(i)  अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)

(ii) लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)

अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction) की विधियाँ –

उदाहरण : पीलोमिक्सा व ओपेलाइना

I. द्वि-विभाजन (Binary Fission)

(1) सरल द्वि-विभाजन – अमीबा

(2) अनुप्रस्थ द्वि-विभाजन – पैरामिशियम

(3) अनुदैर्ध्य द्वि-विभाजन - यूग्लीना

 

II. बहुखण्डन (Multiple Fission) – अमीबा व पैरामिशियम

III. मुकुलन (Budding)

मुकुलन (Budding) दो प्रकार का होता है –

1.   बाह्य मुकुलन (External Budding) – हाइड्रा में शरीर की सतह पर उभार के रूप में मुकुल (Bud) का निर्माण, जो कि जनक हाइड्रा से अलग होकर नए संतति हाइड्रा के रूप में विकसित होता है।

2.   आंतरिक मुकुलन (Internal Budding) – स्पंज (स्पांजिला, साइकॉन आदि में शुष्क परिस्थितियों में जेम्यूल्स/gemules का निर्माण होता है।

IV. खण्डन (Fregmentation)

पुनरुदभवन (Regeneration) –

1.   मॉफोरलेक्सिस – स्पंज, हाइड्रा, स्टारफिश आदि में टूटे हुए अंग से ही संपूर्ण नए जीव का विकास होता है।

2.   एपिमॉफोर्सिस – छिपकली में टूटी हुई पूँछ के स्थान पर नई पूँछ विकसित होना।

 

अलैंगिक जनन की अन्य विधियाँ

            (a) बीजाणु निर्माण (Spore formation) – जीवों में अलैंगिक जनन इकाइयों का निर्माण इन इकाइयों से नए जीव विकसित। जैसे -

1.   जूस्पोर्स – शैवाल व कवक में (जूस्पोर्स - गतिशील, कशाभ/Fiagrella मुक्त)

2.   कोनिडीया – पेनीसिलियम कवक में (अगतिशील)

3.   ओइडिया – एगैरिकस में (कवक जाल में उपस्थित)

4.   स्पोरेंजियोस्पोर्स – राइजोपस व म्यूकर में

            (b) कायिक प्रवर्धन (Vegetative propagation) – पौधों के कायिक भागों में नए पौधों का निर्माण।

ये दो प्रकार का होता हैं - प्राकृतिक एवं कृत्रिम

1.   प्राकृतिक कायिक जनन – जड़ (शकरकंद, डहेलिया, शीशम), तना (बल्ब, कंद, प्रकंद, धनकंद), पत्ती (पत्थरचट्‌टा, बिगोनिया आदि)

2.   कृत्रिम कायिक प्रवर्धन – कृत्रिम रूप से पौधों के कायिक भागांे की सहायता से नए पौधे विकसित करना।

      विधियाँ

(i) कर्तन (cutting)

(ii) दाब लगाना

(iii) ग्राफटिंग / रोपण सूक्ष्म प्रवर्धन (Micropropagation)

      कर्तन (Cutting)

(i) स्तम्भ कर्तन

(ii) मूल कर्तन

(i) स्तम्भ कर्तन

(ii) मूल कर्तन

दाब लगाना (Layering) –

(i) टीला दाब विधि

(ii) वायु दाब

(ii) रोपण विधि

(i) टीला दाब विधि

(ii) वायु दाब

(ii) रोपण विधि

सूक्ष्मप्रवर्धन (Micropropagation)

 

अलैंगिक जनन का महत्त्व

लाभ

हानि –

 

लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)

(i)   युग्मक निर्माण(Gametogenesis)

(ii)  युग्मक संलयन/निषेचन (Fertilisation)

(iii) भ्रूण का निर्माण एवं विकास

(iv) भ्रूण से जीव का निर्माण

लैंगिक जनन की विशेषताएँ –

लैंगिक जनन के प्रकार (Types of Sexual Reproduction) –

1.   युग्मक संलयन (Syngamy) – नर व मादा युग्मक पूर्ण रूप से एक-दूसरे से मिलकर युग्मनज (Zygote) का विकास करते हैं।

2.   संयुग्मन (Conjugation) – पैरामिशियम में एक पैरामिशियम से नर केंद्रक का स्थानांतरण दूसरे पैरामिशियम में व नए जीव का विकास होता है।

लैंगिक संलयन(Syngamy)

स्वनिषेचन(Endogamy)

परनिषेचन(Exogamy)

  • उभयलिंगी/द्विलिंगी(Bisexual/Hermaphrodite) जीवों में नर व मादा युग्मकों/gametes का निर्माण एक ही जीव में।

  • इस एक ही जीव के नर व मादा युग्मक आपस में निषेचन/Fertilisation कर संतति निर्माण करते हैं। उदाहरण - टीनिया सोलियम(Tape-worm)

  • एकलिंगी(Unisexual/dioecious) जीवों में नर व मादा युग्मकों का निर्माण अलग-अलग जीवों में।

  • इनमें परनिषेचन(Cross fertilisation) के द्वारा संतति उत्पन्न। उदाहरण - अधिकांश जंतु

बहुभ्रूणता (PolyEmbryony) –

अनिषेक जनन (Parthenogenesis) –

अनिषेक फलन (Parthenocarpy) –

असंगजनन (Apomixsis) –

जनन-तंत्र (Reproductive System)

- वृषण कोश

- वृषण (प्राथमिक जनन अंग)

- शुक्रवाहिकाएँ

- शुक्राशय

- ग्रंथियाँ

- शिश्न

- अधिवृषण

- शुक्रवाहिनियाँ

वृषण कोश (Scrotal Sac)

Note :

वृषण -

शुक्राशय (Seminal Vesicle) -

प्रोस्टेट ग्रंथि -

काऊपर ग्रंथि -

नर जनन तंत्र -

NOTE :-

नर जनन तंत्र का हॉर्मोनल नियंत्रण -
 


⇒ FSH – फॉलिकल प्रेरक हॉर्मोन - Áवृषण में सेमिनिफेरस नलिकाओं में शुक्रजनन को प्रेरित करता है।
⇒ LH – ल्यूटीनाइजिंग हॉर्मोन Á - वृषण की लीडिग को टेस्टोस्टीरॉन के स्त्रवण हेतु प्रेरित करता है।


किशोरावस्था में शारीरिक परिवर्तन -
नर में ‘एंड्रोजन्स’ (नर हॉर्मोन्स जैसे - टेस्टोस्टीरॉन) के प्रभाव में 12 से 14 वर्ष की उम्र में लैंगिक लक्षण विकसित होने लगते हैं। जैसे-

मादा जनन तंत्र (Female Reproductive System)

मनुष्य के मादा जनन तंत्र की प्रमुख संरचनाएँ-

अण्डाशय (प्राथमिक जनन अंग)

(i) ट्यूनिका एल्ब्युजिनिया

(ii) जनन उपकला

(iii) ट्यूनिका प्रोफेरिया

अण्डवाहिनी (फैलोपियन नलिकाएँ) –

गर्भाशय –

(i) फण्डस (गुम्बदाकार)

(ii) काय (मुख्य भाग)

(iii) ग्रीवा (अन्तिम भाग)

योनि –

जनन स्वास्थ्य -

जनसंख्या नियंत्रण

1. स्थायी विधि

2. अस्थायी विधि

(1)  स्थायी विधियाँ

(2)  अस्थायी विधियाँ

(A) सुरक्षित काल विधि

(B) कोइटस इन्टरप्टस

(C) LAM

(D) अवरोधक युक्तियाँ

कॉपर-T

(E) रासायनिक विधियाँ

(i) शुक्राणुनाशक क्रीम

(ii) गर्भनिरोधक रसायन

सहेली

अन्य स्टीरॉयडल गर्भनिरोधक दवाएँ –

जैसे – MALA-D, MALA-N इन्हें दैनिक आधार पर लिया जाता है।

Morning After Pills (Emergency Pills) -

Note –

(i) मासिक चक्र अनियमित होना।

(ii) अधिक रक्त स्त्रवण।

(iii) रक्त के थक्के बनना।

Nor-Plant -

Depo-Provera -

चिकित्सकीय सगर्भता समापन कानून - 1971

कृत्रिम जनन प्रौद्योगिकी -

(1) IVF (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन)

(2) IUI (इन्ट्रा यूटेराइन इनसेमिनेशन)

(3) ICSI (Intra-Cytoplasmic Sperm Injection) -

एम्निओसेंटेसिस (Amnio Centesis)