मुगलकालीन  अर्थव्यवस्था

बाबर के सिक्के:

शेरशाह सूरी:

अकबर के सिक्के:

मुहर:  

इलाही:

शंसब:

चाँदी के सिक्के:

जलाली:

ताँबे के सिक्के:

दाम:

अन्य सिक्के:

दरब:  50 पैसे का सिक्का

चर्न:  25 पैसे का सिक्का

पनडाऊ:  20 पैसे का सिक्का

अष्ठा:  12.5 पैसे का सिक्का

काला:  6.25 पैसे का सिक्का

सूकी:  5 पैसे का सिक्का

नोट:  
अकबर ने अपने शासन काल के 50वें वर्ष में 1605 ई. में चाँदी ‘राम सिया’ प्रकार का सिक्का चलाया था। जिस पर भगवान श्री राम व माता सीता की मूर्ति का अंकन करवाया तथा इस पर देवनागरी लिपि में राम सिया उत्कीर्ण करवाया।

जहाँगीर के सिक्के:

निसार:

खैर ए काबुल:

सोने के सिक्के:  नुरेअफ्शा, नूरशाही, नूर सल्तानी, नूर दौलत, नूर करम, नूर मिहिर


नोट:  जहाँगीर के काल का सोने का सबसे बड़ा सिक्का नूरशाही था जिसका मूल्य 100 तोल के बराबर होता था।

शाहजहाँ:

औरंगजेब:

माप तौल इकाई:

इलाही गज:

राजस्व व्यवस्था:

आइने दरसाला:

नोट:  आइने दरसाला एक प्रकार से ‘रैय्यतवाड़ी’ व्यवस्था थी जिसे किसान सीधे सीधे सरकार को अपना राजस्व जमा करवाते थे।इसमें किसानों को सुविधा भी दी जाती थी जैसे:-

1. भूमि माप

2. भूमि का वर्गीकरण

3. भू राजस्व का निर्धारण

4. भू राजस्व का अनाज से नकद में रुपांतरण

5. भू राजस्व एकत्र करने की विधि।
 

भू राजस्व वसूलने की अन्य विधि:

1. गल्ला बख्शी (भाओली):  

 

1. पोलज:  प्रतिवर्ष बोई जाने वाली भूमि को पोलज कहा जाता था।

2. परती:  1 वर्ष छोड़कर बोई जाने वाली भूमि को परती कहा जाता था।

3. चच्चर:  3 या 4 वर्ष छोड़कर बोई जाने वाली भूमि चच्चर कहलाती थी।

4. बंजर:  5 वर्ष से अधिक समय से बोई नहीं गई भूमि, बंजर कहलाती थी।

 

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य:


आय के अन्य स्रोत:

1. जजिया:  गैर मुसलमानों से वसूला जाने वाला कर।

2. जकात:  मुसलमानों से वसूला जाने वाला कर (कुल आय का 2.5 प्रतिशत)

3. खुम्स:  युद्ध की लूट में अर्जित किया गया धन।

4. नजराना:  बादशाह को दी जाने वाली नकद भेंट इसे नजर भी कहा जाता था।

5. पेशकस:  अधीनस्थ राजाओं व मनसबदारों द्वारा बादशाह को दी जाने वाली नकद भेंट।
 

मुगलकालीन गाँव व भूमि के अन्य प्रकार:

गैर अमली क्षेत्र:

नानकर व बंध:

मालिकान:

गाँवों के प्रकार:

असली ग्राम:  सबसे प्राचीन व पूर्ण रूप से बसा हुआ गाँव।

दाखिली ग्राम:  नव निर्मित ग्राम।

एम्मा ग्राम:  ऐसे गाँव जिन्हें राज्य की तरफ से मुफ्त अनुदान दिए जाते थे।

रैती ग्राम:  ऐसे गाँव जो जमीदारों के क्षेत्र से बाहर थे।


जमीदारी ग्राम:

जागीरदारी ग्राम:


नोट:  जमीदार वस्तुत: अधिनस्थ हुआ करते थे उन्हें उनके ही क्षेत्र का कुछ भाग जमीदारी के रूप में दिया जाता था जहाँ वह राजस्व वसूलते थे इसे वतन जागीर कहा जाता था। इस पर जमीदारों का वंशानुगत अधिकार होता था तथा इन्हें स्थानांतरण नहीं किया जा सकता था।


मदद ए मास:

वक्फ भूमि:

अलतमगा भूमि:

खालसा भूमि:

मुगल कालीन कृषि:

1. खुदकाश्त:

2. पाहीकाश्त:

3. मुजारीयन:

मुगलकालीन उद्योग:

मुगल कालीन बंदरगाह:

  1. सिंध – लाहरी

  2. गुजरात – सूरत, भड़ौच व खम्भात

  3. महाराष्ट्र – बसाई, चौल, काभौई

  4. कर्नाटक – भट्टकल

  5. आंध्रप्रदेश – मसुलीपट्‌टनम

  6. केरल – कालिकट

  7. बंगाल – सतगाँव, चटगाँव, श्रीपुर, हुगली, सोनार गाँव