प्रमुख मंदिर

द्रविड़ शैली के मंदिर :-

1.  रंगनाथ जी का मंदिर :-

  पुष्कर (अजमेर)

  शैली – द्रविड शैली/गौमुख शैली

  भगवान विष्णु को समर्पित है।

2.  33 करोड़ देवी-देवताओं का मंदिर :-

  जूनागढ़ दुर्ग

  औरंगजेब के सेनापति व बीकानेर के शासक अनूपसिंह दक्षिण भारत से आते समय मूर्तियाँ लेकर आए।

  इस मंदिर में हस्य गणपति की मूर्ति है।

  गणेश जी सिंह पर सवार है।

नागर शैली के मंदिर :-

1.  सावित्री मंदिर/सरस्वती मंदिर :- रत्नगिरी पहाड़ी (पुष्कर)

  इस मंदिर में दो प्रतिमाए है- 1. सावित्रद्धी माता और 2. माँ सरस्वती

  यह राज्य का एकमात्र सरस्वती मंदिर है।

2.  ब्रह्माजी के प्रमुख मंदिर :-

1)  पुष्कर (अजमेर) – यह ब्रह्मा जी का एकमात्र मंदिर है जहाँ, ब्रह्माजी की विधिवत रूप से पूजा होती है।

-     इस मंदिर का मूल निर्माणकर्त्ता ज्ञात नहीं है। लेकिन वर्तमान स्वरूप “गोकुल चन्द्र पारिक” ने दिया।

-     कर्नल जेम्स टॉड इस मंदिर पर लगे क्रॉस चिह्न को देखकर चकित रहे गये।

2)  आसोतरा (बाडमेर) – निर्माण – खेताराम जी महाराज

3)  छिछ गाँव (बांसवाडा) – आम्बलिया तालाब के किनारे

4)  जालौर

5)  नागौर

3.  गणेश के प्रमुख मंदिर :-

1)  त्रिनेत्र गणेश – रणथम्भौर दुर्ग

2)  नृत्य गणेश – अलवर

3)  बाजणा गणेश – सिरोही

4)  मूरला गणेश – डूंगरपुर

5)  खेड गणेश – खेड (बाडमेर)

6)  खडे गणेश – कोटा

7)  खोडा गणेश – किशनगढ़ (अजमेर)

8)  काक गणेश – जैसलमेर

9)  मोती डूंगरी गणेश – जयपुर

10)  हेरम्न गणेश – जूनागढ़ दुर्ग – सिंह पर सवार

11)  बोहरा गणेश – उदयपुर

4.  सप्त गौमाता मंदिर – रैवासा (सीकर, देश का एकमात्र सप्त गौमाता मंदिर है।

5.  श्रीनाथ मंदिर – नाथद्वारा (राजसमंद), राजस्थान में भगवान कृष्ण का सबसे बडा मंदिर यह है।

6.  एकलिंग नाथ जी का मंदिर – कैलाशपुरी (उदयपुर), राजस्थान में भगवान शिव का सबसे बडा मंदिर है।

7.  राधा जी का मंदिर – सलेमाबाद (अजमेर), राज्य में राधा जी का सबसे बड़ा मंदिर है।

8.  72 जिनालय मंदिर – भीनमाल (जालोर)

  यह एक जैन मंदिर है जिसमें जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों की 3-3 प्रतिमाएं लगी हुई हैं। 24 x 3 = 72

  यह क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा मंदिर है।

9.  रसिया-बालम और कुँआरी कन्या का मंदिर – माउण्ट आबू, इस मंदिर में रसिया अपने हाथों में विष का प्याला लेकर खड़ी है।

10. नेमिनाथ मंदिर/वैश्याओं का मंदिर – रणकपुर जैन मंदिर के निकट (पाली)

11. सोनी जी नसियां/लाल मंदिर – अजमेर

   निर्माण – 1870 ई. मूलचन्द सोनी ने लाल पत्थरों से करवाया।

  ऋषभदेव को समर्पित

  भाग-1 – नसियाँ – 24 जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाऐं – सभी धर्मो के लिए

  भाग-2 – अक्षरधाम – 400kg सोने से निर्मित – केवल जैन धर्म के लोगों के लिए

12. गोकर्णेश्वर महादेव मंदिर – बीसलपुर बाद के निकट (टोंक)

  यहां रावण ने 6 माह तक भगवान शिव की तपस्या की।

13. ऊषा मंदिर – बयाना दुर्ग बयाना (भरतपुर)

  यह भगवान कृष्ण के पौत्र अनिरूद्ध की पत्नी ऊषा का मंदिर है। यह भारत में एकमात्र ऊषा मंदिर है।

  बयाना का प्राचीन नाम बाणपुर था क्योंकि बाणासुर की पुत्री ऊषा और भगवान कृष्ण के पौत्र अनिरूद्ध के मध्य प्रेम का रास यहीं रचा गया।

  इस स्थान पर फक्का वंश की राजकुमारी चित्रालेखा ने इस मंदिर का निर्माण करवाया।

  कालान्तर में आक्रमणकारियों ने इस मंदिर का तुड़वाकर ऊषा मस्जिद का निर्माण करवा दिया।

  कालान्तर में भरतपुर के जाट शासकों ने इस मस्जिद को तुडवाकर पुन: ऊषा मंदिर का निर्माण करवा दिया।

14. गंगा मंदिर – भरतपुर नगर – राज्य में एक मात्र गंगा मंदिर।

15. लक्ष्मण मंदिर – भरतपुर – भरतपुर के शासक लक्ष्मण के वंशज माने जाते है।

16. विभिषण मंदिर – कैथून (कोटा), यह भारत का एकमात्र विभीषण मंदिर है।

17. सम्बोधि धाम – जोधपुर

18. रणकपुर जैन मंदिर – सादड़ी गाँव के निकट (पाली)

  उपनाम – चौमुखा जैन मंदिर, खम्भों का अजायबघर (1444 खम्भे), आदिनाथ जैन मंदिर – ऋषभदेव को समर्पित

  नदी – मधाई नदी

  शिल्पी – देपाक

  निर्माण – धरणक शाह – राणा कुम्भा के वित्त मंत्री थे।

  धरणक शाह ने यह मंदिर राणा कुम्भा द्वारा धान में दी गई भुमि पर बनवाई राणा द्वारा भुमि दान में दिए जाने के कारण यह मंदिर रणकपुर कहलाया।

  इस मंदिर में 1444 खम्भे है तथा प्रत्येक खम्भा अद्वितीय है।

  विमल सूरी ने इस मंदिर को “नलीनी गुल्म विमान” की संज्ञा दी।

  कवि मेह ने इस मंदिर को “त्रिलोक दिपक प्रसाद मंदिर” कहा।

  यह मंदिर पंयायत शैली व भूमिज शैजी में निर्मित है।

19. राजस्थान के प्रमुख मीरा मंदिर :-

1)  कुडकी गाँव/मीरगढ़ दुर्ग में – कुडकी गाँव (पाली) – रतसिंह

2)  चारभूजा नाथ/मीरा मंदिर – मेड़ता सिटी – राव दूदा

3)  कृष्ण मंदिर/मीरा – चित्तौड़गढ़ दुर्ग – राणा सांगा

4)  जगत शिरोमण/मीरा मंदिर – आमेर – मिर्जा राजा मानसिंह

5)  हरिहर मंदिर/मीरा मंदिर – कैलासपुर (उदयपुर) – महाराणा कुम्भा

20. देलवाड़ा के जैन मंदिर – माउंट आबू (सिरोही)

  श्वेताम्बर जैन मंदिरों का समूह

  काल – 11 से 13वीं सदी के मध्य निर्मित

  कला – सोलंकी कला

  शैली – नागर शैली

  डाक टिकट – 14 अक्टूम्बर 2009 – भारत सरकार द्वारा

  कर्नल जेम्स टॉड – ताजमहल को छोडकर देश की सबसे सुन्दर ईमारत देलवाड़ा के जैन मंदिर समूह है।

21. गोसण बावजी का मंदिर – सराड़ा (उदयपुर)

  पत्थर का बैल चढ़ाने की परम्परा।

  बैल खो जाने के बाद इस मंदिर मनौति के रूप में बैल चढ़ाने की परम्परा चली आ रही है।

22. ईडाणा माता का मंदिर – बंबोर (उदयपुर)

  ईडाणा माता – अग्नि स्नान करने वाली देवी।

  यहां नारियल, मौली, प्रसाद, स्वत: ही जल कर अग्नि शांत हो जाती है।

23. भाडासर जैन मंदिर – बीकानेर नगर

  निर्माण – भांडू शाह व्यापारी

  नीवों में नारियल व घी भरा गया।

  सुमतिनाथ को समर्पित (5वें तीर्थंकर)

  इस मंदिर को “त्रिलोक दीपक प्रसाद” मंदिर भी कहते है।

24. शीतलेश्वर/चन्द्रमौलीश्वर मंदिर – झालरापाटन (झालावाड़)

  राजस्थान में तिथि युक्त देवालयों में सबसे प्राचीन मंदिर

  निर्माण – 689 ई.

25. पद्मनाथ मंदिर/वैष्ण/सात सहेलियों का मंदिर – झालरापाटन

  भगवान विष्णु को समर्पित

  कर्नल जेम्स टॉड ने इसे “चारभूजानाथ मंदिर” कहा।

 

महत्वपूर्ण तथ्य :-

  राजस्थान में सबसे प्राचीन सूर्य मंदिर – कालीका माता का मंदिर (चित्तौड़गढ़ दुर्ग)

  राजस्थान में प्रतिहार कालीन महामारू शैली में निर्मित अन्तिम मंदिर समुह – किराडू के शिव मंदिर समूह (बाड़मेर) इन मन्दिरों में नग्न मूर्तियाँ होने के कारण इसे राजस्थान का खजूराहो कहा जाता है।

  बारा में स्थित भण्डदेवरा शिवालय को हाड़ौती का खजूराहो व राज्य का मिनी खजूराहो कहा जाता है।

  राजस्थान में निर्मित निम्न मंदिर प्रतिहार कालीन महामारू शैली में निर्मित है:-

1)  जगत अम्बिका माता का मंदिर – जगत (उदयपुर) – मेवाड़ का खजुराहो

2)  सास-बहू का मंदिर – नागदा (उदयपुर)

3)  कालिका माता मंदिर – चित्तौड़गढ़ दुर्ग

4)  कुंभस्वामी मंदिर – चित्तौड़गढ़ दुर्ग

5)  महावीर स्वामी – औसियाँ – राजस्थान में महावीर स्वामी का सबसे प्राचीन मंदिर

6)  हरिहर मंदिर – औसियाँ

7)  समिद्धेश्वर मंदिर – चित्तौड़गढ़ दुर्ग

8)  दधिमति माता का मंदिर – गोठ मंगलोद (नागौर)

9)  किराडू के शिव मंदिर समूह – किराडू (बाड़मेर)

10)   औसियाँ/सच्चियाय माता – औसियाँ

11)   देलवाड़ा के जैन मंदिर समूह – माउंट आबू (सिरोही)