• मेला – किसी विशेष तिथि पर/विशेष देव स्थान पर जहाँ अनेक लोगों का सामूहिक मिलन हो, उसे मेला कहा जाता है।

• उर्स – उर्स का शब्दिक अर्थ – विवाह/मिलन (आत्मा से परमात्मा)

• किसी सूफी संत की आत्मा का मिलन परमात्मा से होता है। उस दिन उस सूफी संत की स्मृति में उर्स का आयोजन किया जाता है।

1. बादशाह मेला – ब्यावर (अजमेर) – चैत्र कृष्ण प्रतिपदा।

2. फूलडोल मेला – रामद्वारा (शाहपुरा, भीलवाड़ा) –चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से पंचमी तक – रामस्नेही संप्रदाय से संबंधित।

 भीलवाड़ा स्थित ‘शाहपुरा’ नगर अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के अनुयायियों का पीठ स्थल है। शाहपुरा में होली के दूसरे दिन प्रसिद्ध वार्षिक फूलडोल का मेला लगता है।

3. धनोप माता का मेला – धनोप गाँव (भीलवाड़ा) – चैत्र कृष्ण एकम् से दशमी तक।

4. शीतला माता का मेला – शील डूँगरी (चाकसू, जयपुर) – चैत्र कृष्ण अष्टमी।

5. ऋषभदेव मेला (केसरिया नाथ जी मेला/काला बावजी का मेला) – धुलेव (उदयपुर) – चैत्र कृष्ण अष्टमी/नवमी।

6. जौहर मेला – चित्तौड़गढ़ दुर्ग (चित्तौड़गढ़) – चैत्र कृष्ण एकादशी।

7. घोटिया अम्बा मेला – (बाँसवाड़ा) – चैत्र अमावस्या।

- यह बाँसवाड़ा जिले का सबसे बड़ा मेला है। यह प्रतिवर्ष चैत्र माह की अमावस्या को भरता है जिसमें राजस्थान, गुजरात तथा मध्यप्रदेश आदि प्रांतों से आदिवासी आते हैं।

8. विक्रमादित्य मेला – उदयपुर – चैत्र अमावस्या।

9. कैलादेवी मेला – कैलादेवी (करौली) – चैत्र शुक्ल एकम् से दशमी (प्रमुख रूप से अष्टमी को), कैलादेवी मेले में भक्तों द्वारा ‘लांगुरिया’ भक्ति गीत गाए जाते हैं।

10. गुलाबी गणगौर – नाथद्वारा – चैत्र शुक्ल पंचमी। – नाथद्वारा वल्लभ सम्प्रदाय का प्रमुख केन्द्र है।

11. श्री महावीरजी मेला – (करौली) – चैत्र शुक्ल त्रयोदशी से वैशाख कृष्ण द्वितीया तक – जैन धर्म का सबसे बड़ा मेला।

यहाँ पर जिनेन्द्र रथ यात्रा मुख्य आकर्षण है।

12. सालासर हनुमान मेला – सालासर (सुजानगढ़, चूरू) – चैत्र पूर्णिमा/हनुमान जयंती।

13. बीजासणी माता का मेला – लालसोट (दौसा) – चैत्र पूर्णिमा।

14. धींगागवर बेंतमार मेला – जोधपुर – वैशाख कृष्ण तृतीया।

 जोधपुर नगर में प्रतिवर्ष होली के एक पखवाड़े बाद चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर का विसर्जन करने के बाद वैशाख कृष्ण पक्ष की तृतीया तक धींगागवर की पूजा होती है। इस अवसर पर महिलाएँ बेंतमार मेला आयोजित करती हैं।

15. गौर मेला – सियावा (आबूरोड, सिरोही) – वैशाख शुक्ल चतुर्थी।

16. नारायणी माता का मेला – सरिस्का (अलवर) – वैशाख शुक्ल एकादशी।

17. बाणगंगा मेला – विराटनगर (जयपुर) – वैशाख पूर्णिमा।

18. मातृकुण्डिया मेला – राश्मी (हरनाथपुरा, चित्तौड़गढ़) – वैशाख पूर्णिमा।

- चित्तौड़गढ़ जिले के राश्मी पंचायत समिति क्षेत्र में स्थित हरनाथपुरा गाँव में प्रतिवर्ष वैशाख पूर्णिमा को यह मेला भरता है।

19. सीतामाता मेला – सीतामाता (प्रतापगढ़) – ज्येष्ठ अमावस्या।

20. सीताबाड़ी का मेला – सीताबाड़ी केलवाड़ा (बाराँ) – ज्येष्ठ अमावस्या।

यह हाड़ौती अंचल का सबसे बड़ा मेला है।

- बाराँ जिले की सहरिया जनजाति का कुंभ कहा जाने वाला सीताबाड़ी मेला केलवाड़ा के निकट सीताबाड़ी में भरता है।

21. कल्पवृक्ष मेला – मांगलियावास (अजमेर) – हरियाली अमावस्या।

22. गुरुद्वारा बुड्‌ढ़ा जोहड़ मेला – श्रीगंगानगर – श्रावण अमावस्या।

23. लोटियों का मेला – मण्डोर (जोधपुर) – श्रावण शुक्ल पंचमी।

24. परशुराम महादेव मेला – सादड़ी (पाली) – श्रावण शुक्ल सप्तमी।

25. वीरपुरी मेला – मंडोर (जोधपुर) – श्रावण माह का अंतिम सोमवार।

26. कजली तीज – बूँदी – भाद्रपद कृष्ण तृतीया।

27. जन्माष्टमी – नाथद्वारा (राजसमंद) – भाद्रपद कृष्ण अष्टमी।

28. गोगानवमी – गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) – भाद्रपद कृष्ण नवमी।

29. राणी सती का मेला – झुंझुनूँ – भाद्रपद अमावस्या।

- झुंझुनूँ में रानी सती के प्रसिद्ध मंदिर में प्रतिवर्ष भाद्रपद मास में मेला भरता है। वर्ष 1988 के बाद से सती निषेध कानून के तहत इस पर रोक लगा दी है।

30. रामदेवरा का मेला – रामदेवरा (रूणेचा) (पोकरण, जैसलमेर)- भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक साम्प्रदायिक सद‌्भाव का सबसे बड़ा मेला।

31. गणेशजी का मेला – रणथम्भौर (सवाईमाधोपुर) – भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी।

32. हनुमानजी का मेला – पांडुपोल (अलवर) – भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी व पंचमी।

33. भोजन थाली मेला – कामां (भरतपुर) – भाद्रपद शुक्ल पंचमी।

34. सवाई भोज मेला – आसींद (भीलवाड़ा) – भाद्रपद शुक्ल अष्टमी।

35. कल्याणजी का मेला – डिग्गी (टोंक) – भाद्रपद शुक्ल एकादशी।

36. देवझूलनी मेला (चारभुजा मेला) – चारभुजा (राजसमंद)- भाद्रपद शुक्ल एकादशी (जलझूलनी एकादशी)।

37. बाबू महाराज का मेला – बाड़ी (धौलपुर) – भाद्रपद शुक्ल एकादशी।

38. चारभुजा मेला – चारभुजा (उदयपुर) – भाद्रपद शुक्ल एकादशी।

39. दशहरा मेला – कोटा – आश्विन शुक्ल दशमी।

- यह मेल- 1579 ई. में कोटा के प्रथम शासक राव माधोसिंह द्वारा शुरुआत किया गया, जो यह परंपरा 400 वर्षों के बाद आज भी चली आ रही है।

40. मीरा महोत्सव – चित्तौड़गढ़ – आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा)।

41. अन्नकूट मेला – नाथद्वारा (राजसमंद) – कार्तिक शुक्ल एकम्।

42. गरुड़ मेला – बंशी पहाड़पुर (भरतपुर) – कार्तिक शुक्ल तृतीया।

43. पुष्कर मेला – पुष्कर (अजमेर) – कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा – अंतर्राष्ट्रीय स्तर का मेला व राजस्थान का सबसे रंगीन मेला।

44. कपिल धारा का मेला – बाराँ – कार्तिक पूर्णिमा – यह मेला सहरिया जनजाति से संबंधित है।

45. चंद्रभागा मेला – झालरापाटन (झालावाड़) – कार्तिक पूर्णिमा।

46. साहावा सिक्ख मेला – साहवा (चूरू) – कार्तिक पूर्णिमा।

 यह राजस्थान में सिक्ख धर्म का सबसे बड़ा मेला है।

- चूरू जिले में साहब का गुरुद्वारा है जिसके साथ सिक्ख धर्म के प्रवर्तक गुरु नानक देव एवं अंतिम गुरु ‘गुरु गोविन्द सिंह’ के आने एवं रहने की स्मृतियाँ जुड़ी हुई हैं।

47. कपिल मुनि का मेला – कोलायत (बीकानेर) – कार्तिक पूर्णिमा – जांगल प्रदेश का सबसे बड़ा मेला

 – इसे जांगल प्रदेश का कुंभ कहा जाता है।

 – चारण जाति के लोग इस मेले में नहीं आते हैं।

48. नाकोड़ा जी का मेला – नाकोड़ा तीर्थ (मेवानगर, बाड़मेर) – पौष कृष्ण दशमी।

49. श्री चौथमाता का मेला – चौथ का बरवाड़ा (सवाईमाधोपुर) – माघ कृष्ण चतुर्थी।

50. पर्यटन मरु मेला – जैसलमेर व सम (जैसलमेर) – माघ शुक्ल त्रयोदशी से माघ अमावस्या तक।

51. बेणेश्वर मेला – नवाटापरा, (बेणेश्वर, डूँगरपुर) – माघ पूर्णिमा को यह मेला सोम-माही-जाखम नदियों के संगम पर भरता है। इसे आदिवासियों के कुंभ के नाम से जाना जाता है।

 – इस मेला का संबंध संत मावजी से है।

 – इस मेले में सर्वाधिक भील जनजाति के लोग आते हैं।

 – यहाँ विश्व के एकमात्र खण्डित शिवलिंग की पूजा होती है।

52. शिवरात्रि मेला – शिवाड़ (सवाईमाधोपुर) – फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी।

53. चनणी चेरी मेला – देशनोक (बीकानेर) – फाल्गुन शुक्ल सप्तमी।

54. चन्द्रप्रभु का मेला – तिजारा (अलवर) – फाल्गुन शुक्ल सप्तमी – जैन धर्म से संबंधित।

55. डाडा पम्पाराम का मेला – पम्पाराम का डेरा, विजयनगर (श्रीगंगानगर) – फाल्गुन माह में आयोजित।

56.  मेहन्दीपुर बालाजी का मेला – मेहन्दीपुर (दौसा)

 – यहाँ पर हनुमान जी की बाल रूप की पूजा होती है।

57. मानगढ धाम पहाडी मेला – मानगढ पहाडी (बाँसवाडा)- मार्गशीर्ष पूर्णिमा।

- यह मेला गुरु गोविन्द गिरी की स्मृति में आयोजित होता है।

- इसे आदिवासियों का मेला कहा जाता है।

- इस मेले में सर्वाधिक भील जाति के लोग आते है।

58. बाणगंगा का मेला – बैराठ/विराटनगर (जयपुर)।

59. डिग्गी कल्याण जी का मेला – डिग्गी सालपुर (टोंक)।

- डिग्गी (टोंक) कस्बे में श्रावणी अमावस्या, भाद्रपद शुक्ल एकादशी व वैशाख पूर्णिमा को यह मेला लगता है।

60. गौतमेश्वर मेला – अरणोद (प्रतापगढ)।

61. गौतमेश्वर का मेला:- सिरोही जिले में पोसालिया नदी के तट पर गौतमेश्वर में प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक यह मेला लगता है। यह मीणा समाज का मेला है, जिसमें मीणा समाज अपने कुल देवता गौतमेश्वर की पूजा करते हैं।

62. गौतम ऋषि का मेला – सिरोही – फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी।

63. भूरिया बाबा का मेला – नाणा रेल्वे स्टेशन (पाली)।

64. कल्पवृक्ष मेला – मांगलियावास (अजमेर)।

65. सुइयाँ मेला – हल्देश्वर मंदिर (चौहटन)।

66. गधों का मेला – सोरसेन (बाराँ) तथा लुणियावास (जयपुर)।

67. खेजड़ली मेला – खेजड़ली (जोधपुर) – 1730 ई. में मारवाड़ के महाराजा अभयसिंह के काल में खेजड़ली हत्या काण्ड हुआ, जिसमें 84 गाँवों के 363 लोग शहीद हुए।

 खेजड़ली मेला विश्व का एकमात्र वृक्ष मेला है।

68. ऊँट मेला – बीकानेर – यह विश्व का एकमात्र ऊँट मेला है।

69. गंगा दशहरा मेला – कामा (भरतपुर)।

70. 12 भाइयों का मेला :- बाड़ी (धौलपुर)।

71. लाल्या व काल्या का मेला – अजमेर।

72. राम-रावण मेला – बडी सादड़ी (चित्तौड़गढ़)।

73. विक्रमादित्य मेला – उदयपुर।

74. बाली मेला – बाली (पाली)।

75. चुंघीतीर्थ मेला – चुंघी (जैसलमेर)।

76. भर्तृहरि मेला – सरिस्का जंगल (अलवर)।

77. हिरण्य महादेव मेला – भीलवाडा।

78. नाग पंचमी का मेला – मंडोर।

79. सम्बोधि धाम मेला – जोधपुर।

80. सतियों का मेला – मेहरानगढ दुर्ग (जोधपुर)।

81. भद्रकाली माता का मेला – हनुमानगढ।

82. बहरोड पशु मेला – बहरोड (अलवर)।

83. भगवान श्री रामचन्द्र जी की सवारी – मेहरानगढ (जोधपुर)।

84. तिलस्वा महादेव मेला – तिलस्वा (माण्डलगढ, भीलवाड़ा)।

85. सेवको/चेनणी चेरी का मेला – करणी माता मंदिर – देशनोक (बीकानेर)।

86. मनसा माता का मेला – झुन्झुनूँ – चैत्र कृष्णा अष्टमी व आश्विन शुक्ल अष्टमी।

87. हाडा पम्पाराम जी का मेला – विजयनगर (श्री गांगानगर)।

88. डोलचीमार होली :- बीकानेर।

89. नीलापानी का मेला :- हाथोड़ (डूँगरपुर)।

90. मलूका मेला :- पाली।

91. छींछ माता का मेला :- बाँसवाड़ा।

92. डोल मेला :- बाराँ।

नोट : वे मेले जो वर्ष में एक बार से ज्यादा भरते हैं –

93. विरात्रा माता का मेला – विरात्रा (बाड़मेर) – चैत्र, भाद्रपद व माघ शुक्ल चतुर्दशी।

94. त्रिपुरा सुंदरी मेला – तलवाड़ा (बाँसवाड़ा) – नवरात्रा (चैत्र व आश्विन)।

95. करणी माता का मेला – देशनोक (बीकानेर) – नवरात्रा (चैत्र व आश्विन)।

96. जीणमाता का मेला – रैवासा ग्राम (सीकर) – नवरात्रा (चैत्र व आश्विन)।

97. दधिमति माता का मेला – गोठ मांगलोद (नागौर) – शुक्ल अष्टमी (चैत्र व आश्विन)।

98. इंद्रगढ़/बीजासन माता का मेला – इंद्रगढ़ (बूँदी) – चैत्र व आश्विन नवरात्रा तथा वैशाख पूर्णिमा।

99. हीरामन बाबा का मेला – नगला जहाजपुर (भरतपुर) – भाद्रपद चतुर्थी व वैशाख चतुर्थी।

100. मारकण्डेश्वर मेला – अंजारी गाँव (सिरोही) – भाद्रपद शुक्ल एकादशी एवं वैशाख पूर्णिमा – यह मेला गरासिया समुदाय का प्रसिद्ध मेला है।

101. चंद्रप्रभु मेला – तिजारा (अलवर) – फाल्गुन शुक्ल सप्तमी व श्रावण शुक्ल दशमी।

102. सैपऊ महादेव – सैपऊ (धौलपुर) – फाल्गुन व श्रावण मास की चतुर्दशी।

नोट : पर्यटन विभाग (राजस्थान) द्वारा आयोजित किए जाने वाले मेले एवं उत्सव

103. ऊँट महोत्सव – बीकानेर – जनवरी।

104. मरु महोत्सव – जैसलमेर – जनवरी-फरवरी।

105. हाथी महोत्सव – जयपुर – मार्च।

106. मत्स्य उत्सव – अलवर – सितम्बर-अक्टूबर।

107. ग्रीष्म महोत्सव (समर फेस्टिवल) – माउन्ट आबू एवं जयपुर – मई-जून।

108. मारवाड़ महोत्सव – जोधपुर – अक्टूबर।

109. वागड़ मेला – डूँगरपुर – नवम्बर।

110. शरद महोत्सव – माउन्ट आबू – दिसम्बर।

111. डीग महोत्सव – डीग (भरतपुर) – जन्माष्टमी।

112. थार महोत्सव – बाड़मेर।

113. मीरा महोत्सव – चित्तौड़गढ़ – अक्टूबर।

114. गणगौर मेला – जयपुर – मार्च।

115. तीर्थराज मेला :- मचकुण्ड (धौलपुर)।

116. श्री जगदीश महाराज का मेला :- जयपुर।

116. भद्रकाली मेला/पल्लू मेला :- हनुमानगढ़।

117.  सारणेश्वर मेला :- सिरोही में (भाद्रपद शुक्ल एकादशी/द्वादशी)

118. बैलून महोत्सव :- बाड़मेर।

119. गरुड़ मेला :- बंशी जहाजपुर (भरतपुर) – कार्तिक माह।

120. राष्ट्रीय जनजाति मेला :- डूँगरपुर।

121. देव सोमनाथ मेला :- डूँगरपुर।

122. हिण्डोला उत्सव :- रंगजी के मंदिर (पुष्कर) में श्रावण मास में छोटी तीज से बड़ी तीज तक आयोजित उत्सव।

123. गणगौर की सवारी (जैसलमेर) :- जैसलमेर की शाही गणगौर दुनिया की निराली गणगौर है। यहाँ गणगौर की सवारी चैत्र शुक्ल तृतीया के स्थान पर चैत्र शुक्ल चतुर्थी को निकाली जाती है।

124. सांगोद का न्हाण (कोटा) :- कोटा जिले में ही ‘सांगोद का न्हाण’ भी प्रसिद्ध है। न्हाण का प्रचलन नवीं शताब्दी से माना जाता है। होली के अवसर पर मनाए जाने वाले इस उत्सव में ग्रामवासी विचित्र वेशभूषा में सज कर अखाड़े निकालते हैं। सांगोद के न्हाण का प्रचलन वीरवर सांगा गुर्जर की पुण्य स्मृति में 9वीं शताब्दी से माना जाता है।

125. ‘मारगपाली’ की सवारी :- जयपुर में अन्नकूट यानी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन यह सवारी निकलती थी।

126. वरकाणा का मेला :- पाली जिले में रानी के पास वरकाणा जैन तीर्थस्थल पर प्रतिवर्ष पौष शुक्ल दशमी को यह मेला भरता है।

127. गोरिया गणगौर का मेला :- आदिवासियों का यह गणगौर मेला बाली तहसील (पाली) के गोरिया ग्राम में प्रतिवर्ष वैशाख शुक्ल सप्तमी को भरता है।

128. चमत्कारजी का मेला :- आलनपुर (सवाईमाधोपुर) में श्री चमत्कारजी (ऋषभदेवजी) जैन मंदिर में प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा को यह प्रसिद्ध मेला लगता है।

129. सलक :- दशहरे के अगले दिन जयपुर में होने वाला विशिष्ट समारोह।

130. खंग स्थापन :- आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को मेवाड़ में मनाया जाने वाला सामरिक समारोह।

Note:-

- राज्य में सर्वाधिक मेले :- डूँगरपुर में (21 मेले)।

- राज्य में सर्वाधिक पशु मेले :- नागौर में।

राज्य-स्तरीय पशु मेले :-

1. श्री मल्लीनाथ पशु मेला – तिलवाड़ा, (बाड़मेर) – यह मेला लूनी नदी के किनारे भरता है।– चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी (अप्रैल) तक यह मेला भरता है।

2. श्री बलदेव पशु मेला – मेड़ता (नागौर) – चैत्र शुक्ल एकम् से पूर्णिमा तक (अप्रैल) यह मेला भरता है।

3. श्री तेजाजी पशु मेला – परबतसर (नागौर) –श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या (अगस्त)  तक यह मेला भरता है।

4. श्री गोमतीसागर पशु मेला – झालरापाटन (झालावाड़) – वैशाख शुक्ल त्रयोदशी से ज्येष्ठ कृष्ण पंचमी तक (मई) यह मेला भरता है।

5. चन्द्रभागा पशु मेला – झालरापाटन (झालावाड़) – कार्तिक शुक्ल एकादशी से मार्गशीर्ष कृष्ण पंचमी तक (नवम्बर) यह मेला चन्द्रभागा नदी के किनारे भरता है।

6. जसवंत पशु मेला – भरतपुर – आश्विन शुक्ल पंचमी से चतुर्दशी तक (अक्टूबर) यह मेला भरता है।

7. कार्तिक पशु मेला – पुष्कर (अजमेर) - कार्तिक शुक्ल अष्टमी से मार्गशीर्ष द्वितीया तक (नवम्बर) यह मेला भरता है।

8. महाशिवरात्रि पशु मेला – करौली – फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी से यह मेला प्रारंभ (मार्च) होता है।

9. सेवाड़िया पशु मेला – रानीवाड़ा (जालोर)।

10. गोगामेड़ी पशु मेला – हनुमानगढ़।

11. रामदेव पशु मेला – नागौर।

12. बदराना पशु मेला :- शेखावाटी का प्रसिद्ध पशु मेला, जो नवलगढ़ (झुंझुनूँ) में आयोजित होता है।

13. बजरंग पशु मेला – उच्चैन (भरतपुर) – आश्विन कृष्ण द्वितीया से अष्टमी तक यह मेला भरता है।

14. बजरंग पशु मेला – सिणधरी (बाड़मेर)

मुस्लिम समाज के प्रमुख उर्स-

1. उर्स गरीब नवाज-अजमेर :- ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती का 1256 ई. में एकांत वास में 6 दिन की प्रार्थना के पश्चात् स्वर्गवास हो गया।

  अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की मृत्यु की बरसी के रूप में 1 से 6 रज्जब तक ख्वाजा का उर्स मनाया जाता है।

 अजमेर के ऐतिहासिक बुलंद दरवाजे पर झंडा चढ़ने के साथ ही उर्स की अनौपचारिक शुरुआत होती है।

 अजमेर में इस उर्स के दौरान सामाजिक सद्भाव व राष्ट्रीय एकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।

2. तारकीन का उर्स-नागौर :- नागौर में सूफियों की चिश्ती शाखा के संत काजी हमीदुद्दीन नागौरी की दरगाह है जहाँ पर अजमेर के बाद सबसे बड़ा उर्स भरता है।

3. गलियाकोट का उर्स-डूँगरपुर :- माही नदी के निकट स्थित गलियाकोट ने दाऊदी बोहरों का प्रमुख तीर्थ स्थान है।

 यहाँ फखरुद्दीन पीर की मजार भी है।

 यहाँ पर प्रतिवर्ष उर्स आयोजित किया जाता है।

4. नरहड़ की दरगाह का मेला-झुंझुनूँ:- झुंझुनूँ जिले के नरहड़ गाँव में ‘हजरत हाजिब शक्कर बादशाह’ की दरगाह है जो शक्कर पीर बाबा की दरगाह के नाम से प्रसिद्ध है।

 यहाँ कृष्ण जन्माष्टमी के दिन विशाल मेला लगता है।

5. ख्वाजा नजमुद्दीनशाह का उर्स :- फतेहपुर (सीकर)।