पादपों में उत्सर्जन- पौधों में उत्सर्जन के लिए कोई विशेष उत्सर्जी अंग नहीं पाए जाते हैं लेकिन फिर भी अतिरिक्त जल व जल में घुलनशील लवणों को पौधों के वायवीय भागों (Aerial parts) से उत्सर्जित कर दिया जाता है।

पौधों में उत्सर्जन 2 क्रियाओं के द्वारा होता हैं-

1. वाष्पोत्सर्जन/ Transpiration

2. बिंदु स्त्रवण / Guttation

1. वाष्पोत्सर्जन (Transpriation)-

वाष्पोत्सर्जित भागों से वाष्पोत्सर्जन 4 प्रकार का होता है-

(i) रंध्रीय वाष्पोत्सर्जन (Stomatal)- पत्तियों,तरूण, तने पर रंध्र पाए जाते हैं, इनसे लगभग 80-90% वाष्पोत्सर्जन की क्रिया होती है। कुछ फलों जैसे- नीबू, संतरा, केला, ककड़ी आदि की सतह पर भी रंध्र पाए जाते हैं।
(ii) उपत्वचीय वाष्पोत्सर्जन(Cuticular Transpiration) - पत्तियों की सतह मोम के समान, पतला, चिकना आवरण क्यूटिकल (उपत्वचा) कहलाता है, इस क्यूटिकल से लगभग 10-20 प्रतिशत वाष्पोत्सर्जन की क्रिया होती है।
(iii) छाल वाष्पोत्सर्जन (Bark Transpiration) - काष्ठीय वृक्षों की छाल से भी लगभग 0.5 से 0.9% वाष्पोत्सर्जन होता है ।

(iii) वातरंध्रीय वाष्पोत्सर्जन (lenticular Transpiration) - वायवीय भागों में उपस्थित वातरंध्रों (lenticular Transpiration) वायवीय भागों में उपस्थित वातरंध्रों में से लगभग 0.1% वाष्पोत्सर्जन होता है।

वाष्पोत्सर्जन के लाभ-     

वाष्पोत्सर्जन से हानि-

प्रतिवाष्पोत्सर्जक पदार्थ- वे पदार्थ जो वाष्पोत्सर्जन की क्रिया को कम कर देते हैं, प्रतिवाष्पोत्सर्जक पदार्थ कहलाते हैं।

उदाहरण-     

  1. ABA (एब्सिसिक अम्ल)

  2. PMA (फिनाइल मरक्यूरिक एसीटेट)

  3. एस्परीन

  4. BAB

  5. ऑक्सी एथिलीन

  6. CO2 की सान्द्रता 0.03% से ज्यादा

वाष्पोत्सर्जन को प्रभावित करने वाले कारक-

1.      बाह्य कारक 

2.      आन्तरिक कारक

1.      बाह्य कारक-

          1.      प्रकाश

          2.      वायु

          3.      मिट्टी में प्राप्य जल की मात्रा

          4.      तापमान- ताप वाष्पोत्सर्जन के समानुपाती होता है।

-        प्रति डिग्री 10°C ताप पर आपेक्षित आर्द्रता 50 प्रतिशत कम हो जाती है, जिससे वाष्पोत्सर्जन की दर बढ़ती है।

2.      आन्तरिक कारक-

          1.      पत्ती की संरचना

          2.      मूल प्ररोह अनुपात

          3.      पत्ती का दि्कविन्यास

रंध्र की संरचना-

 

                               

बिन्दु स्त्रवण (Guttation)-