समंकों की व्याख्या
(Data Interpretation)
1. परीक्षा में प्रश्नों को वास्तव में हल करने में अपना बहुमूल्य समय बर्बाद न करें क्योंकि आपको यथार्थ संख्यात्मक उत्तर न परिकलित कर केवल प्रश्न काे हल करने के लिए दी गई सूचनाओं की पर्याप्तता की जाँच करनी है।
2. जब प्रश्न में ज्यामितीय आकृतियाँ दी हो तथा जहाँ उनके विस्तार/विमाओं का मान नहीं दिया हो तो उन विमाओं के मान स्केल में प्रयोग से मापने की कोशिश न करें और आकृति को केवल देखकर अपने-आप अनावश्यक अभिधारणाएँ न बनायें।
3. इस अध्याय से कभी-कभी ऐसे भी प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनके उत्तर प्राप्त करने के लिए दी गई जानकारी में से कौन-सी जानकारी आवश्यक है, उसका पता लगाना रहता है। छात्रों को इस प्रकार के प्रश्नों को हल करते समय निश्चित मान निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, अपितु दिए गए कथनों में से बारी-बारी प्रत्येक कथन को छोड़कर उत्तर प्राप्त करने के लिए आवश्यक आँकड़ों पर विचार करना चाहिए।
4. परंतु परीक्षा भवन में आप यथासंभव मानसिक क्रिया से ही आँकड़ों की आवश्यकता/अनावश्यकता का पता लगायें।
5. दंड आलेख में विन्यस्त आँकड़ों को ऊर्ध्वाधर (Vertical) या क्षैतिज (Horizontal) दंडों से दिखाया जाता है।
6. आयत चित्र बारंबारता वितरण के निरूपण का सबसे सामान्य तरीका है यदि आँकड़े संतत वर्गों में वर्गीकत हों।
7. बारंबारता बहुभुज वर्गीकृत बारंबारता वितरण के आलेखीय निरूपण का एक तरीका है। बारंबारता बहुभुज की रचना दो प्रकार से की जा सकती है :
(i) आयतचित्र की सहायता से
(ii) बिना आयतचित्र बनाए
8. सारणी का उपयोग अधिकतम संख्यात्मक आँकड़ों को प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है।
9. रैखिक आलेख का प्रयोग आलेख में प्रदर्शित राशि के सतत परिवर्तन को दर्शाने के लिए किया जाता है।
10. वृत्त चार्ट का प्रयोग किसी राशि के कुल योग में विभिन्न खंडों के हिस्सों को दर्शाने के लिए किया जाता है।
I. सारणी (Tables)
- सारणी का उपयोग अक्सर संख्यात्मक आँकड़ों को प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है। यह तुलना करने में और शीघ्र निष्कर्ष निकालने में व्यक्ति की मदद करता है।
- यह पढ़ने वाले के लिए आँकड़ों में अधिक वस्तुनिष्ठता प्रदान करता है। सारणीय प्रस्तुतीकरण से जटिल सूचनाओं को भी सरलता से समझा जा सकता है।
- इसका एक और लाभ यह है कि व्यक्ति एक ही दृष्टि में संपूर्ण सूचनाओं को देख सकता है।
- सारणीय प्रस्तुतीकरण में सामान्यत: सारणी का एक शीर्षक और उसके बाद पंक्तियों और स्तंभों की एक तालिका होती है, जिसमें आँकड़े लिखे होते हैं।
- सारणी को देखते वक्त इसके शीर्षक को ध्यानपूर्वक पढ़ें और साथ में पंक्तियों और स्तंभों के नाम पर भी ध्यान दें। सारणी का शीर्षक प्रस्तुत आँकड़ों का उद्देश्य और प्रकार का एक सामान्य ज्ञात प्रदान करता है।
- पंक्ति और स्तंभों के नाम क्रमश: उनमें दिए गए विशेष प्रकार के सूचनाओं का संकेत करते हैं।
II. रैखिक आलेख (Line graphs)
- रैखिक आलेख का प्रयोग आलेख में प्रदर्शित राशि के सतत परिवर्तन को दर्शाने हेतु किया जाता है। अक्सर, राशि को समय के फलन के रूप में मापा जाता है। जैसे कि, समय में परिवर्तन के साथ राशि में विचरण आदि।
- रैखिक आलेख में, ऊपर की ओर जाती हुई रेखा राशि में वृद्धि को संकेतिक करती है, जबकि नीचे की ओर जाती हुई रेखा घटती हुई राशि को संकेतिक करती है।
- क्षैतिज रेखा का अर्थ है कि निर्दिष्ट समय अवधि में राशि के मान में काेई परिवर्तन नहीं हो रहा है अर्थात् अचल है।
- मापनी या पटरी (Scale or Ruler) उपलब्ध न होने पर, पेंसिल या कागज के सीधे किनारे का प्रयोग भी किया जा सकता है, जिससे रैखिक आलेख पर अंकित किसी बिंदु की सन्निकट ऊँचाई मापी जा सकती है, जो कि उस बिंदु पर उस राशि का मान प्रदान करती है।
III. दण्ड चित्र (Bar Diagram)
- दण्ड चित्र दण्डों से बना होता है। दण्ड की लंबाई/ऊँचाई उस राशि की मात्रा का मापक होता है, जिसे यह निरूपित करता है। इसलिए, राशियों की तुलना आलेख के दण्डों की लंबाई/ऊँचाई की तुलना से की जा सकती है।
- इस आलेख की मदद से विभिन्न राशियों की या एक ही राशि की विभिन्न समय के लिए तुलना की जा सकती है। दण्डों को एक-दूसरे के आसन्न या अलग, प्रश्नानुसार रखा जा सकता है।
IV. आयत चित्र (Histogram)
- यह सतत दंडों के समुच्चय से बना होता है। इसका प्रयोग सामान्यत: सारणीय रूप मंे प्रस्तुत आँकड़ों के विभिन्न वर्ग-अंतरालों के बीच बारंबारता बंटन काे निरूपित करने के लिए किया जाता है।
- दंडों के क्षेत्रफल संगत वर्ग बारंबारताओं के समानुपाती होते हैं।
V. वृत्त आलेख (Pie Chart)
- वृत्त या वर्त्तुल आलेख का प्रयोग किसी राशि के कुल योग में विभिन्न खंडों के हिस्सों को दर्शाने के लिए किया जाता है। वृत्त आलेख को पाई चार्ट भी कहा जाता है।
- सामान्यत: ये राशि के कुल मान को 100 मानकर इसके प्रत्येक खंडों का हिस्सा प्रतिशतता के रूप में दर्शाता है। जब आप वृत्त आलेख का प्रयोग विभिन्न वृत्तखंडों के अनुपात ज्ञात करने के लिए कर रहे हैं, तो इसके लिए उनके निरपेक्ष यथार्थ मान परिकलित करना आवश्यक नहीं है।
- बल्कि उनके प्रतिशतता के अनुपातों से सीधे इनके अनुपातों का मान शीघ्रता से ज्ञात किया जा सकता है।