में आई।

      - एयर इण्डिया को अन्तर्राष्ट्रीय उड़ानों का दायित्व सौंपा गया जबकि इण्डियन एयरलाइन्स को अन्तर्देशीय तथा पड़ोसी देशों की सेवाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई। बाद में इण्डियन एयरलाइन्स को इण्डियन नाम दे दिया गया।

      - केन्द्र सरकार ने 21 फरवरी, 2007 को दोनों सरकारी वायु सेवाओं के विलय को मंजूरी दे दी। विलय के बाद नई कम्पनी का नाम एयर इण्डिया रखा गया।

      पवनहंस हेलीकॉप्टर सेवा

      - भारत की इस अग्रणी हेलीकॉप्टर कम्पनी की स्थापना वर्ष 1985 में की गई थी। यह पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पेट्रोलियम क्षेत्र के लिए देश के दुर्गम क्षेत्रों को जोड़ने के लिए सेवाएँ उपलब्ध कराती हैं।

      GAGAN परियोजना

      - भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण तथा इसरो द्वारा तैयार इस परियोजना का पूरा नाम GAGAN (Global Positioning Systems Added Geo Synchronous Augmented Navigation) है। पहाड़ी और रुकावट वाले क्षेत्रों में भी इसकी सहायता से हवाई यातायात बिना किसी जोखिम के संचालित किए जा सकेंगे।

      जल परिवहन

      - भारत में परिवहन का सबसे पुराना साधन सबसे सस्ता एवं पर्यावरण के अनुकूल साधन है। आकार में बड़े एवं भारी सामानों के परिवहन हेतु यह सर्वाधिक उपयुक्त साधन है।

      - जल परिवहन दो प्रकार का होता है-

      - आन्तरिक जल परिवहन

      - महासागरीय जल परिवहन

      आन्तरिक जल परिवहन

      - भारतीय अन्तर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (INWA) की स्थापना राष्ट्रीय जलमार्ग़ों के विकास, रख-रखाव तथा नियमन के लिए 27 अक्टूबर, 1986 को की गई।

      - केन्द्रीय अन्तर्देशीय जल परिवहन निगम की स्थाना मई, 1967 में की गई जिसका मुख्यालय कोलकाता में है। यह निगम गंगा-भागीरथी, हुगली तथा ब्रह्मपुत्र नदियों में अन्तर्देशीय माल ढुलाई का प्रबन्ध करता है।

      भारत की नाव्य नहरें

      - नाव्य नहरें का भारत में अभाव है। मुख्य नहरें जिसका प्रयोग आन्तरिक जल परिवहन के रूप में किया जाता है, निम्नलिखित हैं

      - गंगा नदी की नहरों में नौकाएँ 584 किमी तक चलती है।

      - कुर्नूल कुड़प्पा नहर (आन्ध्र प्रदेश) - 117 किमी

      - मिदनापुर नहर (पश्चिम बंग) - 459 किमी

      भारत के प्रमुख राष्ट्रीय जलमार्ग

         जलमार्ग      लम्बाई           विस्तार             नदी

         संख्या

         NW I          1620 किमी    इलाहाबाद से      गंगा

                                                 हल्दिया तक

         NW II        891 किमी      सदिया से            ब्रह्मपुत्र

                                                 धुवरी तक

         NW III       205 किमी      कोट्टापुरम से       चम्पाकारा

                                                 वुल्लम तक          नहर

         NW IV       1095 किमी    काकीनाडा से      कृष्णा

                                                पुडुचेरी नहर          गोदावरी

         NW V         623 किमी      पूर्वी तट नहर      ब्राह्मणी

         NW VI       121 किमी      लखीमपुर से       बराक

                                                 मंगा

      महासागरीय जल परिवहन

      - भारत के पास द्वीपों सहित लगभग 7517 किमी लम्बा समुद्र तट है। 13 प्रमुख तथा 185 गौण पत्तन समुद्री परिवहन को संरचनात्मक आधार प्रदान करते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था के परिवहन सेक्टर में महासागरीय मार्ग़ों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

      - भारत में भार के अनुसार लगभग 95% तथा मूल्य के अनुसार 70% विदेशी व्यापार महासागरीय मार्ग़ों द्वारा होता है। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के साथ-साथ इन मार्ग़ों का उपयोग देश की मुख्य भूमि तथा द्वीपों के बीच परिवहन के लिए भी होता है।

      भारत के प्रमुख बन्दरगाह

      - देश में कुल 13 बड़े बन्दरगाह है, इनमें काण्डला, मुम्बई, जवाहरलाल नेहरू (न्हावाशेवा), मार्मागाव, न्यू मंगलौर और कोच्चि पश्चिमी तट के सहारे, जबकि पूर्वी तट के सहारे तूतीकोरिन, चेन्नई, एन्नोर, विशाखापट्‌टनम, पाराद्वीप और कोलकाता-हल्दिया हैं। वर्ष 2010 में पोर्ट ब्लेयर को मुख्य बन्दरगाह के रूप में घोषित किया गया है।

      बड़े पत्तनों को विवरण निम्नलिखित हैं-

      प्रमुख बन्दरगाह        विवरण

      मुम्बई                        प्राकृतिक बन्दरगाह, भारत का सबसे बड़ा बन्दरगाह। पेट्रोलियम उत्पादन तथा शुष्क माल का कारोबार प्रमुख रूप से।

      काण्डला                   गुजरात के कच्छ की खाड़ी में स्थित एक ज्वारीय पत्तन, मुक्त व्यापार क्षेत्र घोषित।

      मार्मागाव                    गोवा में स्थित प्राकृतिक पोताश्रय, लौह-अयस्क का प्रमुख बन्दरगाह।

      न्हावाशेवा                  मुम्बई से दक्षिण सहायक बन्दरगाह के तौर

      (जवाहरलाल नेहरू     पर निर्मित, नवीनतम आधुनिक सुविधाओं

      पत्तन)                       से युक्त भारत का सबसे बड़ा कण्टेनर पत्तन।

      कोच्चि                       केरल तट के सहारे लैगून पर स्थित एक प्राकृतिक बन्दरगाह।

      चेन्नई                        कृत्रिम बन्दरगाह। पूर्वी तट पर देश का सबसे पुराना बन्दरगाह।

      विशाखापट्‌टनम         आन्ध्रप्रदेश के तट पर स्थित देश का सबसे गहरा बन्दरगाह।

      पाराद्वीप                    ओडिशा तट पर स्थित गहरा बन्दरगाह। लैगून सदृश पोताश्रय।

      एन्नोर                        चेन्नई के उत्तर में स्थित देश का प्रथम निगमित बन्दरगाह।

      हल्दिया-कोलकाता     हुगली नदी पर बंगाल की खाड़ी में स्थित एक नदी पत्तन।

      तूतीकोरिन                 तमिलनाडु में दक्षिणी छोर पर स्थित। मुख्य रूप से कोयले का निर्यात।

      पोर्टब्लेयर                  देश का नवीनतम अधिसूचित प्रमुख बन्दरगाह।

      सेतु समुद्रम परियोजना

      - सेतु समुद्रम एक ऐसी महत्त्वाकांक्षी परियोजना का नाम है, जो बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के बीच समुद्री मार्ग को सीधी आवाजाही के लिए खोल देगी। इस मार्ग के शुरू होने से जहाजों को करीब 400 समुद्री मीलों की यात्रा कम करनी होगी, जिससे लगभग 36 घण्टे समय की बचत होगी।

      - इस समय भारत के पश्चिमी तट से चलने वाले जहाजों को श्रीलंका का चक्कर काट कर जाना पड़ता है। यह परियोजना पूरी होने पर वे सीधे ही सेतु समुद्रम नहर से होकर बंगाल की खाड़ी में पहुँच जाया करेंगे।

      सागरमाला परियोजना

      - इस परियोजना की घोषणा प्रधानमन्त्री द्वारा वर्ष 2003 में की गई थी। सागरमाला परियोजना को जहाजरानी के क्षेत्र में कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसमें सरकार के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भी भागीदारी है।

      - इस परियोजना के तहत पश्चिमी तट के प्रमुख बन्दरगाहों का आधुनिकीकरण व क्षमता विस्तार नए बन्दरगाहों का निर्माण व आन्तरिक जल परिवहन तन्त्र का उन्नयन किया जाएगा।

      पाइप लाइन परिवहन

      - पाइप लाइन परिवहन तरल पदार्थ़ों और गैस की लम्बी दूरियों के परिवहन के लिए सबसे सुविधाजनक साधन है।

      - ठोस पदार्थ़ों का भी गाद के रूप में पाइप लाइनों द्वारा परिवहन होता है जो भारत में पाइप लाइन परिवहन एक नई उपलब्धि है।

      कुछ प्रमुख पाइप लाइन

      नाहरकटिया नूनमती-बरौनी पाइप लाइन

      - तेल परिवहन के लिए भारत में सबसे पहले पाइप लाइन असम में बनाई गई थी। असम के तेलकूपों से नूनमाटी तेल परिशोधनशाला तक 443 किमी पाइपलाइन द्वारा तेल से जाया जाता है। इस पाइप लाइन का विस्तार करके इसे बिहार में स्थित बरौनी ले जाया गया।

      - नूनमाटी से बरौनी तक पाइप लाइन की कुल लम्बाई 724 किमी है। इस प्रकार इस पाइप लाइन को कानपुर तक ले जाया गया है।

      सलाया-कोयली-मथुरा पाइप लाइन

      - कच्छ की खाड़ी के किनारे पर स्थित एक महत्त्वपूर्ण पाइप लाइन जो सलाया से मथुरा के बीच बिछाई गई है। 1256 किमी लम्बी यह पाइप लाइन मुम्बई हाई से प्राप्त तेल को मथुरा तेल शोधनशाला तक ले जाती है। इस पाइप लाइन को कोयली से जोड़कर पंजाब के जालन्धर तक ले जाया गया है।

      मुम्बई हाई-मुम्बई-अंकलेश्वर कोयली पाइप

      - 210 किमी लम्बी यह पाइप लाइन मुम्बई हाई को कोयली से जोड़ती है और कोयली तेल परिष्करणशाला को मुम्बई हाई का तेल उपलब्ध कराती है।

      हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर (HVJ) गैस पाइप लाइन

      - हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर देश की सबसे लम्बी गैस पाइप लाइन का निर्माण किया गया है। 1750 किमी लम्बी यह पाइप लाइन विश्व की सबसे लम्बी भूमिगत पाइप लाइन है। यह छह रासायनिक उर्वरक कारखानों को गैस प्रदान करेगी।

      काण्डला-भटिण्डा पाइप लाइन

      - 1454 किमी लम्बी यह पाइप लाइन गुजरात में काण्डला से पंजाब में भटिण्डा तक विस्तृत होगी। यह अभी प्रस्तावित है। इससे राजस्थान, हरियाणा तथा पंजाब राज्यों को लाभ होगा।

      जामनगर-लोनी एलपीजी पाइप लाइन

      - 1269 किमी लम्बी इस पाइप लाइन का निर्माण गैस अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड (GAIL) ने किया है। यह गुजरात के जामनगर को दिल्ली के निकट लोनी (उत्तरप्रदेश) के साथ मिलाती है।

      मुन्द्रा-दिल्ली पाइप लाइन

      - गुजरात में स्थित मुन्द्रा को दिल्ली से मिलाने वाली यह पाइप लाइन 1054 किमी लम्बी है।