वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) (Goods and Service Tax – GST)
- वस्तु एवं सेवा कर (GST) 1 जुलाई, 2017 से लागू हुआ।
- कर सुधारों के बारे में वर्ष 2002 में दो समितियां बनाई गई, जिनके अध्यक्ष श्री विजय केलकर थे। ये समितियां – (i) प्रत्यक्ष करों पर केलकर कार्यबल तथ
(ii) अप्रत्यक्ष करों पर केलकर कार्यबल थी।
- वर्ष 2003 में केलकर कार्यबल ने अपनी रिपोर्ट सौंपी जिसमें उन्होंने जीएसटी व्यवस्था को अपनाने की सिफारिश की थी।
- वर्ष 2011 में तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा 115वाँ संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में लाया गया था, जिसे वित्तीय मामलों से संबंधित संसदीय स्थाई समिति को भेज दिया था। मार्च , 2014 में इसे पुन: लोकसभा में प्रस्तुत किया गया, लेकिन लोकसभा भंग होने के कारण यह विधेयक निरस्त हो गया। 19 दिसंबर, 2014 को पुन: जीएसटी पर 122 वाँ संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में लाया गया जिसे मई 2015 में लोकसभा द्वारा कुछ संशोधनों के साथ इसे पारित कर दिया गया तथा राज्यसभा को भेज दिया गया तथा 14 मई, 2015 को राज्यसभा और लोकसभा की संयुक्त प्रवर समिति को भेज दिया गया। इस समिति में 22 जुलाई, 2015 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। 3 अगस्त, 2016 को राज्यसभा द्वारा कुछ संशोधनों सहित इस विधेयक को पारित कर दिया। तत्पश्चात् 8 अगस्त, 2016 को लोकसभा द्वारा इसे पुन: पारित कर दिया गया। 8 सितंबर, 2016 को राष्ट्रपति द्वारा इस पर हस्ताक्षर किये गए तत्पश्चात् यह '101 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2016' बन गया। इस अधिनियम के द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 279 (A) के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि इस अधिनियम के लागू होने के 60 दिनों के भीतर राष्ट्रपति जीएसटी परिषद् का गठन करेगा। 16 सिंतबर, 2016 को भारत सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर इस अधिनियम के सभी खंडों को लागू कर दिया गया।
- 101 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के द्वारा अनुच्छेद 366 में एक नया खंड (12A) जोड़ा गया, जिसके अनुसार ‘वस्तु एवं सेवा कर’ का अर्थ है – मानव उपभोग के लिये मादक पेय पदार्थों की आपूर्ति पर लगने वाले कर को छोड़कर वस्तुओं या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति पर लगने वाला कर।
- यह कर केंद्र और राज्यों के द्वारा एक साथ, सामान्य कर आधार पर आरोपित दोहरा कर है। कर का प्रशासन केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा किया गया है। एक राज्य के भीतर होने वाले लेन-देन पर केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए कर को केंद्रीय जीएसटी (CGST) कहा जाता है एवं सीजीएसटी केंद्र सरकार के खाते में जमा किया जाता है। राज्यों द्वारा लगाए करों को राज्य जीएसटी (SGST) कहा गया है और एसजीएसटी संबंधित राज्य सरकार के खाते में जमा किया जाता है। इसी प्रकार केंद्र द्वारा प्रत्येक अंतर-राज्य वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर एकीकृत जीएसटी (आईजीएसजी) लगाने और प्रशासित करने की व्यवस्था है।
भुगतान प्रक्रिया- जीएसटी के अंतर्गत निम्नलिखित तरीके से क्रेडिट का उपयोग करने की अनुमति है-
- सीजीएसटी और आईजीएसटी के भुगतान के लिये सीजीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति है।
- एसजीएसटी और आईजीएसटी के भुगतान के लिये एसजीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति है।
- यूटीजीएसटी और आईजीएसटी के भुगतान के लिये यूटीजीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति है।
- आईजीएसटी, सीजीएसटी और एसजीएसटी/यूटीजीएसटी के भुगतान के लिये आईजीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति है।
- एसजीएसटी/यूटीजीएसटी के भुगतान के लिये सीजीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट का उपयोग नहीं किया जाता और न ही सीजीएसटी के भुगतान के लिये एसजीएसटी/यूटीजीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट का उपयोग किया जाता है।
101वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 (101st Constitution Amendment Act, 2016) नए प्रावधान (New Provisions) -
जीएसटी आने के पश्चात कुछ अनुच्छेदों को, जो संविधान में निर्दिष्ट है, संशोधित किया गया और कुछ नए अनुच्छेद जोड़े भी गए। यथा-
अनुच्छेद 246: इस अनुच्छेद के तहत यह व्यवस्था की गई है कि संसद को सीजीएसटी और आईजीएसटी लगाने का अधिकार होगा और राज्यों को एसजीएसटी लगाने का अधिकार होगा।
अनुच्छेद 248: यह अनुच्छेद बताता है कि कौन-से विधानमंडल के पास कौन-से अधिकार होंगे। अनुच्छेद 246-248 तीनों सूचियों से संबंधित हैं- संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची।
अनुच्छेद 268A: इस अनुच्छेद का पहले सेवा कर का प्रावधान करता था। अब यह अनुच्छेद संविधान से समाप्त कर दिया गया है।
अनुच्छेद 269: इसके तहत पहले जो अंतर्राज्यीय लेन-देन होता था, उस पर कर केंद्र लेता था, परंतु उसे राज्यों में बाँट दिया जाता था। अनुच्छेद 269 में अब एक नया अनुच्छेद 269A आईजीएसटी का प्रावधान किया गया है। यह अंतर्राज्यीय लेन-देन पर लगता है। अब अगर वस्तु का बाहर से आयात होगा तो वहाँ सीमा शुल्क के साथ-साथ आईजीएसटी भी लगेगा। 1 जुलाई, 2017 के बाद से जो भी वस्तुएँ आयातित होंगी, वे अंततः जिस राज्य में उपभोग होंगी, उस राज्य को उसके आयात पर आईजीएसटी का आधा हिस्सा भी मिलेगा। इस प्रकार पहली बार राज्यों को आयात में से कुछ हिस्सा मिलेगा। विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) पर भी आईजीएसटी लगेगा।
अनुच्छेद 270: इस अनुच्छेद के तहत जो कर केंद्र लगाता और वसूलता था, उसके बाद इसे राज्यों में बाँट दिया जाता था। अब साथ में जीएसटी से जो राजस्व एकत्र होगा, उसमें अर्थात् सीजीएसटी और आईजीएसटी में केंद्र का जो आधा हिस्सा है, यह कर भी विभाज्य पूल का हिस्सा बनेगा और वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार केंद्र और राज्यों के बीच बांटा जाएगा।
अनुच्छेद 271: इस अनुच्छेद में दो बातें समाहित हैं- अधिभार और उपकर। इससे संबंधित केंद्र सरकार के पास विशेष उपाय थे। केंद्र का कर संग्रह कम होने पर केंद्र अनुच्छेद 269 और अनुच्छेद 270 में जो कर का प्रावधान था, उन पर अधिभार या उपकर लगा सकता था, जिसमें जो भी कर केंद्र लगाता था, उसका सारा पैसा केंद्र को मिलता भा तथा राज्यों को कोई पैसा नहीं मिलता था। लेकिन अब इससे जो भी कर राजस्व प्राप्त होगा, वह वित्त आयोग के सुझाव के अनुसार राज्यों तथा केंद्र में बाँट दिया जाएगा।
- जीएसटी एक व्यापक अप्रत्यक्ष कर है. जिसमें केंद्र सरकार राज्य सरकारों द्वारा उद्गृहीत एवं एकत्र किये जाने वाले कई अप्रत्यक्ष करों को सम्मिलित (Subsumed) किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा उद्गृहीत एवं एकत्र किये जाने वाले निम्नलिखित करों को जीएसटी में सम्मिलित किया गया है –
- केंद्रीय उत्पाद शुल्क
- उत्पाद शुल्क (औषधिक एवं प्रसाधन उत्पाद )
- अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (विशेष महत्त्व की वस्तुएँ)
- अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (टेक्सटाइल एवं टेक्सटाइल उत्पाद )
- अतिरिक्त सीमा शुल्क (Countervailing Duty)
- सेवा कर
- केंद्रीय अधिभार एवं उपकर, जहाँ तक ये वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित हैं।
- राज्य सरकार द्वारा उद्गृहीत एवं एकत्र किये जाने वाले निम्नलिखित करों को जीएसटी में सम्मिलित किया गया है-
- राज्य वैट केंद्रीय बिक्री कर
- विलासिता कर नया क्रय कर
- मनोरंजन कर
- विज्ञापनों पर कर
- लॉटरी, सट्टेबाज़ी एवं जुए पर कर
- राज्य अधिभार एवं उपकर, जहाँ तक ये वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित हैं।
इस प्रकार जीएसटी में केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के उपर्युक्त अप्रत्यक्ष करों को सम्मिलित करके एक एकीकृत कर (वस्तु एवं सेवा कर) का निर्माण किया गया है।
जीएसटी परिषद् (GST Council)
101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के द्वारा अनुच्छेद 279A(1) में यह प्रावधान किया गया है कि 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 की शुरुआत की तारीख से 60 दिनों के भीतर राष्ट्रपति द्वारा जीएसटी परिषद् (GST Council) का गठन किया जाएगा। वस्तु एवं सेवा कर परिषद् का गठन 12 सितंबर, 2016 को किया गया। जीएसटी परिषद् की सहायता के लिये इसका एक सचिवालय भी स्थापित किया गया है। देश में वस्तुओं एवं सेवाओं के लिये राष्ट्रव्यापी बाजार विकसित करने की दृष्टि से जीएसटी परिषद् का मार्गदर्शी सिद्धांत केंद्र और राज्य एवं विभिन्न राज्य सरकारों के बीच जीएसटी के विभिन्न आयामों की सुसंगतता को सुनिश्चित करना है। जीएसटी परिषद् (GST Council) केंद्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी, संघ राज्य क्षेत्र जीएसटी, एकीकृत जीएसटी और राज्यों को क्षतिपूर्ति से संबंधित प्रारूप विधानों की अनुशंसा करने और जीएसटी से संबंधित अनेक नियम, लगभग 1200 वस्तुओं पर जीएसटी की विभिन्न 4 दरें आदि को प्रस्तुत करने में सफल रही है।
जीएसटी परिषद् का कार्य (Functions of GST Council) निम्नलिखित विषयों पर केंद्र और राज्यों की सिफारिश करना है -
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- GST परिषद् का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 279(A) में किया गया है।
- केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों द्वारा वसूले जाने वाले कर, उपकर और अधिशुल्क जिन्हें जीएसटी के अंतर्गत समाहित किया जा सके।
- ऐसी वस्तुएँ और सेवाएँ, जिन्हें जीएसटी के अधीन या पर प्रदान की जा सकती है।
- वह तिथि, जब से कच्चे तेल, हाई स्पीड डीजल, मोटर (पेट्रोल), प्राकृतिक गैस और एविएशन टरबाइन फ्यूल पर GST वसूला जा सके।
- आदर्श जीएसटी कानून, उद्ग्रहण के सिद्धांत, आईजीएसटी का बँटवारा और आपूर्ति के स्थान को प्रशासित करने वाले सिद्धांत;
- वह सीमा रेखा, जिसके नीचे वस्तु एवं सेवा के टर्नओवर को जीएसटी से छूट प्रदान की जा सके।
- किसी भी प्राकृतिक आपदा या विपदा के दौरान अतिरिक्त संसाधन इकट्ठा करने हेतु किसी विशेष अवधि के लिये कोई विशेष दर / दरें;
- उत्तर-पूर्वी एवं पर्वतीय राज्यों- अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम, जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के संबंध में विशेष प्रावधान;
- जीएसटी परिषद् द्वारा यथा निर्णय एवं जीएसटी से संबंधित काइ अन्य मामला, जिस पर परिषद् निर्णय ले सकती है। ।
GST परिषद् की संरचना –
- जीएसटी परिषद् में केंद्र सरकार के दो प्रतिनिधि है-
- अध्यक्ष – केंद्रीय वित्त मंत्री
- सदस्य – केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री
- सदस्य – 28 राज्यों एव 3 संघ राज्य क्षेत्रों (दिल्ली, पुदुच्चेरी एवं जम्मू और कश्मीर) के वित्त मंत्री / कराधान मंत्री या राज्य सरकार द्वारा निर्वाचित कोई अन्य मंत्री,
- इस प्रकार जीएसटी परिषद् में केंद्र और राज्यों से कुल मिलाकर 33 सदस्य हैं।
- उपाध्यक्ष – राज्य सरकारों के मंत्रियों के बीच से निर्वाचित।
- गणपूर्ति (कोरम)- कुल सदस्यों का 50 प्रतिशत।
- निर्णय – जीएसटी परिषद् का प्रत्येक निर्णय उपस्थित एवं मतदान के 75 % भारित बहुमत होने के बाद ही लिया जाएगा।
- भारित बहुमत सिद्धांत – केंद्र सरकार का मान एक –तिहाई (1/3) वोट माना जाएगा। सभी राज्य सरकारों का एक साथ मिलाकर कुल मान दो-तिहाई (2/3) वोट माना जाएगा।
- इस प्रकार केंद्र सरकार और अधिकतम राज्य सरकारों की सहमति से ही कोई निर्णय लिया जा सकेगा।
- जीएसटी परिषद् से संबंधित सभी मद्दों, यथा- विधि, नियम, दर, वस्तुओं का वर्गीकरण आदि पर निर्णय करेगी।
जीएसटी के दायरे से बाहर की वस्तुएं – अनुच्छेद 366 (12A) में जीएसटी की परिभाषा के माध्यम से मानव उपभोग के लिये अल्कोहल को जीएसटी से बाहर रखा गया है। अस्थायी रूप से पाँच पेट्रोलियम उत्पाद, पेट्रोलियम क्रूड, पेट्रोल, हाई स्पीड डीजल, प्राकृतिक गैस और विमानन टरबाइन ईंधन तथा विद्युत को जीएसटी से बाहर रखा गया है।
जीएसटी कर की विभिन्न दरें – इसके तहत प्रत्येक वस्तु या सेवा पर चार दरों का स्लैब लागू होगा यथा – 5 प्रतिशित, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत तथा 28 प्रतिशत। इसके अलावा कुछ वस्तुओं इस कर से छूट प्रदान की गई है, उनके लिए जीएसटी का स्लैब शून्य प्रतिशत अथवा शून्य होगा।
जीएसटी नेटवर्क – इसकी कल्पना जीएसटी के आईटी अवसंरचना के रूप में की गई। यह संघटन नई प्रणाली के लिए आईटी ढांचे की समूचित व्यवस्था करेगा और करदाताओं को विविध प्रणालियों से एकल प्रणाली में लाने में सहायक होगा। केंद्र तथा राज्य सरकारों ने एक साथ मिलकर इस उद्देश्य विशेष की प्राप्ति हेतु गैर –सरकारी और गैर-लाभकारी संघटन के रूप में GSTN को विकसित किया है, जिसमें केंद्र कि हिस्सेदारी 24.5 प्रतिशत तथा राज्य की हिस्सेदारी 24.5 प्रतिशत है। शेष 51 प्रतिशत गैर-सरकारी वित्तीय संस्थाओं की हिस्सेदारी है।
वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (GSTN) की भूमिका-
- बैंकिंग नेटवर्क के साथ कर भुगतान वितरणों का मिलान करना।
- केंद्र और राज्य सरकारों को करदाताओं के रिटर्न की जानकारी के आधार पर विभिन्न MIS सूचना प्रदान करना।
- पंजीकरण की सुविधा प्रदान करना।
- करदाताओं के प्रोफाइल का विश्लेषण करना।
- IGST की गणना और निपटान करना।
- केंद्रीय एवं राज्य के अधिकारियों को रिटर्न भेजना।
जीएसटी के लाभ –
- इसके द्वारा 'कर पर कर' की समस्या से छुटकारा मिला।
- भारत के लिये एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनने में मदद मिली (एक राष्ट्र - एक कर- एक बाजार)।
- इस व्यवस्था में करापात अंतिम उपभोक्ता पर होने के कारण वस्तु एवं सेवाओं के मूल्यों में कमी आएगी जिससे उपभोक्ताओं को लाभ होगा।
- प्रत्येक राज्य में कर की दर एक समान होने से अर्तराज्यीय व्यापार आसान होगा।
- जीएसटी प्रधानत: प्रौद्योगिकी संचालित प्रक्रिया होने के कारण कर प्रशासन सरल तथा सुगम होगा जिससे अंतत: भ्रष्टाचार में कमीं आएगी।
- थ्रेशोल्ड सीमा - इसका अर्थ है कि कितने मूल्य के काराबार के बाद कोई व्यक्ति जीएसटी के दायरे में शामिल होगा। किसी व्यक्ति का कारोबार यदि (वर्तमान में) रु. 40 लाख से कम है, तो उसे GSTN में रजिस्ट्रेशन करवाने की बाध्यता नहीं है (अगर वह चाहे तो रजिस्ट्रेशन करवा सकता है)। पूर्वोत्तर के लिए यह सीमा रु. 20 लाख है।
- रिवर्स चार्ज – इसके अंतर्गत सेवाकर के भुगतान की जिम्मेदारी सेवा प्राप्तकर्ता पर होगी। इस प्रकार यदि कोई सेवा प्रदाता अपनी आय छिपाने के लिये जीएसटी रिटर्न दाखिल नहीं करता है तब सेवा प्राप्तकर्ता द्वारा दिए गए विवरण के आधार पर सिस्टम स्वत: उसे पहचान लेगा और इन सभी सूचनाओं को आयकर विभाग के साथ साझा किया जा सकेगा।
- ई-वे बिल्स – जीएसटी अधिनियम (2016) के अनुसार, की धारा- 68 के अनुसार जीएसटी के अंतर्गत रु. 50, 000 से अधिक मूल्य की वस्तुओं को 10 किलोमीटर की परिधि से बाहर ले जाने वाले वाहन के प्रभारी व्यक्ति द्वारा इस बिल को ले जाना अनिवार्य है। इसमें हस्तांतरित की जाने वाली वस्तुओं की संपूर्ण जानकारी होती है। इससे कर योग्य वस्तुओं पर निगरानी रखना आसान होगा तथा कर चोरी में कमी आएगी। यह व्यवस्था 1 अप्रैल, 2018 से संपूर्ण देश में लागू की गई है।
- उपभोक्ता कल्याण निधि- केंद्रीय जीएसटी अधिनियम- 2017 (CGST Act, 2017) – इस अधिनियम की धारा 57 तथा 58 के अंतर्गत एक फंड तैयार किया गया है, जिसका उपयोग देश के उपभोक्ताओं के कल्याण हेतु किया जाएगा। इसमें वसूली हुई राशि, ब्याज सहित यदि पात्र व्यक्ति को वापस न की जा सकें, ऐसी स्थिति में, वसूली हुई राशि इस निधि में जमा करा दी जाएगी।
- कम्पोजिशन योजना – जिन छोटे उद्यमियों और कारोबारियों को जीएसटी प्रणाली मुश्किल लगती है, उनके लिए यह आसान योजना शुरू की गई है। इस योजना को चुनने वाले व्यापारियों को वर्ष में केवल एक बार ही रिटर्न भरना होगा तथा उनके लिए कर की दर 5 प्रतिशत की गई है, लेकिन इस योजना का लाभ केवल वे ही व्यापारी / छोटे उद्यमी उठा सकते है जिनका पिछले वित्तीय वर्ष में वार्षिक कारोबार 50 लाख रूपए से कम है। प्रारंभ में इसमें केवल वस्तुओं को ही शामिल किया गया था, किंतु वर्तमान में इसमें वस्तु एवं सेवाएं दोनों शामिल है।
- जीएसटी प्रणाली के अंतर्गत राज्यों को होने वाली राजस्व हानि से संबंधित बिंदु :-
- 101 वें संविधान संशोधन अधिनियम में यह प्रावधान किया गया है कि जीएसटी लागू करने के कारण राज्यों को होने वाले राजस्व के नुकसान के लिये 5 वर्षों तक की अवधि के लिये उन्हें क्षतिपूर्ति करने की व्यवस्था की गई।
- जीएसटी (राज्यों की क्षतिपूर्ति) अधिनियम, 2017 ने वित्तीय वर्ष 2015 -16 के राजस्व को आधार वर्ष राजस्व के रूप में निर्धारित किया है।
- इसके अतिरिक्त 14 प्रतिशत की दर से नाममात्र की वार्षिक वृद्धि प्रदान की गई है।
- इस अधिनियम में एक उपकर (वस्तु एवं सेवा उपकर) वसूल करने की व्यवस्था की गई है, जिसे राजस्व की हानि की स्थिति में राज्यों को क्षतिपूर्ति करने के लिये उपयोग किया जाएगा।
- प्रत्येक दो महीनों के अंतराल पर इस क्षतिपूर्ति को करने का प्रावधान किया गया है।
- CAG को इसके अंकेक्षण करने का दायित्व सौंपा गया है।
निष्कर्ष :-
जीएसटी एक आधुनिक कर व्यवस्था है जो पहले की कर व्यवस्था से अधिक सरल एवं पारदर्शी और भ्रष्टाचार को रोकने में मददगार भी है। जीएसटी से सरकार, उद्योग और उपभोक्ता सभी हितधारक लाभान्वित हो रहे है। भारत में जीएसटी लागू होने से उपभोक्ताओं को दोहरे कराधान (कर पर कर- Cascading) से मुक्ति मिली है जिससे होने वाले लाभों के कारण वस्तुओं की कीमतों में कमी की अपेक्षा की जा रही है। इसके द्वारा उत्पादन क्रियाकलापों तथा निर्यात को बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के नए अवसरों का सृजन तथा बेहतर वित्तीय संसाधनों का विकास होगा जिससे गरीबी उन्मूलन में मदद मिलेगी और अंतत: समावेशी विकास का स्वप्न साकार हो सकेगा।