दिल्ली सल्तनत

भारत में इस्लामिक शासन प्रारम्भ

पृष्ठभूमि -

- दिल्ली से होने वाले तुर्कों के शासन को दिल्ली सल्तनत की संज्ञा दी गई और 13-16वीं शताब्दी तक उत्तरी भारत के इतिहास को साधारणतया इसी नाम से पुकारा जाता है।

- 1206 से 1290 ई. तक उत्तरी भारत के कुछ भागों पर जिन पर तुर्क शासकों ने शासन किया उन्हें फारसी इतिहासकारों ने मुइज्जी, कुत्वी, शम्सी तथा बल्बनी वर्गों में बांटा है।

- शम्सीउद्दीन इल्तुतमिश इल्बारी तुर्क था, जबकि कुतुबुद्दीन ऐबक इल्बारी तुर्क नहीं था।

- बलबल ने स्वयं को इल्बारी तुर्क कहा है।

- हबीबुल्लाह ने आरम्भिक तुर्क शासन को 'मामूलक' शासन कहा है।

गुलाम वंश के शासक -

कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210 ई.) :

- 1206 ई. में तुर्की गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक, मुहम्मद गौरी का उत्तराधिकारी बना।

- इसने सुल्तान का पद धारण न कर 'मलिक' तथा 'सिपहसालार' के पद से शासन किया।

- इसका राज्याभिषेक लाहौर में हुआ।

- इसे भारत का प्रथम मुस्लिम शासक भी माना जाता है।

- अपनी उदारता तथा दानी स्वभाव के कारण यह लाखबख्श तथा 'हातिम द्वितीय' के नाम से भी जाना जाता है।

- इसके दरबार में ‘अदब-उल हर्ष’ के लेखक फख-ए-मुदब्बिर तथा ‘ताज-उल-मासिर’ के लेखक हसन निजामी रहते थे।

- 'कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद' तथा 'अढाई दिन का झोपड़ा' के निर्माण का श्रेय ऐबक को है।

- शेख ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की स्मृति में कुतुबमीनार का निर्माण कार्य इसी समय आरम्भ हुआ लेकिन इल्तुतमिश के समय पूरा हुआ।

- 1210 ई. में 'चौगान (पोलो)’ खेलते समय घोड़े से गिरने के कारण ऐबक की मृत्यु हो गई।

- ऐबक का मकबरा लाहौर में है।

आरामशाह (1210-1211 ई.) :

- ऐबक की मृत्यु के बाद आरामशाह शासक बना।

- इल्तुतमिश ने दिल्ली के समीप 'जूद' में आरामशाह को पराजित किया।

शम्सुद्दीन इल्तुतमिश :

- वह पहले बदायूँ का अमीर था।

- पहला मकबरा निर्मित करने का श्रेय इल्तुतमिश को दिया जाता है।

- इसे तुर्कों द्वारा उत्तर भारत की विजयों का वास्तविक संगठनकर्ता माना जाता है।

- यह इल्बारी जनजाति का तुर्क था।

- तराईन के मैदान में इल्तुतमिश ने एल्दौज को पराजित किया।

- 1221 ई. में मंगोल आक्रमणकारी चंगेज खाँ द्वारा मंगबरनी का पीछा करते हुए सिंध को जीतकर लाहौर तक पहुंच जाने पर इल्तुतमिश ने अपनी वास्तविक स्थिति का आकलन करते हुए मंगोल खतरे को टालने हेतु मंगबरनी को दिल्ली में शरण नहीं दी।

- उसने 1226 ई. में रणथम्भौर, 1227 ई. में मन्दौर, 1231 ई. में ग्वालियर, 1234-35 ई. में उज्जैन तथा भिलसा के शासकों को पराजित किया।

- 'बनियान' आक्रमण इनका अंतिम सैन्य अभियान था।

- इसने 40 दासों का एक नया विश्वसनीय दल गठित किया जो ‘तुर्कान-ए- चिहालगानी’ के नाम से जाना जाता है।

- इक्तादारी, मुद्रा प्रणाली तथा सैन्य संगठन में उसने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

- इसने अरबी प्रथा के आधार पर मुद्रा प्रणाली चलाई।

- जीतल तथा टका क्रमशः ताँबे एवं चाँदी के सिक्के थे।

- इसने बगदाद के खलीफा अल-मुस्तनसिर बिल्लाह से खिल्लत का प्रमाण पत्र प्राप्त किया।

- इसने अपनी राजधानी लाहौर से दिल्ली स्थानांतरित की।

- इसके दरबार में मिन्हाज - उल - सिराज एवं मलिक ताजुद्दीन रहते थे।

- इसके शासनकाल में कुतुबमीनार, राजकुमार महमूद एवं इल्तुतमिश के मकबरे का निर्माण हुआ।

रूकनुद्दीन फिरोज (1236 ई.) :

- इल्तुतमिश ने अपने जीवनकाल में पुत्र नासिरुद्दीन महमूद को उत्तराधिकारी बनाया था, लेकिन महमूद की अकस्मात मृत्यु के बाद उसने योग्य पुत्री रजिया को उत्तराधिकारी घोषित किया। परन्तु सुल्तान की मृत्यु के बाद अमीरों ने फिरोज को पदासीन कर दिया।

- फिरोज के शासनकाल में वास्तविक सत्ता उसकी मां शाहतुकौन के हाथों में थी।

रजिया (1236-1240 ई.) :

- वह मध्यकालीन भारत की पहली तथा अंतिम मुस्लिम महिला शासक थी।

- दिल्ली के नागरिकों ने पहली बार अपने आप उत्तराधिकार के मामले का निर्णय किया था।

- इसने जुनैदी (इल्तुतमिश के भूतपूर्व वजीर) के नेतृत्व में प्रान्तीय शासकों के गठबंधन को समाप्त कर दिया।

- इसने लाहौर के गवर्नर याकूत खाँ तथा भटिंडा के गवर्नर अल्तूनिया के विद्रोहों को दबाया।

- इसने अल्तूनिया से विवाह कर संयुक्त सेना का नेतृत्व करते हुए दिल्ली पर चढ़ाई की लेकिन बहराम ने उसे पराजित कर दिया।

- अपने सैनिकों द्वारा परित्यक्त कर दिए जाने पर लुटेरों ने इनको मार डाला।

- इसकी मृत्यु कैथल के समीप हुई।

बहरामशाह (1240-1242 ई.) :

- रजिया का उत्तराधिकारी बहरामशाह एक शक्तिहीन तथा अक्षम शासक था।

- इसके शासनकाल में तुर्क सरदारों ने एक नवीन पद ‘नायब’ का सृजन किया।

अलाउद्दीन मसूदशाह (1242-1246 ई.) :

- इसके शासनकाल में बलबल ने नासिरुद्दीन महमूद तथा उसकी माँ से मिलकर नासिरुद्दीन महमूद को शासन पर बैठाया।

नासिरुद्दीन महमूद (1246-1266 ई.) :

- सुल्तान ने बलबन को 'नायब-ए-मामलात' के पद पर नियुक्त किया।

- 1253-54 ई. के संक्षिप्त अंत:काल को छोड़कर बलबन दिल्ली सल्तनत का वास्तविक शासक बना रहा।

- सुल्तान ने बलबन को 'उलुग खाँ' की उपाधि प्रदान की।

- इसने बलबन को हांसी भेज दिया गया था।

- सुल्तान कुरान की नकल कर हस्तलिपियाँ तैयार करता था।

बलबन (1266-1287 ई.) :

- बलबन के सिंहासन पर बैठने के साथ ही एक शक्तिशाली केन्द्रित शासन का युग आरम्भ हुआ।

- बलबन का मुख्य कार्य चहलगानी या तुर्की सरदारों की शक्ति भंग कर सम्राट की शक्ति एवं प्रतिष्ठा को बढ़ाना था। इसके लिए उसने अपने रिश्तेदार शेर खाँ को विष देकर मार डाला।

- उसने 'लौह एवं रक्त' की नीति अपनाई।

- तुर्क अमीरों के प्रभाव को कम करने के लिए बलबन ने सिज्द़ा (घुटने पर बैठकर सिर झुकाना) तथा पैबोस (सम्राट के सामने झुककर पाँव को चुमना) की प्रथा आरम्भ की, जो मूलतः इरानी एवं गैर इस्लामी था।    

- इसने नौरोज (फारसी) प्रथा को भी आरम्भ किया।

- मृत्यु के पूर्व बलबन ने बुगरा खाँ को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। परन्तु बुगरा खाँ द्वारा अनिच्छा जाहिर करने पर कैखुसरो को उत्तराधिकारी बनाया गया।

- बलबन ने राजत्व को दैवी संस्था मानते हुए राजा को नियामते खुदाई (ईश्वर का प्रतिनिधि) घोषित किया।

- इसने सिक्कों पर खलीफा का नाम खुदवाया।

- इसने अमीर खुसरो तथा अमीर हसन को राज्याश्रय दिया।

- बलबन की मृत्यु के बाद कै खुसरो सुल्तान बना लेकिन दिल्ली के अमीरों ने उसे अपदस्थ कर बलबन के एक और पौत्र कैकुबाद को सुल्तान बना दिया।

- कैकुबाद को पिता बुगरा खाँ के जीवित रहने पर ही सुल्तान बना दिया गया।

- कैकुबाद ने जलालुद्दीन खिलजी को अपना सेनापति बनाया।

- बाद में तुर्क सरदारों ने उसके पुत्र शम्सुद्दीन कैमूर्स को सुल्तान घोषित किया।

- जलालुद्दीन खिलजी ने कैमूर्स की हत्या कर खिलजी राजवंश की स्थापना की।

खिलजी वंश के शासक

जलालुद्दीन खिलजी (1290-1296 ई.) :

- जलालुद्दीन खिलजी ने किलोखरी को अपनी राजधानी बनाया।

- गैर - तुर्की मलिकों ने खिलजी विद्रोह का स्वागत किया।

- खिलजी ने तुर्कों को उच्च पदों से वंचित नहीं किया बल्कि उसका एकाधिकार समाप्त कर दिया।

- यह दिल्ली सल्तनत का प्रथम सुल्तान था, जिसने अपने विचारों को स्पष्ट रूप से रखा कि राज्य का आधार प्रजा का समर्थन होना चाहिए चूंकि भारत की अधिकांश जनता हिन्दू थी, अतः सही अर्थों में यहाँ कोई राज्य इस्लामी राज्य नहीं हो सकता था।

- इसके शासनकाल में 1292 ई. में मंगोल आक्रमणकारी अब्दुल्ला ने पंजाब पर आक्रमण किया।

- देवगिरि के सफल अभियान के बाद जब अलाउद्दीन वापस आ रहा था तो सुल्तान स्वयं उससे मिलने कड़ा गया जहाँ अलाउद्दीन खिलजी ने अपने चाचा (जलालुद्दीन खिलजी) से गले मिलते समय हत्या कर दी।

अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316 ई.) :

- अलाउद्दीन खिलजी पहले कड़ा का गर्वनर था।

- बचपन में यह अली गुरशस्प नाम से प्रसिद्ध था।

- इसके राज्यारोहण के साथ सल्तनत के साम्राज्यवादी युग का आरम्भ हुआ।

- इसका राज्याभिषेक बलबन के लाल महल में हुआ था।

- इसने सिकन्दरसानी की उपाधि धारण की।

- इसके शासनकाल में अनेक मंगोल आक्रमण हुए।

- इसने 1298 ई. में गुजरात के रायकर्ण, 1300-1301 ई. में रणथम्भौर के हम्मीरदेव, 1303 ई. में चित्तौड़ के रतनसिंह, 1305 ई. में मालवा के महलक देव तथा सिवाना के शीलतदेव एवं 1311 ई. में जालोर के कान्हड़देव पर आक्रमण किया।

- अलाउद्दीन की समकालीन दक्षिण की महत्वपूर्ण शक्तियाँ थी- देवगिरि के यादव, तेलंगाना के होयसल, वारंगल के काकतीय तथा मदुरा के पांड्य राजवंश।

- अलाउद्दीन प्रथम मुस्लिम शासक था, जिसने दक्षिणी राज्यों पर आक्रमण किया।

- इसने देवगिरि पर आक्रमण कर रामचन्द्र को पराजित किया तथा रामचन्द्र को 'राय रायान' की उपाधि प्रदान की। इसके अलावा नवसारी का किला भी रामचन्द्र को मिला।

- 1310 ई. में उसने वारंगल के काकतीय शासक प्रताप रुद्रदेव को पराजित किया तथा यहीं से विश्वप्रसिद्ध 'कोहिनूर' हीरा प्राप्त किया था।

- 1310-11 ई.में होयसल राज्य के शासक वीर बल्लाल-III पर आक्रमण किया था।

- 1311-12 ई.में माबर (मदुरै) के पांड्य राज्य पर आक्रमण कर विशाल धन को प्राप्त किया था।

- अलाउद्दीन का अंतिम सैन्य अभियान दक्षिण भारत में देवगिरि के नये शासक शंकरदेव के विरुद्ध था।

- दक्षिणी राज्यों में आक्रमण का नेतृत्व मलिक काफूर द्वारा किया गया।

- दक्षिणी राज्यों से धन वसूला गया न कि उसे सल्तनत में शामिल किया गया।

अलाउद्दील के प्रशासनिक सुधार :

- इसने धर्म को राजनीति से अलग किया।

- दीवान - ए - रियासत विभाग की स्थापना अलाउद्दीन खिलजी ने ही की थी जो आर्थिक मामलों से सम्बन्धित था।

- सैन्य व्यवस्था में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए इसने दाग तथा हुलिया प्रथा की शुरुआत की।

- स्थायी सेना रखने वाला सल्तनत काल का प्रथम सुल्तान था।

- इसने सेना की सीधी भर्ती एवं नकद वेतन देने की प्रथा को आरम्भ किया।

- 'बाजार नियंत्रण प्रणाली' अलाउद्दीन खिलजी की प्रमुख आर्थिक देन है।

- सैनिकों को एक निश्चित वेतन पर जीवित रखने के उद्देश्य से अलाउद्दीन खिलजी ने सभी वस्तुओं के मूल्य निश्चित कर दिए थे।

- यह प्रथम सुल्तान था जिसने भूमि की वास्तविक आय पर राजस्व निश्चित किया तथा भूमि पर उपज का 50% भूमिकर या खिराज के रूप में लेने की घोषणा की थी।

- आवास कर (घरी), चराई कर नामक कर भी लगाए थे।

- इसने अमीर खुसरो तथा हसन को प्रश्रय दिया।

- 1316 ई. में इसकी मृत्यु हो गयी।

मुबारक खिलजी (1316-1320 ई.) :

- इसने 'खिलाफत' के प्रति अपनी भक्ति नकारते हुए स्वयं को इस्लाम का सर्वोच्च प्रधान, स्वर्ग तथा पृथ्वी के अधिपति का खलीफा घोषित किया।

तुगलक वंश  के शासक -

गयासुद्दीन तुगलक (1320-1325 ई.) :

- गाजी मलिक ने ‘सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक शाह’ की उपाधि धारण कर सल्तनत के तीसरे राजवंश की स्थापना की।

- इसने भू-मापीकरण के लिए अलाउद्दीन खिलजी की प्रथा को बंद करवा दिया।

- लगान की दर घटाकर इसने उपज का 1/11वाँ हिस्सा तय कर दिया।

- इसने तुगलकाबाद के नगर-दुर्ग का निर्माण करवाया तथा सल्तनत काल के स्थापत्य का एक नवीन जीवन तैयार किया।

- इसके शासनकाल में शहजादे जौना खाँ के नेतृत्व में वारंगल के काकतीय तथा मदुरै के पाण्ड्य साम्राज्य को विजित करके दिल्ली सल्तनत में शामिल कर लिया था।

- 1325 ई. में जब सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक बंगाल के सैनिक अभियान से लौट रहा था, तब शहजादे जौना खाँ ने सुल्तान का स्वागत करने के लिए दिल्ली के पास अफगानपुर गाँव में लकड़ी का एक मंडप तैयार किया। यह मंडप के अचानक गिर जाने से सुल्तान की मृत्यु हो गयी।

मुहम्मद बिन तुगलक (1325-1351 ई.) :

- मुहम्मद बिन तुगलक को अन्तर्विरोधों का विस्मयकारी मिश्रण, रक्तपिपासु या परोपकारी या पागल भी कहा गया है।

- निजामुद्दीन औलिया ने गयासुद्दीन तुगलक के बारे में कहा था कि ’दिल्ली अभी बहुत दूर है।‘

- गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु के बाद उसका पुत्र जौना खाँ मुहम्मद बिन तुगलक के नाम से सत्ता पर आसीन हुआ।

- इसके बारे में बरनी के ’तारीख - ए - फिरोजशाही’ तथा इब्नबतूता के ’रेहला‘ से जानकारी मिलती है।

- अफ्रीकी यात्री इब्नबतूता को सुल्तान ने दिल्ली का काजी नियुक्त किया तथा 1342 ई. में वह सुल्तान के राजदूत की हैसियत से चीन गया था।

- मुहम्मद बिन तुगलक अपनी पाँच योजनाओं के लिए प्रसिद्ध है।

- सुल्तान का सबसे विवादास्पद निर्णय राजधानी परिवर्तन का था, जिसके तहत राजधानी को दिल्ली से देवगिरि (दौलताबाद) स्थानान्तरित कर दिया गया।

- सुल्तान की दूसरी परियोजना प्रतीक मुद्रा का प्रचलन था।

- सुल्तान की तीसरी परियोजना खुरासान अभियान थी।

- कराचिल अभियान के तहत सुल्तान ने खुसरो मलिक के नेतृत्व में एक विशाल सेना कुमायूँ-गहढ़वाल क्षेत्र में स्थित कराचिल को जीतने के लिए सेना भेजी थी।

- अंतिम परियोजना के तहत सुल्तान ने 'दोआब क्षेत्र' में कर वृद्धि कर दी थी। दुर्भाग्यवश इसी समय अकाल पड़ गया तथा अधिकारियों द्वारा जबरन वसूली के कारण उस क्षेत्र में विद्रोह हो गया तथा परियोजना असफल रही।

- कृषि में विस्तार तथा विकास के लिए 'दीवान-ए-अमीर-ए कोही' नामक विभाग की स्थापना की गयी थी।

- मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में ही दक्षिण में 1336 ई. में हरिहर तथा बुक्का नाम के दो भाइयों ने स्वतंत्र विजयनगर राज्य की स्थापना की।

     फिरोजशाह तुगलक -

- फिरोजशाह तुगलक राजपूत माँ (रणमल की पुत्री बीबी नैला) का पुत्र था।

- इसने ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लगा दिया था।

- सिंचाई पर भी 'हब-ए-शर्ब' नामक सिंचाई कर लगाया गया था।

- इसने उत्तम कोटि की फसलों का प्रचलन किया तथा फलों के 1200 बाग लगवाए।

- इसके काल में सेना को नकद वेतन के बदले भू-राजस्व वाले गाँव दिए जाते थे।

- इसने 1361 ई. में नगरकोट पर आक्रमण कर वहाँ के शासक को पराजित किया तथा ज्वालामुखी मंदिर को तोड़ा।

- इसने निर्धनों की सहायता के लिए उसने 'दीवान-ए-खैरात' विभाग की स्थापना की।

- फिरोजाबाद, जौनपुर, हिसार, फतेहाबाद आदि नगरों की स्थापना भी इसी के शासनकाल में हुई।

- इसने ही मेरठ एवं टोपरा में स्थित अशोक स्तम्भों को दिल्ली लाकर स्थापित किया था।

- इसने दासों के संरक्षण हेतु 'दीवान-ए-बंदगाह' नामक एक अलग विभाग की स्थापना की थी।

- इसने जियाउद्दीन बरनी तथा शम्स - ए - सिराज अफीफ को संरक्षण दिया।

- फिरोजशाह का अंतिम सैनिक अभियान 1365-67 ई. में थट्टा में हुआ जो असफल नहीं रहा।

- सल्तनत के पतन तथा विघटन की जो प्रक्रिया मुहम्मद बिन तुगलक के शासन के अंतिम दिनों में प्रारम्भ हुई थी, वह फिरोजशाह के शासनकाल में और तीव्र हो गई थी।

परवर्ती तुगलक सुल्तान :

- फिरोजशाह तुगलक के उपरान्त उसका एक पौत्र शाह गयासुद्दीन तुगलक II के नाम से गद्दी पर बैठा। अगले 5 वर्षों के दौरान तीन सुल्तान अबूबक्र, मुहम्मद शाह तथा अलाउद्दीन सिकन्दरशाह गद्दी पर बैठे।

- नासिरुद्दीन महमूद (1394-1412 ई.) तुगलक वंश का अंतिम शासक था।

- नासिरुद्दीन महमूद के शासनकाल में मंगोल सेनानायक तैमूर का दिसम्बर, 1398 ई. में आक्रमण हुआ।

- महमूद के साम्राज्य के बारे में कहा जाता था कि शहंशाह की सल्तनत दिल्ली से पालम तक फैली हुई है।

सैय्यद वंश (1414-1451 ई.) :

- खिज्र खाँ सैयद वंश का संस्थापक था।

- तत्पश्चात् मुबारकशाह (1421-1434 ई.) उसका उत्तराधिकारी बना।

- अंतिम सैय्यद शासक शाह आलम को गद्दी से उतारकर वजीर बहलोल लोदी ने नये राजवंश की नींव रखी।

- मुबारकशाह के शासनकाल में याहिया बिन सरहिन्दी ने तारीख-ए-मुबारकशाही नामक ग्रंथ की रचना की।

लोदी वंश के शासक -

बहलोल लोदी (1451-1489 ई.) :

- बहलोल लोदी अफगानिस्तान के गिलजाई कबीले की शाखा शाहूखेल में पैदा हुआ था।

- इसने जौनपुर के शर्की शासक को पराजित कर जौनपुर को पुनः सल्तनत में शामिल किया।

- ग्वालियर अभियान उसका अंतिम सैनिक अभियान था।

- उसने बहलोली सिक्के चलाये।

सिकन्दर लोदी (1489-1517 ई.) :

- इसने 1504 ई. में आगरा नगर का निर्माण करवाया तथा उसके बाद अपनी राजधानी को आगरा स्थानान्तरित किया।

- भूमि माप के लिए इसने 'गज-ए-सिकन्दरी' का प्रयोग किया।

- यह 'गुलरुखी' नाम से कविताएं लिखता था।

इब्राहिम लोदी (1517-1526 ई.) :

- इसने ग्वालियर के शासक विक्रमजीत सिंह को अपने अधीन किया लेकिन मेवाड़ शासक राणा सांगा के विरुद्ध उसका अभियान असफल रहा।

- पानीपत के प्रथम युद्ध में तैमूरवंशी शासक बाबर के साथ हुए युद्ध में 21 अप्रैल, 1526 को इब्राहिम लोदी मारा गया।

दिल्ली सल्तनत का प्रशासन

- तुर्क सुल्तानों ने स्वयं को बगदाद के अब्बासी खलीफा का स्वामिभक्त उत्तराधिकारी घोषित किया तथा खुतबे पर भी उसके नाम को शामिल किया।

- सुल्तान न्यायपालिका, कार्यपालिका का प्रधान होता था।

- उत्तराधिकार का कोई स्वीकृत नियम नहीं था।

- वजीर राज्य का सर्वोच्च मंत्री होता था।

- भारतीय वजारत का स्वर्णकाल 'तुगलक काल' को कहा जाता है।

- प्रान्तीय शासन के प्रधान को वली या मुक्ति कहा जाता था।

- प्रान्तों को 'इक्ता' भी कहा जाता था।

- इक्ताओं का विभाजन शकों या जिलों में हुआ था। यहाँ का शासन आमिल या नाजिम करता था।

- दीवान-ए-अर्ज सैनिक विभाग को कहा जाता था। इसका प्रधान आरिज-ए-मुमालिक होता था।

- मंगोल सेना की वर्गीकरण पद्धति 'दशमलव प्रणाली' को ही सल्तनकाल में अपनाया था।

- इल्तुतमिश ने सैनिकों को इक्ता बांटने की परम्परा आरम्भ की उसे अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में समाप्त हो गई थी।

- स्थानीय प्रशासन में खुत, मुकद्दम तथा चौधरी राजस्व वसूल कर शाही राजकोष में जमा कराते/करवाते थे।

सल्तनत काल में निर्माण कार्य -

सल्तनतकालीन

स्थापत्यकला

1. कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद

कुतुबुद्दीन ऐबक (दिल्ली)

2. कुतुबमीनार

कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश (दिल्ली)

3. अढ़ाई दिन का झोपड़ा

कुतुबुद्दीन ऐबक (अजमेर)

4. लाल महल

बलबन (दिल्ली)

5. अलाई दरवाजा

अलाउद्दीन खिलजी (दिल्ली)

6. जमातखाना मस्जिद

अलाउद्दीन खिलजी (दिल्ली)

7. सिकन्दर लोदी का मकबरा

इब्राहिम लोदी (दिल्ली)

8. सुल्तानगढ़ी का मकबरा

इल्तुतमिश

9. हौज-ए-शम्स

इल्तुतमिश

10. अतरिन का दरवाजा

इल्तुतमिश

11. हौज़-ए-खास

अलाउद्दीन खिलजी

12. तुगलकाबाद

गयासुद्दीन तुगलक

13. आदिलाबाद का किला

मुहम्मद बिन तुगलक

14. जहाँपनाह नगर

मुहमद बिन तुगलक

15. कोटला फिरोजशाह

फिरोजशाह तुगलक

16. खान-ए-जहाँ तेलंगानी का मकबरा (अष्टभुजीय)

जूनाशाह

17. काली मस्जिद

फिरोजशाह तुगलक

सल्तनतकालीन पुस्तकें -

1. तबकात - ए – नासिरी

मिनहाज - उल - सिराज (फारसी)

2. तारीख - ए – फिरोजशाही

जियाउद्दीन बरनी (फारसी)

3. फतवा - ए - जहाँदारी

जियाउद्दीन बरनी (फारसी)

4. खजान - ए - फुतूह

अमीर खुसरो (फारसी)

5. नूहसिपेहर

अमीर खुसरो (फारसी)

6. आशिका

अमीर खुसरो (फारसी)

7. किरान - उल - सादेन

अमीर खुसरो (फारसी)

8. खजाइन - उल - फुतूह

अमीर खुसरो (फारसी)

9. तुगलकनामा

अमीर खुसरो (फारसी)

10. फुतूह - उल - सलातीन

इसामी (फारसी)

11. तारीख - ए - फिरोजशाही

अफीक (फारसी)

12. फुतूहात - ए - फिरोजशाही

फिरोजशाह तुगलक (फारसी)

13. तारीख - ए - मुबारकशाही

सरहिन्दी (फारसी)

14. तारीख - ए - यामिनी

उत्वी

15. जफरनामा

याज्दी

दिल्ली सल्तनत को चुनौतीयाँ -

बंगाल :

- गयासुद्दीन तुगलक ने बंगाल को तीन प्रशासकीय विभागों में बांट दिया-लखनौती (उत्तरी बंगाल), सोनारगाँव (पूर्वी बंगाल), सतगाँव (दक्षिणी बंगाल)।

- हाजी इलियास ने 1345 ई. में बंगाल विभाजन को समाप्त कर दिया तथा शम्सुद्दीन इलियास शाह की उपाधि धारण की।

- सिकन्दरशाह (1358-1390) के शासनकाल में पांडुआ में अदीना मस्जिद का निर्माण हुआ।

- गयासुद्दीन आजमशाह (1390-1410 ई.) के शासनकाल में चीन से राजनीतिक तथा सांस्कृतिक संबंध कायम किए गए थे।

- सुल्तान आजमशाह अपनी न्यायप्रियता के लिए प्रसिद्ध थे। साथ ही फारसी के प्रसिद्ध कवि हाशिमी शीराजी से इसके संबंध थे।

- चटगाँव बन्दरगाह का विकास भी आजमशाह के शासनकाल में हुआ।

- 1493 ई. में अलाउद्दीन हुसैनशाह बंगाल का स्वतंत्र शासक बना।

- हुसैनशाह के शासनकाल में पांडुआ के स्थान पर ‘गौड़’ बंगाल की राजधानी बनी।

- इसके शासनकाल में हिन्दुओं को ऊँचे पदों पर नियुक्त किया गया।

- चैतन्य महाप्रभु हुसैनशाह के समकालीन थे।

- मालधार वसु ने अलाउद्दीन के समय में श्रीकृष्ण विजय की रचना कर गुणराज खान की उपाधि ग्रहण की।

- नासिरुद्दीन नुसरत शाह अलाउद्दीन हुसैन शाह का उत्तराधिकारी बना।

- नुसरत शाह के शासनकाल में हुमायूँ तथा शेरशाह ने बंगाल पर आक्रमण किया।

- नुसरत शाह के शासनकाल में ही महाभारत का बंगला अनुवाद तथा बड़ा सोना व कदम रसूल मस्जिद का निर्माण हुआ।

- गयासुद्दीन महमूद शाह हुसैनशाही राजवंश का अंतिम शासक था।

कश्मीर :

- 1320 ई. में तिब्बती सरदार रिंचान ने हिन्दू शासक सूहादेव से कश्मीर की सत्ता छीन ली थी, तत्पश्चात् उदयनदेव शासक बना तथा उसकी मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी 'कोटा' ने सत्ता को अपने अधीन किया।

- शाहमीर ने कोटा को कैद कर शम्सुद्दीन शाह की उपाधि धारण की।

- शम्सुद्दीन शाह कश्मीर का प्रथम मुस्लिम शासक था।

- सुल्तान शहाबुद्दीन कश्मीर ने शाहमीर वंश का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।

- सिकन्दर शाहमीर के शासनकाल में कश्मीर में तैमूर का आक्रमण हुआ।

- सिकन्दर ने कश्मीर में जजिया कर लगा दिया तथा ब्राह्मणों को उच्च पदों से बर्खास्त कर दिया।

- सुल्तान जैन-उल-आबिदीन (1420-1470 ई.) सिकन्दर का उत्तराधिकारी बना। इसके सिकन्दर की सभी नीतियों को उलट दिया।

- धार्मिक सहिष्णुता के कारण आबिदीन को 'कश्मीर का अकबर' तथा 'वुडशाह' (महान सुल्तान) कहा जाता है।

- इसके शासनकाल में गायों की सुरक्षा, सती प्रथा पर से प्रतिबंध को समाप्त करने, शवदाह कर, जजिया कर आदि न वसूल करने का आदेश दिया था।

- इसी समय वूलर झील में जैनलंका नामक द्वीप का निर्माण हुआ।

- यह फारसी में ‘कुतुब’ नाम से कविताएँ लिखता था।

- ‘जैन प्रकाश’ में जैन-उल-आबिदीन का जीवन चरित्र है।

- हाजी खाँ हैदरशाह इस वंश का अंतिम शासक था।

- 1588 ई. में अकबर ने कश्मीर को मुगल साम्राज्य में शामिल कर लिया गया था।

मालवा :

- मध्य भारत में मालवा की स्वतंत्र सल्तनत की स्थापना 1401 ई. में हुसैन खाँ गौरी ने की थी, जिसे फिरोज तुगलक ने अमीर के रूप में दिलावर खाँ की उपाधि दी थी। 1436 ई. में महमूद खिलजी प्रथम ने  यहाँ खिलजी वंश की स्थापना की।

- महमूद खिलजी ने गुजरात के अहमशाह-I एवं मेवाड़ के राणा कुम्भा के विरुद्ध युद्ध किया था।

- महमूद खिलजी ने मांडू में एक सात मंजिला महल का निर्माण करवाया था।

- जबकि राणा कुम्भा ने चित्तौड़ में एक विजय स्तम्भ बनाया।

- गुजरात के शासक बहादुरशाह ने 1531 ई. में मालवा को गुजरात में मिला दिया था।

गुजरात :

- 1401 ई. में जफर खाँ ने अपने आप को गुजरात का स्वतंत्र शासक घोषित कर दिया था।

- अहमदशाह (1411-1441 ई.) को गुजरात राज्य की स्वतंत्रता का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।

- अहमदाबाद के स्थान पर पहले असावल नामक कस्बा था।

- 1458 ई. में अबुल फतह खाँ अर्थात् 'महमूद बेगड़ा' गुजरात का शासक बना।

- बेगड़ा ने दीव में पुर्तगालियों को कारखाना खोलने के उद्देश्य से भूमि दी थी।

- बेगड़ा ने मुस्तफाबाद नामक शहर की स्थापना की जो उसकी राजधानी भी बनी।

- बहादुरशाह के शासनकाल में 1531 ई. में मालवा को गुजरात में शामिल कर लिया था।

- 1534 ई. में बहादुरशाह ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया।

- 1535 ई. में गुजरात पर मुगल शासक हुमायूँ का आक्रमण हुआ।

- 1572-73 ई. में मुगल सम्राट अकबर द्वारा गुजरात मुगल साम्राज्य में शामिल कर लिया था।

मेवाड़ :

- राजवंश के अंतर्गत मेवाड़ एक प्राचीन राज्य था जिसकी राजधानी नागदा थी।

- अलाउद्दीन खिलजी के मेवाड़ आक्रमण के समय मेवाड़ में रतन सिंह का शासन था।

- मुहम्मद बिन तुगलक के समय में सिसोदिया वंश के हम्मीरदेव ने मेवाड़ को पुनः स्वतंत्र करा दिया।

- राणा कुम्भा के शासनकाल में चित्तौड़ में एक कीर्तिस्तम्भ का निर्माण हुआ।

- कुम्भा ने जयदेव के गीतगोविन्द पर रसिकप्रिया नाम से तथा चंडीशतक पर टीका लिखी थी।

- कुम्भा कुशल वीणावादक था तथा उसने संगीतराज, संगीत मीमांसा तथा संगीत रत्नाकर जैसे ग्रन्थों की रचना भी की थी।

- 1509 ई. में राणा सांगा मेवाड़ की गद्दी पर बैठा।

- सांगा ने इब्राहिम लोदी, महमूद खिलजी II तथा मुजफरशाह II को पराजित किया था।

- 1527 ई. के खानवा युद्ध में बाबर से राणा सांगा पराजित हुआ।

- जहांगीर के शासनकाल में मेवाड़ मुगल साम्राज्य के अधीन हो गया।

जौनपुर :

- जौनपुर को ’भारत का सिराज‘ कहा जाता है।

- जौनपुर की स्थापना फिरोजशाह तुगलक ने अपने चचेरे भाई जौना खाँ अर्थात् मुहम्मद बिन तुगलक की स्मृति में करवाई थी।

- 1394 ई. में सुल्तान मुहम्मद तुगलक II ने अपने वजीर ख्वाजा जहां मलिक सरवर को 'मलिक-उस-शर्क' (पूर्व का स्वामी) की उपाधि प्रदान की।

- 1398 ई. में तैमूर आक्रमण का लाभ उठाकर मलिक-उस-शर्क ने अपने आप को स्वतंत्र शासक घोषित कर दिया तथा जौनपुर में शर्की वंश की नींव डाली।

- इस वंश का शासक शम्सुद्दीन इब्राहिम शाह शर्की स्थापत्य के जौनपुर या शर्की शैली का जन्मदाता के रूप में जाता है।

- हुसैनशाह शर्की वंश का अंतिम शर्की सुल्तान था।

- सिकन्दर लोदी के समय में जौनपुर को पुनः दिल्ली सल्तनत के अधीन हो गया था।

- सुल्तान इब्राहिम शाह के शासनकाल में साहित्य और स्थापत्य कला के क्षेत्र में हुए विकास के कारण जौनपुर को 'भारत का सीराज' कहा जाता है।

खानदेश :

- मलिक राजा फारुखी ने स्वतंत्र खानदेश (नर्मदा व ताप्ती नदियों के बीच) की स्थापना की।

- पूर्व में यह मुहम्मद बिन तुगलक के राज्य का हिस्सा था।

- बुरहानपुर खानदेश की राजधानी थी।

- असीरगढ़ फारुखी शासकों का सैनिक मुख्यालय था।

- 1589 ई. में बुरहानपुर में जामा मस्जिद का निर्माण आदिलशाह फारुखी- IV ने करवाया।

बहमनी :

- स्वतंत्र बहमनी राज्य की स्थापना मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में हुई।

- विद्रोही अमीरों ने इस्माइल मुख को अपना सुल्तान चुना जिसने अलाउद्दीन हसन बहमन शाह की उपाधि धारण की तथा गुलबर्गा (कर्नाटक) को अपनी राजधानी बनाया।

- मुहम्मदशाह- I के शासनकाल में वारंगल तथा विजयनगर के शासकों के मध्य युद्ध हुआ।

- मुहम्मदशाह- II शांतिप्रिय तथा विद्या प्रेमी शासक था। इसके शासनकाल में अनेक मस्जिदों, अनाथालयों, निःशुल्क पाठशालाओं का निर्माण हुआ।

- ताजुद्दीन फिरोज एक पराक्रमी शासक था। उसने विजयनगर राज्य को दो बार पराजित किया लेकिन तीसरी बार पराजित हो गया था।

- शिहाबुद्दीन अहमद I (1422-1436 ई.) ने गुलबर्गा के स्थान पर बीदर को अपनी राजधानी बनाया।

- बीदर का नया नाम मुस्तफाबाद रखा गया।

- शिहाबुद्दीन अहमद I संत अहमद के नाम से भी जाना जाता है।

- अलाउद्दीन अहमद II का गुजरात, खानदेश तथा विजयनगर के साथ संघर्ष हुआ।

- अलाउद्दीन हुमायूं (1458-61 ई.) को उसकी निष्ठुरता के लिए 'जालिम' कहा जाता है।

- निजामशाह के शासनकाल में राजमाता मखदूम जहां ने ख्वाजा जहाँ तथा ख्वाजा महमूद गावाँ के सहयोग से शासन का संचालन किया।

- शम्सुद्दीन मुहम्मद III (1463-1482 ई.) के शासनकाल में महमूद गावां का प्रभावशाली रूप से उदय हुआ।

- महमूद गावां को ख्वाजा जहाँ की उपाधि देकर राज्य का प्रधानमंत्री बनाया गया।

- बहमनी राज्य का सर्वाधिक विस्तार महमूद गावां के समय में हुआ।

- महमूद गावां के समय में ही गोवा पर बहमनी का अधिकार हुआ।

- 1482 में गावां के विरोधी सरदारों ने मुहम्मद III को उसके खिलाफ भड़काकर गावाँ की हत्या करवा दी।

- महमूदशाह के समय में बहमनी राज्य का पतन शुरु हुआ।

- कलीमुल्लाह बहमनी राज्य का अंतिम शासक था।

- रूसी यात्री अल्थेनसियस निकितिन ने मुहम्मद- III के शासनकाल में (1470-1474 ई.) में बीच बहमनी राज्य का भ्रमण किया था।

- बहमनी राज्य के पतन के बाद दक्कन में पांच स्वतंत्र राज्यों का उदय हुआ - बीदर, बरार, बीजापुर, अहमदनगर तथा गोलकुंडा।

बीदर :

- बीदर को दक्षिण की लोमड़ी भी कहा जाता है। बीदर के बरीदशाही वंश का संस्थापक कासिम बरीद था।

- अली बरीदशाह ने विजयनगर के विरुद्ध युद्ध में मित्र राज्यों की सेना की मदद की थी।

- बीजापुर के आदिलशाही सुल्तान ने इब्राहिम बरीदशाह के शासनकाल में बीदर को अपने राज्य में मिला लिया।

बरार :

- बरार के इमादशाही वंश की स्थापना फतेह उल्लाह इमादशाह ने की थी।

- बरार बहमनी राज्य से स्वतंत्र होने वाला प्रथम राज्य था।

- इसकी दो राजधानियाँ थी-एलिचपुर और गाविलगढ़।

- 1574 ई. में अहमदनगर ने बरार को अपने राज्य में मिला लिया।

अहमदनगर :

- अहमदनगर के निजामशाही राजवंश का संस्थापक अहमदशाह निजाम-उल-मुल्क था।

- इसने अहमदनगर की स्थापना की।

- बुरहान निजाम शाह ने बीजापुर, बीदर, बरार तथा विजयनगर के साथ आरम्भ में मित्रता की तथा बाद में शत्रुता।

- हुसैन निजामशाह के शासनकाल में बीजापुर के अली आदिलशाह, गोलकुंडा के इब्राहीम कुतुबुशाह और विजयनगर के राम राय की संयुक्त सेनाओं ने 1562 ई. में अहमदनगर पर आक्रमण कर दिया।

- शाहजहाँ के शासनकाल में 1633 ई. में अहमदनगर को मुगल साम्राज्य में शामिल कर लिया गया साथ ही मुर्तजा निजाम शाह को बंदी बना लिया।

बीजापुर :

- बीजापुर के आदिलशाही राजवंश का संस्थापक युसुफ आदिल खाँ था।

- इस्माइल के शासनकाल में गोआ पर पुर्तगालियों ने अधिकार कर लिया।

- इब्राहिम के शासनकाल में फारसी के स्थान पर हिन्दवी को राजकाज की भाषा बनाया गया और हिन्दुओं को अनेक पदों पर नियुक्त किया गया था।

- अली आदिल शाह (1558-1580 ई.) के शासनकाल में शोलापुर पर अधिकार को लेकर अहमदनगर और बीजापुर के मध्य संघर्ष हुआ।

- अली आदिल शाह ने हुसैन निजामशाह की पुत्री चांद बीबी के साथ विवाह करके अहमदनगर के साथ समझौता कर लिया।

- इस समझौते के परिणामस्वरूप दक्कनी मुस्लिम राज्यों ने विजयनगर के विरुद्ध एक संयुक्त सैनिक मोर्चे का गठन किया, जिसने 1565 ई. में विजयनगर को बुरी तरह पराजित किया।

- इब्राहिम II विद्या का संरक्षक था। इब्राहिम को ’अबला बाबा’ व जगतगुरु की उपाधि दी गई।

- इस काल में सुल्तान की चाची चांद बीबी बीजापुर की वास्तविक शासिका थी।

- अली आदिल शाह- II (1627-1672 ई.) के शासनकाल में शाहजहाँ ने औरंगजेब को सैनिक कार्यवाही करने का आदेश दिया।

- आदिलशाही वंश का अंतिम सुल्तान सिकन्दर आदिल शाह था।

- सिकन्दर आदिल शाह के शासनकाल में 1674 ई. में शिवाजी ने रायगढ़ में छत्रपति के रूप में अपना राज्याभिषेक किया।

- 1686 ई. में औरंगजेब ने बीजापुर को मुगल साम्राज्य में मिला लिया था।

गोलकुंडा :

- स्वतंत्र गोलकुंडा राज्य का संस्थापक कुली कुतुबशाह था।

- इब्राहिम कुतुबशाह महान कूटनीतिज्ञ था।

- मुहम्मद कुलीशाह हैदराबाद नगर का संस्थापक तथा दक्कनी उर्दू में लिखित प्रथम काव्यसंग्रह या दीवान का लेखक था।

- मुहम्मद कुलीशाह ने उर्दू तथा तेलुगु को संरक्षण दिया।

- अब्दुल्ला के शासनकाल में गोलकुंडा का प्रसिद्ध अमीर मीर जुमला द्वारा मुगलों के साथ मिल जाने के कारण मुगलों ने हैदराबाद पर 1656 ई. में अधिकार कर लिया था।

- अंतिम कुतुबशाही सुल्तान अबुल हसन कुतुबशाह था।

- 1687 ई. में मुगलों ने गोलकुंडा को अपने साम्राज्य में मिला लिया था।

- गोलकुंडा हीरों का विश्व प्रसिद्ध बाजार था।

- मसूलीपट्टनम कुतुबुशाही साम्राज्य का विश्व प्रसिद्ध बंदरगाह था।

- डच तथा अंग्रेज दोनों व्यापार के लिए पहली बार यहीं आए थे।

- यहाँ उत्पादित वस्त्रों का विश्व में निर्यात होता था।

- मुहम्मद कुली द्वारा हैदराबाद में निर्मित चारमीनार विश्व प्रसिद्ध है।