दुर्ग / गढ़ :- राज्य में निर्मित ऐसे भवन जिसमें राज्य की सुरक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।

किला :- राज्य में निर्मित ऐसे भवन जिसमें सुरक्षा के पर्याप्त संसाधन न हों।

-           दुर्ग का प्रथम अवशेष मिला - हडप्पा सभ्यता में।

शुक्र नीति के अनुसार दुर्गों की कुल श्रेणियाँ - 9

1. गिरी दुर्ग -  पहाड़ी से घिरा  - आमेर दुर्ग

2. एरण दुर्ग - ऐसा दुर्ग जहाँ पहुँचना मुश्किल हो - जैसलमेर दुर्ग

3. वन दुर्ग - वन से घिरा दुर्ग - रणथम्भौर दुर्ग

4. जल / औद दुर्ग - जो पानी से घिरा हो - माण्डलगढ़ दुर्ग

5. धान्वन दुर्ग - समतल भूमि पर बने हो- अकबर का किला

6. पारिख दुर्ग - चारों तरफ खाई हो - लोहागढ़ दुर्ग

7. पारिध दुर्ग - चारों तरफ दीवार (परकोटा) हो - कुम्भलगढ़ दुर्ग

8. सहाय दुर्ग - आम व्यक्ति + सैनिक रहते है - चित्तौड़गढ़ दुर्ग, जैसलमेर दुर्ग

9. सैन्य दुर्ग - सैनिक निवास करते हैं।

 

आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में कुल दुर्गों की संख्या - 256

भारत में सर्वाधिक दुर्ग = 1. महाराष्ट्र

                                    2. मध्यप्रदेश

                                    3. राजस्थान

राजस्थान में सर्वाधिक दुर्ग = जयपुर

राजस्थान में न्यूनतम दुर्ग = गंगानगर

राजस्थान का सबसे प्राचीन दुर्ग = भटनेर (हनुमानगढ़)

राजस्थान  का सबसे नवीनतम दुर्ग = मोहनगढ़ (जैसलमेर), लोहागढ़ (भरतपुर) 

राजस्थान में सर्वाधिक विदेशी आक्रमण हुए = भटनेर

राजस्थान में सर्वाधिक स्वदेशी आक्रमण = तारागढ़ (अजमेर) - गढ़ - बिठली, रूठी रानी का महल भी कहा जाता है।

राजस्थान में सर्वाधिक बुर्जों वाला किला = जैसलमेर (99 बुर्जें)

बुर्ज - दुर्ग की दीवार पर सैनिक चौकी बनाने वाला स्थान

प्रवेश द्वार :

 जून, 2013  में युनेस्को ने राजस्थान के 6 दुर्गों को विश्व विरासत में शामिल किया है।

 

Trick :- गाजर चिकु आम

1. गागरोन (झालावाड़)

2. जैसलमेर

3. रणथम्भौर (स.माधोपुर - स्थापना - सवाई माधोसिंह (जयपुर शासक) )

4. चित्तौड़गढ़

5. कुम्भलगढ़

6. आमेर   

1. सोनारगढ़ दुर्ग - जैसलमेर

उपनाम  

1. गौहरागढ़

2. गलियों का दुर्ग

3. स्वर्ण गिरी

4. राज. का अण्डमान

5. रेगिस्तान का गुलाब

6. प. सीमा का प्रहरी


कहावते :

1. घोड़ा किजे काठ का, पग कीजे पाषाण शरीर राखे बख्त, जै पहुँचे जैसाण। (अबुल फजल)

2. गढ़ दिल्ली गढ़ आगरा, अधगढ़ बीकानेर।

         भली चिणायों भाटिया, गढ़ लो जैसलमेर।

जैसलमेर के \(2\frac12\)  साका :-

प्रथम साका - (1312) -

दूसरा साका - (1370-71)

अर्द्ध साका - (1550)

नोट :-

1. राजस्थान का वैष्णो मंदिर - अर्बुदापाल - माउंट आबु (सिरोही)

2. वास्तविक वैष्णो मंदिर - कटराथल (जम्मू-कश्मीर)

 

भटनेर दुर्ग

निर्माण - भूपत भाटी - तीसरी शताब्दी में

श्रेणी - धान्वन

वास्तुकार - कैकेया

प्रवेश द्वार - गोरखपोल

उपनाम - उत्तरी सीमा का प्रहरी, भाटियों की मरोड़

भटनेर दुर्ग में स्थित इमारतें -

-        गुरु गोरखनाथ जी मंदिर

-        हनुमान जी का मंदिर

दिल्ली - मुल्तान मार्ग पर स्थित दुर्ग

घग्धर / सरस्वती नदी के तट पर स्थित

राज्य का सबसे प्राचीन दुर्ग

मिट्टी से निर्मित दुर्ग

पहला विदेशी आक्रमण - 1001 ई. मोहम्मद गजनवी

अन्तिम विदेशी आक्रमण - 1570/97 - अकबर

अनूपगढ़ - श्रीगंगानगर में - अनूप सिंह द्वारा निर्मित

राज्य का एकमात्र दुर्ग जहाँ पर तैमूर लंग के आक्रमण के

समय मुस्लिम महिलाओं ने जौहर किया।

इस जौहर के समय स्थानीय शासक - मूलचन्द

जौहर का प्रमाण - तैमुर लंग की आत्मकथा 'तुजुक-ए-

तैमूरी' में

ग्यासुद्दीन तुगलक के भाई शेरखाँ की कब्र इसी दुर्ग में

स्थित है।   

1805 ई. में बीकानेर शासक सूरतसिंह ने मंगलवार के

दिन जापाता खाँ भट्‌टी को जीतकर 'हनुमानगढ़' रखा।

भटनेर दुर्ग को 'हाकरा दुर्ग' भी कहा जाता है।

 

चूरू का किला

इस किले का निर्माण  कुशाल सिंह ने करवाया था।

यह किला चाँदी के गोले दागने के लिए प्रसिद्ध है।

1814 में बीकानेर शासक सूरतसिंह के सेनापति अमरचंद

सुराणा द्वारा आक्रमण करने पर चूरू शासक शिवसिंह ने

दागे थे।

जूनागढ़ (बीकानेर)

निर्माण (1589-1594) - रायसिंह

श्रेणी - धान्वन, पारीख

प्रवेश द्वारा - कर्णपोल, सुरजपोल

उपनाम - राती घाटी दुर्ग , जमीन का जेवर

-        जुनागढ़ दुर्ग के मुख्य प्रवेश द्वार पर जयमल व फत्ता की गजारूढ़ मूर्तियाँ लगी हुई है।

-        इस दुर्ग में 33 करोड़ देवी-देवताओं का मन्दिर है, जिसका निर्माण अनुप सिंह ने करवाया।

-        33 करोड़ देवी-देवताओं की साल - मण्डोर (जोधपुर) में है।

-        इस दुर्ग के गजनेर महल में गंगासिंह की सोने-चाँदी से निर्मित वेश-भूषा, सोफे पलंग स्थित है।

-        इस दुर्ग में स्थित बादल-महल राजस्थान में सोने की कलाकृति हेतु प्रसिद्ध है।

-        गंगा निवास, सूरत निवास, प्रताप निवास, लाल निवास, रतन निवास, मोती महल, रंग महल, सुजान महल, गणपत विलास, भैरव चौक, गुलाब मंदिर, सूर मंदिर आदि प्रमुख स्थल है।

-        यहाँ राव बीका के चाँदी के पलंग व सिंहासन हैं।

-        यहाँ स्थित महलों में मुगल शैली का प्रभाव दिखाई देता है।

-        यहाँ स्थित महलों में सोने की चित्रकारी की गई है।

        मेहरानगढ़ दुर्ग :- जोधपुर

-        निर्माण - 12 मई, 1459 में राव जोधा ने करवाया।

-        नींव रखी - करणी माता ने

-        श्रेणी - गिरी दुर्ग - पंचेटिया / चिड़िया टुक पहाड़ी पर स्थित

-        प्रवेश द्वार - जोधा की पोल

-        उपनाम -

         1. मयूर ध्वज गढ़

         2. विहंगगढ़

         3. कागमुखीगढ़

         4. सूर्यगढ़

         5. गढ़ चिंतामणि

         6. जोधा की ढाणी

कथन -

1. रूड्यार्ड कलिंग / किपलिंग - परियों तथा फरिश्तों द्वारा निर्मित

2. जैकलीन कैनेडी - दुनिया का 8 वाँ अजूबा

3. बिल गेट्स - जोधपुर - नीला शहर

4. कर्नल जेम्स टॉड - दुनिया के सबसे मँहगे व बेशकीमती मेहरानगढ़ के दरवाजे व खिड़कियाँ है।

मेहरानगढ़ दुर्ग की नींव में जिंदा चुना गया।

         1. राजाराम कड़ेला

         2. मोहर सिंह

खेता ब्राह्मण ने मेहरानगढ़ दुर्ग के शुद्धिकरण हेतु अपना कलेजा आहूत किया।

मंदिर -

1. चामुण्डा माता का मंदिर -

घटना की जाँच हेतु आयोग - जसराज चौपड़ा आयोग (वर्ष 2019 में राज्य सरकार को रिपोर्ट दी)

2. नागणेची माता का मंदिर -  जोधपुर राठौड़ों की कुल देवी

महल :-

1. फूल महल - सोने का कार्य किया गया बख्त सिंह द्वारा

2. चौखा महल 

3. अभय महल

4. बीचल महल

5. मोती महल

दुर्ग में तोपें :-

1. शंभु बाण

2. किलकीला

3. कड़क बिजली

4. गजनी

5. गजक

6. गुब्बारा

7. धुड़धाणी

8. हुंकार

9. बादली

10. जजमान

बावड़ियाँ - रानीसर, पदमसर, चाँद बावड़ी, जोधेलाव।

छतरियाँ - धन्ना व भींवा की छतरी

दुर्ग का आधुनिक निर्माता - मालदेव

1857 ई. के समय इस दुर्ग पर बिजली गिरने पर तख्तसिंह द्वारा जीर्णोद्धार करवाया गया।

मस्जिद - शेरशाह सूरी की

पुस्तकालय - मान प्रकाश पुस्तकालय

श्रृंगार चौकी महल - मेहरानगढ़ में

-        इसमें जोधपुर राजाओं का राज्यभिषेक होता था।

 

चित्तौड़गढ़

चित्तौड़गढ़ दुर्ग का निर्माण चित्रागंद मौर्य ने करवाया।

श्रेणी - धान्वन श्रेणी को छोड़कर सभी श्रेणियों का माना जाता है।

प्रवेश द्वार - पाड़न पोल, भैरव पोल, रामपोल

उपनाम

-    राजस्थान का गौरव

-    दुर्गों का सिरमौर

-    त्याग व बलिदान का प्रतीक

-    दक्षिणी सीमा का प्रहरी

-    मूर्तियों का अजायबघर

-    भारतीय मूर्तिकला का विश्व-कोश

-    चित्तौड़गढ़ दुर्ग के मुख्य प्रवेश द्वारा पर बाघसिंह का स्मारक स्थित है।

-    चित्तौड़गढ़ दुर्ग के भैरवपोल पर चार हाथ वाले लोकदेवता कल्लाजी राठौड़ का स्मारक स्थित है।

-    चित्तौड़गढ़ दुर्ग का अन्तिम प्रवेश द्वारा रामपोल है जिस पर फतेहसिंह सिसोदिया का स्मारक स्थित है।

दुर्ग के प्रमुख मंदिर -

1. तुलजा भवानी मंदिर - निर्माण - बनवीर द्वारा

-    मराठा शिवाजी की आराध्य देवी

2. श्रृंगार - चंवरी

-    निर्माण - 'वेल्लका' ने 1448 - 57 में

-    महाराणा कुम्भा की पुत्री रमा देवी का विवाह स्थल

-    रमा बाई का विवाह - मण्डुलीक के साथ

3. सात-बीस देवरी मंदिर - जैन मंदिर

4. मोकल / त्रिभुवन नारायण मंदिर / समद्विश्वर मंदिर

5. कुम्भश्याम मंदिर - कुम्भा ने

6. मीरा मंदिर - राणा सांगा ने

7. कालीका माता मंदिर / सूर्य मंदिर - मान मौर्य ने

 

दुर्ग के प्रमुख महल -

1. गोरा-बादल महल

2. पद्मनी महल

3. झाला महल

4. सपूत महल

प्रमुख जलाशय -

1. भीमलत तालाब

2. रत्नेश्वर तालाब

3. खातन की बावड़ी

4. घी-तेल बावड़ी

5. सूर्यमुख कुण्ड

6. घासुण्डी बावड़ी

अन्य महत्वपूर्ण बिन्दू -

-  चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर प्रथम विदेशी आक्रमण - भाभू ने

-  राजस्थान का सबसे बड़ा दुर्ग जिसकी लम्बाई 8 किमी. व चौड़ाई 2 किमी. है।

-  आधुनिक निर्माता - राणा कुम्भा

-  कुम्भा ने इस दुर्ग में विजय-स्तम्भ (मालवा विजय के उपलक्ष) में 1438-49 ई. में करवाया।

-  वास्तुकार - जैता, नाथा, पोमा, पूंजा

-  ऊँचाई - 122 फीट

-  सिढ़ियाँ - 154

-  माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान पुलिस व वन विभाग का प्रतीक चिह्न

-  भगवान विष्णु को समर्पित

-  कुल 9 मंजिला भवन

-  जीर्णोद्वार - स्वरूप सिंह

-  राजस्थान का प्रथम स्मारक जिस पर 15 अगस्त, 1849 को 1 रु. का डाक टिकट जारी।

-  चित्तौड़गढ़ दुर्ग का लघु दुर्ग - नौलखाँ भण्डार कहलाता है, जिसका निर्माण बनवीर ने करवाया।

-  राज्य का एकमात्र ऐसा दुर्ग जिसमें खेती होती है।

-  अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग का नाम बदलकर खिज्राबाद किया।

-  मेवाड़ के एकमात्र शासक महाराणा प्रताप थे, जिन्होंने कभी चित्तौड़गढ़ दुर्ग में प्रवेश नहीं किया ।

-  चित्तौड़गढ़ दुर्ग को अबुल-फजल ने कहा - 'गढ़ तो चित्तौड़गढ़ बाकी सब गढैया'

चित्तौड़गढ़ दुर्ग के साके -

प्रथम साका - 1303 ई.

-    शासक / केसरिया - राणा रतनसिंह

-    जौहर - पद्मनी

-    आक्रमण - अलाउद्दीन खिलजी

द्वितीय साका - 1534 ई.

-    केसरिया - रावत बाघ सिंह

-    जौहर - कर्मावती

-    आक्रमण - बाहदुरशाह

तृतीय साका - 1568

-    केसरिया - फत्ता

-    जौहर - फूलकँवर

-    आक्रमण - अकबर

कुम्भलगढ़ दुर्ग

-    निर्माण - सम्प्रति मौर्य

-    आधुनिक निर्माता - राणा कुम्भा

-    श्रेणी - गिरी दुर्ग (जरगा पहाड़ी पर), पारिध दुर्ग

-    प्रवेश द्वार - ओरठ पोल

-    उपनाम -

    1. मेवाड़-मारवाड़ सीमा का प्रहरी

    2. मेवाड़ राजाओं की संकटकालीन राजधानी

    3. मेवाड़ की तीसरी आँख - कटारगढ़

प्रमुख इमारते / मंदिर -

1. बादल महल - राजस्थान का सबसे बड़ा महल

2. झाली रानी का मालिया
 

1. कुम्भ स्वामी मंदिर - राणा कुम्भा

2. नीलकंठ महादेव मंदिर - टॉड ने यूनानी मंदिर कहा
 

-    कुम्भलगढ़ दुर्ग के चारों तरफ कुल 36 किमी. लम्बी दीवार है, जिसे 'भारत की महान दीवार' कहते है। इस दीवार की चौड़ाई 8 मी. है।

-    कुम्भलगढ़ दुर्ग को कर्नल जेम्स टॉड ने एस्ट्रॉकन कहा है।

-    अबुल फजल ने कटारगढ़ के बारे में कहा - यह दुर्ग तो इतनी बुलन्दी पर स्थित है, जिसे नीचे से ऊपर की ओर देखने में सिर की पगड़ी गिर जाती है।

 

तारागढ़ (अजमेर)

श्रेणी - गिरी दुर्ग (बीठली पहाड़ी पर)

प्रवेश द्वार - पृथ्वीपोल

उपनाम

-    राजस्थान का हृदय

-    अरावली का अरमान

-    राजपूताना की कुंजी

-    राजस्थान का जिब्राल्टर - विश्व हेबर ने कहा

-    गढ़ बीठली दुर्ग

-    इस दुर्ग का जीर्णोद्धार पृथ्वीराज सिसोदिया ने करवाकर इसका नाम तारागढ़ किया।

-    राज्य का एकमात्र दुर्ग जहाँ घोड़े की मजार स्थित है।

-    राज्य का प्रथम तरणताल स्थित

-    मिरान साहब की दरगाह स्थित

-    अजय महल नाटयरम्भा महल व रूठी रानी का महल स्थित है।

-    शिशखमा नामक गुफा स्थित

-    श्रृंगार बुर्ज, घूँघट बुर्ज, इमली बुर्ज व पीपली बुर्ज - मुख्य बुर्जे (कुल - 17 बुर्जे)

-    दुर्ग में स्थित रंगमहल का निर्माण छत्रशाल ने करवाया।

-    प्रमुख तोप – गर्भ गुंजन व महाबाला तोप

-    मेवाड़ राणा लाखा इस दुर्ग को जीवनभर नहीं जीत पाये।

-    मिट्टी के तारागढ़ की रक्षा करते हुए ‘कुम्भकर्ण हाड़ा’ ने अपना बलिदान दिया।

•   अकबर का किला

-    निर्माण – अकबर 1570 में

-    श्रेणी – धान्वन व सैन्य दुर्ग

-    प्रवेश द्वार – जहाँगीर पोली

-    ख्वाजा मोइनुद्दीन के सम्मान में निर्मित

-    नींव – दादू दयाल द्वारा

-    उपनाम –

    1. अकबर का दौलतखाना

    2. अकबर का शास्त्रागार

    3. मैंगनीज दुर्ग   

    4. अजमेर का किला

-    प्रमुख महल – जहांगीर महल

-    राजस्थान का एकमात्र दुर्ग, जो पूर्ण रूप से मुगल शैली में निर्मित।

-    सर टॉमस रॉ को सर्वप्रथम इसी दुर्ग में बसाया गया।

-    हल्दीघाटी युद्ध की योजना स्थली

-    दुर्ग का जीर्णोद्वार – लॉर्ड कर्जन ने

-    1907 में राजपूताना – संग्रहालय की स्थापना, जिसके प्रथम अध्यक्ष –  डॉ. गौरी शंकर, हीरानंद उपाध्याय

•    टॉडगढ़ दुर्ग

-    प्राचीन नाम – बोरसवाड़ा

-    अंग्रेजों द्वारा निर्मित – कर्नल जेम्स टॉड द्वारा

•   गागरोन दुर्ग – झालावाड़

-    निर्माण – बीजलदेव परमार

-    श्रेणी – जल दुर्ग – कालीसिंध व आहू नदी के संगम पर

-    अन्य नाम – डोडगढ़, धुलरगढ़

-    प्राचीन नाम – गगरितपुर

-    गागरोन नामकरण – देवीसिंह खींची ने

-    बिना नींव के निर्मित दुर्ग जिसके तिहरा परकोटा है।

-    प्रवेश sssद्वार – बुलंद दरवाजा निर्माण – औंरगजेब ने

-    मधुसुदन मंदिर, दीवान-ए-खास, दीवान-ए-आम, जनाना महल, अचलदास के महल इत्यादि दर्शनीय स्थल है।

-    दोषियों को सजा देने के लिए इस दुर्ग में गींधक राई पहाड़ी का प्रयोग किया जाता है।

•   दुर्ग के प्रमुख शाके :-

-    प्रथम शाका – 1423

    स्थानीय शासक – अचलदास खींची

    आक्रमणकारी – होशंगशाह (गुजरात)

-    द्वितीय शाका – 1444

    शासक – पल्हणसी

    आक्रमणकारी – मुहम्मद खिलजी-I (मालवा)

-    खिलजी ने इस दुर्ग का नाम बदलकर ‘मुस्तफाबाद’ रखा गया।

-    गागरोन दुर्ग संत पीपा की जन्मस्थली मानी जाती है

रणथम्भौर दुर्ग

निर्माण -  वन, गिरी, एरण

प्रवेश द्वार - नौलखा दरवाजा

उपनाम -

-     चित्तौड़गढ़ का छोटा भाई

-     दुर्गाधिराज

रणथम्भौर का शाब्दिक अर्थ - रण की घाटी

रणथम्भौर स्थित प्रमुख इमारते / मंदिर -

1. दिलखुश महल

2. जौरा-भौरा महल

3. सुपारी महल

4. जोगी महल

5. पदमला महल

अन्य प्रमुख स्थल :

-     गणेश / रणतभंवर गणेश / त्रिनेत्र गणेश मंदिर

-     शाकम्भरी माता का मंदिर

-     पदमला / देवल दे तालाब

-     रणथम्भौर दुर्ग में गुप्त गंगा बहती है।

रणथम्भौर दुर्ग में लगे दो उपकरण -

1.   अर्रादा - रणथम्भौर दुर्ग में लगा ऐसा उपकरण जो दुर्ग के बाहर दुश्मन- सैनिकों पर पत्थर फेंकने के काम आता है।

2.   मगसी - दुर्ग से बाहर दुश्मन सैनिकों पर ज्वलनशील पदार्थ फेंकने का उपकरण।

कहावते : -

 

बाली दुर्ग (पाली)

निर्माण - बीरमदेव चौहान

 

आमेर का इतिहास

निर्माण - कोकिल देव (1207 ई.)

श्रेणी - गिरी दुर्ग - कालीखोह पहाड़ी पर

प्रवेश द्वार - गणेश पोल व हाथी पोल

उपनाम -

-  अम्बेवती दुर्ग

-  आम्रपाली दुर्ग

आमेर दुर्ग के मुख्य-प्रवेश द्वार गणेशपोल को फर्ग्युसन ने विश्व का सबसे सुन्दर दरवाजा बताया है।

•    दुर्ग के प्रमुख महल -

1.   दीवान-ए-खास

2.   दीवान-ए-आम

3.   केसर-क्यारी

उपर्युक्त तीनों महलों का निर्माण मिर्जा राजा जय सिंह ने करवाया।

 

•    कदमी महल - इस महल का प्रारम्भिक निर्माण राजदेव ने करवाया जबकि आधुनिक निर्माता - मान सिंह I

-     आमेर राजाओं का राज्यभिषेक स्थल भी यहीं है।

•   सुहाग मंदिर, सुख महल, जसमहल - तीनों महलों का निर्माण भी मानसिंह I द्वारा ही करवाया गया।

•   प्रमुख मंदिर :-

1.   शिला देवी का मंदिर - कच्छवाहा राजवंश की आराध्य देवी

-     निर्माण - मान सिंह I ने करवाया।

-     इस मंदिर में लगी मूर्ति / प्रतिमा को मान सिंह I पूर्वी बंगाल के राजा केदार को पराजित कर जस्सोर नामक स्थान से लाया।

2.   जगत शिरोमणी मंदिर :-

-     निर्माण - मान सिंह I की पत्नी कनकावती द्वारा।

-     मूर्ति - हल्दीघाटी युद्ध के समय मान सिंह I चित्तौड़गढ़ के मीरा - मंदिर से लाया।

•   प्रमुख जलाशय -

1.   मावठा तालाब

2.   हाथी-तालाब

3.   पन्ना मीणा बावड़ी

•   अन्य महत्त्वपूर्ण बिन्दु -

-     इस दुर्ग को देखने सर्वाधिक विदेशी पर्यटक आते है।

-     हाथी सवारी के लिए प्रसिद्ध दुर्ग।

-     पर्यटन विभाग द्वारा बुखारा गार्डन में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण केन्द्र।

-     दुर्ग का आधुनिक निर्माता - मान सिंह प्रथम

-     राजस्थान का एकमात्र दुर्ग, जिसमें बाजार स्थित है। (मीणा बाजार)

-     यह जयगढ़ दुर्ग से जयसुरंग से जुड़ा हुआ है।

-     1707 ई. में बहादुरशाह ने इस दुर्ग का नाम बदलकर 'मोमिनाबाद' रखा, कुछ समय पश्चात इसका नाम 'इस्लामाबाद' कर दिया गया।

जयगढ़ दुर्ग

निर्माण - मिर्जा राजा जय सिंह द्वारा

प्रवेश द्वार - डुँगर पोल, जय पोल

श्रेणी - गिरी दुर्ग ईगल / चिल्ह की पहाड़ी पर स्थित है।

-     इस दुर्ग में राजस्थान का सबसे बड़ा टांका स्थित है।

-     निर्माण - आमेर का राज-खजाना रखने हेतु करवाया गया।

-     इस दुर्ग में एशिया की सबसे बड़ी तोप - जय बाण / रणबंका तोप स्थित है।

-     तोप का वजन = 50 टन

-     तोप की लम्बाई = 20 फीट

-     गोले का वजन = 50 किलो ग्राम

-     गोले की मारक क्षमता = 35 किमी. (22 मील)  

-     इस तोप को इतिहास में केवल एक ही बार चलाया गया, जिससे गोलेलाव (चाकसु) तालाब का निर्माण हुआ।

-     एशिया का तोप बनाने का पहला कारखाना इसी दुर्ग में स्थापित किया गया।

नाहरगढ़ दुर्ग (जयपुर) :-
निर्माण : – सवाई जयसिंह 
समय – 1734 . में 
श्रेणीयह एक गिरी दुर्ग है, जिसका निर्माण मीठड़ी 
पहाड़ी पर करवाया गया था। 
प्रवेश द्वारानाहरपोल डॅूँगरपोल। 
उपनामजयपुर का मुखौटा, मीठड़ी दुर्ग, सुदर्शनगढ़  
जनाना क्वार्टर।                          
• मराठा आक्रान्ताओं से बचने हेतु इस दुर्ग का निर्माण करवाया गया। 
• नाहर सिंह भोमिया की छतरी इस दुर्ग में स्थित है। 
• माधवेन्द्र भवन का निर्माण सवाई जयसिंह ने करवाया। 
• माधोसिंह ने अपनी 9 पासवानों के लिए एक समान नौ महलों का निर्माण विक्टोरिया शैली में इसी दुर्ग में करवाया जो निम्न प्रकार है। 
1. सुख महल    
2. खुश महल 
3. बसंत महल     
4. ललित महल 
5. जवाहर महल    
6. आनन्द महल 
7. प्रकाश महल    
8. चाँद महल 
9. लक्ष्मी महल 
• भगवान श्री कृष्ण का सुदर्शन चक्र के लिए हुए मंदिर भी इस महल में स्थित है। 
लोहागढ़ दुर्ग (भरतपुर) :-
निर्माण : – रुस्तम जाट  
वास्तविक/आधुनिक निर्मातासूरजमल जाट 
समय–1733 . में 
श्रेणीपारिख दुर्ग
प्रवेश द्वारालोरियापोल 
उपनामराजस्थान का अजयदुर्ग, पूर्वी सीमा का प्रहरी। 
दुर्ग के प्रमुख महलदादी माँ का महल, किशोरी माँ का 
महल वजीर कोठी।             
• जवाहर बुर्ज का निर्माण जवाहर सिंह ने दिल्ली विजय के उपलक्ष में करवाया था, जिसमें भरतपुर शासकों का राजतिलक होता है। 
प्रमुख मंदिरलक्ष्मण मंदिर(राजस्थान में एकमात्र) बिहारी जी का मंदिर, मोहनजी का मंदिर, राजेश्वरी माता का मंदिर, गंगा मंदिर जामा मस्जिद कचहरी किले में स्थित है।  
• भरतपुर की जीवन रेखा मोती झील को कहा जाता है। जिसमें रूपारेल नदी का पानी जाता है। इस झील का पानी सुजान गंगा के माध्यम से लोहागढ़ दुर्ग में पहुँचाया गया है। 
• दुर्ग के चारों ओर स्थित खाई में सुजान गंगा मोती झील का पानी आता है।  
• यह राजस्थान का सबसे नीचा दुर्ग है। 
• यह मिट्टी से निर्मित दुर्ग है। 
• 1765 . में जवाहर सिंह के द्वारा लाल किले (दिल्ली) से अष्टधातु का दरवाजा उखाड़कर लाया गया तथा गोपालगढ़ की ओर लोहागढ़ किले पर लगवाया गया। 
• 1805–1806 . में जसवंतराय होल्कर को इस दुर्ग में शरण दी गई, जिस कारण लॉर्ड लेक ने दुर्ग पर लोहे के गोले दागे किन्तु इससे दुर्ग को कोई भी नुकसान नहीं हुआ, जिससे इसका नाम लोहागढ़ दुर्ग पड़ा इस विजय के उपलक्ष में रणजीत सिंह ने फतेह बुर्ज का निर्माण करवाया। 
• इस दुर्ग को पूर्व का प्रहरी कहते हैं। 
• 1826 . में इस दुर्ग पर अंग्रेजों ने अधिकार कर लिया। 
दुर्ग के लिए प्रचलित कहावत :- आठ फिरंगी, 9 गोरे लड़े जाट के दो छोरे (दुर्जनशाल, माधोसिंह

बयाना दुर्ग
- र्माण- 1040 ई. विजयपाल
- स्थित- दमदमा/मानी पहाड़ी पर स्थित है।
- उपनाम- रोहितपुर, बाणासुर, विजयमंदिरगढ़, बादशाह दुर्ग
- 1618 ई. डच यात्री  फ्रेंक स्पेल्सर बयाना आते हैं।
- नील की खेती की जानकारी देते हैं।
- भीमलाट का स्तंभ निर्माण- विष्णुवर्धन ने करवाया।
- राजस्थान का प्रथम विजय स्तम्भ का निर्माण ने समुद्रगुप्त ने करवाया।
- दूसरा विजय स्तम्भ- मण्डोर (जोधपुर)
- तीसरा विजय स्तम्भ-चित्तौड़गढ़
- चौथा विजय स्तम्भ-आहवा (पाली) 1857ई. 
- पाँचवाँ विजय स्तम्भ-जैसलमेर (1965) 
- इस दुर्ग में उषा मंदिर का निर्माण रानी चित्रलेखा ने करवाया।
- उषा मंदिर की जगह मुबारक खिलजी ने उषा मस्जिद का निर्माण करवाया।
डीग का किला :- भरतपुर
- निर्माण- बदनसिंह
- सूरजमल महल स्थित
- इस दुर्ग के किनारे जल महल स्थित है।
नोट- राजस्थान में जल महलों की नगरी-डीग (भरतपुर) को कहा जाता है।
बालाकिला- अलवर
- अलवर का किला
- निर्माण- उलगुराम कोकिलदेव
- 52 दुर्गो का लाडला।
- सलीम महल स्थित
- हैंगिग महल/झुलता महल
- झुलता हुए बांघ/पुल-कोटा
भानगढ़ किला- अलवर
- निर्माण- भगवंतदास
- भूतिया किला
- इस दुर्ग में मेहंदी महल स्थित है।
- इसमें घास कुण्ड स्थित है। 
कुचामन का किला-नागौर
- निर्माण- गौड़ राजपुतों द्वारा
- आधुनिक निर्माता-झालिम सिंह द्वारा 18वीं शताब्दी में करवया गया। 
- अणरवला का दुर्ग
- इसे जागीरी किलों का शिरमौर कहा जाता है।
- प्रमुख बुर्ज- सुनहरी बुर्ज, पाताल्या बुर्ज
- अंधेरया महल, पाताल्य महल
- चामन एक मात्र जागीर थी,  जिसकी स्वयं की मुद्रा थी इक्कतीसंदा
कुचामन 
- कुचामन जागीर की राजधानी-मारोठ
- यह दुर्ग कुचबंधियों की ढाणी के नाम से विख्यात है।
- अभयसंह के शासक बनने से पहले कुचामन मेड़ता के अधीन था, लेकिन अभयसिंह के शासन काल में यह जोधपुर राज्य के अधीन हुआ।
नागौर का किला
- निर्माण- सोमेश्वर के दरबारी मंत्री कैमास/कदम्बवास द्वारा
- प्राचीन नाम- अहिच्छत्रगढ़/नागाणा
- वास्तविक बादल महल स्थित है, जिसका निर्माण बख्तसिंह ने करवाया था।
- जल-प्रबंध हेतु विश्व विख्यात दुर्ग।
- अमरसिंह राठौड़ की कर्मस्थली- 16 खंभो की छतरी में स्थित है।
सिवाना का किला-बाड़मेर
- निर्माण-वीरनारायण पंवार
- स्थित- हल्देश्वर/कुम्बा पहाड़ी पर स्थित
- इसे कुम्बाना दुर्ग भी कहते हैं।
- यहाँ मामदेव कुण्ड स्थित है।
- इसे जालौर दुर्ग की कुंजी कहा जाता है।
- मारवाड़ राजाओं की शरण-स्थली कहा जाता है।
- मारवाड़ राजाओं की संकटकालीन राजधानी
- 1308 ई. अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय प्रथम साका हुआ।

 

निर्माण :- डॉ. दशरथ शर्मा के अनुसार नागभट्ट-I (730 ई.-760 ई. के द्वारा)
G.H. ओझा के अनुसार 10वीं सदी में धारा वर्ष परमार के द्वारा।
उपनाम - सोनगढ़, सुवर्णगिरी
मुख्य प्रवेश द्वारा - सिरपोल, सूरजपोल
जालोर दुर्ग में जालंधरनाथ की गुफा स्थित है।
दुर्ग के सामने नटनी की छतरी बनी है।
नटनी का चबूतरा - पिछौला झील (उदयपुर) के किनारे बना है।
प्रमुख जलाशय :-
झालर बावड़ी
सोहन बावड़ी
पापड़ बावड़ी
प्रमुख महल :-
मानसिंह का महल
रानी महल (दो मंजिला)
नाथावत महल
मंदिर :- अवसुधन मंदिर, जोगमाया माता का मंदिर, आसापुरा माता मंदिर, बीरमदेव चौकी स्थित है।
- परमार कालीन कीर्ति स्तंभ भी स्थित है।
- अलाउद्दीन खिलजी ने इस दुर्ग में फिरोजा/तोप मस्जिद का निर्माण करवाया।
- 1311 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने जालोर दुर्ग पर आक्रमण किया।
- जालोर दुर्ग के साके (1311 ई.) में केसरिया का नेतृत्व कान्हड़देव ने व जौहर का नेतृत्व जैतल देवी ने किया।
- हसन निजामी "इस दुर्ग का दरवाजा कोई आक्रमणकारी अब तक नहीं खोल पाया।"
- जालौर दुर्ग को सिवाना दुर्ग की कुंजी कहा जाता है।
- इस दुर्ग के बारे में प्रचलित कथन  'राई का भाव राते ही गया'

पिपलुद दुर्ग
स्थान - बाड़मेर
निर्माण - दुर्गादास राठौड़
इसे अजीत सिंह की शरणस्थली कहा जाता है।

बाली दुर्ग :-
स्थान - पाली
निर्माण - बीरमदेव (जालोर)
- इस दुर्ग में पांडवों के गुली डंडे स्थित है।
- वर्तमान में इस दुर्ग में जेल संचालित है।
नवलखा दुर्ग 
स्थान - झालावाड़ 
निर्माण - पृथ्वीसिंह
एकमात्र दुर्ग जिसका निर्माण कार्य अभी तक जारी है।
नवलखा बावड़ी - डूँगरपुर
नवलखा /नौलखा दरवाजा - रणथंभौर
नवलखा बुर्ज - चित्तौड़गढ़
नवलखा महल - उदयपुर
नवलखा मंदिर - पाली

कोटा दुर्ग:-
निर्माण - देवा जैत्रसिंह
- इस दुर्ग में मावठा/रावठा तालाब स्थित है।
- भित्ति चित्रों हेतु झाला हवेली प्रसिद्ध है।
- 1857 ई. की क्रांति के समय सर्वाधिक अवधि तक क्रांतिकारियों के अधीन रहने वाला दुर्ग (लगभग - 6 माह तक) 

शेरगढ़ दुर्ग /कोषवर्द्धन दुर्ग:-
स्थान - बाराँ
निर्माण - मालदेव
इस दुर्ग में हुनहुन्कार नामक तोप स्थित है।
इस दुर्ग में रावल महल स्थित है।

नाहरगढ़ दुर्ग:-
स्थान : बाराँ
इस दुर्ग की आकृति लाल किले जैसी है।

भैंसरोड़गढ़ दुर्ग :-
स्थान : चित्तौड़गढ़
निर्माण :- भैंसाशाह व रोड़ाशाह
- यह एक व्यापारिक दुर्ग है।
- इसे राजस्थान का वेल्लौर कहा जाता है।

अचलगढ़ दुर्ग:-
स्थान - सिरोही
निर्माण - राणा कुंभा 

माण्डलगढ़ दुर्ग 
स्थान - भीलवाड़ा
निर्माण - मांडिया भील
- यह दुर्ग बनास - बेड़च - मेनाल नदियों के संगम पर स्थित है।
- श्रेणी - जल/औद्रुक दुर्ग
- हल्दीघाटी युद्ध में पूर्व अकबर की सेना को इस दुर्ग में 21 दिन का सैन्य प्रशिक्षण दिया गया।
- महाराणा प्रताप आजीवन चित्तौड़गढ़ व माण्डलगढ़ पर अधिकार नहीं कर पाए।